हिंदी की सभी मात्राएँ (परिभाषा, प्रकार और उदाहरण)

Matra in Hindi : किसी भी भाषा को समझने के लिए उनकी मात्रा का सही उपयोग समझना जरुरी है ताकि आप उस भाषा को अच्छे से बोल सके और लिख सके। हिंदी व्याकरण में मात्रा का उपयोग शब्द लिखने के लिए किया जाता है। इस लिए हिंदी में मात्रा का महत्व सबसे ज्यादा होता है। आज हम इस आर्टिकल में आपको मात्रा के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे ताकि आप जब शब्द लिखे तब कोई भी भूल ना करे।

Matra in Hindi
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इस आर्टिकल में हम आपको मात्रा क्या है?, मात्रा के कितने प्रकार है?, मात्रा का उपयोग कब और कहा करें? उसके बारे में जानकारी देंगे, तो आपको निवेदन है कि आर्टिकल को पूरा पढ़े।

हिंदी की सभी मात्राएँ | Matra in Hindi

मात्रा की परिभाषा

जब स्वरों का प्रयोग व्यंजनों के साथ मिलाकर किया जाता हैं, तब उनका स्वरूप बदल जाता हैं और उन्हे मात्रा कहते हैं। यानि की किसी भी ध्वनि और वर्ण के उच्चारण को मात्रा कहते है।

मात्राएँ केवल स्वर की होती है। मात्रा के बिना व्यंजन को बोला भी नहीं जा सकता।

हिंदी में कितनी मात्राएं होती है?

वैसे तो हिंदी में मात्राओं की संख्या 11 है लेकिन सिर्फ 10 मात्रा का ही प्रयोग किया जाता है क्योंकि ‘अ’ स्वर की कोई मात्रा नहीं होती। ‘अ’ को उदासीन स्वर कहा जाता है।

मात्रा के प्रकार

  • ह्रस्व (4) – अ, इ, उ, ऋ , इसे ( । ) चिन्ह के द्वारा दर्शाया जाता है।
  • दीर्घ (7) – आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, इसे (S) चिन्ह के द्वारा दर्शाया जाता है।

हिंदी की मात्राएँ

स्वरमात्राव्यंजन के साथ मात्राएँ
अ उदासीन स्वर
 ा का
िकि
की
कु
कू
कृ
के
कै
को
अं ांकं
अ: ाःकः

हिंदी मात्र के उदाहरण

स्वरमात्राउदाहरण
अ उदासीन स्वरबस, घर, कब, छत, जल, कल
 ा काम, राजमा, कारखाना, राजा, धनवान, नाम
िनिगम, तिथि, किस्मत, किताब, चिंता, किसान
पीला, खाली, जीवन, ताली, शहीद
पुल,जुलाब, गुस्सा,झुमका, बुलबुल
तराजू, जादूगर, झूला, कबूतर,कूड़ादान
कृपालु, तृतीय, कृष्णकांत, वृष्टि, कृति, अमृत
बेसन, चमेली, केंद्र, विवेक , खेत , रेल
बैजनाथ, हैरान, सैनिक, पैदल, पैर, मैच
मोदी, मनोहर, भोजन, दोपहर, सोना, घोडा, बोतल
अं ांसंतरा, जंगल, अंडा, सरपंच, गंगाधर
अ: ाःप्रातः, नमः, अतः, नि:संकोच, क्रमशः

मात्रा का उच्चारण स्थान

क्रमवर्णउच्चारणश्रेणी
1.अ, आकंठ और जीभ का निचला भागकंठ्य
2.इ, ईतालु और जीभतालव्य
3.मूर्धा और जीभमूर्धन्य
4.त् थ् द् ध् न् ल् स्दाँत और जीभदंत्य
5.उ ऊदोनों होंठओष्ठ्य
6.अंनासिकाअनुनासिक
7.ए ऐकंठ तालु और जीभकंठतालव्य
8.ओ औकंठ जीभ और होंठकंठोष्ठ्य
9.व्दाँत जीभ और होंठदंतोष्ठ्य

हिंदी मात्रा के लिए ध्यान में रखने वाली बात:

हिंदी एक ऐसी भाषा है, जिसमें किसी भी अक्षर या वर्ण के चारों तरफ मात्राएं लगती है लेकिन सभी मात्राओं को लगाने का तरीका अलग है।

  • किसी अक्षर के पहले मात्रा लगती है, जिसे छोटी मात्रा कहा जाता है।
  • किसी अक्षर के पीछे मात्रा लगती है, जिसे बड़ी मात्रा कहा जाता है।
  • किसी अक्षर के ऊपर जो मात्रा लगती है, तो ऐसी मात्राओं को उपली मात्रा कहा जाता है।
  • किसी अक्षर के नीचे जो मात्रा लगती हैं, तो ऐसी मात्राओं को निचली मात्रा कहा जाता है।
  • कुछ मात्राएं ऐसी होती हैं जो वर्ण के बीच में लगती हैं, जैसे की – क्रिया, रूपक।

‘र’ के साथ ‘उ’ या ‘ऊ’ की मात्रा उसके आगे-पीछे या ऊपर-नीचे न लगकर ‘र’ के पेट में  लगती है-

र् + उ = रु – रुपया, रुई
र् + ऊ = रू – रूप, अमरूद

‘ऋ’ की मात्रा हमेशा व्यंजन के नीचे लगती है।

व् + ऋ = वृ – वृक्ष
प् + ऋ = पृ – पृथ्वी

FAQ

हिंदी में मात्राएं कितनी होती हैं?

हिंदी में मात्राएं ग्यारह होती है।

मात्राएँ कितने प्रकार के होते है?

मात्राएं तीन प्रकार की होती है। ह्रस्व, दीर्घ, और प्लुत।

र’ के साथ ‘उ’ या ‘ऊ’ की मात्रा कहाँ लगती है

‘र’ के साथ ‘उ’ या ‘ऊ’ की मात्रा उसके आगे-पीछे या ऊपर-नीचे न लगकर ‘र’ के पेट में  लगती है।

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने हिंदी की सभी मात्राएँ (Matra in Hindi) के बारे में आपसे जानकारी शेयर की है, जिसमें हमने मात्रा किसे कहते है, मात्रा की परिभाषा और प्रकार क्या है? उसके बारे में विस्तार से बताया है। मात्रा के सम्बंधित आपको माहिति पसंद आई हो तो उसे आगे शेयर जरुर करें। आर्टिकल के प्रति कोई भी सुझाव हो तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं।

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