रोटी शायरी

Roti Shayari in Hindi

Roti Shayari in Hindi
Roti Shayari in Hindi

Roti Shayari in Hindi | रोटी शायरी

मैं चाहता हूँ वह मेरे जबीं पे बोसा दे,
मगर जली हुई रोटी
को कौन घी लगाता है….

“भूख से बड़ा मजहब और रोटी
से बड़ा ईश्‍वर कोई हो तो
बता देना मुझे भी धर्म बदलना है…!” –

कतार बहुत लम्बी थी
इस लिए सुबह से रात हो गयी,
ये दो वक़्त की रोटी
आज फिर मेरा अधूरा ख्वाब हो गयी।

जले पे नमक तो
सब लगाने आयेंगे लेकिन,
रोटी पे मक्खन कोई नहीं लगाता है.

मैं कई दफा चूल्हे के
आगे से भूखा उठा हूँ,
ऐ रोटी अपना पता बता मुझे,
जहाँ तू बर्बाद होती है….

“रोटियाॅं उन्ही की
थालियों से कूड़े तक जाती है,
जिन्हें पता नहीं होता भूख क्या होती है…!” –

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फेंक रहे हो तुम खाना
क्योंकि आज रोटी थोड़ी सुखी हैं।
थोड़ी इज्जत से फेंकना
साहब मेरी बेटी कल से भूखी हैं।

मसीहा के नाम पर लोगों को लूटने वालो, कभी किसी
जरूरतमंद इंसान को दो वक्त की रोटी खिला के देख
उसकी भूख मिट जाएगी और तुम्हें दुवाये मिल जाएगी..

रोटी को ढूंढता कूड़े के ढेर पर,
देखा है मैंने एक चाँद
का टुकड़ा ज़मीन पर….

****

“छोटी सी उम्र में बड़े तजुर्बे करवा दिये,
पेट की भूख ने सैकड़ो हुनर सिखा दिये…!” –

Roti Shayari in Hindi

गरीब के गुनाहों का
हिसाब क्या खुदा लेगा,
जिसने गिन-गिन कर
पूरी जिन्दगी रोटी खाई हो।

“भर कर खाने की थाली ,
लोग फ़ेंक दिया करते हैं ,
लेकिन उस गरीब को अपनी चौखट से ,
भूखे पेट भगा दिया करते हैं। …!” –

वो राम की खिचड़ी भी खाता है,
रहीम की खीर भी खाता है।
वो भूखा है जनाब उसे,
कहाँ मजहब समझ आता है।

हराम की रोटी किसी को डरते नहीं और
मेहनत की रोटी कभी रुकती नही..

“हर गरीब की थाली में खाना है,
अरे हाँ !
लगता है यह चुनाव का आना है।…!” –

अमीरी नशा करके पड़ा है
कचरे के ढेर में,
गरीबी रोटी ढूँढने निकला है
कचरे के ढेर में।

ठंडी रोटी आप ही को मिलती है,
जो अपने
घरवालो के लिए गर्म रोटी लेने जाते है..

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“कभी भूख से बहुत गहरा रिश्ता रखता होगा.,
वो जो आजकल अपनी
रोटी बाँट कर खाता है…!” –

इक गरीब दो रोटी में
पूरा जीवन गुजार देता है,
वो ख्वाहिशों को पालता नहीं है…
उन्हें मार देता है।

“चौराहे पर रूक कर
उस पर ये एहसान कर दें,
वो देगा दुआ बहुत बस
उसकी भूख मिटा दे। …!” –

उस मासूम की रोटी की
आखिरी उम्मीद तब टूटी,
जब बड़े साहब ने चढ़ा
कर सीसा कार आगे बढ़ा दी।

ये भगवा चाहे तू हमें भूखे रखले, पर
किसी इंसान को भूखे पेट मत सोने देना..

