संस्कृत धातु रुप (परिभाषा, भेद और उदाहरण)

संस्कृत धातु रुप (परिभाषा, भेद और उदाहरण) | Dhatu Roop in Sanskrit

Dhatu Roop in Sanskrit
Dhatu Roop in Sanskrit

संस्कृत में धातु रूप

संस्कृत व्याकरण में वैसे शब्द जो की क्रिया के मूल रूप को व्यक्त करें उसे धातु कहा जाता है। धातुओं को संस्कृत भाषा में शब्दों के निर्माण हेतु काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

संस्कृत लकार

संस्कृत में धातुओं के दस लकार हैं, जो निम्न है:

  1. लट् लकार (Present Tense)
  2. लोट् लकार (Imperative Mood)
  3. लङ्ग् लकार (Past Tense)
  4. विधिलिङ्ग् लकार (Potential Mood)
  5. लुट् लकार (First Future Tense or Periphrastic)
  6. लृट् लकार (Second Future Tense)
  7. लृङ्ग् लकार (Conditional Mood)
  8. आशीर्लिन्ग लकार (Benedictive Mood)
  9. लिट् लकार (Past Perfect Tense)
  10. लुङ्ग् लकार (Perfect Tense)

धातु रूप में पुरुष और वचन

  1. प्रथम पुरुष
  2. मध्यम पुरुष
  3. उत्तम पुरुष

उपर्युक्त तीनों पुरुषों में प्रत्येक में तीन वचन होते है, जो कि निम्न है:

  1. एकवचन (वह वचन जिसमें एक होने का बोध हो रहा हो)
  2. द्विवचन (वह वचन जिसमें दो के होने का बोध हो रहा हो)
  3. बहुवचन (वह वचन जिसमें दो से अधिक होने का बोध हो रहा हो)

धातुओं का वर्गीकरण

धातुओं को मुख रूप से 3 भागों में वर्गीकृत किया गया है, जो निम्न है:

  1. परस्मैपद
  2. आत्मेनपद
  3. उभयपद

परस्मैपद

ऐसी क्रिया जिसका फल कर्ता को नहीं मिलता हो, किसी अन्य को मिलता हो, ऐसी धातुओं को परस्मैपद धातु कहते है। कर्तृवाच्य वाक्यों में परस्मैपद धातु का प्रयोग किया जाता है।

यहाँ पर परस्मैपद लकारों की धातु रुप सरंचना दी गई है जिनसे आप आसानी से सभी प्रकार के धातु रूप बहुत ही सरलता से बना पाएंगे।

1.लट् लकार (वर्तमान काल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

ति

तस् (त:)

अन्ति

मध्यम पुरुष

सि

थस् (थ:)

उत्तम पुरुष

मि

वस् (व:)

मस् (म:)

2. लङ्ग् लकार (भूतकाल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

त्

ताम्

अन्

मध्यम पुरुष

स्

तम्

उत्तम पुरुष

अम्

3. लृट् लकार (भविष्यत काल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

स्यति

स्यतस् (स्यत:)

स्यन्ति

मध्यम पुरुष

स्यसि

स्यथस् (स्यथ:)

स्यथ

उत्तम पुरुष

स्यामि

स्याव:

स्याम:

4. लुङ्ग् लकार (सामान्य भूतकाल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

द्

ताम्

अन्

मध्यम पुरुष

स्

तम्

उत्तम पुरुष

अम्

5. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

अतुस्

उस्

मध्यम पुरुष

अथुस्

उत्तम पुरुष

6. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्य काल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

ता

तारौ

तारस्

मध्यम पुरुष

तासि

तास्थस्

तास्थ

उत्तम पुरुष

तास्मि

तास्वस्

तास्मस्

7. लृङ्ग् लकार (हेतुहेतुमद् भविष्य काल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

स्यत्

स्यताम्

स्यन्

मध्यम पुरुष

स्यस्

स्यतम्

स्यत्

उत्तम पुरुष

स्यम

स्याव

स्याम

8. लोट् लकार (आज्ञा)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

तु

ताम्

अन्तु

मध्यम पुरुष

हि

तम्

उत्तम पुरुष

आनि

आव

आम

9. विधिलिङ्ग् लकार (चाहिए)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

यात्

याताम्

युस्

मध्यम पुरुष

यास्

यातम्

यात

उत्तम पुरुष

याम्

याव

याम

10. आशीर्लिन्ग लकार (आशीर्वाद)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

यात्

यास्ताम्

यासुस्

मध्यम पुरुष

यास्

यास्तम्

यास्त

उत्तम पुरुष

यासम्

यास्व

यास्म

आत्मेनपद

ऐसी क्रियाएँ जिनका फल सीधा कर्ता को मिलता हो, उन्हें आत्मनेपद कहा जाता है। कर्मवाच्य एवं भाववाच्य की सभी धातुएं आत्मनेपदी होती है।

1.लट् लकार (वर्तमान काल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

ते

आते

अन्ते

मध्यम पुरुष

से

आथे

ध्वे

उत्तम पुरुष

वहे

महे

2. लङ्ग् लकार (भूतकाल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

ताम्

अन्त

मध्यम पुरुष

थास्

आथाम्

ध्वम्

उत्तम पुरुष

वहि

महि

3. लृट् लकार (भविष्यत काल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

स्यते

स्येते

स्यन्ते

मध्यम पुरुष

स्यसे

स्येथे

स्यध्वे

उत्तम पुरुष

स्ये

स्यावहे

स्यामहे

4. लुङ्ग् लकार (सामान्य भूतकाल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

