जल पर कविता

Pani Par Kavita in Hindi: नमस्कार दोस्तों, हमारे जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण जल है। यदि पृथ्वी पर जल है तो ही जीवन है। जल के बिना धरती पर जीवन संभव नहीं है, यह सब अच्छी तरह जानते हैं। आज के समय में हो रही पानी की बर्बादी को देखते हुए हम यह अंदाजा लगा सकते हैं कि हमें कितनी भयंकर परिस्थिति से गुजरना पड़ सकता है।

Pani Par Kavita

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जल पर कविता – Pani Par Kavita in Hindi

पानी की महिमा

Best Water Poems in Hindi

पानी की महिमा धरती पर, है जिसने पहचानी।
उससे बढ़कर और नहीं है, इस दुनिया में ज्ञानी।।

जिसमें ताकत उसके आगे, भरते हैं सब पानी ।
पानी उतर गया है जिसका, उसकी खतम कहानी।।

जिसकी मरा आँख का पानी, वह सम्मान न पाता।
पानी उतरा जिस चेहरे का, वह मुर्दा हो जाता।।

झूठे लोगों की बातें पानी पर खिंची लकीरें।
छोड़ अधर में चल देंगे वे, आगे धीरे-धीरे।।

जिसमें पानी मर जाता है, वह चुपचाप रहेगा।
बुरा-भला जो चाहे कह लो, सारी बात सहेगा।।

लगा नहीं जिसमें पानी, उपज न वह दे पाता।
फसल सूख माटी में मिलती, नहीं अन्न से नाता।।

बिन पानी के गाय-बैल, नर नारी प्यासे मरते।
पानी मिल जाने पर सहसा गहरे सागर भरते।।

बिन पानी के धर्म-काज भी, पूरा कभी न होता।
बिन पानी के मोती को, माला में कौन पिरोता।।

इस दुनिया से चल पड़ता है, जब साँसों का मेला।
गंगा-जल मुँह में जाकर के, देता साथ अकेला।

उनसे बचकर रहना जो पानी में आग लगाते।
पानी पीकर सदा कोसते, वे कब खुश रह पाते।।

पानी पीकर जात पूछते हैं केवल अज्ञानी।
चुल्लू भर पानी में डूबें, उनकी दुखद कहानी।।

चिकने घड़े न गीले होते, पानी से घबराते।
बुरा-भला कितना भी कह लो, तनिक न वे शरमाते।।

नैनों के पानी से बढ़कर और न कोई मोती।
बिना प्यार का पानी पाए, धरती धीरज खोती।।

प्यार ,दूध पानी-सा मिलता है जिस भावुक मन में।
उससे बढ़कर सच्चा साथी, और नहीं जीवन में।।

जीवन है बुलबुला मात्र बस, सन्त कबीर बतलाते।
इस दुनिया में सदा निभाओ, प्रेम-नेम के नाते।।

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पानी (जल पर कविता हिंदी में)

आदमी तो आदमी
मैं तो पानी के बारे में भी सोचता था
कि पानी को भारत में बसना सिखाऊँगा।

सोचता था
पानी होगा आसान
पूरब जैसा
पुआल के टोप जैसा
मोम की रोशनी जैसा।

गोधूलि में उस पार तक
मुश्किल से दिखाई देगा
और एक ऐसे देश में भटकायेगा
जिसे अभी नक़्शे में आना है।

ऊँचाई पर जाकर फूल रही लतर
जैसे उठती रही हवा में नामालूम गुंबद तक
यह मिट्टी के घड़े में भरा रहेगा
जब भी मुझे प्यास लगेगी।

शरद में हो जायेगा और भी पतला
साफ़ और धीमा
किनारे पर उगे पेड़ की छाया में।

सोचता था
यह सिर्फ़ शरीर के ही काम नहीं आयेगा
जो रात हमने नाव पर जगकर गुज़ारी
क्या उस रात पानी
सिर्फ़ शरीर तक आकर लौटता रहा?

क्या-क्या बसाया हमने
जब से लिखना शुरू किया?

उज़डते हुए बार-बार
उज़डने के बारे में लिखते हुए
पता नहीं वाणी का
कितना नुक़सान किया।

पानी सिर्फ़ वही नहीं करता
जैसा उससे करने के लिए कहा जाता है
महज़ एक पौधे को सींचते हुए पानी
उसकी ज़रा-सी ज़मीन के भीतर भी
किस तरह जाता है।

क्यात स्त्रियों की आवाज़ों में बच रही हैं
पानी की आवाज़ें
और दूसरी सब आवाज़ें कैसी हैं?

