चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास और मौर्य वंश की स्थापना

History of Chandragupta Maurya in Hindi: नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करने वाले हैं प्राचीन भारत में मौर्य वंश की स्थापना करने वाले प्रमुख राजा के बारे में। जी हां! आपने बिल्कुल सही सोचा हम बात करने वाले हैं सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के बारे में। चंद्रगुप्त मौर्य वही है, जिन्होंने मौर्य वंश की स्थापना की थी। यदि हमें कोई कहे कि मौर्य वंश की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य के बिना होना संभव नहीं था तो यह किसी भी प्रकार से गलत नहीं होगा। क्योंकि चंद्रगुप्त मौर्य ही ऐसे शासक हैं, जिनके कारण मौर्य वंश की स्थापना हुई और मौर्य वंश का उदय हुआ। चंद्रगुप्त मौर्य प्राचीन भारत में मौर्य साम्राज्य के संस्थापक थे।

History of Chandragupta Maurya in Hindi
History of Chandragupta Maurya in Hindi

आज का यह लेख हमने केवल मौर्य वंश के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य जी के विषय में ही लिखा है। यह लेख बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि चंद्रगुप्त मौर्य एक बहुत ही विशाल साम्राज्य के शासक थे, जिन्होंने मौर्य वंश की स्थापना की और इसका उदय किया।

यदि आप मौर्य वंश के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य जी के जीवन से लेकर उनकी समस्त क्रियाओं के विषय में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो इस लेख “चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास (History of Chandragupta Maurya in Hindi)” को अंत तक जरूर पढ़े। इस लेख के माध्यम में हमने चंद्रगुप्त मौर्य के जीवन से लेकर के उनके सभी क्रियाओं इत्यादि से उनकी मृत्यु तक की संपूर्ण यात्रा प्रस्तुत की है।

चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास और मौर्य वंश की स्थापना – History of Chandragupta Maurya in Hindi

चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास

नामचंद्रगुप्त मौर्य
जन्मजन्म ईसा मसीह के जन्म से लगभग 340 वर्ष
मृत्यु की तिथि297 ईशा पूर्व
शैक्षिक योग्यताशास्त्र और विज्ञान
वैवाहिक स्थिति
पत्नी का नाम
पुत्र
Chandragupta Maurya History in Hindi

चंद्रगुप्त मौर्य कौन है?

विशाल मौर्य वंश के संस्थापक और मौर्य वंश का उदय करने वाले चंद्रगुप्त मौर्य एक बहुत ही विशाल साम्राज्य के सम्राट थे। मौर्य वंश के विकास से लेकर के इसकी उदय होने तक की संपूर्ण प्रक्रिया का श्रेय सिर्फ और सिर्फ चंद्रगुप्त मौर्य को ही जाता है। चंद्रगुप्त मौर्य भारत के प्राचीन समय में मौर्य वंश के संस्थापक कह जाते थे और यह अब भी इसी नाम से जाने जाते हैं।

चंद्रगुप्त मौर्य ने देश के अनेक छोटे-छोटे खंडित राज्यों को एक साथ मिलाया और इन्होंने एक बहुत ही बड़े साम्राज्य का निर्माण किया। इनका यह साम्राज्य बहुत ही बड़ा था। चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के दौरान मौर्य साम्राज्य पूर्व बंगाल और असम से पश्चिम में अफगानिस्तान और बलूचिस्तान से लेकर उत्तर भारत के कश्मीर और नेपाल तक फैला हुआ था, चंद्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य ना केवल इन्हीं देशों में अपितु दक्षिण भारत के पठारी इलाकों तक फैला हुआ था।

चंद्रगुप्त मौर्य अपने गुरु चाणक्य जी के साथ नंद साम्राज्य को समाप्त करने की घोषणा कर चुके थे। उन्होंने नंद वंश के साम्राज्य को समाप्त कर दिया और मौर्य वंश की स्थापना कर दी। चंद्रगुप्त मौर्य अपनी कुशल रणनीति के कारण न सिर्फ भारत पर ही नहीं बल्कि आसपास के अनेक देशों पर भी राज किया था। चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 23 वर्षों के सफल शासन करने के पश्चात सभी प्रकार के सांसारिक सुख इत्यादि मोह मायाओं को त्याग दिया और इसके पश्चात वे खुद को एक जैन साधु में बदल दिए।

लोगों के द्वारा ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने सल्लेखना किया, सल्लेखना हर किसी के बस की बात नहीं है। सल्लेखना एक ऐसी तपस्या है, जिसमें किसी भी व्यक्ति को अपने तक एक ऐसा व्रत रखना होता है कि वह कुछ नहीं खाएगा और भूखे ही रहकर के संपूर्ण जीवन भगवान की पूजा अर्चना करना होगा।

चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म कब हुआ?

चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म ईसा मसीह के जन्म से लगभग 340 वर्ष पूर्व हो चुका था। उनका जन्म किसी तिथि को पाटलिपुत्र में हुआ था। इनकी माता की बात करें तो इनका नाम मुरा था। वही उनके पिता का नाम सर्वार्थसिद्धि था। बिंदुसार इनके उत्तराधिकारी थे।

चंद्रगुप्त मौर्य जी की शिक्षा

चंद्रगुप्त मौर्य अपनी शिक्षा को प्राप्त करने योग्य नहीं थे, जिसके कारण यह अपना पूरा दिन इधर उधर केवल खेलने और अपने परिवार की देखरेख में ही बिता देते थे। एक बार जब महा पंडित चाणक्य जी इस गांव के भ्रमण से निकल रहे थे, तब उन्होंने चंद्रगुप्त को देखा और यह चंद्रगुप्त को देखते ही उनकी शक्तियों को पहचान गए। इसके बाद उन्होंने तुरंत ही इनके पिता के समक्ष इन्हें खरीदने का प्रस्ताव रखा।

इनके पिता के स्थिति इतनी दयनीय थी कि इन्होंने चंद्रगुप्त को महा पंडित चाणक्य को गोद दे दिया। इसके बाद महापंडित चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को शास्त्र और विज्ञान का ज्ञान प्राप्त करवाया, जिसके कारण चंद्रगुप्त मौर्य इस संपूर्ण देश के प्रमुख ज्ञाता बन गए और जिन्होंने संपूर्ण देश पर राज भी किया।

चंद्रगुप्त मौर्य का प्रारंभिक जीवन

यदि हम अनेकों प्रकार के शासकों इत्यादि के हादसों को देखें तो हमें यह पता चलेगा कि चाणक्य जी नंद वंश के विनाश के लिए बहुत ही शक्तिशाली और बुद्धिमान होने के साथ-साथ एक चालाक व्यक्ति की खोज कर रहे थे। जिसके दौरान यह मगध राज्य का परिभ्रमण कर रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि चंद्रगुप्त मौर्य एक दोस्त के साथ खेल रहे थे। तभी वहां पर महान पंडित चाणक्य जी आए और उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य को देखा।

लोगों के द्वारा ऐसा कहा जाता है कि पंडित चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य के खेल में उनकी नेतृत्व को देखा और उसके पश्चात वे चंद्रगुप्त के नेतृत्व कौशल से इतने प्रभावित हो गए। चाणक्य जी ने उन्हें प्रशिक्षित करने का विचार बना लिया। इसके पश्चात वे चंद्रगुप्त को विभिन्न स्तरों पर शिक्षा प्रदान करने से पहले चंद्रगुप्त को अपना पुत्र बनाना चाहा। इसके लिए उन्होंने चंद्रगुप्त को उनके पिता से खरीद लिया और उसके पश्चात चाणक्य जी ने चंद्रगुप्त को तक्षशिला लेकर चले गए।

उन्होंने नंद राजा के साम्राज्य को समाप्त करने के लिए चंद्रगुप्त मौर्य को अपनी समस्त अपूर्व संपत्ति को एक विशाल सेना में बदलने का आदेश दिया, उसके पश्चात उन्होंने उनकी संपूर्ण संपत्ति को एक बहुत ही विशाल सेना में बदल दिया।

चंद्र गुप्त मौर्य की भूमिका रूप व्यवस्था क्या थी

हम आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि मौर्य वंश के साम्राज्य में अपने इंजीनियरिंग चमत्कारों जैसे जलाशय, सड़क, सिंचाई, मंदिर और विभिन्न प्रकार के खानों के लिए जाना जाता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि चंद्रगुप्त मौर्य जलमार्ग के बहुत बड़े पक्षधर नहीं थे, इसीलिए उनका मुख्य मार्ग सड़क मार्ग ही था। उन्होंने अपनी और अपने राज्य की सुगमता के लिए अनेक प्रकार की सड़के बनवाई।

इन सड़कों का विस्तार इन्होंने इतनी अच्छी तरीके से करवाया जैसे कि इन सड़कों से बड़े वाहन जैसे बैलगाड़ी इत्यादि बड़ी ही आसानी से गुजर सकते थे। चंद्रगुप्त मौर्य जी ने अपनी भूमिका रूप व्यवस्था में एक राजमार्ग भी बनवाया जो कि इस समय में पाटलिपुत्र के तक्षशिला को जोड़ता है। चंद्रगुप्त मौर्य जी के द्वारा निर्मित अन्य राजमार्गों के द्वारा अनेक प्रकार की राजधानी जैसे नेपाल, देहरादून, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक इत्यादि जैसे स्थानों को जोड़ती थी।

नंद वंश का अंत कैसे हुआ था?

