प्रत्यय प्रकरण (संस्कृत में प्रत्यय, परिभाषा, भेद और उदाहरण)

प्रत्यय प्रकरण (संस्कृत में प्रत्यय, परिभाषा, भेद और उदाहरण) | Pratyay in Sanskrit

Pratyay in Sanskrit
Pratyay in Sanskrit

प्रत्यय प्रकरण की परिभाषा

जिससे अर्थ का ज्ञान हो जाता है, उसे प्रत्यय कहते हैं। प्रत्यय वे शब्द हैं जो किसी शब्द के अंत में जुड़कर नए शब्द का निर्माण करते हैं।

उदाहरण के लिए

  • या – विद्या, मृगया
  • ति – भक्ति, शक्ति, प्रीति

उपसर्गों की तरह प्रत्यय भी नए शब्दों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उपसर्ग को अव्यय कहा जा सकता है, लेकिन अव्यय के साथ ऐसा नहीं है। उपसर्ग का प्रयोग पहले किया जाता है लेकिन प्रत्यय का प्रयोग बाद में किया जाता है। उपसर्गों के प्रयोग से मूल शब्द का अर्थ बदल जाता है। हालाँकि, प्रत्ययों के प्रयोग से शब्द का अर्थ मूल शब्द के समान ही रहता है।

संस्कृत में प्रत्यय प्रकरण के भेद

कृत् प्रत्यय: ये धातुओं की संज्ञा बनाते हैं। जैसे: पठ् + अनीयर् = पठनीयम्

तध्दित् प्रत्यय: ये नाम शब्दों के विभिन्न रूपों के प्रयोग को बताते हैं। जैसे: पठ् + अनीयर् = पठनीयम्, शिव + अण् = शैवः

स्त्री प्रत्यय: ये नामों के स्त्रीलिंग रूपों को बताते हैं। जैसे: कुमार + ङीप् = कुमारी

यह भी पढ़े

संस्कृत धातु रुपसंस्कृत वर्णमालासमास प्रकरण
संस्कृत में कारक प्रकरणलकारउपसर्ग प्रकरण
संस्कृत विलोम शब्दसंस्कृत में संधिसंस्कृत शब्द रूप
संस्कृत धातु रुपहिंदी से संस्कृत में अनुवाद

इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here