वर्ण (परिभाषा, भेद और उदाहरण)

Varn Kise Kahate Hain: नमस्कार दोस्तों, अक्सर वर्ण से संबंधित प्रश्न विद्यार्थियों से और प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं और बहुत से लोग प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाते। तो आइए बिना समय गवाएं वर्ण के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।

varn kise kahate hain?

यहां पर हम वर्ण को निम्न स्टेप्स में जानेंगे, जिससे आप वर्ण को अच्छे समझ सके:

  • वर्ण किसे कहते हैं?
  • वर्ण के कितने भेद होते हैं?
  • वर्ण के उदाहरण

वर्ण किसे कहते हैं?

वर्ण की परिभाषा (Varn ki Paribhasha): वर्ण की परिभाषा की बात करें तो वर्ण उस मूल ध्वनि को कहा जाता है, जिसके खंड व टुकड़े नहीं किये जा सकते हैं।

अर्थात मानव के द्वारा प्रस्तुत की गई सार्थक व अर्थ से परिपूर्ण ध्वनि को भाषा की संज्ञा दी जाए और भाषा को चिन्हों के द्वारा लिखी गयी भाषा मे परिवर्तित किया जाए, इसी चिन्ह को वर्ण कहा जाता है।

वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई होती है व इसके टुकड़े या खण्ड नहीं किये जा सकते हैं। जैसे:- क, ख, व, च, प आदि।

उदाहरण के द्वारा मूल ध्वनियों को स्पष्ट कर सकते हैं।

जैसे:- काम (क + आ + म + अ) में चार मूल ध्वनियां हैं।

वर्णमाला की परिभाषा

भाषा के ध्वनि चिन्हों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहा जाता है, हिंदी भाषा की वर्णमाला में 47 वर्ण माने गए हैं, इन 47 वर्णों में 35 व्यंजन और 10 स्वर होते हैं।

सम्पूर्ण हिंदी वर्णमाला के लिए यहाँ क्लिक करें।

वर्ण के कितने भेद होते हैं?

हिंदी भाषा के अनुसार वर्ण 2 प्रकार के होते हैं।

  • स्वर
  • व्यंजन

स्वर किसे कहते हैं?

स्वर की परिभाषा: वह वर्ण जिनके उच्चारण के लिए कोई अन्य वर्ण की सहायता की जरूरत नहीं पड़ती, उसे स्वर कहते हैं।

जब भी हम स्वर का उच्चारण करते हैं तो हमारे कंठ और तालु का ही प्रयोग किया जाता है, जीभ व होंठ का उपयोग नहीं किया जाता है।

जैसे:- अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः, ऋ, ॠ, ऌ, ॡ आदि होते हैं।

स्वर के कितने भेद होते है?

स्वर के 2 प्रकार होते हैं।

  1. मूल स्वर
  2. संयुक्त स्वर

मूल स्वर

मूल स्वर – अ ,आ ,इ ,ई ,उ ,ऊ, ए , ओ।

मूल स्वर 3 प्रकार के होते हैं।

  1. हस्व स्वर
  2. दीर्घ स्वर
  3. प्लुत स्वर

हस्व स्वर:- इनके उच्चारण में समय बहुत ही कम लगता है, इसलिए इन्हें हस्व स्वर कहते हैं। जैसे – अ, इ, उ।

दीर्घ स्वर: इन स्वरों का जब हम उच्चारण करते हैं तो इनमें हस्व स्वर से कही ज्यादा समय का उपयोग होता है, इसलिए इन्हें दीर्घ स्वर कहा जाता है। जैसे – आ, ई,ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, लृ आदि।

प्लुत स्वर: इस स्वर का उच्चारण जब हम करते हैं तो इसमें हस्व स्वर व दीर्घ स्वर से अधिक समय लगता है, इसलिए इन्हें प्लुत स्वर कहा जाता है। जैसे – ओउम

संयुक्त स्वर

संयुक्त स्वर- ए (अ+ए) और औ (अ+ओ)।

व्यंजन किसे कहते हैं?

व्यंजन की परिभाषा: व्यंजन की परिभाषा के अनुसार जिन वर्णों के उच्चारण में स्वरों की सहायता ली जाती है, उसे व्यंजन कहा जाता है। जितने भी व्यंजन वर्ण होते हैं, उनका उच्चारण बिना स्वर के संभव नहीं है।

जैसे- क, ख, ग, च, द, म, भ, त, थ आदि।

व्यंजन के कितने भेद होते है?

व्यंजन 3 प्रकार के होते हैं।

  • स्पर्श व्यंजन
  • अंतःस्थ व्यंजन
  • उष्म व्यंजन

स्पर्श व्यंजन (Sparsh Vyanjan): स्पर्श व्यंजन की बात करें तो क से म तक के जो वर्ण होते हैं, उन्हें हम स्पर्श व्यंजन कहते हैं। यह कंठ, तालु, दांत, ओष्ठ के स्पर्श से भी बोले जाते हैं, जिस कारण इन्हें वर्गीय व्यंजन भी कहा जाता है।

स्पर्श व्यंजन 5 वर्गों के अंतर्गत विभाजित होते हैं।

  1. क वर्ग:- क, ख, ग, घ, ङ
  2. च वर्ग:- च, छ, ज, झ, ञ्
  3. ट वर्ग:- ट, ठ, ड, ढ़, ण
  4. त वर्ग:- त, थ, द, ध, न
  5. प वर्ग:- प, फ़, ब, भ, म

अन्तःस्थ व्यंजन (Antastha Vyanjan): अन्तःस्थ व्यंजन अर्धस्वर व्यंजन भी कहलाते हैं, इनका उच्चारण जीभ तालू दांत और होंठ के परस्पर हटाने से होता है लेकिन पूरी तरह से स्पर्श नहीं होता है।

जैसे- य, र, ल, व।

उष्म व्यंजन (Ushma Vyanjan): यह चार होते हैं, उष्म व्यंजन का उच्चारण मुह से गर्म सांस लेने से निकलता है। जैसे – श, ष, स, ह।

संयुक्त व्यंजन (Sanyukt Vyanjan):

  • क + ष = क्षा – क्षत्रिय, क्षमा
  • त + र = त्र – त्रस्त, त्राण, त्रुटि
  • ज़ + ञ = ज्ञ – ज्ञानी यज्ञ अज्ञान
  • श + र = श्र – श्रीमान, श्रीमती, परिश्रम, श्री

अरबी फारसी के वर्ण

अरबी फारसी के वर्ण की बात करें तो यह 4 होते हैं।

  • फ़, ग़, ज़, ख।

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हमने क्या सीखा?

हमने यहां पर वर्ण की परिभाषा क्या होती है (Varn Kise Kahate Hain), वर्ण कितने प्रकार के होते हैं (varn ke kitne bhed hote hain), वर्ण के उदाहरण आदि के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की है।

उम्मीद करते हैं कि आपको वर्ण के बारे में अच्छे से समझ आ गया होगा। यदि आपका कोई इससे जुड़ा सवाल है तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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संज्ञासर्वनामकारक
समासलिंगवाक्य
क्रियाविशेषणक्रिया विशेषण

इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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