“रुखी रोटी को भी
बाँट कर खाते हुये देखा मैंने,
सड़क किनारे वो
भिखारी शहंशाह निकला…!” –

रोटी कमाना बड़ी बात नही है,
परिवार के साथ
बैठकर खाना बड़ी बात है।

“दुनिया में ऐसे लोग हैं, जो इतने भूखे हैं
कि भगवान उन्‍हें किसी और रूप में
नहीं दिख सकता सिवाय रोटी के रूप के। …!” –

जब घर में खुश होती है
माँ बहू और बेटियाँ,
तभी घर में मिलती है
सुकून की रोटियाँ।

आजकल रोटी के पीछे भागता हूँ ,
तो याद आता है मुझे ,मेरा बचपन जब
रोटी खिलाने के लिए माँ मेरे पीछे भागती थी

****

“भूख ,महंगाई,गरीबी,
सब इश्क़ मुझ से कर रहे थे ,
एक होती तो निभाता ,
तीनो मुझ पर मर रहे थे।…!” –

माँ के हाथों से बनी रोटी बहुत याद आती है,
जब अपने हाथों से रोटी बनानी पड़ जाती है।

“खुद भूखा रहकर किसी
को खिलाकर तो देखिए,
कुछ यूं इंसानियत का
फ़र्ज निभाकर तो देखिए।…!” –

पूछा माँ से प्यार क्या है !
तू, मैं, तेरे भाई और पिता,
दाल -रोटी और एक छत।

काश कोई रोटी डे भी होता तो लोग भूख
से मरते लोगों को रोटियां बाटी जाती

भूख तो एक रोटी से भी मिट जाती माँ ,
अगर थाली की वो एक
रोटी तेरे हाथ की होती ।

Roti Shayari in Hindi

एक रोटी से मिट जाये
भूख हमारी अगर
थाली की वो एक
रोटी तेरे हाथ की होती तो

“भूखा होता है
अननदाता तो केवल घास खा लेता है
किसान जब मजबूर होता है
तो सल्फास खा लेता है…!” –

तलाश रोटी के सफर
में मुझसे दूर मत होना माँ ,
बताऊंगा भूख को की तू
मेरी माँ से बढ़कर नही ।

कोई परेशान है पैसों के लिए ,
कोई ख्वाहिश के लिए और
आम इंसान परेशान है ,
उधार के प्याज और रोटी के लिए

“एक माँ उबालती रही पत्थर तमाम
रात बच्चे फरेब खा कर चटाई पे सो गए…!” –

पिता को दिनभर चलाती रही ये रोटी ,
माँ को दिन भर थकाती रही ये रोटी ,
बच्चो को दूर शहर नचाती रही ये रोटी ,
ना जाने क्या-क्या कमाल दिखाती रही ये रोटी ।

बोलने पड़ते है कोट में जुट दो
वक्त की रोटी कमाने के लिए
यह सच बोलने पर तो
गालियां ही मिलती है रोटी नहीं..

“शुक्र है रमज़ान आया,
हमारे फ़ाकों पे पर्दा होगा,
कोई पूछे के भूखे हो ??
तो कह देना के रोज़ा है…!” –

मैं कई बार चूल्हे के
आगे से भूखा उठता हूँ,और रोटी
अपना पता मुझे बताती है
जहाँ कुछ भी नही होता है..

“पेट की भूख ने जिंदगी के,
हर एक रंग दिखा दिए,
जो अपना बोझ उठा ना पाये पेट
की भूख ने पत्थर उठवा दिए…!” –

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प्रेम का अर्थ मुझे उस वक्त समझ में आया ,
जब माँ ने आधा रोटी भी बांट कर खाया ।

मजदूर दिन भर मजदूरी करता है
रोटी कमाने के लिए ,
अमीर तो अमीर है ,
उसके पास वक्त नहीं है रोटी खाने के लिए ..

