रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है? (इतिहास, महत्व और पौराणिक कथा)

हिंदू धर्म में अलग-अलग त्योहारों की अलग-अलग विशेषताएं और उनकी मान्यताएं होती है। रक्षाबंधन का त्यौहार भी काफी पावन और पवित्र त्यौहार हिंदू धर्म में माना जाता है। रक्षाबंधन का त्यौहार आज से ही नहीं बल्कि पौराणिक काल से ही मनाया जाता रहा है।

आज हम आपको अपने इस महत्वपूर्ण लेख के माध्यम से रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है? और इसके इतिहास के बारे में जानकारी देंगे। बहन भाई के पवित्र रिश्ते को समर्पित यह त्यौहार सावन के माह में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

Rakesh bandhan kyu manaya jata hai

आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से रक्षाबंधन से संबंधित सभी आवश्यक और महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में बताएंगे और इतना ही नहीं रक्षाबंधन का इतिहास और रक्षाबंधन के दिन क्या गिफ्ट देना चाहिए? इसके बारे में भी आपको हमारे इस महत्वपूर्ण लेख में जानकारी मिलेगी।

हमारा यह लेख आपके लिए काफी उपयोगी साबित होने वाला है और इसीलिए हम चाहते हैं कि आप हमारे इस लेख को शुरू से लेकर अंतिम तक पढ़े और एक भी जानकारी बिल्कुल भी मिस ना करें।

रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है? (इतिहास, महत्व और पौराणिक कथा)

रक्षाबंधन क्या है?

रक्षाबंधन एक भाई बहन के रिश्ते को पवित्र करने वाला हिंदू धर्म का पावन त्यौहार है। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई को उनके कलाई पर राखी बांधती है। अगर लड़की के पास उसकी बहन है तो वह अपनी बहन को राखी बांधकर यह त्यौहार मनाती हैं।

रक्षाबंधन दो शब्दों से मिलकर बना है पहला ‘रक्षा’ जिसका अर्थ किसी चीज से या फिर जीवन में आने वाली विपत्ति पर सुरक्षा प्रदान करना और दूसरा ‘बंधन’ मतलब गांठ जो इस रिश्ते में जरूरी है, उसे प्रदर्शित करता है और इन्हें मिलाकर रक्षाबंधन का अर्थ निकलता है कि एक ऐसा धागा या फिर एक ऐसी गांठ जो बहनों को उनके भाई द्वारा रक्षा प्रदान करने के लिए बांधी जाती है। रक्षाबंधन के त्यौहार को भारत देश में ही नहीं बल्कि भारतीय मूल के लोग जिस भी देश में रहते हैं, वहां पर इसे सेलिब्रेट करते हैं।

रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है?

रक्षाबंधन का त्यौहार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को प्रदर्शित करता है और इस रिश्ते की विशेषता को दर्शाता है। इसीलिए रक्षाबंधन का त्यौहार हिंदू धर्म में बढ़ेगी धूमधाम से मनाया जाता है।

रक्षाबंधन मनाने का इतिहास

सिकंदर और राजा पुरु

यह बात है 326 ईसा पूर्व के समय की जब सिकंदर ने हमारे देश में प्रवेश किया था। सिकंदर का युद्ध राजा पुरु के साथ होने वाला था। युद्ध से कुछ समय पहले ही सिकंदर की बीवी ने राजा पुरु को एक राखी भेजी और उनसे सिकंदर पर जानलेवा हमला न करने का वचन लिया।

जैसा कि राखी के पवित्र धागे की मान्यता है जब कोई बहन अपने भाई को राखी बांधी है तब भाई बहन का ही नहीं बहन के पति एवं उसके परिवार के ऊपर आने वाले सभी विपत्तियों को अपने सिर माथे ले लेता है।

राजा ने अपने हाथ में बांधी हुई राखी के धागे को देखा और फिर उन्होंने इस पवित्र रिश्ते की मान रखते हुए राजा सिकंदर पर अपनी तरफ से जानलेवा हमला नहीं किया और इस तरह से राजा पुरु और सिकंदर की बीवी ने जाने अनजाने में राखी के पवित्र त्योहार को मनाया और इसका मान भी रखा।

देवराज इंद्र की कहानी

हिंदू धर्म में अनेकों पुराण लिखे गए हैं और उन्हें सभी पुराणों में से एक भविष्य पुराण में लिखा है कि जब दैत्यों के राजा बलि ने देवताओं के ऊपर आक्रमण किया था, तब देवताओं के राजा इंद्र को काफी हानि पहुंची थी और उनका आसन डगमगा गया था।

