महाराजा रणजीत सिंह का इतिहास और जीवनी

Maharaja Ranjit Singh History in Hindi: नमस्कार दोस्तों आज हम आप सभी लोगों को अपने इस महत्वपूर्ण लेख के माध्यम से भारत के बहुत ही महान एवं प्रतापी शासक महाराजा रणजीत सिंह के विषय में संपूर्ण जानकारी बताने वाले हैं। महाराजा रणजीत सिंह प्राचीन भारत के प्रतापी एवं महान शासकों में से एक थे। महाराजा रणजीत सिंह प्राचीन समय के मजबूत एवं विशाल सिख साम्राज्य के संस्थापक थे।

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आप सभी लोगों ने जब भी कहीं भी पंजाब के विषय में बात करते हुए किसी व्यक्ति को सुना होगा, तो आपने उस व्यक्ति के मुख से महाराजा रणजीत सिंह अर्थात शेर ए पंजाब का नाम तो अवश्य ही सुना होगा। आज आप सभी लोगों को हमारे द्वारा लिखे गए इस महत्वपूर्ण लेख में महाराजा रणजीत सिंह के विषय में संपूर्ण जानकारी जानने को मिलेगी। इतना ही नहीं आज हम आप सभी लोगों को महाराजा रणजीत सिंह के परवरिश से लेकर उनकी मृत्यु तक के सफर को बताने वाले हैं।

आज आप सभी लोगों को हमारे द्वारा लिखे गए इस महत्वपूर्ण लेख में महाराजा रणजीत सिंह कौन है? (Maharaja Ranjit Singh History in Hindi) महाराजा रणजीत सिंह की परवरिश? महाराजा रणजीत सिंह का सैन्य अभियान? महाराजा रणजीत सिंह के द्वारा पंजाब राज्य का विस्तार? कैसे हुआ सिख साम्राज्य का पतन इत्यादि के विषय में बड़े ही विस्तार पूर्वक से चर्चा करने वाले हैं। यदि आप सभी लोग महाराजा रणजीत सिंह के विषय में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो कृपया हमारे द्वारा लिखे गए इस महत्वपूर्ण लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

महाराजा रणजीत सिंह का इतिहास और जीवनी | Maharaja Ranjit Singh History in Hindi

कौन थे महाराजा रणजीत सिंह

महाराजा रणजीत सिंह पंजाब राज्य के बहुत ही महान एवं प्रतापी राजा थे। महाराजा रणजीत सिंह ने ही सिख धर्म की स्थापना की और इन्होंने ही विशाल शिक्षण राज्य एवं मजबूत साम्राज्य का गठन भी किया। महाराजा रणजीत सिंह अपने बचपन से ही लोगों से काफी प्यार करते थे और सदैव उनके हित में ही कार्य किया करते थे। महाराजा रणजीत सिंह का जन्म पूरे गुजरांवाला इलाके के लिए बहुत ही भाग्यशाली माना जाता है।

वर्तमान समय में यह क्षेत्र पंजाब पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है। परंतु प्राचीन समय में यह पाकिस्तान पंजाब का क्षेत्र भारत का ही एक हिस्सा हुआ करता था, भारत ने एक बंटवारे में पाकिस्तान को यह हिस्सा भेंट स्वरूप दिया था। महाराजा रणजीत सिंह ने अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए अनेकों संघर्ष किए और इन्होंने ही इतने विशाल सिख साम्राज्य की स्थापना की।

महाराजा रणजीत सिंह की परवरिश

जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं, महाराजा रणजीत सिंह प्राचीन समय के बहुत ही महान एवं प्रतापी राजा थे। महाराजा रणजीत सिंह का जन्म 13 नवंबर 1780 ईस्वी को हुआ था। महाराजा रणजीत सिंह ने पंजाब राज्य के गुजरांवाला इलाके में महा सिंह और राज कौर के परिवार में जन्म लिया था। महाराजा रणजीत सिंह ने ही सिख धर्म की स्थापना की।

