संधि (परिभाषा, भेद एवं उदाहरण)

संधि (परिभाषा, भेद एवं उदाहरण) | Sandhi Kise Kahate Hain

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संधि की परिभाषा

Sandhi ki Paribhasha: संधि शब्द सम् + धि के जुड़ने से बना है, जिसका अर्थ होता है मेल। किसी दो निकटवर्ती वर्णों के आपस में मेल से जो विकार क्या परिवर्तन होता है, वह संधि कहलाता है।

जैसे: शिव+अलाय=शिवालय, देव+इंद्र=देवेंद्र।

हिंदी भाषा में संधि का इस्तेमाल करके पूरे शब्दों को लिखा नहीं जाता है। लेकिन संस्कृत भाषा की बात करें तो इसमें बिना संधि के इस्तेमाल के कोई भी शब्द नहीं लिखा जाता। संस्कृत की व्याकरण की परंपरा बहुत प्राचीन है। संस्कृत भाषा को अच्छी तरीका से पढ़ने के लिए व्याकरण को पढ़ना बहुत जरूरी होता है। शब्द रचना जैसे कार्य में भी संध्या का उपयोग किया जाता है।

निकटवर्ती स्थित शब्दों के पदों के समीप विद्यमान वर्णों के परस्पर में से जो भी परिवर्तन होता है, वह संधि कहलाता है।

जब कोई दो शब्द आपस में मिलकर एक शब्द बनाते हैं तो पहले शब्द की अंतिम वाली ध्वनि और दूसरी शब्द की पहली वाली ध्वनि आपस में मेल करके जो विकार उत्पन्न करती है, उसे संधि कहते हैं।

अर्थात

संधि किए गए जिस किसी भी शब्दों के संधि किए गए हैं, उन शब्दों को अलग-अलग करके पहले की ही तरह संधि करना संधि विच्छेद कहलाती है। इसका मतलब है कि जब भी दो शब्द आपस में मिलकर के कोई तीसरा शब्द बनाते हैं, तब जो भी विकार उत्पन्न होता है, उस विकार को संधि विच्छेद कहते हैं।

संधि विच्छेद के उदाहरण विवेक+आनंद= विवेकानंद। राम+लीला=रामलीला।

संधि के भेद

Sandhi ke Bhed: हिंदी व्याकरण में सामान्य रूप से संधि के तीन प्रकार होते हैं।

  1. स्वर संधि
  2. व्यंजन संधि
  3. विसर्ग संधि

1 . स्वर संधि

जब स्वर के साथ स्वर का मेल हो, तो वह परिवर्तन स्वर संधि कहलाता है। हिंदी भाषा में स्वरों की संख्या 11 होती है, बाकी अच्छे व्यंजन कहलाती है। जब दो स्वर को आपस में मिला दिया जाता है तो जो भी तीसरा स्वर बनता है, उसे स्वर संधि कहते हैं।

स्वर संधि के उदाहरण

  • वसुर+अरि = सुरारि (अ+अ = आ)
  • विद्या+आलय = विद्यालय (आ+आ = आ)
  • मुनि+इन्द्र = मुनीन्द्र (इ+इ = ई)
  • श्री+ईश = श्रीश ( ई+ई = ई)
  • गुरु+उपदेश = गुरुपदेश (उ+उ = ऊ)

स्वर संधि के प्रकार

स्वर संधि के प्रकार स्वर संधि के मुख्य 5 प्रकार होते हैं। 

  1. दीर्घ संधि
  2. गुण संधि
  3. वृद्धि संधि
  4. अयादि संधि

1.दीर्घ संधि

जब अ, आ के साथ अ, आ को मिलाया जाता है तो ‘आ‘ बनता है। या इ, ई के साथ इ, ई को मिलाया जाता है तो ‘ई‘ बनता है या उ ऊ के साथ उ, ऊ को मिला जाता है तो ‘ऊ‘ बनता है।
अर्थात
अक: सवर्ण दीर्घ:

इसका मतलब है कि तक प्रत्याहार के के बाद यदि सवर्ण पाया जाता है तो वह मिलकर दीर्घ बन जाते हैं। दूसरे शब्दों में अगर कहें तो सुजातीय स्वर आसपास होते हैं, तो स्वर्ण बनता है और वह सुजातीय दीर्घ स्वर कहलायेंगे। इसी को हम स्वर संधि की दीर्घ संधि कहते हैं। इसे ह्रस्व संधि कहा जाता हैं।

दीर्घ संधि के उदहारण

धर्म + अर्थ

 धर्मार्थ

पुस्तक + आलय

 पुस्तकालय

विद्या + अर्थी

 विद्यार्थी

रवि + इंद्र

 रविन्द्र

गिरी +ईश

 गिरीश

मुनि + ईश

मुनीश

मुनि +इंद्र

 मुनींद्र

भानु + उदय

 भानूदय

वधू + ऊर्जा

 वधूर्जा

विधु + उदय

 विधूदय

भू + उर्जित

 भुर्जित।

2. गुण संधि

यदि अ, आ के साथ इ, ई रहे तो वह शब्द ‘ए‘ बन जाएगा। और यदि अ, आ के साथ उ, ऊ रहे, तो वह अक्षर ‘ओ‘ बन जाता है। यदि अ, आ के साथ ऋ रहे, तो ‘अर’ बन जाएगा। और इस तरह के संधि मेल को गुण संधि कहते हैं।

गुण संधि के उदाहरण

नर + इंद्र

 नरेंद्र

सुर + इन्द्र

 सुरेन्द्र

ज्ञान + उपदेश

 ज्ञानोपदेश

भारत + इंदु

 भारतेन्दु

देव + ऋषि

 देवर्षि

सर्व + ईक्षण

 सर्वेक्षण

3. वृद्धि संधि

यदि अ, आ के साथ ए, ऐ रहे, तो ‘ऐ‘ बन जाएगा। और यदि अ, आ के साथ ओ, औ रहे, तो ‘औ‘ बन जाएगा। वह वृधि संधि कहलायेगा।

वृधि संधि के उदाहरण

मत + एकता

 मतैकता

एक + एक

 एकैक

धन + एषणा

 धनैषणा

सदा + एव

 सदैव

महा + ओज

 महौज

4. यण संधि

यदि इयदि इ, ई के साथ अन्य स्वर रहे, तो ‘य‘ बन जाऐगा। जब उ, ऊ के साथ कोई अन्य स्वर रहे, तो ‘व्‘ बन जाएगा। और यदि ऋ के साथ कोई अन्य स्वर रहे, तो ‘र‘ बन जाएगा।

यण संधि के तीन प्रकार के संधि युक्त्त पद होते हैं।

  • य से पूर्व आधा व्यंजन होती है।
  • व् से पूर्व आधा व्यंजन होती है।
  • शब्द में त्र होती है।

यण स्वर संधि के लिए शर्त भी होती है और य, त्र में स्वर होना आवश्यक होती है और उससे बने हुए शुद्ध व् सार्थक स्वर को + के बाद लिखेंगे, वह यण संधि कहलाते हैं।

यण संधि के उदाहरण

इति + आदि

 इत्यादि

परी + आवरण

 पर्यावरण

अनु + अय

 अन्वय

सु + आगत

 स्वागत

अभी + आगत

 अभ्यागत

5. अयादि संधि

यदि ए, ऐ, ओ, औ के साथ कोई अन्य स्वर रहे, तो ‘ए – अय‘ में, ‘ऐ – आय ‘में, ‘ओ – अव ‘ में, ‘औ – आव ‘ण होती है। य, व् से पहले व्यंजन पर अ, आ की मात्रा रहे, तो वह अयादि संधि कहलाती है। परन्तु यदि कोई विच्छेद न निकलता हो तो + के बाद वाले भाग को वैसा ही रहेगा। वह अयादि संधि कहलाते हैं।

अयादि संधि के उदाहरण

ने + अन

 नयन

नौ + इक

 नाविक

भो + अन

 भवन

पो + इत्र

 पवित्र

2. व्यंजन संधि

जब किसी व्यंजन को स्वर या व्यंजन के साथ मेल कराने पर जो परिवर्तन होता है, वह व्यंजन संधि कहलाते हैं।

