संस्कृत भाषा का महत्व (संस्कृत की उत्पत्ति, लाभ और कैसे सीखे)

संस्कृत ना केवल भारत की बल्कि दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है। इसे पवित्र भाषा माना जाता है। प्राचीन काल में भारत जैसे देश में सबसे अत्यधिक संस्कृत भाषा बोली जाती थी। हालांकि धीरे-धीरे इस भाषा का महत्व खत्म होने लगा और एक परसेंट से भी कम लोग ही भारत में संस्कृत भाषा का उपयोग करते हैं।

आज भी हिंदू धार्मिक अनुष्ठान पूजा पाठ में संस्कृत भाषा का उपयोग किया जाता है। इसे समझ में आता है कि संस्कृत भाषा का कितना धार्मिक महत्व है। वैसे भी संस्कृत भाषा को प्राचीन काल में देव भाषा कहा जाता था। इस भाषा को देवताओं का भाषा माना जाता था और प्राचीन काल में लिखे गए ज्यादातर धार्मिक ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं फिर चाहे वह महाभारत और रामायण हो या चार ग्रंथ ऋग्वेद ,सामवेद, यजुर्वेद और अथर्व वेद हो।

Sanskrit Bhasha Ka Mahatva

इस भाषा को ऋग वैदिक काल की भाषा मानी जाती है। विद्वानों का ऐसा भी मानना है कि दुनिया की अधिकतर भाषाओं की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से ही हुई है। यहां तक कि कंप्यूटर जिसमें बायनरी भाषा का उपयोग होता है उसके लिए भी संस्कृत सबसे सरलतम भाषा है। आज के इस लेख में हम इसी संस्कृत भाषा के महत्व और इससे संबंधित कुछ रोचक तथ्य जानने वाले हैं तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

संस्कृत भाषा का महत्व (संस्कृत की उत्पत्ति, लाभ और कैसे सीखे)

संस्कृत भाषा का महत्व

संस्कृत जिसे देववाणी या फिर सुरभारती भी कहा जाता है। यह दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है। यह  पवित्र और शास्त्रीय भाषा मानी जाती है। संस्कृत दुनिया की सबसे उल्लिखित भाषाओं में से एक है। अपनी भावनाओं को एक दूसरे से सांझा करने के लिए हमें भाषा की जरूरत पड़ती है और भाषा बहुत ही सरल होनी चाहिए, जिससे हम एक दूसरे के भावनाओं को समझ सके।

संस्कृत दुनिया की सबसे सरल भाषा मानी जाती है। यहां तक कि कंप्यूटर के लिए भी संस्कृत सबसे सरल भाषा है। आज दुनिया में लगभग 6- 7 हजार से भी ज्यादा भाषाओं का प्रयोग किया जाता है और इन सभी भाषाओं की जननी संस्कृत को ही माना जाता है।

संस्कृत एकमात्र ऐसी भाषा है जिसके शब्दों के क्रम को यदि अस्त-व्यस्त कर दे तब भी उसके अर्थ के बदलने की बहुत कम संभावना होती है क्योंकि यह ऐसी भाषा है जिसका सभी शब्द विभक्ति और वचन के अनुसार होते हैं।

यहां तक कि नासा के वैज्ञानिकों का भी मानना है क्योंकि उनके अनुसार अंतरिक्ष में जब वे अंतरिक्ष यात्री को मैसेज भेजते हैं तो उनके वाक्य उलट जाने के कारण मैसेज का अर्थ ही बदल जाता है और इसके लिए उन्होंने कई भाषाओं का प्रयोग किया और हर भाषाओं के साथ यही समस्या आई, तब इन्होंने संस्कृत भाषा पर यह प्रयोग किया और उन्होंने देखा कि संस्कृत भाषा के वाक्य उलट जाने पर भी उनका अर्थ नहीं बदलता।