देवराज इंद्र की पत्नी सची को अपने पति की हालत देखी नहीं गई और उन्होंने भगवान विष्णु जी के पास जाकर इस विषम परिस्थिति से उभरने का समाधान प्राप्त करने के लिए आग्रह किया।

श्री हरि विष्णु जी ने देवराज इंद्र की पत्नी को एक धागा प्रदान किया और कहा कि इस धागे को जाकर देवराज इंद्र की कलाई पर बांध दें और ऐसा ही देवराज की इंद्र की पत्नी ने किया और फिर जब देवराज इंद्र एवं राज्य बली के बीच में महायुद्ध हुआ तब देवराज इंद्र ने असुरों के सम्राट राजा बलि को पराजित किया। इसलिए पुराने समय में युद्ध में जाने से पूर्व राजा और उनके सैनिकों के हाथों में उनकी पत्नी और बहनें राखी बांधा करती थी, जिससे वो सकुशल घर जीत कर लौट सके।

रानी कर्णावती और हुमायूँ

यह उस समय की बात है जब अपने अपने राज्य को बचाने के लिए हिंदुस्तान में मुसलमानों और राजपूतों के बीच युद्ध हुआ करता था। राखी का पर्व रानी कर्णावती के समय में भी काफी धूमधाम से मनाया जाता था जब रानी कलावती चित्तौड़ की रानी हुआ करती थी। परंतु में एक विधवा स्त्री थी। एक दिन अचानक से गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर हमला कर दिया।

रानी कर्णावती ने अपनी तरफ से युद्ध में कोई भी कसर नहीं छोड़ी। परंतु फिर भी धीरे-धीरे इनकी सेना और यह कमजोर होते चले गए और सुल्तान बहादुर शाह इनके सेना पर भारी पड़ने लगे और तब इस विषम परिस्थिति से उभरने के लिए रानी कर्णावती ने सम्राट हिमायू को पत्र समेत राखी भेजी और अपनी एवं चित्तौड़ की रक्षा करने के लिए उन्होंने आग्रह किया।

हिमायू ने भी रक्षा बंधन की लाज रखते हुए और एक भाई का कर्तव्य निभाते हुए अपने एक सेना की टुकड़ी को चित्तौड़ के लिए भेजी और तब जाकर कहीं सुल्तान बहादुर शाह को अपनी सेना पीछे हटानी पड़ी और तब से लेकर आज तक रानी कर्णावती और हुमायूं के बीच इस अनोखे और पवित्र रिश्ते को याद किया जाता है।

महालक्ष्मी और राजा बलि की कहानी

सम्राट बली जो एक बहुत ही बड़ा श्री हरि जी का भक्त हुआ करता था। उसने श्रीहरि को प्रसन्न करने के लिए और उनका दिल जीतने के लिए कड़ी तपस्या की और उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान श्री हरि ने बलि के राज्य की रक्षा खुद करनी शुरू कर दी और ऐसे में मां लक्ष्मी जी को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा और वे श्री हरि जी के इस निर्णय से सहमत नहीं थी।

वैकुंठ की देखभाल ना करके सम्राट बली की राज्य की रक्षा करने के लिए श्री हरि लगे रहते थे और इसी चीज से महालक्ष्मी दिन प्रतिदिन चिंतित होती चली जा रही थी और इसका समाधान निकालने का प्रयास कर रही थी। श्री हरि जी को दोबारा से वैकुंठ में वापस लाने के लिए मां लक्ष्मी जी ने एक ब्राह्मणी का रूप धारण किया और असुर सम्राट बलि के महल में जाकर रहने लगी।

फिर माता लक्ष्मी जी ने राखी के पर्व और पावन उत्सव के दिन अशोक सम्राट राजा बलि के हाथों में राखी बांधा और फिर मां लक्ष्मी ने उपहार के तौर पर कुछ देने को कहा और महाबली सम्राट मां लक्ष्मी के इस स्वरूप को समझ नहीं सका और उसने कहा कि आप खुद स्वयं जो मांगना चाहो मांग सकती हो और हम आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करने का प्रयास करेंगे फिर महालक्ष्मी ने यही सही अवसर समझा और सम्राट बलि से कहा कि वह श्री हरि विष्णु से कहे कि वापस बैकुंठ लौट जाएं।