व्यंजन संधि के उदाहरण

जगत्+नाथ 

 जगन्नाथ

 त्+न

न्न

सत्+जन

 सज्जन

 त्+ज

 ज्ज

उत्+हार

 उद्धार

 त्+ह

द्ध

सत्+धर्म

  सद्धर्म

त्+ध

द्ध

आ+छादन

 आच्छादन

 आ+छा

 च्छा

व्यंजन संधि के नियम

जब वर्ण पहले आये जैसे क्, च्, ट्, त्, प् का मेल किसी अन्य वर्ग के तीसरे और चौथे वर्ण में या य्, र्, ल्, व्, ह आदि जैसे वर्ण किसी स्वर से हो जाये तो क् को ग्, च् को ज्, ट् को ड्, त् को द् और प् को ब् में बदल देगा। यदि स्वर मिलता है तो जो स्वर की मात्रा होगी वो हलन्त वर्ण में लग जाएगी लेकिन अगर व्यंजन का मिलन होता है तो वे हलन्त ही रहेंगे।

उदाहरण

क् के ग् में बदलने के उदाहरण

दिक् + अम्बर

 दिगम्बर

दिक् + गज

 दिग्गज

वाक् +ईश

 वागीश

च् के ज् में बदलने के उदाहरण

अच् +अन्त

 अजन्त

अच् + आदि

अजादी

ट् के ड् में बदलन के उदाहरण

षट् + आनन

 षडानन

षट् + यन्त्र

 षड्यन्त्र

षड्दर्शन

 षट् + दर्शन

षड्विकार

 षट् + विकार

षडंग

 षट् + अंग

त् के द् में बदलने के उदाहरण

तत् + उपरान्त

 तदुपरान्त

सदाशय

 सत् + आशय

तदनन्तर

 तत् + अनन्तर

उद्घाटन

 उत् + घाटन

जगदम्बा

 जगत् + अम्बा

प् के ब् में बदलने के उदाहरण

अप् + द

 अब्द

अब्ज

 अप् + ज

जब किसी वर्ग के पहले वर्ण में क्, च्, ट्, त्, प् का मिलन न हो और म वर्ण ङ, ञ ज, ण, न, म के साथ हो, तो क् को ङ्, च् को ज्, ट् को ण्, त् को न्, और प् को म् में बदल जाएगा। उदाहरण –

क् के ङ् में बदलने के उदाहरण

वाक् + मय

 वाङ्मय

दिङ्मण्डल

 दिक् + मण्डल

प्राङ्मुख

 प्राक् + मुख

ट् के ण् में बदलने के उदाहरण

षट् + मास

 षण्मास

षट् + मूर्ति

 षण्मूर्ति

षण्मुख

 षट् + मुख

त् के न् में बदलने के उदाहरण

उत् + नति

 उन्नति

जगत् + नाथ

 जगन्नाथ

उत् + मूलन

 उन्मूलन

प् के म् में बदलने के उदाहरण

अप् + मय

 अम्मय

यदि त् का मेल ग, घ, द, ध, ब, भ, य, र, व से या फिर स्वर से रहे तो द् बन जाएगा। म के साथ क से म तक के किसी भी वर्ण के मिलन पर ‘म‘ की स्थान पर मिलन वाले वर्ण का अंतिम नासिक वर्ण बन जाता है। उदाहरण:

म् + क ख ग घ ङ के उदाहरण

सम् + कल्प

 संकल्प/सटड्ढन्ल्प

सम् + ख्या

 संख्या

सम् + गम

 संगम

शंकर

 शम् + कर

म् + च, छ, ज, झ, ञ के उदाहरण

सम् + चय

 संचय

किम् + चित्

 किंचित

सम् + जीवन

 संजीवन

म् + ट, ठ, ड, ढ, ण के उदाहरण

दम् + ड

 दण्ड/दंड

खम् + ड

 खण्ड/खंड

म् + त, थ, द, ध, न के उदाहरण

सम् + तोष

 सन्तोष/संतोष

किम् + नर

 किन्नर

सम् + देह

 सन्देह

म् + प, फ, ब, भ, म के उदाहरण

सम् + पूर्ण

 सम्पूर्ण/संपूर्ण

सम् + भव

 सम्भव/संभव

त् + ग, घ, ध, द, ब, भ, य, र, व् के उदाहरण

सत् + भावना

 सद्भावना

जगत् + ईश

जगदीश

भगवत् + भक्ति

 भगवद्भक्ति

तत् + रूप

 तद्रूपत

सत् + धर्म

 सद्धर्म

त् से परे च् या छ् रहने पर च, ज् या झ् रहने पर ज्, ट् या ठ् रहने पर ट्, ड् या ढ् रहने पर ड् तथा ल रहने पर ल् बन जाएगा। म् के साथ य, र, ल, व, श, ष, स, ह में से किसी भी वर्ण का मिलन होने पर ‘म्’ की जगह पर अनुस्वार ही लगेगा। उदाहरण

म + य, र, ल, व्, श, ष, स, ह के उदाहरण

सम् + रचना

 संरचना

सम् + लग्न

 संलग्न

सम् + वत्

 संवत्

सम् + शय

 संशय

त् + च, ज, झ, ट, ड, ल के उदाहरण

उत् + चारण

 उच्चारण

सत् + जन

 सज्जन

उत् + झटिका

 उज्झटिका

तत् + टीका

   तट्टीका

उत् + डयन

 उड्डयन

उत् + लास

 उल्लास

यदि त् का मेल यदि श् से हो जाए, तो त् को च् और श् को छ् में बदल दिया जाएगा। यदि त् या द् के साथ च या छ का मेल हो जाए, तो त् या द् के स्थान पर च् बन जाएगा। उदाहरण

उत् + चारण

 उच्चारण

शरत् + चन्द्र

 शरच्चन्द्र

उत् + छिन्न

 उच्छिन्न

त् + श् के उदाहरण

उत् + श्वास

 उच्छ्वास

उत् + शिष्ट

 उच्छिष्ट

सत् + शास्त्र

 सच्छास्त्र

यदि त् का मेल ह् से रहे तो त् को द् तथा ह् को ध् में बदल दिया जाऐगा और त् या द् के साथ ज या झ का मेल रहे, तो त् या द् स्थान पर ज् बन जाएगा। उदाहरण

सत् + जन

 सज्जन

जगत् + जीवन

 जगज्जीवन

वृहत् + झंकार

 वृहज्झंकार

त् + ह के उदाहरण

उत् + हार

 उद्धार

उत् + हरण

 उद्धरण

तत् + हित

 तद्धित

स्वर के बाद यदि छ् वर्ण रहे तो छ् से पहले च् वर्ण लगाया जाता है। त् या द् के साथ ट या ठ का मेल होने पर त् या द् के स्थान पर ट् बन जाएगा। अगर त् या द् के साथ ‘ड’ या ढ के मेल रहने पर त् या द् के स्थान पर ‘ड्’ बन जाऐगा। उदाहरण

तत् + टीका

 तट्टीका

वृहत् + टीका

 वृहट्टीका

भवत् + डमरू

 भवड्डमरू

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, + छ के उदाहरण

स्व + छंद

 स्वच्छंद

आ + छादन

आच्छादन

संधि + छेद

 संधिच्छेद

अनु + छेद

अनुच्छेद

जब म् के बाद क् से म् तक कोई भी व्यंजन रहे तो म् अनुस्वार में बदल जाएगा। त् या द् के पास जब ल का मेल है तो त् या द् के स्थान पर ‘ल्’ बन जाएगा। उदाहरण

उत् + लास

 उल्लास

तत् + लीन

 तल्लीन

विद्युत् + लेखा

 विद्युल्लेखा

म् + च्, क, त, ब, प के उदाहरण

किम् + चित

 किंचित

किम् + कर

 किंकर

सम् +कल्प

 संकल्प

सम् + चय

 संचयम

सम +तोष

 संतोष

सम् + बंध

 संबंध

सम् + पूर्ण

 संपूर्ण

म् के बाद म का द्वित्व रहे। त् या द् के साथ ‘ह’ के मेल पर त् या द् के स्थान पर द् तथा ह के स्थान पर ‘ध’ बनेगा। उदाहरण

