स्‍वराघात किसे कहते है?

स्‍वराघात किसे कहते है? | Swaraghat Kise Kahate Hain

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स्‍वराघात (बलाघात) किसे कहते हैं?

Swaraghat Kise Kahate Hain: हम बोलते हैं तो बोलते समय हमारी ध्वनियों का उच्चारण एक समान रूप में नहीं रहता है। कभी-कभी किसी वाक्य के एक शब्द पर ही हमारा सबसे अधिक बल होता है या फिर कभी दूसरे किसी शब्दों पर ही हमारा ज्यादा बल होता है। और कभी कभी एक शब्द के एक ही अक्षर पर पूरा बल दिए रहते हैं तो कभी दूसरी अक्षर पर उच्चारण के बल को देते हैं। इसी गुण को ही स्‍वराघात कहते हैं।

दूसरे शब्दों में कहें तो जब कोई व्यक्ति बोलता है तो बोलते समय किसी शब्द के किसी अक्षर पर या किसी शब्द समूह के किसी शब्द के उच्चारण को जो विशेष बल प्रदान किया जाता है। उसे ही स्‍वराघात कहते हैं।

किसी शब्दों के उच्चारण में उस शब्द के अक्षरों पर जो बलाघात लगता है, उसे स्‍वराघात (बलाघात) कहते हैं। ध्वनि कंपन की लहरों से बनी होती है और यह अघात ध्वनि लहरों की छोटी-बड़ी होने पर निर्भर करती है। मात्रा का उच्चारण काल के परिमाण से संबंधित होता है। और अघात का स्वर कंपन की छुटाई-बढ़ाई के परिमाण से।

इससे स्पष्ट होता है, कि फेफड़ों में से निस्वास जितने बल से निकलते हैं। उसके अनुसार बल में अंतर होने लगता है। इसी बल उच्च-माध्य और नीच होने के कारण ही ध्वनि के तीन भेद किए गए हैं।

  1. सबल
  2. समबल
  3. निर्बल

उदाहरण: ‘कालिया’ में ‘या’ सबल है, इसी पर बल लग रहा है। और ‘का’ पर उससे कम बल लग रहा है। और ‘ली’ पर सबसे कम बल लगता है। अतः समबल और ‘ली’ निर्बल है।

स्‍वराघात का शाब्दिक अर्थ होता है, ‘अक्षर’ बालाघाट से लिया जाता है। जैसे: काम और राम में ‘रा’ और ‘का’ के ऊपर बालाघाट का प्रयोग किया जा रहा है। जब दो अक्षर साथ साथ आते हैं, एक अक्षर पर बालाघाट का अधिक प्रयोग किया जाता है और दूसरे पर कम।

‘काला’ शब्द में दो अक्षर से बना है, जिसमें पहला अक्षर ‘का’ और दूसरा अक्षर ‘ला’ है। यहां दूसरी अक्षर पर अधिक बल लग रहा है। और पहले अक्षर पर कम बल लग रहा है। इसलिए ‘ला’ को मुख्य स्वरघात कहेंगे। और द्वितीय को गुण स्वरघात कहा जा सकता है।

हिंदी व्याकरण में किसी भाषा में शब्द तथा वाक्य के स्तर पर स्वरघात होता है, परंतु स्वरघात के कारण उसके अर्थ में कोई भी परिवर्तन नहीं आएगा। ध्वनि तथा अक्षर का स्वराघात, का संबंध पराया अर्थ से नहीं होता है लेकिन उच्चारण करने में अस्वाभाविक आवश्यकता होती है।

जैसे कि: “ललिता” शब्द में ‘ली’ पर ज्यादा बल लग रहा है। परंतु कुछ लोग ‘ली’ पर नहीं बल देकर ‘ता’ पर बल देते हैं। इससे अर्थ में कोई भी परिवर्तन नहीं आता। परंतु सुनने में हास्य पद अवश्य लगता है। इसलिए शुद्ध उच्चारण की दृष्टि में वक्ता को ध्वनि तथा अक्षर का स्वराघात का अच्छा ज्ञान होना आवश्यक होता है।

डॉक्टर भोलानाथ तिवारी के अनुसार

भाषा के विभिन्न स्तरों पर स्वराघात के निम्नलिखित भेद हैं।

  1. ध्वनि स्वराघात
  2. अक्षर स्वराघात
  3. शब्द स्वराघात
  4. वाक्य स्वराघात

1. ध्वनि स्वराघात

ध्वनि स्वराघात किसी ध्वनि, अर्थात स्वर और व्यंजन पर आधारित होता है।

जब किसी एक शब्द का अक्षर ही दृष्टि से विश्लेषण करता है, तो उसकी ध्वनि अक्षर का शीर्ष होता है। और अन्य ध्वनियां गह्वर यानी कि गौण रहती है।

जैसे कि: “काम” में तीन ध्वनियां है- क+आ+म।

‘काम’ में ‘आ’ स्वर ध्वनि अक्षर में शीर्ष होता है, और ‘म’ व्यंजन ध्वनि गोण हो जाएगी। इन दोनों अक्षरों में से स्वराघात और शीर्ष पर सबसे अधिक बल देने के कारण बन जाएगा।

2. अक्षर स्वराघात

जब स्वराघात किसी अक्षर पर बनता है, तो उसे अक्षर स्वराघात कहते हैं। यह दो या दो से अधिक अक्षरों का शब्द समूह पर बनता है। तब किसी अवसर पर सबसे ज्यादा बल लगता है और किसी पर कम।