“खुले आसमां के नीचे सोकर भी
अच्छे सपने पा लेते है,
हम गरीब है साहेब थोड़े
सब्जी में भी 4 रोटी खा लेते है।…!” –

तेरी टिफन की वो दो
रोटि कही पे बिकती नही,
माँ मेंहगे ढाबो में
आज भूख मिटती नही।

दो वक्त की रोटी कमाता हूँ ,
दो वक्त भगवान मानता हूँ , इसे ज्यादा
मेरी जरूरत नहीं और और
मुझे काम पर बुलाने की तेरी औकात नही है

“सुला दिया माँ ने भूखे बच्चे को ये कहकर,
परियां आएंगी सपनों में रोटियां लेकर…!” –

जब एक रोटी के चार
टुकड़े हो और खाने वाले पांच ,
तब मुझे भूख नही है ,
ये कहने वाली सिर्फ माँ होती है ।

****

गरीब का रिश्ता ,
रोटी से होता है एक रोटी
भी मिल जाए उसमें
ही सुकून पा लेता है ।

“ज़रूरतों की भूख जब
पेट में शोर मचाती है,
दिल की ख्वाहिशें कुछ
कुछ चुप सी पड़ जाती हैं….!” –

तन जलाकर रोटींया पकाती है माँ ,
नादान बच्चे आचार पर रूठ जाते है ।

मिलती नहीं किसी
गरीब को दो वक्त की रोटी ,
सो जाते है बेचारे
जमीन पर कोई चिन्ता नही होती !!

“फ़ेक रहे तुम खाना क्योंकि,
आज रोटी थोड़ी सूखी है,
थोड़ी इज्ज़त से फेंकना साहेब,
मेरी बेटी कल से भूखी है…!” –

माँ मेरी खातिर तेरा
रोटी पकाना याद आता है ,
अपने हाथों को चुल्हे में
जलाना याद आता है ।

अरे कई दिनों से
किस्मत आई है,
कल से रोटी हमारी है..

Roti Shayari in Hindi

“गरीबी की भी क्या
खूब हँसी उड़ायी जाती है,
एक रोटी देकर 100
तस्वीर खिंचवाई जाती है।…!” –

तुम क्या सिखाओगे मुझे ,
प्यार करने का सलीका ,
मैने माँ के एक हाथ से थप्पड़ ,
दूसरे से रोटी खाई है ।

शजादो को उसने प्यार से तोल दिया,
दो वक्त की रोटी की कीमत उसने दिया

“क्या किस्मत पाई है
रोटीयो ने भी निवाला बनकर,
रहिसो ने आधी फेंक दी,
गरीब ने आधी में जिंदगी गुज़ार दी…!” –

तेरी डिब्बे की वो दो
रोटियां कही बिकती नही ,
माँ मेंहगे होटलो में
आज भी भूख नही मिटती ।

यह हुआ हूँ सबसे, साजिशें ही कर रहा हूँ,
मामी ने कहा था कभी, रोटी ही भगवान है..

“मैं कई चूल्हे की आग से भूखा उठा हूँ,
ऐ रोटी अपना पता बता,
तू जहाँ बर्बाद होती हैं।…!” –

बिकते देखे है यहां जिंदगी अमीरों के हाथों में ,
कही गरीब इंसान के लिए दो वक्त का खाना और
अनाज और कपड़े खरीदना मुश्किल होता जा रहा है ।

माँ की रोटी में ही प्यार होता है ,
वरना पूरा खाना ही बेस्वाद होता है..

“अमीर की छत पे
बैठा कौवा भी मोर लगता है,
गरीब का भूखां बच्चा
भी चोर लगता है…!” –

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कई दिनों से सोच की
कब तेरे हाथ की रोटी मिले
तो कल में जा रहा था,
तब मेने तेरे हाथो की रोटी खाई..