यह बात 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध की है, उस समय पंजाब प्रशासनिक तौर पर अनेकों प्रकार के टुकड़े टुकड़े में बटा हुआ था, पंजाब राज्य के इन सभी टुकड़ों को मिश्ल कहा जाता था। पंजाब राज्य में प्राचीन समय में मिश्ल के हर एक इलाके पर मिश्ल सरदारों की हुकूमत चलते थे। इतना ही नहीं महाराजा रणजीत सिंह के पिता महा सिंह भी इन्हीं मिश्ल सरदार में से एक थे।

महाराजा रणजीत सिंह के पिता जिस मिश्रा सरदार की टुकड़ी से संबंध रखते थे, वह मिश्ल क्षेत्र सुकरचकीय मिश्ल हुआ करता था, यह पंजाब के पश्चिमी हिस्से में राज करते थे। महाराजा रणजीत सिंह के पिता महा सिंह की मृत्यु हो जाने के बाद महाराजा रणजीत सिंह के परवरिश का पूरा वह उनकी माता के ऊपर चला गया। उनकी माता ने एक राजपूत शासक की तरह उनकी परवरिश की और उन्हें अस्त्र शास्त्र की भी शिक्षा प्राप्त करवाएं।

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महाराजा रणजीत सिंह का प्रारंभिक जीवन

आता तो हम सभी लोगों ने यह जाना, कि जिस समय महाराजा रणजीत सिंह का जन्म हुआ था उस समय पंजाब को बहुत अधिक शिक्षकों के द्वारा शासन किया जाता था उस समय पंजाब राज्य को अनेक मिश्रा गुटों में विभाजित किया था, महाराजा रणजीत सिंह के पिता महा सिंह भी एक मिसाल दार थे।

महाराजा रणजीत सिंह को बचपन में चेचक हो गया था, जिसके कारण उनकी बाईं आंख की दृष्टि कमजोर हो गई थी, अतः उनकी माता राज कौर ने ही उनकी परवरिश पूरी की। महाराजा रणजीत सिंह की माता राज कौर जिंद के महाराजा की बेटी थी इनका नाम मालवैन भी था।

चा महाराजा रणजीत सिंह मात्र 12 वर्ष के ही थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई उनके पिता की मृत्यु के बाद रणजीत सिंह की माता को कन्हैया मिश्ल की सरदार बना दिया गया। इसके बाद 18 वर्ष की उम्र में उन्हें उनके पिता के स्थान पर मिसल दार के रूप में चुना गया। इन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों को अपने तरफ कर लिया, क्योंकि आप बहुत ही अच्छे विचार वाले व्यक्ति थे।

महाराजा रणजीत सिंह का सैन्य अभियान

धीरे धीरे महाराजा रणजीत सिंह ने पंजाब को एक करने के लिए अन्य मिश्ल सरदारों को हराने के लिए सैन्य अभियान शुरू कर दिया। इन्होंने अपने सैन्य अभियान के माध्यम से अन्य मिश्ल सरदारों को हराना शुरू कर दिया। 7 जुलाई 1999 ईस्वी में महाराजा रणजीत सिंह ने पहली बार जीत हासिल की और उस समय वह किशोरावस्था अर्थात 18 वर्ष की उम्र में थे।

महाराजा रणजीत सिंह ने भांगी मिश्र को हराकर पूरे लाहौर पर अपना कब्जा जमा लिया। इसके बाद इन्होंने आने वाले अगले कुछ दशकों में धीरे-धीरे सभी सुखों को हरा दिया और एक विशाल शिक्षण राज्य की स्थापना की। महाराजा रणजीत सिंह ने सैन्य अभियान केवल इसी उद्देश्य से शुरू किया था, कि पंजाब एक संयुक्त राज्य बन सके।

महाराजा रणजीत सिंह के सैन्य अभियान से पहले पंजाब राज्य में सब कुछ अलग-अलग ढंग से किया जाता था, क्योंकि पंजाब राज्य के अलग-अलग इलाकों पर अलग-अलग शासकों का शासन था। इन सभी शासकों ने अपने अपने राज्य में अपनी मनमानी शुरू कर दिया। जिसके कारण पंजाब राज्य में अशांति फैल गई थी, अतः महाराजा रणजीत सिंह ने अपने सैन्य अभियान के माध्यम से संपूर्ण पंजाब राज्य को एकजुट कर लिया और राज्य में शांति फैलाने के लिए एक प्रबल सिख साम्राज्य की स्थापना की।

