औकात शायरी

Aukat Shayari In Hindi

Aukat Shayari In Hindi
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Aukat Shayari In Hindi |औकात शायरी

लोग बातों ही बातों में
हालात पूछ लेते हैं,
कितना कमा लेते हो कहकर,
औकात पूछ लेते हैं।

शाखों से गिर कर टूट जाऊ,
मै वो पत्ता नही
आंधियो से कह दो
कि अपनी औकात मे रहें

“मेरी औकात का तुम
“अंदाजा” लगा सको,
इतनी तो तुम्हारी
“औकात” नहीं”

कामयाबी का जनून होना चाहिए,
फिर मुश्किलों की क्या औकात है

उसे कह दो ज्यादा औकात
औकात न करे मैं अपनी
औकात पे आया तो उसकी
औकात लिख दूँगा

बेवजह ही नहीं होती आंखों से बरसात,
दौलत ने पूछी होगी दिलवालों की औकात।

आदतें बुरी नहीं शौक ऊँचे हैं
वरना किसी ख्वाब की इतनी औकात नहीं कि
हम देखें और पूरा न हो

“औकात देखकर
“जरूरते” भी सिमट जाती है,
जेब में पैसा न हो तो
“भूख” भी मिट जाती है”

औकात देखकर जरूरते भी सिमट जाती है,
जेब में पैसा न हो तो भूख भी मिट जाती है.

जो लोग ऐसा सोचते है
मैं उनसे दूर हो जाऊं वही
साले औकात बताएंगे मुझे अपना
अगर जरा सा मशहूर हो जाऊं

कुछ लोग इस तरह
जीने का सलीका सिखाते है,
औकात में रहूं इसीलिए
औकात दिखाते है।

मिला हूँ ख़ाक में ऊँची मगर औकात रखी है
तुम्हारी बात थी आखिर तुम्हारी बात रखी है
भले ही पेट की खातिर कहीं दिन बेच आया हूँ
तुम्हारी याद की खातिर भी पूरी रात रखी है

“शाखों से गिर कर “टूट”
जाऊ, मै वो पत्ता नही,
आंधियो से कह दो कि
अपनी औकात मे रहें”

अकड़ तोड़नी है, उन मंजिलों की,
जिनको अपनी ऊंचाई पर गरूर है..!!

अगर मुझसे हाथ मिलाना है,
तो मुझे सहना सीख,
वरना अपनी औकात में रहना सीख।

मालूम है मुझे मेरी औक़ात,
हर बार क्यों दिखाते हो,
छोड़ना है तो छोड़ ही जाओ न,
यूँ हर बार क्यों सताते हो।

अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उँगलियाँ
जिनकी हमे छुने की औकात नहीं होती

औकात तो कुत्तों की होती है…..
हमारी तो हैसियत है

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तू हाथ ही लगा के देख
लियो प्रधान फिर देख हम
भी तेरी फ़िल्म ही बना देंगे

वो छोड़ के गए तो
एक सबक सीखा गए,
अबके कोई आये तो
उसे औकात में रखा जाए।

वो मेरी न हुई तो ईसमेँ
हैरत की कोई बात नहीँ
क्योँकि शेर से दिल
लगाये बकरी की ईतनी औकात नही

“औकात तो “कुत्तों” की होती है,
हमारी तो “हैसियत” है”

दौलतसे औकातनापी जाएजहाँ,
क्याइंसान कीकद्र होगीवहाँ।

बेटा तू जो कुत्ते की
तरह भोकता है
तुझे सच मे कुत्ता न बना
दिया तो कहना

****

जो इन्तिकाम लेने उतरूँ मैं,
तो अपनी कलम से
तेरी औकात बता दूं।

वैसे तो पूरी दुनिया हमारी दीवानी है
हाँ भूल गए है कुछ लोग औकात अपनी
वक्त रहते उन्हें उनकी औकात याद दिलानी है

“बुरे वक्त की भी क्या बात होती है,
वो भी सलाह देता है जिसकी कोई
“औकात” नहीं होती है

मेरे‪ साथ रहना है,
तो मुझे ‪सहना सिख,
वरना अपनी औकात में रहना‎सिख…

कुछ सालों को लगता है
उन्होंने अपनी औकात से मेरा मुँह बंद कर
दिया अरे बात बस इतनी
सी है तू मेरे से बात करने
के लायक नही है

औकात तो उनकी मुंह
लगाने की भी ना थी,
हम तो उनसे दिल लगा बैठे थे।।

Aukat Shayari In Hindi

मैं क्यूँ कुछ सोच कर दिल छोटा करूँ
वो उतनी ही कर सकी
वफ़ा जितनी उसकी औकात थी

“नज़रों से “घमण्ड” का पर्दा भी हटाएगा,
वक़्त ही तुझे तेरी “औक़ात” दिखाएगा”

औकात की बात वही करते है,
जिनकी कोई औकात नहीं होती है.