“छुपाता था वो गरीब
अपनी भूख को गुरबत में,
अब वो भी फ़ख़्र से
कहेगा मेरा रोज़ा है….!” –

मसीहा के नाम पर लोगों
को लूटने वालो, कभी किसी ,
जरूरतमंद इंसान को दो
वक्त की रोटी खिला के देख,
उसकी भूख मिट जाएगी
और तुम्हें दुवाये मिल जाएगी।

बिखरियो की बहुत खली उड़ाई जाती है,
एक रोटी देकर उसकी
जम के हसी उड़ाई जाती है…

जिन्दगी बीत जाती है
दो वक्त की रोटी कमाने में,
पर पेट भी ढंग से नही
भरता इस महँगाई के जामने में.

मेरे को बार-बार उल्टी आ रही है,
लगता है, कोई पड़ोस में भूखा सोता है..

“मै गरीब का बच्चा था
इसलिये भूखा रह गया,
पेट भर गया वो कुत्ता
जो अमीर के घर का था…!” –

Roti Shayari in Hindi

तलाश प्यार के सफर में
मुझसे दूर मत होना माँ
बताऊंगा की प्यार को
तू मेरी माँ से बढ़कर नहीं मिस यू माँ

जज्बातों को उसने दौलत से तोल दिया,
जब वो दो वक्त की
रोटी की कीमत बोल दिया।

“अब मैं हर मौसम में
खुद को ढाल लेता हूँ,
छोटू हूँ पर अब मैं
बड़ो का पेट पाल लेता हूँ….!” –

ख्वाहिशों की कतार बड़ी लम्बी है,
दो वक्त की रोटी मिलना आसान नहीं।

जाने क्यों बिल्कुल
कम मुझे अब भूख लगती है,
है जब से सुना की पत्नी रोटी नहीं देती ।

“मेरे हिस्से की रोटी
सीधा मुझे दे दे ऐ खुदा,
तेरे बंदे तो बड़ा
ज़लील करके देते हैं।…!” –

ख्वाहिशो की कतार की
डोर बड़ी लम्बी है, दो वक्त
की रोटी मिलना और
कपड़े पहना बी आसन नही..!!

कुछ इस कदर अब
अपने जीमर जगाएँ,
कि मेहनत करके दो
वक्त की रोटी कमाएँ।

रोटी उसी को मिलती हूँ,
जिसका लिखा है नाम
न्याय की तलाश में
भटकते रहे जय श्री हनुमान..

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“भूख चेहरों पे लिए चाँद से प्यारे बच्चे,
बेचते फिरते हैं गलियों में
ग़ुबारे बच्चे -बेदिल हैदरी…!” –

गरीब की चाहत ,
दो वक्त की रोटी और चैन हो ,
हमारी भी किस्मत में हो ,
और तुम्हारी भी किस्मत में हो ।

दो वक्त रोटी भगवान
सबको देता है, फिर क्यों
बन्दा गरीब के दिल
के साथ अत्याचार करता हूँ |

“चेहरा बता रहा था
के मारा है भूख ने,
सब कह रहे थे
के कुछ खा के मर गया…!” –

क्या ताजा क्या बासी ,
ठंडा हो या गर्म ,
दो वक्त की रोटी मिली ,
खुदा का है करम ।

“वो ही दाना भी देगा,जिसने चोंच दी है,
इस अफ़वाह ने चिड़िया की जान ली है,
इबादत ना हो पायेगी अब हमसे तो
भूखी अँतड़ियों ने ये ज़िद ठान ली है।…!” –

जो भरा हो पेट तो रोटी में भी
चांद नजर आता है और जब पेट
न भरना हो तो चांद भी
रोटी और गुलाब जामुन नजर आता है ।

कतार बड़ी लम्बी थी ,
के सुबह से रात हो गयी ,
ये दो वक्त की रोटी आज फिर मेरा
अधूरा ख्वाब हो गई ।

****

“गरीब नहीं जानता क्या है
मज़हब उसका,
जो बुझाए पेट की
आग वही है रब उसका…!” –

हाथों से उठाकर मीठा वो
कड़वा सुना गये खायी थी
उसकी एक रोटी,
वो मेरा सारा खाना खा गये #