चूँकि सम्राट बलि ने पहले ही उपहार मांगने का वादा दिया था। इसलिए मां लक्ष्मी की बात को मानते हुए और रक्षा बंधन की लाज रखते हुए सम्राट बली ने श्री हरि विष्णु जी को वापस वैकुंठ लौट जाने का आग्रह किया और फिर श्रीहरि वापस वैकुंठ में लौट गए इसलिए राखी को बहुत से जगहों में बलेव्हा भी कहा जाता है।

भगवान श्री कृष्ण और द्रोपदी की कहानी

जैसा कि हम सभी लोग भली-भांति जानते हैं द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण जी ने कई पापियों को यमलोक पहुंचाया था और उन्होंने धरती से पापियों को भगाने के लिए और प्रेम एवं भाईचारा के संदेश को फैलाने के लिए अपना अवतार लिया था। द्वापर युग में श्री कृष्ण जी ने अनेक लीलाएं की थी और कई दुष्टों का संहार किया था। जनहित के लिए और दुष्ट राजा से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान श्री कृष्ण जी ने दुष्ट राजा शिवपाल को यमलोक पहुंचाया था।

शिवपाल और भगवान श्री कृष्ण के बीच में हुए युद्ध में कृष्ण जी की अंगूठे में गहरी चोट आई और उनके अंगूठे से रक्त बहने लगा। रक्त को बहता देख द्रौपदी ने अपने वस्त्र को पढ़कर भगवान श्री कृष्ण के अंगूठे पर बांध दिया ताकि रक्त बहना बंद हो जाए। तब भगवान कृष्ण द्रौपदी के इस कार्य को देखकर काफी प्रसन्न हुए और उन्होंने अपना रिश्ता द्रौपदी के साथ भाई बहन का रिश्ता बना लिया और वे तब से द्रौपदी को अपनी बहन मानने लगे।

द्रौपदी को अपनी बहन मानने के साथ-साथ भगवान श्री कृष्ण ने द्रोपदी से वादा किया कि जब किसी भी समय द्रौपदी को एक भाई की आवश्यकता होगी, तब श्री कृष्ण अपने भाई के कर्तव्य को निभाने के लिए जरूर उपस्थित होंगे और द्रौपदी की रक्षा भी करेंगे।

बहुत वर्षों बाद जब द्रौपदी को कुरु सभा में जुए के खेल में हारना पड़ा तब कौरवों के राजकुमार दुशासन ने द्रौपधी का चिर हरण करने लगा, तब उस समय द्रौपदी ने अपने ससुराल वालों से आग्रह किया कि वह ऐसा ना करें और कई लोगों से सहायता भी मांगी।

परंतु द्रोपदी की लाज बचाने के लिए कोई भी आगे नहीं आया। क्योंकि सब के सब अपने अपने वचन में मजबूर होकर बंधे पड़े थे और तब जाकर द्रोपदी ने भगवान श्रीकृष्ण को याद किया और भगवान कृष्ण ने भाई के धर्म को निभाते हुए द्रोपदी की लाज रखी और तब से लेकर आज तक भगवान कृष्ण एवं द्रौपदी के भाई बहन के रिश्ते को अभी भी याद किया जाता है। हर साल ब्रज में रक्षाबंधन का त्यौहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है।

मां संतोषी की कहानी

भगवान गणेश जी दो पत्नियां थी, रिद्धि और सिद्धि और इनसे भगवान गणेश को 2 पुत्र भी थे, जो शुभ और लाभ थे। एक दिन अचानक से भगवान गणेश से उनके दोनों पुत्र शुभ और लाभ बहन लाने के लिए जिद करने लगे। वह कहने लगे कि वह कैसे भी करके उनके लिए बहन ला कर दे और भगवान गणेश उनकी जिद से परेशान हो गए और फिर उन्होंने अपनी शक्ति से संतोषी मां को जन्म दिया।

जिस दिन भगवान श्री गणेश जी ने मां संतोषी जी को अपनी शक्ति से उत्पन्न किया था, उस दिन रक्षाबंधन का पावन पर्व था और तभी से पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन का त्यौहार शुभ और लाभ एवं उनकी बहन मां संतोषी के द्वारा मनाया गया।

रक्षाबंधन का त्यौहार कैसे मनाया जाता है?