फ्री फायर एक अच्छा गेम है
माना पर उसमे कुछ अच्छी
अपडेट आना बाकी है
सुनो #PUBG सिर्फ नाम
ही काफी है

औकात जो नाप रहे हो
ज़ुबान की धार से,
ज़रा ख़ुद में झाँक
लो ज़मीर के दीदार से।

Attitude तो बच्चे दिखाते है
हम तो लोगो को उनकी
औकात दिखाते है

“अक्सर वही “लोग” उठाते हैं
हम पर उँगलियाँ,
जिनकी हमे “छूने”
की औकात नहीं होती”

औकातका तोवक्त आनेपर पत्ताचलता है…
रातको गिदड़कितना भीचिल्ला ले,
सुबहतो शेरोका हीदबदबा होताहै..

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अगर मैं तुम्हे अच्छा नही
लगता तो भाड़ में जाओ
मुझे घण्टा फर्क नही पड़ता

चाँद तारों पर पहुंचने का
क्यों गुमां करता है तू ए इंसान,
मत भूल कभी के दो मुठ्ठी
रेत से ज्यादा तेरी औकात नहीं।

औकात दिखा देती है
एक दिन मोहब्बत भी
इसलिए खुद से ज्यादा
चाहत किसी की मत रखना

“कुछ लोग इस तरह
“जीने” का सलीका सिखाते है,
औकात में रहूं इसीलिए
“औकात” दिखाते है”

साथ बैठने कीऔकात नहींथी उसकी,
जिसको मैंनेसर पर बिठा रखाथा

****

कोशिशे लाख आजमाई
तुम्हारा साथ निभाने में,
एक पल भी न लगा
तुम्हे औकात दिखाने में।

उसकी औकात का
उसे एहसास जरुरी था
शीशा था, टूटना जरुरी था

“औकात बस “इतनी सी” रखिये की,
सामने वाला “आपकी”
औकात दिखाने से पहले,
खुद की “औकात” देख ले”

Aukat Shayari In Hindi

आइनादिखाता है
रोज़औकातचेहरों की

चलो हकीक़त से
थोड़ी मुलाक़ात करते हैं,
जितनी औकात बस
उतनी ही बात करते हैं।

तेरी तो इतनी भी औकात नहीं
की तुझसे नफरत करूँ
ना जाने कैसे मोहब्बत हो गई

सबकी औकातहै बससफ़ेद चादर
और वो भीखुद सेओढ़ने कीताकत नहोगी

मुझ से मिलने मेरी औकात आई है,
मकान कच्चा है और बरसात आई है।

झूठ इसलिए बिक जाता है क्योंकि
सच को खरीदने की
सबकी औकात नहीं होती

“रात को “गिदड़” कितना भी चिल्ला ले,
सुबह तो “शेरो” का ही दबदबा होताहै”

बुरेवक्त कीभी क्याबात होतीहै,
वोभी सलाहदेता है
जिसक कोईऔकात नहींहोती है.

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मुझे मेरी ही नजरो में गिरा कर चली गई,
वो आईना बन कर आई थी,
मुझे मेरी औकात दिखा कर चली गई।

खूब हौसला बढ़ाया आँधियों ने धुल का
मगर दो बून्द बारिश ने औकात बता दी

“कुछ लोग अपनी
“औक़ात” दिखा देते हैं,
गिराने की फ़िराक़ में बस
“इल्जाम” लगा देते हैं”

एड़ियाउठा करचलने सेकद नहीं
बढ़ता रकीबोंसे कहदो, अपनीऔकात मेरहें

फिर हुआ यूं के घड़ी
खोल के रख दी हमने,
वक्त हर शख़्स की
औकात बताये जा रहा था।

ऐ दिल तू ज़रा कम ही
हसरतें पाला कर
बस तू अपनी औकात के
हिसाब के ख्वाब देखा कर

“वो मेरी न हुई तो इसमें
“हैरत” की कोई बात नहीँ,
क्योँकि “शेर” से दिल
लगाये “बकरी” की ईतनी औकात नही”