प्राचीन काल में इस भाषा का प्रयोग सबसे अधिक किया जाता था यही कारण था कि उस दौरान रचे गए ज्यादातर ग्रंथ और साहित्य में संस्कृत भाषा देखने को मिलती है लेकिन आज भले ही लोग संस्कृत भाषा का बहुत कम प्रयोग करते हैं। यहां तक कि ना के बराबर संस्कृत भाषा का प्रयोग करते हैं। लेकिन आज भी धार्मिक कर्मकांड करवाने के लिए संस्कृत भाषा का ही प्रयोग किया जाता है।

बिना मंत्र और श्लोक के पूजा-पाठ अधूरा है और उसे संस्कृत में ही पढ़ा जाता है। इससे समझ में आता है कि संस्कृत भाषा का महत्व आज भी है और हमेशा ही बना रहेगा। भले ही विभिन्न भाषाओं की उत्पत्ति ने संस्कृत भाषा का स्थान ले लिया हो और लोग  संस्कृत के बजाय दूसरी भाषा का अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए प्रयोग करना शुरू कर दिया हो लेकिन आज भी संस्कृत भाषा बोलने वाले कई लोग हैं।

सरकार भी संस्कृत भाषा का महत्व बनाए रखने के लिए स्कूल कॉलेज में संस्कृत भाषा को एक अलग विषय के रूप में पढ़ाने के लिए अनिवार्य बना चुकी है।

संस्कृत के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • संस्कृत विश्व की सबसे पुरानी भाषा है। इसलिए इसे विश्व की प्रथम भाषा भी माना जाता है। यह सभी भाषाओं की जननी मानी जाती है।
  • संस्कृत पर लिखा गया पहला व्याकरण ग्रंथ ‘अष्टाध्याई’ है, जिसके रचयिता पाणिणी है।
  • वर्तमान में भारत की राष्ट्रीय भाषा हिंदी है लेकिन अरबों के भारत पर आक्रमण से पहले संस्कृत भारत की राष्ट्रभाषा हुआ करती थी।
  • संस्कृत भाषा की उत्पत्ति भारत में हुई लेकिन आज भारत में संस्कृत भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या बहुत कम हो चुकी है। लेकिन अचरज की बात है कि जिस देश में संस्कृत भाषा की उत्पत्ति हुई उस देश में संस्कृत बोलने वालों की संख्या कम हो गई वहीं अन्य देशों में लोग संस्कृत को सीखना चाहते हैं और वहां पर स्कूल कॉलेज में संस्कृत की शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है।
  • संस्कृत एकमात्र ऐसी भाषा है, जिसके ज्यादातर शब्दों का पर्यायवाची अन्य भाषाओं की तुलना में सबसे ज्यादा है। माना जाता है इसके ज्यादातर भाषाओं के सौ से भी ज्यादा पर्यायवाची शब्द है।
  • भारत का राज्य कर्नाटक के मट्टुर  ऐसा गांव है, जहां आज भी लोग संस्कृत में ही बोलते हैं।
  • संस्कृत एकमात्र ऐसी भाषा है जिसमें बहुत कम शब्दों में ही वाक्य पूर्ण हो जाते हैं। इस प्रकार संस्कृत भाषा से बड़े वाक्यों को बहुत कम शब्दों में बयां किया जा सकता है।
  • संस्कृत एकमात्र ऐसी भाषा है जिसे बोलने के लिए जीप की सभी मांसपेशियों का प्रयोग होता है।
  • मैक्समूलर जिसने संस्कृत को आर्यों की मूल भाषा सिद्ध किया उनके अनुसार संस्कृत के सभी शब्द 500 धातु से निकले हैं।
  • तेलगू, कन्नड़ और मलयालम तीनों भाषाओं का साहित्य संस्कृत के तत्सम और तद्भव शब्दों से भर गया।
  • व्याकरण ग्रन्थों की रचना के बाद शिक्षित समाज में संस्कृत भाषा का प्रयोग किया जाता था, वही अशिक्षित जन सामान्य की बोलचाल की भाषा ‘प्राकृत’ थी।