मिसाल बन गई उसकी गरीबी
जमाने के लिए वो डबल रोटी बेचती है ,
दो वक्त की रोटी कमाने के लिए ।

“दरिया दरिया घूमे मांझी पेट की
आग बुझाने पेट की आग में जलने
वाला किस किस को पहचाने –
जमीलुद्दीन आली…!” –

रिश्तों की रोटी अगर
एक ओर से ही सेककी
जाए तो कभी-कभी
कच्ची ही रह जाती है ।

“अजीब सा जादुई नशा होता है
गरीब की कमाई में,
जिसकी रोटी खाकर पथरीले
रास्तों पर भी सुकून की नींद आ जाती है।…!” –

दो वक्त की रोटी कभी दो वक्त के लाले ,
गरीब की तकदीर में
क्या बसा ए मोहब्बत क्या आरजू
ए निवाला ।

Roti Shayari in Hindi

“खाली पेट सोने का दर्द क्या
होता मुझे नही पता,
ना जाने जूठन खा के वो बच्चे कैसे बड़े हो जाते।…!” –

भूखे-नंगो पे सितम दिल भी जाने हम करे
मेहनत मजदूरी रोटी देते न शर्म..
Love Roti

“गरीब भूख से मरे तो
अमीर आहों से मर गए,
इनसे जो बच गए वो
झूठे रिवाजों से मर गए…!” –

बादशाहों के सर चाहे न कोई ताज हो,
दो वक्त की रोटी
को कोई न मोहताज हो !!

“दान करना है तो गरीब को रोटी दान
कर ऐ इन्सान आखिर कब तक
मंदिर मस्जिद को अमीर बनाता रहेगा…!” –

जिन्दगी लगे भरम ,
जिन्दा रहना अहम ,
दो वक्त की रोटी किस्मत
दे करम…

किस्मत की रोटी तो
मिल ही जाती है , पर इज्जत
की रोटी पाने के लिए
कीमत चुकानी पड़ती है

“बीच सड़क इक लाश पड़ी थी
और ये लिक्खा था,
भूक में ज़हरीली रोटी भी
मीठी लगती है – बेकल उत्साही…!” –

मेरे # खुदा ने आज ये
कैसा कमाल कर दिया,
रोटी कमाने निकला
तो सिर पर ताज रख दिया

हर इंसान का
करम ख़ुशी-गम का वहम
अपनों की है
जिंदगी रोटी हो ठंडी या गर्म..!!

“भूख ने निचोड़ कर रख दिया है जिन्हें,
उनके तो हालात ना पूछो तो अच्छा है…!” –

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बादशाहों के सर ,
चाहे न कोई ताज हो ,
दो वक्त की रोटी को
कोई न मोहताज हो ।

मिलती नही सब लोगो को ,
दो वक्त की रोटी ,
सो जाते है जमीं पर ,
कोई चिन्ता नही होती ।

“खड़ा हूं आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए.
सवाल ये है किताबों ने क्या
दिया मुझ को -नज़ीर बाक़री…!” –

दो वक्त रोटी रब सबको देता है ,
फिर क्यों बन्दा
दिल का दर्द सहता है ।

“भूख से बिलखते हुए वो फिर नहीं सोया,
एक और रात भारी पड़ी गरीबी पर…!” –

तन जलाकर रोटियां पकाती है माँ,
नादान बच्चे अचार पर रूठ जाते है

मिल जाये अगर सभी को ,
दो वक्त की रोटी ,
तो फिर मिले कैसे ,
पांच साल की गद्दी ।

*****

“कभी निराशा कभी प्यास है
कभी भूख उपवास,
कुछ सपनें भी फुटपाथों
पे पलते लेकर आस।…!” –

सारे वजन उठा के देख लो ,
दाल, रोटी ही सबसे भारी है।

माँ रोटी को में ठंडी नहीं सेकती, मैं
फुटपाथ पे भी जलते हुए चूल्हे देखे है

अक्षरों के भिगो के थोड़े चावल,
मात्राओं की हरी दाल मिलाता हूँ,
नमक, राई, और घी के शे’रों से,
ग़ज़ल वाली खिचड़ी बनाता हूँ!!

