पर्यावरण पर कविताएं

Poem on Environment in Hindi: नमस्कार दोस्तों, हमारे जीवन में पर्यावरण कितना महत्व है। इसका हम शब्दों में व्याख्यान नहीं कर सकते हैं। पर्यावरण के कारण ही हम अपने जीवन को चला रहे हैं। आज हम यहां पर पर्यावरण पर कविताएं शेयर कर रहे हैं। उम्मीद करते हैं आपको यह वातावरण पर हिन्दी कविताएँ पसंद आयेंगी।

Poem on Environment in Hindi

पर्यावरण पर कविताएं | Poem on Environment in Hindi

एक जैसा हर समय वातावरण होता नहीं

एक जैसा हर समय वातावरण होता नहीं
अर्चना के योग्य हर इक आचरण होता नहीं

जूझना कठिनाइयों की बाढ़ से अनिवार्य है
मात्र चिन्तन से सफलता का वरण होता नहीं

मिल सका किसको भला नवनीत मन्थन के बिना
दुख बिना चुपचाप सुख का अवतरण होता नहीं

लाख हो शृंगार नारी के लिए सव व्यर्थ है
पास में यदि शीलता का आभरण होता नहीं

जल रहा हो जब वियोगी मन विरह की आग में
यत्न कितना भी करो पर विस्मरण होता नहीं

व्याकरण के बंधनों में ग्रंथ सारे ही बंधे
प्यार कितना भी करो पर विस्मरण होता नहीं

मैं अकेला ही चलूंगा लक्ष्य के पथ पर अभय
अब किन्हीं क़दमों का मुझसे अनुसरण होता नहीं

नित नए परिधान बदले सभ्यता चाहे कोई
क्या महत्ता लाज का यदि आवरण होता नहीं

तन भले ही मिल सकें पर मन नहीं मिलते कभी
जब तलक है प्रेम रस का संचरण होता नहीं

जो न आँसू की कहानी सुन द्रवित होता ‘मधुप’
वह निरा पाषाण है, अन्तः करण होता नहीं

-महावीर प्रसाद ‘मधुप’

पर्यावरण पर छोटी कविता

पर्यावरण को बचाना हमारा ध्येय हो
सबके पास इसके लिए समय हो
पर्यावरण अगर नहीं रहेगा सुरक्षित
हो जायेगा सबकुछ दूषित
भले ही आप पेड़ लगाये एक
पूरी तरह करे उसकी देखरेख
सौर उर्जा का करे सब उपयोग
कम करे ताप विद्युत् का उपभोग
रासायनिक खाद का कम करे छिडकाव
भूमि को प्रदूषित होने से बचाव
कचड़ो का समुचित रीती से करो निपटारा
फैक्ट्रियो में जब सौर यन्त्र लगाई जाएँगी
वायु प्रदुषण में अपने आप कमी आएँगी
तब जाकर पर्यावरण प्रदुषण में कमी आएँगी
आधी बीमारिया अपने आप चली जाएगी

poem on environment in hindi
Image: poem on environment in hindi

कसम खाते है (Paryavaran Par Kavita)

मिलकर आज ये कसम खाते हैं,
पर्यावरण को स्वच्छ बनाते है।
मिलकर आज ये कसम खाते हैं,
प्रदूषण को दूर भगाते हैं।
मानव तूने अपनी जरूरतों के लिए,
वातावरण को कितना दूषित किया है,
फिर भी पर्यावरण ने तुझे सब कुछ दिया है।
प्राण दायनी तत्वों जल, वायु और मिट्टी से,
हमारा जीवन का उद्दार किया है।
फिर भी मानव पेड़ काटता है,
अपने जीवन को संकट में डालता है।
पर्यावरण न होता तो जीवन मे रंग कहाँ से होते,
पर्यावरण को स्वच्छ बनाये हमारा प्रथम कर्त्तव्य है।
आओ मिलकर कसम खात हैं,
पर्यावरण को स्वच्छ बनाते हैं।
आज मिलकर कसम खाते है,
प्रदूषण को दूर भगाते हैं।

Paryavaran Par Kavita
Image: Paryavaran Par Kavita

धरती स्वर्ग दिखाई दे (Poem on Environment in Hindi)

करके ऐसा काम दिखा दो, जिस पर गर्व दिखाई दे।
इतनी खुशियाँ बाँटो सबको, हर दिन पर्व दिखाई दे।
हरे वृक्ष जो काट रहे हैं, उन्हें खूब धिक्कारो,
खुद भी पेड़ लगाओ इतने, धरती स्वर्ग दिखाई दे।।
करके ऐसा काम दिखा दो…