उत् + हार

 उद्धार/उद्धार

उत् + हृत

 उद्धृत/उद्धृत

पद् + हति

 पद्धति

म् + म के उदाहरण

सम् + मति

 सम्मति

सम् + मान

 सम्मान

म् के बाद य्, र्, ल्, व्, श्, ष्, स्, ह् में से कोई अन्य व्यंजन रहने पर म् का अनुस्वार हो जाएगा। ‘त् या द्’ के साथ ‘श’ के मेल पर त् या द् के स्थान पर ‘च्’ तथा ‘श’ के स्थान पर ‘छ’ बन जाएगा। उदाहरण :

उत् + श्वास

 उच्छ्वास

उत् + शृंखल

 उच्छृंखल

शरत् + शशि

 शरच्छशि

म् + य, र, व्, श, ल, स, के उदाहरण

सम् + योग

 संयोग

सम् + रक्षण

 संरक्षण

सम् + विधान

 संविधान

सम् + शय

संशय

सम् + लग्न

 संलग्न

सम् + सार

 संसार

ऋ, र्, ष् से परे न् का ण् हो जाएगा। लेकिन चवर्ग, टवर्ग, तवर्ग, श और स का अवरोध हो जाने पर न् का ण् नहीं होगा। किसी स्वर के साथ ‘छ’ के मेल पर स्वर और ‘छ’ के बीच ‘च्’ आ जायेगा। उदाहरण

आ + छादन

 आच्छादन

अनु + छेद

 अनुच्छेद

शाला + छादन

 शालाच्छादन

स्व + छन्द

 स्वच्छन्द

र् + न, म के उदाहरण

परि + नाम

 परिणाम

प्र + मान

 प्रमाण

स् से पहले अ, आ से विभिन्न कोई स्वर आ जाता हैं, तो स् को ष बन जाएगा। उदाहरण

वि + सम

 विषम

अभि + सिक्त

 अभिषिक्त

अनु + संग

 अनुषंग

भ् + स् के उदाहरण

अभि + सेक

 अभिषेक

नि + सिद्ध

 निषिद्ध

वि + सम

 विषम

जब कोई शब्द में कही भी ऋ, र या ष रहे, और साथ मेल करने वाले शब्द में कभी भी ‘न’ हो तथा उस दो शब्दों के बीच कोई भी स्वर, क, ख ग, घ, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व में से कोई भी वर्ण रहे, तो सन्धि होने पर ‘न’ की जगह पर ‘ण’ हो जाएगा। यदि द् के साथ क, ख, त, थ, प, फ, श, ष, स, ह का मेल रहे तो द स्थान पर त् बन जाएगा। उदाहरण

राम + अयन

 रामायण

परि + नाम

 परिणाम

नार + अयन

 नारायण

संसद् + सदस्य

 संसत्सदस्य

तद् + पर

 तत्पर

सद् + कार

 सत्कार

3.विसर्ग संधि

यदि विसर्ग में स्वर या व्यंजन का मेल हो, तो जो विकार उत्पन्न होता है, वह विसर्ग संधि कहलाते हैं।

विसर्ग संधि के उदहारण

मन: + अनुकूल

 मनोनुकूल

नि:+अक्षर

 निरक्षर

नि: + पाप

निष्पाप

विसर्ग संधि के 10 नियम होते हैं

  • जब विसर्ग के साथ च या छ का मेल से विसर्ग के स्थान पर ‘श्’ बन जाएगा। और यदि विसर्ग के पहले ‘अ’और बाद में भी ‘अ’ या वर्गों के तीसरे, चौथे, पाँचवें वर्ण, या य, र, ल, रहे, तो विसर्ग का ‘ओ’ जाएगा। उदहारण:

मनः + अनुकूल

 मनोनुकूल 

अधः + गति

 अधोगति 

मनः + बल

 मनोबल

निः + चय

 निश्चय

दुः + चरित्र

 दुश्चरित्र

ज्योतिः + चक्र

 ज्योतिश्चक्र

निः + छल

 निश्छल

तपश्चर्या

 तपः + चर्या

अन्तश्चेतना

 अन्तः + चेतना

हरिश्चन्द्र

 हरिः + चन्द्र

अन्तश्चक्षु

 अन्तः + चक्षु

  • यदि विसर्ग से पहले अ, आ को छोड़ कोई स्वर रहे, और बाद में कोई स्वर और रहे, या वर्ग के तीसरे, चौथे, पाँचवें वर्ण या य्, र, ल, व, ह में कोई रहे, तो विसर्ग का र या र् जाएगा। और जब विसर्ग के साथ ‘श’ के मेल पर विसर्ग के स्थान पर भी ‘श्’ बन जाएगा।

दुः + शासन

 दुश्शासन

यशः + शरीर

 यशश्शरीर

निः + शुल्क

 निश्शुल्क

निः + आहार

 निराहार

निः + आशा

 निराशा

निः + धन

 निर्धन

निश्श्वास

 निः + श्वास

चतुश्श्लोकी

 चतुः + श्लोकी

निश्शंक

 निः + शंक

  • जब विसर्ग के पहले जब कोई स्वर रहे और उसके बाद में च, छ या श रहे, तब विसर्ग का श हो जाएगा। और जब विसर्ग के साथ ट, ठ या ष का मिलान रहे, तो विसर्ग के जगह पर ‘ष्’ बन जाएगा।

धनुः + टंकार

 धनुष्टंकार

चतुः + टीका

 चतुष्टीका

चतुः + षष्टि

 चतुष्षष्टि

निः + चल

 निश्चल

निः + छल

 निश्छल

दुः + शासन

 दुश्शासन

  • जब विसर्ग के बाद त या स रहे, तब विसर्ग स् बन जायेगा। जब विसर्ग के प्रथम वर्ण में अ या आ के अलावा अन्य स्वर रहे और यदि विसर्ग के साथ मेल वाले शब्द का प्रथम वर्ण क, ख, प, फ में से कोई भी रहे, तब विसर्ग की जगह पर ‘ष्’ बन जाता है।

निः + कलंक

 निष्कलंक

दुः + कर

 दुष्कर

आविः + कार

 आविष्कार

चतुः + पथ

 चतुष्पथ

निः + फल

 निष्फल

निष्काम

 निः + काम

निष्प्रयोजन

 निः + प्रयोजन

बहिष्कार

 बहिः + कार

निष्कपट

 निः + कपट

नमः + ते

 नमस्ते

निः + संतान

 निस्संतान

दुः + साहस

 दुस्साहस

  • जब विसर्ग से पहले इ, उ और बाद क, ख, ट, ठ, प, फ में से कोई भी एक वर्ण रहे, तब विसर्ग का ष जाएगा। अगर विसर्ग के प्रथम वाले वर्ण का अ या आ स्वर रहे और विसर्ग के बाद क, ख, प, फ रहे, तो सन्धि होने पर विसर्ग भी वैसा ही बना रहेगा।

अधः + पतन

 अध: पतन

प्रातः + काल

 प्रात: काल

अन्त: + पुर

 अन्त: पुर

वय: क्रम

 वय: क्रम

रज: कण

 रज: + कण

तप: पूत

 तप: + पूत

पय: पान

 पय: + पान

अन्त: करण

 अन्त: + करण

विसर्ग संधि के अपवाद (1)

भा: + कर

 भास्कर

नम: + कार

 नमस्कार

पुर: + कार

 पुरस्कार

श्रेय: + कर

 श्रेयस्कर

बृह: + पति

 बृहस्पति

पुर: + कृत

 पुरस्कृत

तिर: + कार

 तिरस्कार

निः + कलंक

 निष्कलंक

चतुः + पाद

 चतुष्पाद

निः + फल

 निष्फल

  • जब विसर्ग के पहले अ, आ रहे और बाद में किसी भिन्न स्वर रहे, तब विसर्ग लोप हो जाएगा। जब विसर्ग के साथ त या थ के मिलान करे, तब विसर्ग की जगह पर ‘स्’ बन जाता हैं।