हाथ हो सख़्त-नरम वक़्त दे कभी ज़ख्म
आँखों में हसीं ख्वाब रोटी का निवाला नर्म..

वो मेरा कितना ख़याल रखते हैं.
सामने मेरे बेतुके सवाल रखते हैं,
इतने आँसू पी चुका हूँ अब तक मैं
खाने में बिनौ नमक की दाल रखते हैं।

हर इंसान को पेट
को रोटी बदन पर कपड़े सर पर
छत बहुत अच्छे है
ये सपने मगर सच्चे नही होती..#

वो इश्क़ ही क्या गर जुद़ाई ना मिले ,
आशिक हैं जी
Hostel
की दाल नहीं जो हर रोज मिले ।॥

Roti Shayari in Hindi

अश्कों में छिपे गम
हाय रोना भी सितम पानी
मिटाये कभी भूख
वक़्त पे मिले रोटी कम..!!

तेरे हुस्न की दाल में
पड़ने वाला तड़का हूं में,
तू भूखी लड़की;
जोमैटो वाला लड़का हूं मैं।

ये मत देखो हिंदू कौन है,
मुसलमान कौन है
अपने पडोस में
पाटा लागो भूखा इन्सां कौन है

अपना मिलन है मधुर स्वर्णिम,
देखो ना चलाओ चाल प्रिये!
मैं गेंहू की रोटी हूं
और तुम अरहर की दाल प्रिये !

खुदा की रहमत सभी
पर बरसे दो वक्त की रोटी के लिए
कोई न तरसे, जीत हासिल करनी है
ते काबिलियत बढ़ाओ
किस्मत की रोटी ते
कुत्तों को भी नसीब होती है

बीवी के सामने मेरी दाल नहीं गलती।
इसलिए लीटते वक्त सब्जी ले आता हूँ।

रोटी का आकार गोल नहीं,
बल्कि चोकोर जैसा – होना
चाहिए था क्योंकि रोटी
ही प्रश्न है बहुतो के जीवन का ।

सब्ली बहुत हैं महँगी आजकल,
भाव तुम जेंसे बढ़ गया इसका,
रहने दो मत करो तकलीफ़,
खा लेंगे हम दाल उबाल कर।।

शब्दों में पिरोये कम ज़िंदगी लिखे कलम
किस्मत और वक़्त नंदिता रोटी अहम..

मुद्दा ये नहीं है की दाल महंगी है।
दर्द ये है कि किसी
की गल नहीं रही है ।।

पिता को दिनभर धूप में
चलती रही ये रोटी, माँ को दिन भर काम
करा करा कर थक जाती रही ये रोटी,
बच्चो को माँ से दूर शहर
नचात रही ये रोटी,
ना जाने क्या-क्या कमाल दीकाये रोटी ने ।

बचपन में बहुत उड़ता था मै
पर अब दाल रोटी ने मेरे पैरों में बेड़ियाँ डाल दी हैं।
शायद कोई जिंदा ख़्वाब अपने पूरा होने की तपिश
से इनको पिघला पाएगा।

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घुटन क्या चीज है
ये पूछिये उस बच्चे से जो काम
करता है रोटी के लिए
खिलौनों की दुकान पर..#

मुझे मेरी थाली में दो
रोटी और दाल चाहिए ,
अच्छे दिन के लिए
और कितने साल चाहिए।

इक रोटी की भूख कभी
किसी को सताए ना सताए
तो मेहनत करें,
किसी के सामने हाथ फैलाए ना..!!

