जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर की जीवनी और इतिहास

History of Akbar in Hindi: भारत के इतिहास में अकबर को आज कौन नहीं जानता है। अकबर जो दिल्ली सल्तनत का एक शासक था, जो कभी पूरे भारतवर्ष पर कब्जा करना चाहता था। जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर, नसीरुद्दीन हुमायूं का पुत्र था।

History of Akbar in Hindi
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हमारे इस लेख में हम अकबर के बारे में (History of Akbar in Hindi) आपको बताने जा रहे है। अतः आप इस लेख को अंत तक पढ़े ताकि आपको अकबर कौन था, अकबर की जीवनी (Akbar ka Itihaas) व उनके घटनाओं से जुड़ी पूरी जानकारी के बारे में पता चल सके।

जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर की जीवनी और इतिहास | History of Akbar in Hindi

अकबर के बारे संक्षिप्त जानकारी (Akbar History in Hindi)

बिन्दूजानकारी
पूरा नामजलाल उद्दी मोहम्मद अकबर
पिता का नामनसीरुद्दीन हुमायूँ 
माता का नामहमीदा बानो
जन्म स्थान अमरकोट पाकिस्तान
वंशजतैमूर वंश
उपाधियांअकबर-ए आज़म, शहंशाह अकबर
Akbar Biography in Hindi

अकबर कौन था?

अकबर मुगल सम्राट नसीरुद्दीन हुमायूं का पुत्र था और अकबर का जन्म 15 अक्टूबर 1542 ईसवी को सिंध में स्थित राजपूत शासक राणा अमरसाल के महल उमेरकोट में हुआ था। अकबर ने अपनी बहादुरी के दम पर पूरे भारतवर्ष पर राज किया और अकबर के इसी बहादुरी को देखते हुए लोगों ने अकबर को जहांपनाह की उपाधि दे दी।

अकबर बहुत ही बहादुर होने के साथ-साथ एक अच्छा राजा भी था। अकबर सदैव अपने प्रजा के हित के लिए कार्य किया करता था और प्रजा की हर एक समस्या पर ध्यान देता था। अकबर के इसी काम को देखते हुए सभी लोगों ने अकबर को अकबर महान की उपाधि से सम्मानित किया।

अकबर के जन्म के बाद इनके पिता हुमायूं ने देश से बाहर निकाल दिया था और इसीलिए अकबर अपने पिता से दूर होकर अपने चाचा के यहां अफगानिस्तान चला गया। अकबर के चाचा का नाम अधिकारी था। अफगानिस्तान में अकबर का उनके चाचा चाची ने पालन पोषण किया और अच्छे संस्कार भी दिए।

अकबर जब अपनी युवावस्था में था तो उसे युद्ध करना बेहद पसंद था, इसलिए उसने युद्ध कला सीखी। परंतु किसी के विपरीत अकबर को पढ़ाई लिखाई में थोड़ी भी रुचि नहीं थी।

अकबर हर एक क्षेत्र में बहुत ही ज्यादा माहिर था और इसके साथ साथ अकबर बहुत ही प्रसिद्ध राजा भी बन गया था। जब अकबर मात्र 13 वर्ष का था तभी इसके पिता हुमायूं की मृत्यु हो गई और इसके बाद अकबर ने 14 फरवरी 1556 ईस्वी में राज सिंहासन को संभाला। ऐसी स्थिति में अकबर अपने पिता के मंत्री बैरम खां के सक्षम मार्गदर्शन के अधीन था और शासन कला सीख रहा था।

जब अकबर अपने पिता के सिंहासन को संभालने लगा तो अकबर ने पंजाब जाकर वहां के राजा शेर शाह सुरी के बेटे सिकंदर शाह सूरी से युद्ध किया और सब कुछ नष्ट कर दिया, अकबर की इस बहादुरी को देख कर सिकंदर शाह सूरी ने अपना शासन छोड़ दिया और इस युद्ध के बाद अकबर और भी ज्यादा चर्चित हो गया।

जब अकबर पंजाबी युद्ध के लिए आया था, उसी समय मौके का फायदा उठाते हुए एक हिंदू शासक हेमू ने दिल्ली पर हमला कर दिया और दिल्ली के राज्य पर अपना कब्जा कर लिया। इसके बाद अकबर ने अपनी सेना के साथ हेमू की सेना पर चढ़ाई बोल दी और पानीपत के दूसरे युद्ध में अकबर ने हेमू को पराजित भी कर दिया।

अकबर का जन्म कब हुआ था?