इज्ज़तदोगे तोइज्ज़त पाओगे,
औकातदिखाओगे तोबड़ा पछताओगे।

****

मेरे औकात से बड़े मेरे सपने है,
और मेरे ही खिलाफ खड़े
आज मेरे अपने है।

सब की औकात है बस सफ़ेद चादर
और वो भी खुद से ओढ़ने की ताकत न होगी

“मालूम है “मुझे” मेरी औक़ात,
हर बार क्यों “दिखाते” हो,
छोड़ना है तो “छोड़” ही जाओ न,
यूँ हर बार “क्यों” सताते हो”

खूबहौसला बढ़ायाआँधियों नेधुल
कामगरदो बून्दबारिश नेऔकात बतादी

मैं मोहब्बत में ऐसे
अल्फ़ाज़ लिख देता हूँ,
कलम उठा के उस
बेवफा की औकात लिख देता हूं।

अब मैं तुझे अपने शब्दों में जगह दूँ
ऐसी तुझमे कोई बात नहीं
अब मैं तेरे बारे में लिखू
इतनी तेरी औकात नहीं

“आज हमसे वो “पूछ”
रहे है हमारी औकात,
जो हमारी “रहमतों”
के कर्जदार आज भी हैं”

Aukat Shayari In Hindi

औकातनहीं हैं, आँख सेआँख मिलानेकी,
औरबात करतेहैं हमारानाम मिटानेकी।

चीर दूंगा मेरे जख्मी पैरों
से इन लंबे रास्तों को,
वक्त मेरा बताएगा
औकात इन हसीन चेहरों को।

आइना दिखाता है रोज़
औकात चेहरों की

“किसी को “नीचा” दिखाना,
छोटी औकात होने की
सबसे बड़ी पहचान है”

ज्यादा Smart बनने की
कोशिश मतकर क्योंकि,
मेरेबाल भीतेरे औकातसे लंबेहै..!

किसी ने पूछा था मुझसे
कमा कितना लेते हो,
बस जेब या पेट नहीं,
औकात भर का कमा लेता हूं।

वो बार बार औकात की बात करता है
इसे वक़्त के बारे में बता दो कोई

“कुछ लोगों की “वफ़ा” की ज़ात नहीं होती,
रिश्ते तो बना लेते हैं,
बस “निभाने” की औक़ात नहीं होती”

आदतेबुरी नहीं, शौक ऊँचेहैं,
वर्नाकिसी ख्वाबकी इतनी
औकात नही की, हमदेखे औरपुरा नाहो।

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हवाओंसे कहदो किअपनी औकातमें
रहेहम पैरोंसे नहींहौसलो सेउड़ा करतेहै..!!

कहना चाहो तो कह
लो तुम काफ़िर मुझे,
मैंने औकात से बाहर
जाकर प्यार किया है।

कितने कमजर्फ है ये गुब्बारे
चन्द सांसो में फूल जाते है
नीच को जब उरूज मिलता है
अपनी औकात भूल जाते है

“औकात नहीं है “दुश्मनो”
की आँख से आँख मिलाने की,
और साले बात करते है
“घर” से उठाने की”

****

कामनिकल जाएतो औकातदिखते हैलोग,
वरनापाँव पकड़करगिड़गिड़ाते हैलोग.

औकात पे आ जाते हैं,
जब हम औकात की बात करते हैं।

चीज़ों से हो रही है पहचान आदमी की
औकात अब हमारी बाजा़र लिख रहे हैं

औकातकी बातमत करऐ दोस्त,
तेरी बन्दूकसे ज्यादालोग
हमारीआँखों सेडरते हैं।

तेरी अकड़ देख ली मैंने,
क्या ही बड़ी बात है,
कुछ तो छूट मेरी दी है,
वरना तेरी क्या औकात है।

जूते फटे पहन आकाश पे चढ़े थे
सपने हमेशा हमारे औकात से बङे थे

Aukat Shayari In Hindi

आँचक्या लगीदूध उबालखाने लगा,
एकबूँद पानीने उसकीऔकात दिखादी.

जूते फटे पहने आसमां पर पहुंचने चले थे,
सपने हमेशा हमारे औकात से बड़े थे।

मोहब्बत तू मुझे अपनी औकात तो बता
तू ना ही लफ्जों में पूरी होती है न हकीकत में

मुझे क्या डराएगामौत कामंजर,
हमनेतो जन्मही
कातिलोंकी बस्तीमें लिया है।

आँखें भी अक्सर अपनी
औकात भूल जाती है,
खुद है दो पर सपने
हजार लिए चली आती है।

आज हमसे वो पूछ रहे है हमारी औकात
जो हमारी रहमतों के कर्जदार आज भी हैं

मुसीबतोंका यहाँहर कोईमारा है,
परसबसे बड़ाऔकात हमारा है.