इस संसार में सितम चाहे रब से रहम
कुछ वक़्त दे सुकून रोटी दिखाती वहम

बाटी में घी का ,
दाल में नीबू का ,
चूरमे में बूरे का ,
और जीवन में हीरे का ,
बड़ा ही महत्त्व है।

रोटी को धुंडता कूदे के धेर पार, दीखा
है में एक चांद का टुकड़ा जमीन पर..

Roti Shayari in Hindi

वो मिले भी तो भंडारे
में बाल्टी पकड़े हुए ,
अब दिल माँगते या दाल ,
हाय रे मेरे हमसफर।

कोई पडोस मे न भूखा है इसलिये शयद,
मेरे गेलिये से निकाला नहीं विटारा है।

मेरे खुदा ने आज ये
कैसा कमाल कर दिया,
रोटी कमाने निकला
तो सिर पर ताज रख दिया।

गरीब दिन भर भटकता है रोटी कमाने के लिए ,
अमीर तो अमीर है ,
वक्त नही है उसके पास रोटी भी
खाने कि लिए ।

जिंदगी में कभी
ख़ुशी इस कदर ना मिले,
जैसे खैरात किसी
गरीब को रोटी मिले।

अमीरी की चाह कोठी तक,
गरीबी की चाह रोटी तक।

खुशी मिली तो हमें कुछ यूं मिली ,
जैसे चंद लम्हात के लिए हो जिन्दगी मिली ,
सुबह से शाम तक सैकड़ो पिज्जा पहुंचाता है ,
तब जाकर परिवार को वो रोटी खिलाता है ।

ग़रीब भूख मिटाने को रोटी लेकर भाग गया,
बड़े दिनों बाद लगता है पूरा भारत जाग गया।
साहब और नेताओं की चोरी सबको दिखती है ,
लेकिन डर उस वक्त सबकी जुबान सिलती है।

ये रोटी बड़े मेहनत से बनती है,
पहले गेंहूँ की फसल काटी जाती है,
उसे धोया जाता है, सुखाया जाता है,
पीसा जाता है, गूथा जाता है,
बेला जाता है, पकाया जाता,
इसके बाद इसे खाया जाता है।

भूख से बड़ी कोई
मजबूरी नही होती और ,
रोटी से बड़ी कोई
ताकत नही होती।

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ठंडी रोटी आप ही
को मिलती है, जो अपने ,
घरवालो के लिए
गर्म रोटी लेने जाते है।

किस्तम की रोटी तो मिल ही जाती है ,
पर इज्जत की रोटी पाने
के लिए कीमत चुकानी पड़ती है ।

वो करते नही अब
ज़िद खिलौनों की,
क्योंकि समझने लगे है
वो कीमत रोटी की।।

सेंकते रहते हो
अपनी उम्मीदो की रोटी .
मेरी बेचैनियाँ तुम्हे
आग नजर आती है ।

भूख इक एहसास है
जिसे रोटी मिटाती है,
पर मोहब्बत के बिना
ये जिन्दगी अधूरी रह जाती है।

चाय ठंडी रोटी ही
क्यों ना हो बस ,
टाइम पे मिल गई
हम तो उसी में खुश हैं।

खींच लाता है
गांव में बड़ों का प्यार ,
छाछ गुड़ के
साथ गेहूं की रोटी का स्वाद।

सांझ भी मुन्ताजिर है ,
तेरी झलक पाने को ,
ऐ चांद जल्दी आजा ,
साथ रोटी खाने को ।

****

मुझसे ना पूछा कीजिए
ये खुदाओ की बातें ,
बात रोटी की हो तो
हुलिया पहचानता हूँ मै ।

बिकती है बोटी ,
तो मिलती है रोटी ,
दुनिया बड़ी पर ,
इंसानियत है छोटी ।

गरीब भूख मिटाने को रोटी लेकर भाग गया ,
बड़े दिनो बाद लगता है पूरा भारत जाग गया ,
साहब और नेताओ की चोरी सबको दिखती है ,
लेकिन डर उस वक्त सबकी जुबान सिलती है ।

