राम मंदिर का इतिहास

History of Ram Mandir in Hindi: पुरुषों में महान माने जाने वाले पुरुषोत्तम राम, विष्णु के 9वें अवतार, जो अयोध्या के राजा दशरथ के बड़े बेटे थे। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो भगवान श्री राम के बारे में न जनता होगा। आज हम भगवान श्री राम के विषय में कुछ ऐसी चर्चा करने जा रहे हैं, जिससे आपको वास्तविकता पता चल सकेगी।

History of Ram Mandir in Hin
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राम मंदिर का इतिहास | History of Ram Mandir in Hindi

सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया था। जिसमें 5 जजों की बैठक हुई थी, जिसमें अयोध्या में मंदिर बनाना तय हुआ था। इस निर्णय में बताया गया था कि मुगल शासक बाबर ने 1528 ई. में राम मंदिर को तोड़कर वहां पर मस्जिद बनवाई थी, इसकी वास्तविकता क्या है हम आगे जानेंगे।

सुव्यवस्थित अक्षरों में राम मंदिर का इतिहास लिखा जा चुका है। 5 अगस्त 2020 का दिन यह एक ऐसा दिन है, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। 1528 और 2020 के बीच 492 वर्षों का जो समय रहा, इस समय में काफी उतार-चढ़ाव आए। परंतु अंत में निर्णय राम मंदिर के पक्ष में आया।

9 नवंबर 2019 को पांच जजों की बैठक ने ऐसा ऐतिहासिक निर्णय दिया, जो लंबे समय से चले आ रहे हैं विवाद की जड़ था।

सन 1528 की बात है बाबर के एक सिपाही जो उनके सलाहकार थे मीर बाकी अयोध्या के एक स्थान पर मस्जिद का निर्माण करवाया, जिसे आज हम बाबरी मस्जिद के नाम से जानते हैं। हिंदुओं के मुताबिक कहा गया कि यह राम जन्मभूमि और यहां पर एक बहुत ही पुराना राम मंदिर था।

काफी समय बीतने का के पश्चात 1853 और 1949 के बीच यहां पर काफी दंगे हुए। इस विवाद को देखते हुए इस बीच अंग्रेज सरकार ने 1859 में यहां पर एक कड़ा नियम बनाया। अंग्रेज सरकार के अनुसार हिंदुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की इजाजत दी गई और मुसलमानों को अंदर नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई।

अगर हम बात करें तो असली विवाद 23 दिसम्बर 1949 को शुरू हुआ था। कहा जाता है कि जब भगवान राम की मूर्तियां बाबरी मस्जिद के अंदर पाई गई तो एक बड़े विवादित दंगे का निर्माण हुआ।

हिंदुओं का कहना था कि यहां पर भगवान राम स्वयं प्रकट हुए। परंतु मुसलमानों को कहना था कि मस्जिद के अंदर जाकर किसी ने चुपचाप उन मूर्तियों को रख दिया। इस विषय में काफी सोच और विचार करने के उपरांत उत्तर प्रदेश सरकार ने मूर्ति हटाने का निर्णय लिया। परंतु डिप्टी मजिस्ट्रेट के के नारायण ने हिंदू और मुसलमानों के बीच दंगे न हो, इसके कारण उस आदेश को खारिज कर दिया।

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इसे विवादित स्थल मान कर ताला लगाने का आदेश दे दिया। परंतु 1950 में यह विवाद फिर से चर्चा में आया जब फैजाबाद कोर्ट में दो अर्जियां दाखिल की गईं। एक में पुरुषोत्तम राम की पूजा की इजाजत मांगी गई और दूसरे में भगवान श्री राम की मूर्ति रखने की इजाजत मांगी गई।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब तीसरी अर्जी नीम रोही ने सन 1959 ने दाखिल की। लगातार विवाद बढ़ता गया और सन 1961 में सुन्नी वक्फ एक अर्जी और दाखिल की, जो विवादित स्थान से मूर्ति हटाने की मांग की। विवाद लगातार बढ़ता ही जा रहा था। एक न एक स्थान पर दंगे बढ़ते ही जा रहे थे। इसी बीच सन 1984 हिंदुओं ने मंदिर बनाने के लिए एक हिंदू परिषद कमेटी स्थापित की।