हिंदी भाषा में एक शब्द है- “गाया” इसमें दो अक्षर होने के साथ-साथ ‘ग’, ‘के’, ‘आ’ पर अधिक बल लगता है और ‘य’, ‘के’, ‘आ’ पर कम बल लगता है।

इसलिए ऐसे ही क्रम से मुख्य स्वराघात और गौण स्वराघात कहते हैं। स्वराघात को स्वागत कर देना ठीक है।

3. शब्द स्वराघात

शब्द स्वराघात ऐसी स्वराघात है, जो किसी शब्द पर स्वर या अक्षर पर विशेष बल देकर बनता हो, ऐसे स्वर या अक्षर को स्वराघात युक्त बल कहेंगे और शेष ध्वनि को स्वराघात ही कहेंगे। जब वाक्य के सभी शब्दों पर सामान्य तरह से ही स्वराघात का लगता हो, तो वह वाक्य सामान्य स्वराघात से लाएंगे। जब किसी रूप शब्द पर अधिक बल दिया जाता है। तो उस वाक्य के अर्थ में परिवर्तन निश्चित है। और ऐसे वाक्य को विशेष वाक्य भी कहेंगे।

जैसे कि: श्याम खाना खा रहा है। यहां पर श्याम शब्द पर बल देने का अर्थ है, कि श्याम खान श्याम ही खाना खा रहा है, अन्य कोई दूसरा नहीं।

4. वाक्य स्वराघात

ऐसे वाक्य को कहा जाता है, जो प्रायः बोलने में सभी वाक्यों पर समान रूप से बल देता है। परंतु आश्चर्य, भावावेश, आज्ञा, प्रश्न से संबंधित कुछ वाक्य के आसपास अपने वाक्य से अधिक जोर डालता हो। वैसे वाक्य को वाक्य स्वराघात कहते हैं।

पिता से कहता है, क्या मैं दोस्तों के साथ सिनेमा देखने जाऊं।

पिता बोलते हैं, नहीं नहीं तुम अपनी पढ़ाई करो।
हम बोलते हैं, मैं जरूर सिनेमा देखने जाऊंगा।
पिताजी, तुम मेरा कहना नहीं मानते हो तो चले जाओ मेरे सामने से।

चले जाओ पर अधिक जोर लग रहा है, जबकि अन्य पर बालाघाट कम पाया जाता है। वाक्य स्वराघात छोटे वाक्य बड़ी बाकी दोनों पर ही पड़ता है।

उदाहरण: संक्षेप में निम्नलिखित हैं।

स्वराघात के कुछ उदाहरण संक्षेप में

जब कोई व्यक्ति बोलते समय वाक्य शब्द अक्षर के एक अंश पर सबसे ज्यादा बल लगा कर बोलने पर अर्थ परिवर्तित कर देता है, तो इसे ही स्वर आघात कहते हैं।

जैसे कि: “राम” में ‘आ’ बल लगता है, क्योंकि आज शब्द पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इसलिए यह ध्वनि स्वराघात कहलाती है। हिंदी भाषा में शब्द स्वराघात स्वनिमिक है।

  • उसे एक खिड़की वाला कमरा चाहिए उसे एक खिड़की वाला कमरा चाहिए।
  • पद मैं स्वरा घाट होने पर अर्थ इस प्रकार होगा ऐसा कमरा जिसमें केवल एक खिड़की हो।
  • दूसरे वाक्य में उसका अर्थ होगा कि ऐसा कमरा जिसमें प्रकाश और वायु दोनों ही आते हो।

इसी प्रकार

‘पकड़ो‘ मत जाने दो। ‘पकड़ो मत‘ जाने दो।

वाक्य में किसी व्यक्ति को पकड़े रहने तथा दूसरे वाक्य में नहीं पकड़े जाने से स्वराघात का प्रभाव बदलता है।

स्वराघात के प्रभाव

शब्द और वाक्य में स्वराघात के आधार पर कुछ स्वराघात के प्रभावित निम्नलिखित है।

  • स्वराघात युद्ध ध्वनि या अधिक प्रबल रूप से होती है अतः अधिक सुदृढ़ रहती है।
  • ध्वनियों में परिवर्तन ना के बराबर होता है।
  • स्वराघातहीन ध्वनियाँ निर्बल हो जाती है और उनमें परिवर्तन सबसे ज्यादा होने लगता है।
  • स्वराघात युक्त ध्वनियाँ मांसपेशियों की दृढ़ता के कारण और बलपूर्वक और इसके बिना ध्वनियाँ शिथिल हो जाती है।
  • स्वराघात में वायु की प्रबलता अधिक होती है।
  • अतः अल्पप्राण ध्वनि महाप्राण के समान सुनाई देता है।
  • स्वराघात से युक्त ध्वनि या अधिक शक्तिशाली और मुखर और श्रवण है रहती है। इसके अतिरिक्त स्वराघात ही धनिया कमजोर स्पष्ट होती है।

इस लेख में आपने जाना स्वराघात किसे कहते हैं (Swaraghat Kise Kahate Hain) और स्वराघात के कितने भेद होते हैं। उसके साथ आप लोगों ने अलंकार के कुछ उदाहरण भी देखें। जिससे कि आपको समझ में आ गया होगा, यह कितने प्रकार के होते हैं। और किस तरह से स्‍वराघात शब्द मिलकर किसी वाक्य को परिवर्तित कर देते हैं। स्‍वराघात, परिभाषा, भेद और उदाहरण आदि सभी की जानकारी इस लेख में दी गई है।

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छंदरसअलंकार
सर्वनामअव्ययनिपात अवधारक
विराम चिन्हविशेषणकारक

इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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