  • रक्षाबंधन के त्यौहार के दिन भाई और बहन दोनों को ही राखी बांधने के मुहूर्त के पहले सुबह उठकर स्नान करना पड़ता है।
  • प्रातः काल नहाने के बाद भाई बहन नए-नए कपड़े पहनते हैं और अच्छे से तैयार होते हैं।
  • फिर बहनें राखी की थाल को अच्छे से सजाती है और अपने भाई के सामने लेकर जाती है।
  • राखी की थाल में भाई की आरती करने के लिए दिया, उसे टीका लगाने के लिए रोरी और राखी एवं भाई का मुंह मीठा कराने के लिए मिठाई भी रखी जाती है। मिठाई आप अपने भाई के मनपसंद की रख सकती हो।
  • अब भाई अच्छे से आसन लगाकर के बैठता है और अपने सर पर रुमाल रखता है।
  • अब बहनें अपने भाई की आरती को करने के लिए दिया जलाती है और अच्छे से भाई की आरती उतारती है और उसके जीवन के लिए शुभकामनाओं की कामना करती है।
  • भाई की आरती करने के बाद बहन उन्हें अक्षत का टीका लगाती है।
  • इतना करने के बाद फिर बहन अपने भाई के दाहिने हाथ में उनके कलाई पर राखी बांधती है।
  • राखी बांधने के बाद बहन अपने भाई का मुंह मीठा कर आती है और उसे पानी पिलाती है।
  • जब इतनी रसम बहन की तरफ से पूरी हो जाती है, तब भाई को अपना रसम पूरा करना होता है। फिर भाई अपनी बहन को अपने आवश्यकतानुसार कोई भी बड़ा या फिर छोटा गिफ्ट देता है और इतना ही नहीं उसकी जीवन भर रक्षा करने का वादा भी करता है और इस प्रकार से बहन भाई का राखी पर्व का त्यौहार मनाया जाता है।

रक्षाबंधन पर बहन को क्या गिफ्ट दें?

हर भाई को रक्षाबंधन के दिन अपने बहन को कुछ ना कुछ स्पेशल गिफ्ट करना पड़ता है और सब भाइयों को समझ में नहीं आता है कि वह अपनी बहन को रक्षाबंधन के दिन क्या स्पेशल गिफ्ट कर सकते हैं और उन्हें खुश कर सकते हैं। अगर आप भी अपनी बहन को इस बार रक्षाबंधन की शुभ अवसर पर कुछ स्पेशल गिफ्ट करना चाहते हैं और आपको समझ में नहीं आ रहा है कि आप उसे इस रक्षाबंधन पर क्या गिफ्ट देंगे?

तो यहां पर हमने रक्षाबंधन पर बहन को दिए जाने वाले एक से बढ़कर एक गिफ्ट के बारे में बताया हुआ है और आप यहां से आसानी से रक्षाबंधन की गिफ्ट आईडियाज ले सकते हैं और अपनी बहन को स्पेशल गिफ्ट देकर उसका दिल जीत सकते हैं एवं उसके चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान भी ला सकते हैं।

चॉकलेट या फिर उसकी फेवरेट मिठाई गिफ्ट दें

हर लड़की को चॉकलेट और उसका फेवरेट स्वीट काफी पसंद होता है। अगर आप सोच रहे हो कि इस रक्षाबंधन अपनी बहन को क्या स्पेशल गिफ्ट करेंगे तो, आप अपनी बहन को इस बार चॉकलेट का एक बड़ा सा रक्षाबंधन सेलिब्रेशन का डब्बा दे सकते हैं या फिर आप चाहो तो उसकी कोई भी फेवरेट महंगी से महंगी मिठाई को भी गिफ्ट कर सकते हैं।

कुछ इसी प्रकार से उसका मन पसंदीदा गिफ्ट अपने बहन को दिया तो यकीनन आपकी बहन इस रक्षा बंधन काफी खुश हो जाएगी और उसे आपका यह गिफ्ट काफी पसंद भी आएगा।

कोई भी ज्वेलरी

जैसा कि हम और आप भली-भांति जानते हैं कि लड़कियों को अगर कोई सबसे ज्यादा चीज पसंद आती है तो लेटेस्ट डिजाइनिंग की ज्वेलरी। हर एक लड़की लेटेस्ट अपग्रेडेड ज्वेलरी पहनना पसंद करती है। अगर आप अपनी बहन को इस रक्षाबंधन पर कुछ बहुत ही स्पेशल गिफ्ट करना चाहते हैं तो ऐसे में आप उसे आज के लेटेस्ट जमाने के अनुसार से चलने वाले ट्रेंड के अंतर्गत कोई भी एक ज्वेलरी दे सकते हैं।

अगर आपके पास अच्छा बजट है तो आप ऑफलाइन महंगी से महंगी ज्वेलरी के शोरूम में जाकर अपने बहन के लिए उसकी फेवरेट ज्वेलरी गिफ्ट में ले सकते हैं और उसे इस रक्षाबंधन गिफ्ट कर सकते हैं। अगर आप इस रक्षाबंधन अपनी बहन को कुछ इस प्रकार का गिफ्ट दोगे तो उसे काफी ज्यादा पसंद आएगा और वह आपसे काफी इंप्रेस भी होगी।