1986 में यूसी पांडे की याचिका पर फैजाबाद के जिला जज केएम पांडे हिंदुओं को पूजा करने के लिए मंदिर से ताला हटाने का आदेश दे दिया।

सरकार ने इसी बीच काफी परिवर्तन और काफी नियम लागू किया परंतु यह ज्यादा समय तक टिके नहीं। सन 1992 में वीएचपी और शिवसेना समेत कई हिंदू कार्यकर्ता और कई हिंदू कमेटियां ने उस मस्जिद को गिरा दिया, जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश में काफी दंगे भड़के और हजारों लोगों की मौत हुई। लेकिन यह समस्या का निवारण नहीं था। लगातार दंगे बढ़ते जा रहे थे।

इसी बीच 2002 गोधरा में एक हिन्दु सामाजिक स्थल पर जा रही ट्रेन में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आग लगा दी,  जिससे 70 लोगों की मौत हो गई और 100 से 120 लोग घायल हो गए। इस कारण काफी दंगे हुए गुजरात में हजारों लोगों की मौत हुई।

कुछ समय के लिए दंगे फसाद रुके 8 साल समय बीतने के पश्चात सन 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस विवादित स्थान पर कुछ अहम निर्णय लिए, जो सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा पर बाकायदा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस स्थान को तीन बराबर भागों में बांटने का आदेश दिया। परंतु 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के द्वारा सुनाए गए इस निर्णय को रद्द कर दिया।

लंबे समय तक सोच विचार करने के उपरांत 8 मार्च 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने उस स्थान को फिर से जांच करने का आदेश दिया और इस जांच की समय अवधि 8 सप्ताह रखी गई। 8 सप्ताह जांच करने के उपरांत कार्यवाही पूर्ण करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया।

1 अगस्त 2019 को जांच कमेटी द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2 अगस्त 2019 को बताया। जांच कमेटी अर्थात मध्यस्था पैनल इस विषय पर निर्णय लेने में विफल रही।

6 अगस्त 2019 से लगातार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होती है। 16 अक्टूबर 2019 तक सुनवाई चली। सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर फैसला लेकर सुरक्षित कर दिया। 9 नवंबर सन 2019 को पांच जजों की बैठक ने एक अहम निर्णय लिया, जो हिंदू पक्ष में था। 2.77 एकड़ में विवादित जमीन बताई गई, जो हिंदुओं को प्राप्त हुई। यह जमीन राम मंदिर के लिए दी गई और बाबरी मस्जिद के लिए अलग से 5 एकड़ की जमीन मुस्लिम समुदाय को प्राप्त हुई।

5 मार्च 2020 को रामलला की मूर्ति एक टेंट हाउस से निकालकर फाइबर के मंदिर में स्थापित की गई, उसकी पूजा की गई।

इसके पश्चात 5 अगस्त 2020 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा तथा आर एस एस के संचालक मोहन भागवत तथा यूपी के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तथा कुछ साधु संतों को मिलाकर 175 लोगों समेत अयोध्या के हनुमानगढ़ी जिले में राम मंदिर की नींव रखी गई।

राम मंदिर की नींव रखने में चांदी की ईट का प्रयोग किया गया। ईट पर राम का नाम लिखा गया है, जो लगभग 2 किलो 500 ग्राम के आसपास थी। मंदिर का ढांचा अत्यंत सुंदर बनाया गया, जो चंद्रकांत सोमपुरा ने बनाया था। मंदिर बनने का कार्य अत्यंत तेजी से चल रहा है। लगभग 2023 तक यह कार्य पूरा हो जाएगा।

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