अन्त: + तल

 अन्तस्तल

नि: + ताप

 निस्ताप

दु: + तर

 दुस्तर

नि: + तारण

 निस्तारण

निस्तेज

 निः + तेज

नमस्ते

 नम: + ते

मनस्ताप

 मन: + ताप

बहिस्थल

 बहि: + थल

निः + रोग

 निरोग

निः + रस

 नीरस

  • विसर्ग के बाद क, ख अथवा प, फ होने पर विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होता। विसर्ग के साथ ‘स’ के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘स्’ बन जाता है।

नि: + सन्देह

 निस्सन्देह

दु: + साहस

 दुस्साहस

नि: + स्वार्थ

 निस्स्वार्थ

दु: + स्वप्न

 दुस्स्वप्न

निस्संतान

 नि: + संतान

दुस्साध्य

 दु: + साध्य

मनस्संताप

 मन: + संताप

पुनस्स्मरण

 पुन: + स्मरण

अंतः + करण

 अंतःकरण

  • जब विसर्ग के पहले वर्ण में ‘इ’ व ‘उ’ का स्वर रहे और यदि विसर्ग के बाद ‘र’ रहे, तब सन्धि करते समय विसर्ग का लोप हो जाता हैं, और साथ ही साथ ‘इ’ व ‘उ’ की मात्रा ‘ई’ व ‘ऊ’ की हो जाती हैं।

नि: + रस

 नीरस

नि: + रव

 नीरव

नि: + रोग

 नीरोग

दु: + राज

 दूराज

नीरज

 नि: + रज

नीरन्द्र

 नि: + रन्द्र

चक्षूरोग

 चक्षु: + रोग

दूरम्य

 दु: + रम्य

  • जब विसर्ग के प्रथम वर्ण में ‘अ’ का स्वर रहे और विसर्ग के साथ अ के अतिरिक्त अन्य कोई स्वर पर विसर्ग विलुप्त हो जाता हैं और अन्य परिवर्तन नहीं होता हैं।

अत: + एव

 अतएव

मन: + उच्छेद

 मनउच्छेद

पय: + आदि

 पयआदि

तत: + एव

 ततएव

  • जब विसर्ग के पहले वर्ण में ‘अ’ में स्वर रहे और तब विसर्ग के साथ अ, ग, घ, ड॰, ´, झ, ज, ड, ढ़, ण, द, ध, न, ब, भ, म, य, र, ल, व, ह में कोई भी वर्ण के मिलान पर विसर्ग की जगह पर ‘ओ’ बन जाता हैं।

मन: + अभिलाषा

 मनोभिलाषा

सर: + ज

 सरोज

वय: + वृद्ध

 वयोवृद्ध

यश: + धरा

 यशोधरा

मन: + योग

 मनोयोग

अध: + भाग

 अधोभाग

तप: + बल

 तपोबल

मन: + रंजन

 मनोरंजन

मनोनुकूल

 मन: + अनुकूल

मनोहर

 मन: + हर

तपोभूमि

 तप: + भूमि

पुरोहित

 पुर: + हित

यशोदा

 यश: + दा

अधोवस्त्र

 अध: + वस्त्र

विसर्ग संधि के अपवाद (2)

पुन: + अवलोकन

 पुनरवलोकन

पुन: + ईक्षण

 पुनरीक्षण

पुन: + उद्धार

 पुनरुद्धार

पुन: + निर्माण

 पुनर्निर्माण

अन्त: + द्वन्द्व

 अन्तद्र्वन्द्व

अन्त: + देशीय

 अन्तर्देशीय

अन्त: + यामी

 अन्तर्यामी

इस लेख में आपने जाना संधि किसे कहते हैं (sandhi Kise Kahate Hain) और संधि के कितने भेद होते हैं। उसके साथ आप लोगों ने संधि के कुछ उदाहरण भी देखें। जिससे कि आपको समझ में आ गया होगा, यह कितने प्रकार के होते हैं। और किस तरह से संधि शब्द मिलकर किसी वाक्य को परिवर्तित कर देते हैं। संधि, परिभाषा, भेद और उदाहरण आदि सभी की जानकारी इस लेख में दी गई है।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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