दुखी और टूटे हुए हृदय में
सिर्फ़ पानी की रात है
वहीं है आशा और वहीं है
दुनिया में फिर से लौट आने की अकेली राह।

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पानी की तरह कम तुम (Poem on Jal in Hindi)

Hindi Poem on Water

मैं तुम्हें मेरे लिए पानी की तरह कम होते देख रहा हूँ।

मेरे गेहूँ की जड़ों के लिए तुम्हारा कम पड़ जाना
मेरी चिड़ियों के नहाने के लिए तुम्हारा कम पड़ जाना
मेरे पानी माँगते राहगीर के लिए तुम्हारा ग़ायब हो जाना
मेरे बैल का तुम्हारे पोखर पर आकर सूनी आँखों से इधर-उधर झाँकना
मेरी आटा गूंधती स्त्री के घड़े में तुम्हारा नीचे सरक जाना।

तुम्हारे व्यवहार में मैं यह सब होते देख रहा हूँ।

लगातार कम होते पानी की तरह
मैं तुम्हें मेरे लिए कम होते देख रहा हूँ।

पानी रहित हो रहे इलाकों की तरह
मैं पूछ भी नहीं पा रहा हूँ
क्यों हो रहा है ऐसा?
पानी तुम क्यों कर रहे हो ऐसा?

पानी चला गया तो नदी किसके पास गई कुछ कहने
वैसी नदी की तरह लीन हूँ मैं अपने में।

नदी के बहाव की सूखी रेत में सुदूर तक फैले आक की तरह
अभी भी तुम्हारी याद का हरा बचा हुआ मुझ में।

पानी बहता है (Poem on Water in Hindi)

Short Poem on Water in Hindi

पानी बहता है
चाहे कहीं भी हो पानी
वह बह रहा है।

पत्‍तेे पर रखा बूँद बह रहा है
बादल में भी पानी बह रहा है।

झील-कुआँ का पानी
बहने के सिवा और वहाँ
कर क्‍या रहा होता है!

गिलास में रखा पानी भी
दरअसल बह रहा है।

घूँट में भी पानी
बह कर ही तो पहुँचता है प्‍यास तक।

सूख रहा पानी भी बह रहा है
अपने पानीपन के लिए।

मेरे शब्‍दो! तुम्‍हारे भीतर भी तो
बह रहा है स्‍वर-जल
नहीं तो कहना कैसे होता प्रांजल।

पानी बहता है
तभी तक पानी
पानी रहता है!

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जल ही जीवन है पर कविता (Jal hi Jivan Par Kavita in Hindi)

Jal hi Jeevan Hai Poem in Hindi

जल ही जीवन है
जल से हुआ सृष्टि का उद्भव जल ही प्रलय घन है
जल पीकर जीते सब प्राणी जल ही जीवन है।।

शीत स्पर्शी शुचि सुख सर्वस
गन्ध रहित युत शब्द रूप रस
निराकार जल ठोस गैस द्रव
त्रिगुणात्मक है सत्व रज तमस
सुखद स्पर्श सुस्वाद मधुर ध्वनि दिव्य सुदर्शन है।
जल पीकर जीते सब प्राणी जल ही जीवन है।।

भूतल में जल सागर गहरा
पर्वत पर हिम बनकर ठहरा
बन कर मेघ वायु मण्डल में
घूम घूम कर देता पहरा
पानी बिन सब सून जगत में, यह अनुपम धन है।
जल पीकर जीते सब प्राणी जल ही जीवन है।।

नदी नहर नल झील सरोवर
वापी कूप कुण्ड नद निर्झर
सर्वोत्तम सौन्दर्य प्रकृति का
कल-कल ध्वनि संगीत मनोहर
जल से अन्न पत्र फल पुष्पित सुन्दर उपवन है।
जल पीकर जीते सब प्राणी जल ही जीवन है।।

बादल अमृत-सा जल लाता
अपने घर आँगन बरसाता
करते नहीं संग्रहण उसका
तब बह॰बहकर प्रलय मचाता
त्राहि-त्राहि करता फिरता, कितना मूरख मन है।
जल पीकर जीते सब प्राणी जल ही जीवन है।।

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सदा हमें समझाए नानी

Jal Sanrakshan Par Kavita In Hindi

सदा हमें समझाए नानी,
नहीं व्यर्थ बहाओ पानी।
हुआ समाप्त अगर धरा से,
मिट जायेगी ये ज़िंदगानी।

नहीं उगेगा दाना-दुनका,
हो जायेंगे खेत वीरान।
उपजाऊ जो लगती धरती,
बन जायेगी रेगिस्तान।

हरी-भरी जहाँ होती धरती,
वहीं आते बादल उपकारी।
खूब गरजते, खूब चमकते,
और करते वर्षा भारी।

हरा-भरा रखो इस जग को,
वृक्ष तुम खूब लगाओ।
पानी है अनमोल रत्न,
तुम एक-एक बूँद बचाओ।

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा

जल संरक्षण पर कविता इन हिंदी

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
जिसमें मिला दो लगे उस जैसा।

इस दुनिया में जीनेवाले ऐसे भी हैं जीते
रूखी-सुखी खाते हैं और ठंडा पानी पीते।
तेरे एक ही घूँट में मिलता जन्नत का आराम
पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
भूखे की भूख और प्यास जैसा।

गंगा से जब मिले तो बनता गंगाजल तू पावन
बादल से तू मिले तो रिमझिम बरसे सावन
सावन आया सावन आया रिमझिम बरसे पानी
आग ओढ़कर आग पहनकर, पिघली जाए जवानी
कहीं पे देखो छत टपकती, जीना हुआ हराम
पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
दुनिया बनाने वाले रब जैसा।