महाराजा रणजीत सिंह को प्राप्त ताज

महाराजा रणजीत सिंह ने पंजाब के महाराजा होने का खिताब हासिल कर लिया, क्योंकि इन्होंने पंजाब के अन्य सभी मिश्ल सिखों को हरा दिया और पंजाब को एक संयुक्त राज्य स्थापित किया। यहीं से राजा रणजीत सिंह के सर पर महाराजा का ताज सजा दिया गया। जिस दिन महाराजा रणजीत सिंह को ताज पहनाया जा रहा था, वह दिन वैशाखी का दिन था।

जिस समय राजा रणजीत सिंह को महाराजा घोषित किया गया उस समय वह मात्र 20 वर्ष के थे। साहिब सिंह बेदी ने महाराजा रणजीत सिंह के मस्तिष्क पर केशरिया तिलक लगाया और उन्हें पंजाब का महाराजा घोषित किया। इन्होंने पंजाब के महाराजा को अपने किले से एक शाही सलामी भी दी। महाराजा रणजीत सिंह ने दोपहर के बाद अपने नौजवानों के साथ हाथी पर सवार हुए और पूरे शहर का चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े।

महाराजा रणजीत सिंह के इस जुलूस को देखने के लिए पूरे शहर की सभी गलियों में प्रजा की भीड़ खड़ी थी और महाराजा रणजीत सिंह ने लोगों के ऊपर सोने और चांदी के सिक्के बरसाने शुरू कर दिए। इसके बाद धीरे-धीरे पूरा पंजाब राज्य उस रात प्रकाश में हो गया और सभी लोगों के घरों में दिए जलाकर महाराजा रणजीत सिंह की खुशियों का जश्न मनाया गया, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार हम दिवाली का जश्न मनाते हैं।

पंजाब राज्य का साम्राज्य विस्तार

महाराजा रणजीत सिंह ने अपनी लाहौर की जीत के बाद अपने सिख साम्राज्य के विस्तार पर ध्यान देना शुरू कर दिया। अपने सिख साम्राज्य के विस्तार के लिए इन्होंने पंजाब के अन्य हिस्सों के साथ-साथ पंजाब से दूर स्थित इलाके जैसे कि कश्मीर, हिमालय क्षेत्र इत्यादि की तरफ अपना ध्यान केंद्रित किया। महाराजा रणजीत सिंह ने वर्ष 18 सो 2 ईस्वी में अमृतसर को अपने साम्राज्य में मिला दिया और अपने साम्राज्य को विस्तृत किया।

धीरे धीरे महाराजा रणजीत सिंह ने वर्ष 1807 ईस्वी में अफगानी शासक कुतुबुद्दीन ऐबक को हरा दिया और कसूर क्षेत्र पर अपना एकाधिकार जमा लिया। इसके बाद 1818 ईस्वी में मुल्तान को अपने राज्य में मिला लिया। महाराजा रणजीत सिंह ने जितने भी युद्ध लड़े उन सभी युद्धों में विजय हासिल की।

इसके बाद महाराजा रणजीत सिंह ने 1819 ईस्वी में कश्मीर के क्षेत्रों पर भी शिक्षण राज्य का हिस्सा अर्थात साम्राज्य जमा लिया। इन सभी के बाद महाराजा रणजीत सिंह ने 1813 ईस्वी से लेकर 18 सो 37 ईस्वी के मध्य बहुत से ऐसे युद्ध लड़े, जिसमें उन्होंने विजय हासिल की। इन सभी के बाद वर्ष 1837 ईसवी में इन्होंने जमरूद से युद्ध लड़ा यह युद्ध महाराजा रणजीत सिंह की आखरी युद्ध बन गई।