महा पंडित चाणक्य जी को नंद वंश के शासक ने बहुत ही अपमानित किया था, जिसके कारण चाणक्य जी नंद वंश के शासक से बहुत ही घृणा करते थे, इसके लिए उन्होंने यह प्रण कर लिया कि वह नंद वंश का विनाश कर देंगे। अंततः चंद्रगुप्त के आ जाने के पश्चात चाणक्य जी को नंद वंश का विनाश करने का एक बहुत ही अच्छा अवसर प्राप्त हुआ। जिसके बाद वास्तव में चंद्रगुप्त मौर्य जी के सहायता से चाणक्य ने नंद वंश को नष्ट करने का एकमात्र उद्देश्य पूरा कर दिया।

चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की सलाह प्राप्त करने के पश्चात प्राचीन भारत के हिमालय क्षेत्र के शासक राजा पर्वत के साथ गठबंधन कर लिया। चंद्रगुप्त मौर्य जी ने पर्वत का संयुक्त सेना के साथ नंद वंश साम्राज्य पर वर्ष 322 ईसा पूर्व में आक्रमण कर दिया और इन्होंने नंद वंश का अंत कर दिया।

नंद वंश के अंत के पश्चात मौर्य वंश का विस्तार

चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद वंश के विनाश के पश्चात भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर पश्चिम मैसेडोनियन सूबेदार को हराया। इसके बाद चंद्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया जो एक यूनानी शासक था। सेल्यूकस वहीं था, जिसका नियंत्रण भारत के अधिकांश क्षेत्रों पर था। सेल्यूकस को पहले सिकंदर ने पकड़ा था, सिकंदर से तो सभी लोग परिचित होंगे क्योंकि इस के संदर्भ में एक बहुत ही प्रसिद्ध कहावत है (यह कहावत है “जो जीता वही सिकंदर”)।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सेल्यूकस ने अपनी बेटी का चंद्रगुप्त मौर्य से शादी करने के लिए प्रस्ताव रखा था। इसके बाद गठबंधन के बाद इस राज्य में प्रवेश किया था। सेल्यूकस की मदद से चंद्रगुप्त मौर्य ने कई क्षेत्रों को प्राप्त कर लिया और इसके बाद चंद्रगुप्त मौर्य ने दक्षिण एशिया तक अपने साम्राज्य को विस्तार कर दिया। चंद्रगुप्त मौर्य भाग विस्तार के कारण चंद्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य को पूरे एशिया तक में जाना जाने लगा।

मौर्य वंश का उदय कैसे हुआ?

यदि हम बात करें मौर्य वंश के उदय के बारे में तो कई तथ्य हमारे सामने निकल कर के आते हैं। मौर्य वंश के बारे में ज्यादा जानकारी आपको ग्रीक, जैन धर्मों के साथ-साथ बौद्ध धर्म और हिंदू प्राचीन ब्राह्मणवाद के गानों में भी आपको चंद्रगुप्त मौर्य के विषय में संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो जाएगी। साथ ही आपको यह भी पता चल जाएगा कि मौर्य वंश का उदय आखिर कैसे हुआ था?

कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि चंद्रगुप्त मौर्य एक नंद राजकुमार थे और उनकी नौकरानी मुरा का एक नाजायज बच्चा था। लोगों का मानना है कि चंद्र गुप्ता मौर्य जाति से संबंधित है जो कि पीपलीवाला के एक प्राचीन गणराज्य के एक क्षत्रिय कबीले के थे जो रोमिंग दे और कसया के मध्य रहा करते थे।

हमें अन्य विचारों से यह पता चलता है कि चंद्रगुप्त मौर्य या तो मुरार वंश से या फिर इंडो-एशियन वंश से संबंधित है जो कि एक क्षत्रिय हुआ करते थे। सभी साथियों से यह स्पष्ट हो जाता है कि चंद्रगुप्त मौर्य से पहले भी यह वंश रहा करता था परंतु यह वंश अधिक प्रचलन में नहीं था। इसे ऊपर लाने का श्रेय सिर्फ और सिर्फ चंद्रगुप्त मौर्य को ही जाता है।

चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु

चंद्रगुप्त मौर्य को बिंदुसार ने सिंहासन पर बैठाया था। बिंदुसार की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया जो कि अशोक के नाम से जाने जाते हैं। अशोक जी भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे शक्तिशाली राजाओं में से एक थे। चंद्रगुप्त मौर्य जी द्वारा बनाया गया यह साम्राज्य संपूर्ण विश्व में सबसे बड़ा बन गया था।