मेहनत की रोटी में ही स्वाद होता है,
वरना पूरा जीवन ही बेस्वाद होता है।

सभी के पेट को रोटी ,
बदन पर कपड़े ,
सर पर छत ,
बहुत अच्छे है ये
सपने मगर सच्चे नही होती ।

भूख से बड़ा ‘ मजहब ’
और रोटी से बड़ा ‘ ईश्वर ‘
कोई हो तो बता देना ,
मुझे भी “ धर्म ” बदलना है ।

ठंडी रोटी अक्सर
उनके ही नसीब में होती है..
जो अपनों के लिए
कमाई करके देर से घर लौटते है ।

चाहे सूखी रोटी ही क्यो न हो ,
अपने श्रम से अर्जित भोजन
से मधुर और कुछ नही होता ।

रूखी रोटी को भी
बांट कर खाते हुए देखा मैने ,
सड़क किनारे वो
भिखारी शहंशाह निकला।

कोई परेशान है कुर्सी के लिए ,
कोई ख्वाहिश के लिए और
एक किसान परेशान है ,
उधार के किश्तो
और रोटी के लिए ।

भगतसिंह , सुखदेव ,
मै इन फिरंगियो की सूखी रोटियों का
मोहताज नही ,
मुझे भूख फकत स्वराज की है ।

Roti Shayari in Hindi

गरीबी की भी बड़े
अदब से हंसी उड़ाई जाती है ,
एक रोटी देकर
100 तस्वीर खिचवाई जाती है ।

गरीब का रिश्ता बस ,
भूख से होता है ,
एक रोटी भी मिल जाए
उसमें भी सूकून होता है ।

दाग जाते नही कभी मां की रोटी से ,
उफ्फा वो कितनी मेहनत करती है ।

जवां हुआ हूँ सबसे ,
सजदे ही कर रहा हूँ ,
दादी ने कहा था कभी,
रोटी ही खुदा है ।

रोटी को हाशिये पर धकेल ,
तवे सत्ताधीश हो गये ,
भूख को जलते रहे वो ,
आग उसकी बुझने तलक ।

कई दिनों से भूखा था ,
मैने रोटी को देखा ,
कल तुम्हारी गली से गुजरा था ,
मैने तुमको देखा ।

कोई अपनो के लिए
मुंह की रोटी भी छीन देता है ,
पर इस दुनिया को क्या कहें ,
जहां कोई रोटी के लिए
अपनो को ही छोड़ देता है ।

मिलती नही रोटी उसे ,
जिसका लिखा है नाम ,
न्याय की तलाश में ,
भटकते रहे श्रीराम ।

रोटी का आकार गोल नही ,
बल्कि प्रश्नचिन्ह जैसा होना चाहिए था ,
क्योंकि रोटी ही प्रशन है
बहुतो के जीवन का ।

हाथों से थमाकर मीठा
वो कड़वा सुना गये ,
खायी थी उसकी एक रोटी,
वो मेरा सारा खाना खा गये ।

धर्म के नाम पर राजनीति की रोटी सेकने वाले
कभी धर्म के नाम पर रोटियां भी बांटतर देखे ,
भूखे को भोजन मिल जाएगा ,
और उन्हे दुआए ।

मौला मेरे हिस्से की
रोटी कम कर दे ,
मगर किसी भूखे
का पेट भर दे ।

क़िस्मत की लक़ीरे नहीं
थीं उसके हाथों में,
माथे पर पसीना,
उसकी रोटी का गवाह था

मोहब्बत से भरता गर पेट तो ये
रोटी की बातें क्यों लिखनी पड़ी हैं।

हाथ में रोटी लिए उसने हँस के पूछा,
“किस धर्म से ताल्लुक रखते हो?”
उस भिखारी ने भी रोके कहा,
“जिस धर्म के नाम से वो रोटी मिल जाये!”

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