इन सभी के बाद इस युद्ध में महाराजा रणजीत सिंह के बहुत ही बेहतरीन सिपहसालार हरि सिंह नलवा की मृत्यु हो गई। यह महाराजा रणजीत सिंह के सबसे पसंदीदा सिपाही थे। महाराजा रणजीत सिंह इस युद्ध में कुछ सामाजिक कारकों के कारण अफगानिस्तानी लोगों ने बढ़त हासिल की और उन्होंने पुनः काबुल पर अपना अधिकार जमा लिया।

महाराजा का नाम कैसे पड़ा रणजीत

महाराजा रणजीत सिंह का उनके जन्म के समय में उनके माता-पिता के द्वारा दूसरा नाम रखा गया था। महाराजा रणजीत सिंह के बचपन का नाम बुध सिंह था। लोगों का ऐसा कहना है कि महाराजा रणजीत सिंह के पिता महा सिंह ने एक युद्ध में छत्तर सरदार को हराया था और यह युद्ध के बाद महा सिंह ने अपने पुत्र का नाम रणजीत रहा। इन्होंने अपने बेटे का नाम रणजीत यह सोच कर रखा था कि यह कभी भी नहीं हारेंगे और रणजीत का शाब्दिक अर्थ भी होता है, सदैव युद्ध को जीतने वाला अर्थात विजेता। महाराजा रणजीत सिंह अपने पिता के वचनों पर कायम रहे हैं और कभी भी हारना स्वीकार नहीं किया, परंतु उनके एक पसंदीदा सिपाही की मृत्यु हो जाने पर उन्होंने स्वयं ही उस युद्ध को त्याग दिया था।

कैसे हुआ सिख साम्राज्य का पतन

महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु दशकों तक शासन करने के बाद 27 जून 1839 ईसवी में हो गया। महाराजा रणजीत सिंह ने अपनी मृत्यु के बाद सिख साम्राज्य की बागडोर को खड़क सिंह के हाथों में सौंप दिया। परंतु महाराणा महाराजा रणजीत सिंह के विशाल साम्राज्य की बागडोर संभालने में खड़क सिंह नाकाम रहे और शासन कला में कमी होने के कारण आपसी लड़ाई में के वजह से ही शिक्षण राज्य का पूर्ण रूप से पतन हो गया। इसके बाद वर्ष 1845 ईस्वी में सिख और अंग्रेजों के मध्य एक युद्ध हुआ। इस युद्ध के दौरान महान सिख साम्राज्य अंग्रेजो के कब्जे में चला गया और यहीं से महाराज रणजीत सिंह के साम्राज्य का पतन हो गया।

महाराजा रणजीत सिंह के विषय में रोचक तथ्य

  • महाराजा रणजीत सिंह का यह मानना था, कि कोई भी व्यक्ति भगवान के सामने बराबर होता है। अतः इसी बात को ध्यान में रखते हुए इन्होंने गद्दी पर विराजमान होना पसंद तो किया, परंतु कभी भी ताज नहीं पहना।
  • महाराजा रणजीत सिंह ने बहुत ही ऐतिहासिक गुरुद्वारा तख्त सिंह और तख्त सिंह हजूर का निर्माण कराया।
  • तख्त सिंह गुरुद्वारा का निर्माण दशवे सिख गुरु के जन्म के उपलक्ष में पटना में तथा तख्त श्री हजूर साहिब का निर्माण उनकी मृत्यु के स्थान पर करवाया।
  • महाराजा रणजीत सिंह ने मात्र 10 वर्ष की उम्र में ही अपने पिता के साथ मिलकर अपनी पहली लड़ाई लड़ी।
  • बचपन में ही महाराजा रणजीत सिंह को चेचक हो गया था और इस बीमारी के कारण उनकी एक आंख से ज्योति छिन गई।

निष्कर्ष

हम आप सभी लोगों से उम्मीद करते हैं, कि आप सभी लोगों को हमारे द्वारा लिखा गया यह महत्वपूर्ण लेख “महाराजा रणजीत सिंह का इतिहास और जीवनी (Maharaja Ranjit Singh History in Hindi)” अवश्य ही पसंद आया होगा। यदि आपको यह लेख वाकई में पसंद आया हो, तो कृपया इसे शेयर करें। यदि आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव है, तो कमेंट बॉक्स में हमें अवश्य बताएं।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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