वैसे तो हर रंग में तेरा जलवा रंग जमाए
जब तू फिरे उम्मीदों पर तेरा रंग समझ ना आए
कली खिले तो झट आ जाए पतझड़ का पैगाम
पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
सौ साल जीने की उम्मीदों जैसा।

मैं पानी हूँ (Save Water Par Kavita)

Poems on Water Conservation in Hindi

मैं पानी हूँ
आपकी आँखों का पानी
प्यासे की प्यास
बुझाने वाला पानी
रंगहीन, गंधहीन पानी
झील नदी नालों
पोखरों
तालाब और कुँए का पानी
वर्षा का पानी
ओस का पानी
समुन्दर का लहलहाता
इठलाता बलखाता पानी
बर्फ़ का जमा
बादलों का वाष्पित पानी।

नदियों में बहता
तालाब पोखरों में बँधता
बादलों में आसमान छूता
उड़ता बरसता
फिर बहता
मैं रूकता नहीं
मैं चलता रहता हूँ
अपनी मंज़िल की ओर
सारा जहाँ मेरी मंज़िल।

समंदर मेरा अन्तिम पड़ाव
जहाँ पर भी
मैं मारता हिलोरे
और उड़ जाता
बादल बन कर।

मेरे बिना जीवन नहीं
मेरे बिना जग नहीं
मैं ना गिरूँ तो
पड़ जाता सूखा
मैं बरस पड़़ूँ
तो आ जाती बाढ़।

मेरे जीवन चक्र
को मत रोको
मैं अनमोल हूँ
मुझे सहेजो।

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मत करो मुझको बर्बाद (जल संकट कविता)

Jal Sanrakshan Kavita in Hindi

मत करो मुझको बर्बाद, इतना तो तुम रखो याद,
प्यासे ही तुम रह जाओगे, मेरे बिना न जी पाओगे।

कब तक बर्बादी का मेरे, तुम तमाशा देखोगे,
संकट आएगा जब तुम पर, तब मेरे बारे में सोचोगे।

संसार में रहने वालों को, मेरी जरूरत पड़ती है,
मेरी बर्बादी के कारण, मेरी उम्र भी घटती है।

ऐसा न हो इक दिन मैं, इस दुनिया से चला जाऊं,
खत्म हो जाए खेल मेरा, लौट के फिर न वापस आऊं।

पछताओगे-रोओगे तुम, नहीं बनेगी कोई बात,
सोचो-समझो करो फैसला, अब तो ये है तुम्हारे हाथ।

मेरे बिना इस दुनिया में, जीना सबका मुश्किल है,
अपनी नहीं भविष्य की सोचो, भविष्य भी इसमें शामिल है।

मुझे ग्रहण कर सभी जीव, अपनी प्यास बुझाते हैं,
कमी मेरी पड़ गई अगर तो, हर तरफ सूखे पड़ जाते हैं।

सतर्क हो जाओ बात मान लो, मेरी यही कहानी है।
करो फैसला मिलकर आज, मत करो मुझको बर्बाद,
इतना तो तुम रखो याद।

अमृतधारा सा पानी (Save Water Poems in Hindi)

पानी पानी पानी,
अमृतधारा सा पानी
बि‍न पानी सब सूना सूना
हर सुख का रस पानी।

पावस देख पपीहा बोल
दादुर भी टर्राये
मेह आओ ये मोर बुलाये
बादर घि‍र-घि‍र आये
मेघ बजे नाचे बि‍जुरी
और गाये कोयल रानी।

रुत बरखा की प्रीत सुहानी
भेजा पवन झकोरा
द्रुमदल झूमे फैली सुरभि‍
मेघ बजे घनघोरा
गगन समन्दनर ले आया
धरती को देने पानी।

बाँध भरे नदि‍या भी छलकीं
खेत उगाये सोना
बाग बगीचे, हरे भरे
धरती पर हरा बि‍छौना
मन हुलसे पुलकि‍त तन झंकृत
खुशी मि‍ली अनजानी।

उपवन कानन ताल तलैया
थे सूखे दि‍ल धड़कें
जाता सावन ज्योंलही लौटा
सबकी भीगी पलकें
क्या बच्चे क्याै बूढे नाचे
सब पर चढ़ी जवानी।

पानी पानी पानी।

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पानी (Pani Par Kavita)

मुँह धोऊँगा पानी से
मुन्ना बोला नानी से
प्यासे पानी पीते हैं
पानी से हम जीते हैं
जाने कब से पानी है
कितनी बड़ी कहानी है
कहीं ओस है, बर्फ कहीं
पानी ही क्या भाप नहीं
सब रूपों में पानी है
कहती ऐसा नानी है
नदियाँ बहतीं कल-कल-कल
झरने गाते झल-छल-छल
तालों में लहराता जल
कुओं में आता निर्मल
धरती पर जीवन लाया
खेत सींचकर लहराया
करता है यह कितने काम
कभी नहीं करता आराम
पर जब बाढ़ें लाता है
भारी आफत ढाता है।

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