यह साम्राज्य इन्होंने ऐसा बना दिया था कि इसकी तुलना करने वाला अन्य कोई भी साम्राज्य नहीं था। चंद्रगुप्त मौर्य के द्वारा बनाया गया यह साम्राज्य लगभग 130 वर्षों तक आने वाली पीढ़ियों के लिए बढ़ा हुआ था। आपको बता दे कि चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु 297 ईशा पूर्व के आसपास आध्यात्मिक संत गुरु भद्रबाहु के मार्गदर्शन में हुई थी।

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चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म कब हुआ था?

चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म ईसा मसीह के जन्म से लगभग 340 वर्ष पूर्व हो चुका था। उनका जन्म किसी तिथि को पाटलिपुत्र में हुआ था।

चंद्रगुप्त मौर्य किसका पुत्र था?

इनकी माता की बात करें तो इनका नाम मुरा था। वही उनके पिता का नाम सर्वार्थसिद्धि था। यह बिंदुसार जी के उत्तराधिकारी थे।

चन्द्रगुप्त मौर्य के पिता कौन थे?

चन्द्रगुप्त मौर्य के पिता का नाम सर्वार्थसिद्धि था।

चन्द्रगुप्त मौर्य की पत्नी का क्या नाम था?

ऐसा कहा जाता है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने तीन बार विवाह किया था, जिसमें पहली पत्नी का नाम दुर्धरा था जिससे चंद्रगुप्त मौर्य को बिन्दुसार प्राप्त हुआ।

चन्द्रगुप्त मौर्य की कितनी पत्नियां थी?

चंद्रगुप्त मौर्य ने तीन बार विवाह किया था, जिसमें पहली पत्नी का नाम दुर्धरा था, जिससे चंद्रगुप्त मौर्य को बिन्दुसार प्राप्त हुआ। चंद्रगुप्त मौर्य का दूसरा विवाह सेल्युकस की पुत्री कार्नेलिया हेलेना से हुआ था, इनसे चन्द्रगुप्त मौर्य को एक पुत्र प्राप्त हुआ, जिसका नाम जस्टिन था। ऐसा कहा जाता है कि चन्द्रगुप्त मौर्य के तीसरी पत्नी का नाम चंद्र नंदिनी था।

दुर्धरा किसकी पुत्री थी?

दुर्धरा नंदवंशियो के पूर्वज महाराज घनानंद की पुत्री थी।

चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु कब हुई थी ?

चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु 297 ईशा पूर्व के आसपास आध्यात्मिक संत गुरु भद्रबाहु के मार्गदर्शन में हुई थी।

चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु कौन थे?

चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु महा पंडित चाणक्य थे।

मौर्य साम्राज्य की स्थापना किसने की थी?

मौर्य साम्राज्य की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य की थी।

चन्द्रगुप्त मौर्य का कार्यकाल?

चन्द्रगुप्त मौर्य ने 322 से 298 ईसा पूर्व के मध्य शासन किया था। चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 23 वर्षों के सफल शासन करने के पश्चात सभी प्रकार के सांसारिक सुख इत्यादि मोह मायाओं को त्याग दिया और इसके पश्चात वे खुद को एक जैन साधु में बदल दिए।

चन्द्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य?

चंद्रगुप्त मौर्य अपनी कुशल रणनीति के कारण न सिर्फ भारत पर ही नहीं बल्कि आसपास के अनेक देशों पर भी राज किया था। चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के दौरान मौर्य साम्राज्य पूर्व बंगाल और असम से पश्चिम में अफगानिस्तान और बलूचिस्तान से लेकर उत्तर भारत के कश्मीर और नेपाल तक फैला हुआ था, चंद्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य ना केवल इन्हीं देशों में अपितु दक्षिण भारत के पठारी इलाकों तक फैला हुआ था।

चंद्रगुप्त मौर्य का उत्तराधिकारी कौन हुआ?

बिंदुसार चंद्रगुप्त मौर्य का उत्तराधिकारी हुआ था।

निष्कर्ष

यदि हम बात करें चंद्रगुप्त के उदय और इस साम्राज्य के विस्तार की तो इस साम्राज्य का संपूर्ण श्रेय सिर्फ और सिर्फ चंद्रगुप्त मौर्य और उनके गुरु जी को जाता है। इस लेख के माध्यम से हमने यह बताया कि चंद्रगुप्त मौर्य ने संपूर्ण विश्व में कितने वर्षों तक राज्य किया।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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