गलती मेरी है
तुझे इतनी अहमियत दे दी,
तुझे तो औकात दिखाने
वाला आईना देना चाहिए था।

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मैं चीज़ बिकाऊ नहीं…..
क़ीमत लगा मग़र
मैं अपने ख़रीदार की…
औक़ात तो देखूँ

शाखोंसे गिरकर टूटजाऊ,
मैवो पत्तानहीआंधियो से कह
दो कि अपनी औकात मे रहें

कभी जात कभी समाज
तो कभी औकात ने लुटा,
इश्क़ किसी बदनसीब
गरीब की आबरू हो जैसे।

हर सम्त रौशनी थी मुझे पूछता भी कौन
बुझते हुए च़राग़ की औक़ात कुछ नही

पत्थर-सा दिल, उसमें जज़्बात नहीं
सुनबेवफा! तेरे‘इश्क़’ कीऔक़ात नहीं

****

चीज़ों से पहचान हो रही है आदमी की,
औकात अब हमारी बज़ार रहा है।

नज़रों से घमण्ड का पर्दा भी हटाएगा
वक़्त ही तुझे तेरी औक़ात दिखाएगा

अक्सरवही लोगउठाते हैं
हम परउँगलियाँजिनकी
हमे छुनेकी औकातनहीं होती

किसी का भला कितना ही कर लो,
आखिर में वो अपनी
औकात दिखा देता है।

यूँ तो ठिकाने बहुत थे दुनिया में
पर मैंने रहने के लिए
अपनी ‘औक़ात’ को चुना

रिश्ते संजोने के
लिए एक इंसान झुकता चला गया!
और लोगोंने इसे,
उसकी औकातसमझ लिया!

झूठ इसलिए बिक जाता है,
सच को खरीदने की
सबकी औकात नहीं होती।

चूर हो गयी सारी चमक हथौड़े की चोट से
हीरे की औक़ात ही क्या थी जौहरी के सामने

Aukat Shayari In Hindi

इज्ज़त दोगे तो इज्ज़त पाओगे,
अकड़दिखा ओगे तो मेरा
कुछनहीं उखाड़पाओगे..!!

कितनी भी शिद्दत से निभा लो रिश्तें,
लोग औकात दिखा ही जाते है।

ये शान-ओ-शौकत,
ये रुतबा कहीं और दिखाना
ये चीज़ ‘औक़ात’
अक्सर बदलती रहती है

कागजकी कश्तीलेकर दरियापार करतेहो,
समझाताहूँ तोतुम औकातकी बातकरते हो.

जरा संभल कर,
कहीं तुम्हारी औकात तुम्हे,
और नीचे न गिरा दे।

तेरी औकात से ज्यादा की थी
मोहब्बत तुझसे
अब नफ़रत का आलम है,
सोच तेरा क्या होगा

मेरीऔकात सेज्यादा बेटामेरे नामके
चर्चेहैंऔरतेरी औकातसे
ज्यादातो मेरेसिगरेट केखर्चे हैं

अपनी आँखों से लड़ कर
जो हमने दिन रात देखा था,
ऐसा औकात से बढ़ कर
हम ने इक ख़्वाब देखा था।

वो फरेब के इरादे,
बेफ़िज़ूल की चाहत क्यूँ थी
निभाने की औक़ात न थी,
तो रिश्तों के नाटक क्यूँ थे

औकातकी बातमत करपगली,
हमतो #Autograph
देने केलीए 10-11 आदमी रखतेहै.

कुछ लोगों की वफ़ा की ज़ात नहीं होती
रिश्ते तो बना लेते हैं,
बस निभाने की औक़ात नहीं होती

तेवरतो हमवक्त आनेपे दिखायेंगे,,
शहेर तुमखरीदलो
उसपर हुकुमतहम चलायेंगे

Aukat कि बातमत करए-दोस्त,
तेरीबंदुक सेज्यादा लोग हमारी आंखोसे डरतेहै.

आँखों से कहो औकात में रहे जनाब,
बिना मुझसे पूछे पढ़ लेती है रूह मेरी।

औक़ात तो तेरी धूल जितनी भी न थी
वो हम थे जिसने तुझको पर्वत बना रखा था

तेरी औकात ही क्या है
मेरे इस दिल में बसने की,
हम तो शायरी से
लोगों की रुह में बस जाते हैं।

ये इंसान भी कितने अ
जीब काम करता है
मिट्टी की औक़ात
लेकर दौलत पे गुमान करता है

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