अकबर का जन्म 15 अक्टूबर 1542 ईसवी को सिंध में स्थित राजपूत शासक राणा अमरसाल के महल उमेरकोट में हुआ था। ऐसा माना जाता है कि अकबर का जन्म पूर्णिमा के दिन में हुआ था, जिस वजह से उनके पिता ने उनका नाम बदरुद्दीन मोहम्मद अकबर रख दिया था।

अकबर के जन्म के बाद उनके पिता हुमायूं ने इन्हें देश से बाहर निकाल दिया था और इसीलिए अकबर अपने पिता से दूर होकर अपने चाचा के यहां अफगानिस्तान चला गया। इतिहास के स्रोतों के अनुसार जब हुमायूं द्वारा काबुल जीत लिया गया था तब हुमायूं ने अकबर को बुरी नज़र से बचाने के लिए अकबर के पैदा होने की तारीख को भी बदल दिया था।

अकबर का प्रारंभिक जीवन

अकबर का जन्म तैमूर राजवंश के तीसरे शासक के रूप में हुआ था। अकबर को कई अलग-अलग उपाधियों से भी जाना जाता है, जिसमें “अकबर-ए आज़म, शहंशाह अकबर, महाबली शहंशाह” इत्यादि प्रमुख है।

अकबर के पिता का नाम नसीरुद्दीन हुमायूँ एवं उनके दादा का नाम जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर था। अकबर की माता का नाम हमीदा बनो था। अकबर को चंगेज खां का वंशज माना जाता है।

अकबर एक ऐसा राजा था, जिसे हिन्दू और मुस्लिम दोनों वर्गो से काफी प्यार मिला था। अकबर ने हिन्दू और मुस्लिम वर्ग के बीच की दूरियों को कम करने के लिए “दीन-ए-इलाही” नामक एक ग्रंथ की भी रचना की थी। अकबर का दरबार राज्य की जनता के लिए हमेशा खुला रहता था।

अकबर जब शासक बना था तो उस समय अकबर की आयु केवल 13 वर्ष की ही थी। एक सम्राट के रूप में अकबर ने राजपुताने के राजाओं से राजनीतिक और वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किये थे।

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अकबर का बचपन

अकबर के बचपन की बात करें तो उनका बचपन उनके चाचा के यहां बिता था। अकबर के चाचा का नाम मिर्जा अस्करी था। अकबर के बचपन में उनकी दोस्ती रामसिंह नामक एक व्यक्ति से हो गई थी, जिसके बाद उनकी यह दोस्ती पूरे जीवन भर रही। अकबर अपने बचपन में कुछ समय अपने चाचा के पास रहने के बाद वे काबुल में रहने लग गये थे।

काबुल से पहले अकबर अपने चाचा के पास कंधार में रहता था। जिस अकबर को हम आज शक्तिशाली मानते है, वह कला अकबर ने अपने चाचा से ही सीखी थी, जिसके बाद अकबर एक शक्तिशाली और निडर शासक बनने में सफल रहा।

अकबर की शादी 

अकबर उन शासकों में से भी है, जिसने एक से अधिक शादियां की है। अकबर ने पहली शादी 1551 में अपने ही चाचा की बेटी रुकैया बेगम से की थी। रुकैया बेगम उनकी पहली और मुख्य बीवी थी।

इसके बाद अकबर ने इस एक शादी के अलावा भी कई राजकुमारियों से शादी की, जिसमें सुल्तान बेगम सहिबा, मरियम उज-जमानी बेगम साहिबा और उसके बाद राजपूत राजकुमारी जोधाबाई से भी शादी की थी।

History of Akbar in Hindi
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अकबर के दरबार की शान अकबर के नवरत्न

अकबर के दरबार में नवरत्न शामिल थे अर्थात 9 ऐसे व्यक्ति जो अकबर को हर एक कार्य के लिए सलाह देते थे। आप सभी ने इन नौ रत्नों को लेकर बहुत सी कहानियां सुनी होंगी और यह भी सुना होगा कि अकबर का दरबार उनके सलाहकारों के बिना एक दम अधूरा था।

अकबर के दरबार में ऐसे 9 व्यक्ति थे, जो उनके दरबारी थे और वे अकबर के नवरत्न कहलाते थे।

  1. बीरबल – अकबर के नवरत्नों में सबसे ऊपर जो नाम आता है, वह है बीरबल का। यह अकबर के दरबार का सबसे ज्यादा बुद्धिमान और अकबर का सबसे करीबी सलाहकार माना जाता था।
  2. मानसिंह – मानसिंह जो कि जयपुर के कछवाहा वंश के राजकुमार थे, अकबर के सेनापति माने जाते थे।
  3. अबुल फजल – अबुल फजल एक लेखक थे, जिन्होंने आइना-ए-अकबरी और अकबरनामा की रचना की थी।
  4. फकीर अजिओं दिन – फकिर अजिओं खान यह अकबर के सलाहकार थे।
  5. अब्दुल रहीम खान – यह एक महान कवि थे और यह अकबर के संरक्षक सिपाही बैरम खान के बेटे थे।
  6. मुल्लाह दो पिअज़ा – मुल्लाह दो पिअज़ा भी अकबर के सलाहकार सूची में थे।
  7. तानसेन – तानसेन अकबर के दरबार में एक गायक और एक कवि थे।
  8. फौजी – अकबर के नवरत्नों की सूची में शामिल यह एक फ्रांसीसी कवि थे, यह अकबर के बेटे को गणित पढ़ाया करते थे।
  9. टोडरमल – जो स्वयं जयपुर के दरबार से ताल्लुक रखते थे और वे अकबर के वित्त मंत्री थे।