संस्कृत बोलने के लाभ

  • कहां जाता है संस्कृत भाषा बोलने से जुबान साफ होती है। संस्कृत बोलने से जीभ लचीले बनते हैं।
  • ऐसा भी माना जाता है कि जो संस्कृत का अध्ययन करता है, उसे गणित और विज्ञान समझने में आसानी होती है।
  • संस्कृत भाषा बोलने से तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है, जिससे व्यक्ति हमेशा सकारात्मक रहता है। इससे मानव की स्मरण शक्ति बढ़ती है।
  • यूनेस्को का भी मानना है कि संस्कृत भाषा के बोलने से शरीर और आत्मा पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

संस्कृत भाषा की उत्पत्ति

संस्कृत के उत्पत्ति को लेकर कई विद्वानों का अलग-अलग मत है। कई लोग संस्कृत के उत्पत्ति को ऋग्वेद काल में बताते हैं। क्योंकि उसी दौरान विश्व का पहला ग्रंथ ऋग्वेद लिखा गया था, जिसे संस्कृत भाषा में लिखा गया है। ऋग्वेद में भजन कीर्तन, धार्मिक, दार्शनिक औश्र मार्गदर्शन शामिल है जिसमें संस्कृत भाषा का प्रयोग किया गया है।

हालांकि वेद की तिथि को निर्धारण करना तो मुश्किल है फिर भी कई विद्वान 3500 इसावर्ष पूर्व  वेदों की रचना का काल बताते हैं। कुछ विद्वानों का मानना है कि वेद से पहले भी संस्कृत भाषा का अस्तित्व रहा होगा। कोई विद्वान कहते हैं इस भाषा का प्रयोग आर्य करते थे। आर्य कोई विशेष जाति के लोग नहीं थे लेकिन श्रेष्ठ मानव के लिए इस शब्द का प्रयोग किया जाता था।

समय-समय पर संस्कृत भाषा के स्वरूप भी देखने को मिले हैं उदाहरण के लिए कुछ विद्वानों का मानना है कि ऋग्वेद की भाषा वैदिक संस्कृत है, तो वही रामायण में लौकिक संस्कृत का प्रयोग किया गया है और यह दोनों ही संस्कृत एक दूसरे से भिन्न है।

प्राचीन समय में बहुत प्रचुर मात्रा में संस्कृत भाषा का प्रयोग किया जाता था लेकिन धीरे-धीरे इस भाषा का सर्वसाधारण में प्रचार कम होने लगा तब पाली प्राकृत और अपभ्रंश जैसे भाषा का प्रयोग बोलचाल के लिए होने लगा।

यहां तक कि जैन और बौद्ध समुदाय के महान भगवान बुध और महावीर स्वामी ने भी अपने उपदेश के लिए क्रमशः पाली और प्राकृतिक भाषा का प्रयोग किया है ना कि संस्कृत का। इससे समझ में आता है कि इस काल तक संस्कृत भाषा का प्रयोग काफी कम हो गया था।

संस्कृत कैसे सीखें?

जिन लोगों को संस्कृत नहीं आता है, उन्हें लगता है कि संस्कृत बहुत कठिन भाषा है लेकिन जब हिंदी या अन्य भाषा आते हुए अंग्रेजी सीख सकते हैं तो फिर संस्कृत क्यों नहीं सीख सकते हैं? यहां तक कि संस्कृत को तो अन्य भाषा की तुलना में काफी सरल भाषा माना जाता है। यह भले सुनने में और बोलने में कठिन लगता हो लेकिन इसके व्याकरण को समझ लो तो संस्कृत बोलना काफी आसान हो जाता है।

संस्कृत बोलने के लिए सबसे पहले व्याकरण को समझना जरूरी होता है। उसके बाद छोटे छोटे शब्दों को संस्कृत में बोलने का अभ्यास करना चाहिए। जब छोटे छोटे शब्द जो हर दिन प्रयोग किए जाते हैं। उन्हें संस्कृत में सीख लिया जाए तब उन शब्दों की मदद से वाक्य को बनाने का अभ्यास करना चाहिए और जब छोटे-छोटे वाक्य संस्कृत में बनाना आ जाए तो किसी एक विषय पर संस्कृत में बोलने का अभ्यास करना चाहिए।