डिजाइनिंग ड्रेस

अगर आप सोच रहे हैं कि इन सभी चीजों के अलावा भी कुछ स्पेशल और हटके इस रक्षाबंधन किया जाए तो आप अपने बहन के लिए इस रक्षाबंधन डिजाइनिंग ड्रेस भी गिफ्ट में कर सकते हैं। आप ऑफलाइन या फिर ऑनलाइन जैसे चाहो वैसे लेटेस्ट फैशनेबल डिजाइनिंग ड्रेस को खरीद सकते हैं और इस रक्षा बंधन अपनी बहन से राखी  बंधवाने के बाद उसे डिजाइनिंग ड्रेस गिफ्ट दे सकते हैं।

इस प्रकार के गिफ्ट भी लड़कियां खूब पसंद करती है। एक बार आप इस रक्षाबंधन कुछ इस प्रकार के गिफ्ट को भी देखकर जरूर देखें। हो सकता है आपकी बहन को काफी अच्छा लगे और वह इस गिफ्ट से काफी खुश भी हो जाएं।

कुकिंग अप्लायंसेज

अगर आपकी बहन की शादी हो गई है या फिर आपकी बहन को कुकिंग में काफी ज्यादा इंटरेस्ट है तब आप इन दोनों ही परिस्थितियों में इस रक्षाबंधन के दिन उसे सबसे ज्यादा इस्तेमाल में होने वाली कुकिंग अप्लायंसेज गिफ्ट में कर सकते हैं। आप कोई भी कुकिंग अप्लायंसेज गिफ्ट कर सकते हो जैसे कि मिक्सर, जूसर, स्मार्ट चिमनी, माइक्रोवेव, ओवन आदि।

आप कुछ इसी प्रकार के अपने बहन के आवश्यकतानुसार कुकिंग अप्लायंसेज रक्षाबंधन पर गिफ्ट कर सकते हैं। इस प्रकार के गिफ्ट भी बहन को काफी ज्यादा पसंद आएंगे क्योंकि उन्हें लगेगा कि उनके भाई ने उनकी कुकिंग को समझते हुए उन्हें इस्तेमाल में आने वाले सबसे उपयोगी चीज को गिफ्ट में दिया है। इसीलिए आप इस बार कुछ इस प्रकार का भी गिफ्ट देकर जरूर ट्राई करें।

FAQ

2022 में रक्षाबंधन कब है?

2022 में रक्षाबंधन 11 अगस्त दिन गुरुवार को है।

रक्षाबंधन किस हाथ में बंधवाना चाहिए?

भाइयों को रक्षाबंधन अपनी बहनों से दाहिने हाथ में बंधवाना चाहिए।

रक्षाबंधन का त्यौहार किस किस धर्म में मनाया जाता है?

रक्षाबंधन का त्यौहार लगभग सभी धर्मों में मनाया जाता है परंतु खासकर यह त्यौहार हिंदू धर्म के लोगों के लिए मान्यता रखता है।

रक्षाबंधन के दिन भाई क्या संकल्प लेता है?

रक्षाबंधन के दिन भाई संकल्प लेता है कि वह अपनी बहन की रक्षा हर एक मुसीबत में करेगा और आवश्यकता पड़ने पर उसे हमेशा सपोर्ट करेगा इसीलिए रक्षाबंधन के पर्व के दिन भाई एवं बहन दोनों ही एक दूसरे के लिए संकल्प लेते हैं।

रक्षाबंधन का पर्व किसका प्रतीक है?

रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के आपस में स्नेह का प्रतीक है। 

निष्कर्ष

हमने अपने आज के इस महत्वपूर्ण लेख में आप सभी लोगों को रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है और इसका इतिहास के बारे में विस्तार पूर्वक से जानकारी प्रदान की है और हमें उम्मीद है कि हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आप लोगों के लिए काफी ज्यादा उपयोगी और सहायक सिद्ध हुई होगी।

अगर आपके लिए हमारा यह आज का महत्वपूर्ण लेख उपयोगी साबित हुआ हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ और अपने सभी सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करना ना भूले ताकि आप के जरिए अन्य लोगों को भी रक्षाबंधन के ऊपर प्रस्तुत किया गया यह लेख पढ़ने के बाद कुछ उपयोगी जानकारी हासिल हो सके।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 4 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 6 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।

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