अकबर का साम्राज्य विस्तार 

बात करें अकबर के साम्राज्य विस्तार की तो अकबर एक विस्तारवादी नीति वाला राजा था। अकबर अपने राज्य का विस्तार पूरे हिंदुस्तान में करना चाहता था। अकबर के सैन्य अभियानों व राज्य विस्तार के बारे में आप आगे पढ़ सकते हैं। 

दिल्ली आगरा विजय

अकबर के शासक बनने के बाद यह अकबर की सबसे पहले पहली विजय थी। 1556 ईं. में अकबर के पिता हुमायूं की मृत्यु के बाद तक अकबर के पास पंजाब का एक छोटा से क्षेत्र था।

अकबर ने अपने राज्य विस्तार को लेकर यह पहला युद्ध किया था। इस युद्ध को पानीपत का युद्ध कहा जाता है। यह युद्ध अकबर और हेमू के मध्य हुआ था, जिसमें अकबर जीतकर दिल्ली-आगरा पर अधिकार कर पाया था।

ग्वालियर, अजमेर, जौनपुर 

अकबर की दिल्ली व आगरा विजय के बाद उसने 1556 और 1560 के बीच ग्वालियर, अजमेर और जौनपुर पर भी विजय प्राप्त कर ली और उन राज्यों को मुगल साम्राज्य में मिला दिया।

मालवा विजय 

अकबर के समकालीन अफगान सरदार बहादुर शाह मालवा का शासक था। अकबर ने मालवा को अधीन करने के लिए आधम खां और मीर मोहम्मद के नेतृत्व में एक सेना मालवा की चढ़ाई के लिए भेजी।

इसमें इन दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें मालवा का नरेश हार गया और मालवा पर अकबर का अधिकार हो गया। यह घटना 1560 से 1562 के बीच मानी जाती है।

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अकबर की गौंडवाना विजय 

अकबर ने अपने राज्य का और विस्तार करने के लिए गोंडवाना के शासक वीर नारायण के साथ भी दो-दो हाथ किए थे। इस युद्ध को भी अकबर जीत गया था।

वीर नारायण अल्पसंख्यक था, जिसके कारण उसकी मां उसकी देखभाल करती थी। वीर नारायण की मां एक कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ वह एक श्रेष्ठ सेनापति भी थी।

चित्तौड़ के राजा से सामना 

1567 ई में अकबर ने अपने राज्य विस्तार में राजपूताने के क्षेत्र को भी अपनी और मिलने का सोचा। अकबर पहले चित्तौड़ पर आक्रमण नहीं करना चाहता था व वहाँ की सामाजिक स्थिति व राजनीतिक प्रतिष्ठा से काफी प्रभावित था।

अकबर चित्तौड़ को अपने अधीन करना चाहता था। वहाँ के शासक महाराणा प्रताप को यह बिल्कुल भी मंजूर नहीं था कि वह मुगल साम्राज्य में मिल जाएं।

काफी समय तक कोशिश चली फिर आखिर चित्तौड़ पाने के लिए अकबर और महाराणा प्रताप के बीच में हल्दीघाटी का युद्ध हुआ। इस युद्ध में किसकी विजय हुई, इस बात पर इतिहासों में अभी भी मतभेद है। पर ऐसा कहा जा सकता है कि बाद में यह राज्य भी मुगल शासक अकबर के अधीन आ गया था।

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राजपुताने के अन्य राज्यों पर विजय

चितौड़ को अधीन करने के कुछ ही समय बाद रणथंभौर, कार्लिजर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर जैसे राज्य भी अकबर के अधीन आ गये थे। इन सब से एक बात तो पक्की साबित होती है कि अकबर एक विस्तारवादी राजा था।

गुजरात पर विजय

अकबर के उत्तर भारत मे विजय अभियानों के बाद अकबर को अब मध्य भारत और दक्षिण भारत में भी अपना राज्य विस्तार करना था। 1574 में अकबर गुजरात की ओर बढ़ा। अकबर और गुजरात शासक के बीच युद्ध बिलकुल भी नहीं हुआ बल्कि गुजरात शासक ने अकबर की अधीनता युही स्वीकार कर ली थी।