आज की सोशल मीडिया के समय में तो किसी भी भाषा को सीखना काफी आसान हो गया है क्योंकि बहुत सारी ऐसी वीडियोस सोशल मीडिया पर मौजूद है, जो विभिन्न भाषाओं को सिखाने में मदद करती है।

इसके साथ ही कई सारी एप्लीकेशन भी है, जो अन्य भाषाओं के साथ ही संस्कृत को भी सिखाने में मदद करती है। वहां पर अभ्यास भी कराया जाता है। इस तरह संस्कृत भाषा को सीखना कठिन नहीं है बस जरूरी है सीखने की तीव्र इच्छा होना। जहां इच्छा होती है, वहां सफलता जरूर मिलती है।

FAQ

संस्कृत पढ़ना क्यों जरूरी है?

हमें पता है कि संस्कृत भाषा दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है और प्राचीन काल में सबसे अत्यधिक संस्कृत भाषा का प्रयोग किया जाता था और उस काल में रचित ग्रंथ संस्कृत भाषा में है, जिन्हें पढ़ने के लिए संस्कृत की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि उन सभी ग्रंथों का संस्करण आज विभिन्न भाषाओं में लिखा जा चुका है जिसके कारण हम बिना संस्कृत के भी उन्हें पढ़ सकते हैं। लेकिन संस्कृत केवल पढ़ने के लिए ही आवश्यक नहीं है बल्कि संस्कृत हमारी प्राचीन भाषा है। यह हमारी संस्कृति है इसीलिए इसे सम्मान देने के लिए हमें यह भाषा आनी चाहिए।

क्या संस्कृत सीखना आसान है?

आसान तो कुछ भी नहीं होता हालांकि हर चीज संभव होता है। बहुत से लोगों को अंग्रेजी नहीं आती है लेकिन जिसकी इच्छा होती है वह बेहतरीन इंग्लिश बोलना सीख जाता है उसी प्रकार जिसको संस्कृति सीखने की इच्छा है वह संस्कृत भी बहुत अच्छे से सीख सकता है। बस जरूरी है सीखने के प्रति समर्पण भाव रखना।

कौन से पेशे में संस्कृत भाषा की जरूरत होती है?

संस्कृत भाषा पढकर भी अन्य भाषा की तरह ही बेहतरीन करियर बना सकते हैं उदाहरण के लिए अधिक कोई बहुत बड़ा पंडित बनना चाहता है, तो उसे संस्कृत भाषा आनी चाहिए बड़े-बड़े मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पुजारी का कार्य करने के लिए संस्कृत भाषा आनी चाहिए। इसके साथ ही कर्मकांड को कराने के अलावा संस्कृत भाषा के अनुवादक के रूप में संस्कृत भाषा की आवश्यकता होती है। अब तो सरकार संस्कृत का अस्तित्व बचाए रखने के लिए स्कूल और कॉलेजों में भी संस्कृत पढ़ाने के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में संस्कृत पढ़ कर स्कूल में संस्कृत के टीचर के रूप में भी काम कर सकते हैं।

क्या संस्कृत भाषा विश्व भाषा बन सकती हैं?

यदि चाहे तो बेशक संस्कृत भाषा विश्व भाषा बन सकती है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार विश्व की 97 परसेंट से भी ज्यादा भाषाओं का निर्माण संस्कृत भाषा से ही किया गया है और इसे दुनिया का सबसे सरलतम भाषा माना जाता है।

निष्कर्ष

इस तरह आज के लेख में हमने आपको विश्व की सबसे प्राचीन और पहली भाषा संस्कृत के महत्व और उससे संबंधित कुछ रोचक तथ्य को बताया। हमें उम्मीद है कि आज के इस लेख में संस्कृत भाषा का महत्व (संस्कृत की उत्पत्ति, लाभ और कैसे सीखे)को समझते हुए आप भी संस्कृत भाषा को सम्मान देंगे और संस्कृत को सीखने का प्रयास करेंगे।

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