आताम्

अन्त

मध्यम पुरुष

थास्

आथम्

ध्वम्

उत्तम पुरुष

वहि

महि

5. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

आते

इरे

मध्यम पुरुष

से

आथे

ध्वे

उत्तम पुरुष

वहे

महे

6. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्य काल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

ता

तारौ

तारस

मध्यम पुरुष

तासे

तासाथे

ताध्वे

उत्तम पुरुष

ताहे

तास्वहे

तास्महे

7. लृङ्ग् लकार (हेतुहेतुमद् भविष्य काल)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

स्यत

स्येताम्

स्यन्त

मध्यम पुरुष

स्यथास्

स्येथाम्

स्यध्वम्

उत्तम पुरुष

स्ये

स्यावहि

स्यामहि

8. लोट् लकार (आज्ञा)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

ताम्

आताम्

अन्ताम्

मध्यम पुरुष

स्व

आथाम्

ध्वम्

उत्तम पुरुष

आवहै

आमहै

9. विधिलिङ्ग् लकार (चाहिए)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

ईत

ईयाताम्

ईरन्

मध्यम पुरुष

ईथास्

ईयाथाम्

ईध्वम्

उत्तम पुरुष

ईय

ईवहि

ईमहि

10. आशीर्लिन्ग लकार (आशीर्वाद)

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम पुरुष

सीष्ट

सियास्ताम्

सीरन्

मध्यम पुरुष

सीष्टास्

सीयस्थाम्

सीध्वम्

उत्तम पुरुष

सीय

सीवहि

सीमहि

धातुओं का वर्गीकरण 

संस्कृत की सभी धातुओं को 10 भागों में बांटा गया है, जिन्हें गण कहा जाता है:

  1. भ्वादिगण
  2. अदादिगण
  3. ह्वादिगण (जुहोत्यादि)
  4. दिवादिगण
  5. स्वादिगण
  6. तुदादिगण
  7. तनादिगण
  8. रूधादिगण
  9. क्रयादिगण
  10. चुरादिगण

भ्वादिगण

भ्वादिगण के मुख्य धातु रूप निम्न है:

  • भू/भव् (होना)
  • अस् (होना) – As Dhatu Roop
  • हस् (हँसना) – Has Dhatu Roop
  • लिख् (लिखना)
  • पठ् (पढना)
  • गम्/गच्छ (जाना)
  • वद् (बोलना)
  • वृत् (होना)
  • धाव् (दौडना)
  • जि (जीतना)
  • दृश् (देखना)
  • जि/जय् (जीतना)
  • पच् (पकाना)
  • पत् (गिरना)
  • ष्ठिव्/ष्ठीव् (थूकना)
  • नी (ले जाना)
  • शुभ् (शोभित होना)
  • क्रम्/क्राम् (चलना)
  • गुह् (छिपाना)
  • पा/पिव् (पीना)
  • स्था/तिष्ठ (प्रतीक्षा करना)
  • यज् (यजन करना)
  • लभ् (प्राप्त करना)
  • घ्रा/जिघ्र (सूँघना)
  • वस् (निवास करना)
  • व्रज (जाना)
  • तप् (तप करना)
  • सद्/सीद् (दु:ख पाना)
  • सेव् (सेवा करना)
  • सेव् (सेवा करना)
  • दाण/यच्छ (देना)
  • भज् (भजन करना)
  • अर्च् (पूजा करना)

अदादिगण

  • आस् (बैठना)
  • अस् (होना)
  • जागृ (जागना)
  • ब्रू (बोलना)
  • विद् (जानना)
  • अद् (भोजन करना)
  • दुह् (दूहना)
  • या (जाना)
  • शी (सोना)
  • इ (आना)
  • हन् (मारना)
  • रुद् (रोना)
  • द्विष् (द्वेष करना)

ह्वादिगण

  • भी (डरना)- Bhi Dhatu Roop
  • दा (देना)
  • हु (हवन करना)

दिवादिगण

  • नृत् (नाचना)
  • सो (नाश करना)
  • दिव् (क्रीडा करना)
  • शम् (शान्त होना)
  • सिव् (सीना)
  • नश् (नाश होना)
  • विद् (रहना)
  • जन् (उत्पन्न होना)

स्वादिगण

  • श्रु (सुनना)
  • सु (स्नान करना)
  • शक् (सकना)
  • आप् (प्राप्त करना)
  • चि/चिञ् (चुनना)

तुदादिगण

  • स्पृश (छूना)
  • विश् (घुसना)
  • मृ (मरना)
  • तुद् (पीडा देना)
  • क्षिप् (फेंकना)
  • इष् (इच्छा करना)
  • सिच्/सिञ्च (सींचना)
  • प्रच्छ् (पूछना)
  • मिल् (मिलना)
  • मुच् (छोडना)

तनादिगण

  • कृ (करना)
  • तन् (फैलाना)

रूधादिगण

  • रुध् (रोकना)
  • छिद्र (काटना)
  • भुज् (भोजन करना)
  • भिद् (काटना)

क्रयादिगण

  • क्री (खरीदना)
  • पू (पवित्र करना)
  • ज्ञा (जानना) – Gya Dhatu Roop

चुरादिगण

  • गण् (गिनना)
  • चुर (चुराना)
  • पाल् (पालना करना)
  • कथ् (कहना)
  • छिद्र (छेद करना)
  • चिन्त (सोचना)

संस्कृत व्याकरण

संस्कृत धातु रुपसंस्कृत वर्णमालालकार
संस्कृत में कारकसंस्कृत में संधिसमास प्रकरण
प्रत्यय प्रकरणउपसर्ग प्रकरणसंस्कृत विलोम शब्द

इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here