पहली बार जब अकबर यहां से चला गया तो मुरफ्फरशान ने अपने राज्य को एक बार फिर स्वतंत्र घोषित कर दिया, उसके बाद फिर अकबर ने चढ़ाई की और इस बार मुफ्फर शाह हार गया।

बंगाल पर विजय

गुजरात विजय के बाद अकबर एक बार फिर पश्चिम बंगाल की ओर रुख किया, उस समय वहाँ का शासक सुलेमान था। सुलेमान ने अकबर के डर से ही अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली थी।

इसके बाद सुलेमान की मृत्यु के बाद फिर उसके पुत्र ने एक स्वतंत्र राज्य की घोषणा कर दी। जिसके बाद 1574 में अकबर ने इसके विरोध में एक बार फिर बंगाल पर आक्रमण किया और सुलेमान के पुत्र दाऊद खां को हार का सामना करना पड़ा।

काबुल विजय

1585 में जब अकबर ने काबुल पर अधिकार करना चाहा तो उस समय वहाँ का शासक अकबर का सौतेला भाई मिर्ज़ा मुहम्मद हाकिम था। यह वही मिर्ज़ा मुहम्मद हाकिम था, जो खुद भी भारत जीतने की इच्छा रखता था। अकबर ने उसके विरुद्ध भी कार्यवाही की और उसके खिलाफ युद्ध किया।

इस युद्ध में अकबर को विजयश्री प्राप्त हुई, पर उसके बाद अकबर ने उसके भाई पर दया दिखाकर उसका राज्य उसे वापस लौटा दिया। हाकिम की मृत्यु के बाद अकबर ने काबुल को मुगल साम्राज्य में मिला दिया।

इन सब विजयों के बाद अकबर ने कई छोटे बड़े राज्यों को मुगल साम्राज्य में मिला दिया था।

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अकबर के समय की शासन प्रणाली

अकबर एक राजा के साथ वह एक कुशल प्रशासक भी था। उसके राज्य में वह सबसे एक ही समान देखता था चाहे वो किसी भी धर्म, वर्ग या किसी भी श्रेणी का हो। अकबर के समय की शासन प्रणाली के बारे में भी आपको जानना चाहिए, जो इस प्रकार है:

  • अकबर के शासन काल में साम्प्रदायिक सद्भावना देखने को मिलती थी। अकबर के राज्य में हिन्दू, मुस्लिम या अन्य सभी धर्मों को एक समान माना जाता था। अकबर के शासन काल में सभी धर्मों को स्वतंत्रता थी, वे अपने धर्म के संबंधित परम्परा मना सकते थे।
  • अकबर के राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में कई अधिकारी नियुक्त थे, जो राज्य के शासन में अपना योगदान देते थे। अकबर के राज्य में वकील, प्रधानमंत्री, दीवान, मीर बक्शी, मुख्य सदर इत्यादि अधिकारी कार्य करते थे।

अकबर के जीवन पर मूवी 

साल 2008 में अकबर के जीवन की घटनाओं पर एक मूवी भी बनी थी, जिसे “जोधा अकबर” नाम दिया गया था। इस मूवी में अकबर व उनकी अंतिम बीवी जोधा के बारे में बताया गया है। साथ ही मुगल साम्राज्य की घटनाओं का भी वर्णन है। इस मूवी में रितिक रोशन और ऐश्वर्या राय ने मुख्य किरदार निभाया है।

अकबर कौन था?

अकबर मुगल साम्राज्य का एक राजा था।

अकबर का जन्म कहाँ हुआ था?

अकबर का जन्म पाकिस्तान के उमरकोट में हुआ था।

अकबर की पहली पत्नी का क्या नाम था?

अकबर की पत्नी का नाम रुकैया बेगम था।

अकबर की पत्नी जोधा कहाँ की राजकुमारी थी?

अकबर की पत्नी जोधा जयपुर की राजकुमारी थी।

अकबर की मृत्यु के समय उनकी उम्र क्या थी?

अकबर की मृत्यु के समय उसकी उम्र 63 साल थी।

अकबर का पूरा नाम क्या था?

अकबर का पूरा नाम जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर था।

अकबर के पिता का क्या नाम था?

अकबर के पिता का नाम नसीरुद्दीन हुमायूं था।

निष्कर्ष

इस लेख अकबर का इतिहास (History of Akbar in Hindi) में आपको अकबर के बारे में व अकबर के जीवन के बारे में बताया गया है। उम्मीद करते है आपको यह अकबर के बारे में पूरी जानकारी का लेख पसंद आया होगा, इसे आगे शेयर जरूर करें। आपको यह लेख कैसा लगा, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 4 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 5 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।

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