कोई मानव शिक्षा से भी, वंचित नहीं दिखाई दे।
सरिताओं में कूड़ा-करकट, संचित नहीं दिखाई दे।
वृक्ष रोपकर पर्यावरण का, संरक्षण ऐसा करना,
दुष्ट प्रदूषण का भय भू पर, किंचित नहीं दिखाई दे।।
करके ऐसा काम दिखा दो…

हरे वृक्ष से वायु-प्रदूषण का, संहार दिखाई दे।
हरियाली और प्राणवायु का, बस अम्बार दिखाई दे।
जंगल के जीवों के रक्षक, बनकर तो दिखला दो,
जिससे सुखमय प्यारा-प्यारा, ये संसार दिखाई दे।।
करके ऐसा काम दिखा दो…

वसुन्धरा पर स्वास्थ्य-शक्ति का, बस आधार दिखाई दे।
जड़ी-बूटियों औषधियों की, बस भरमार दिखाई दे।
जागो बच्चो, जागो मानव, यत्न करो कोई ऐसा,
कोई प्राणी इस धरती पर, ना बीमार दिखाई दे।।
करके ऐसा काम दिखा दो…

संतोष कुमार सिंह

पर्यावरण बचाओ पर कविता

पर्यावरण बचाओ, आज यही समय की मांग यही है।
पर्यावरण बचाओ, ध्वनि, मिट्टी, जल, वायु आदि सब।
पर्यावरण बचाओ ………..
जीव जगत के मित्र सभी ये, जीवन हमें देते सारे.
इनसे अपना नाता जोड़ो, इनको मित्र बनाओ।
पर्यावरण बचाओ ………..
हरियाली की महिमा समझो, वृक्षों को पहचानो।
ये मानव के जीवन दाता, इनको अपना मानो।
एक वृक्ष यदि कट जाये तो, दस वृक्ष लगाओ।
पर्यावरण बचाओ ………..

पर्यावरण कविता हिंदी में (Paryavaran Par Kavita)

बहुत लुभाता है गर्मी में,
अगर कहीं हो बड़ का पेड़।
निकट बुलाता पास बिठाता
ठंडी छाया वाला पेड़।
तापमान धरती का बढ़ता
ऊंचा-ऊंचा, दिन-दिन ऊंचा
झुलस रहा गर्मी से आंगन
गांव-मोहल्ला कूंचा-कूंचा।
गरमी मधुमक्खी का छत्ता
जैसे दिया किसी ने छेड़।
आओ पेड़ लगाएं जिससे
धरती पर फैले हरियाली।
तापमान कम करने को है
एक यही ताले की ताली
ठंडा होगा जब घर-आंगन
तभी बचेंगे मोर-बटेर
तापमान जो बहुत बढ़ा तो
जीना हो जाएगा भारी
धरती होगी जगह न अच्‍छी
पग-पग पर होगी बीमारी
रखें संभाले इस धरती को
अभी समय है अभी न देर।

व्यूह (Prakriti Par Kavita)

शब्दों का व्यूह
बहुत उलझा हुआ है
मौसम कई रंगों में लिपटा है
स्मृतियों पर धुँध घिरी है
परदे सरकते हैं
जीवन के
दृष्टियाँ काले परदों से
टकराकर लौटती हैं

आसपास का वातावरण अब गीला है
नन्ही बूँदें मन के कोनों में बसी हैं
काले परदे के आगे
कुछ नहीं सूझता
आँखें भर आई हैं
वातावरण का गीलापन
एक फ़रेब है

-शैलप्रिया

हमें पर्यावरण बचाना हैं (Paryavaran Bachao Par Kavita)

खतरे में हैं वन्य जीव सब। मिलकर इन्हें बचाना हैं।
आओं हमें पर्यावरण बचाना हैं।
पेड़ न काटे बल्कि पेड़ लगाना हैं।
वन हैं बहुत कीमती इन्हें बचाना हैं।
वन देते हैं हमें ओक्सिजन इन में न आग लगाओ।
आओं हमें पर्यावरण बचाना हैं।

जंगल अपने आप उगेंगे, पेड़ फल फूल बढ़ेंगे।
कोयल कूके मैना गाये, हरियाली फैलाओ।
आओं हमें पर्यावरण बचाना हैं।
पेड़ों पर पशु पक्षी रहते।
पत्ते घास हैं खाते चरते।
घर न इनके कभी उजाड़ो, कभी न इन्हें सताओ।
आओं हमें पर्यावरण बचाना हैं।

Paryavaran Bachao Par Kavita
Image: Paryavaran Bachao Par Kavita

प्रकृति संरक्षण पर कविता (Poem on Paryavaran)

प्रकृति ने अच्छा दृश्य रचा
इसका उपभोग करें मानव।
प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करके
हम क्यों बन रहे हैं दानव।
ऊँचे वृक्ष घने जंगल ये
सब हैं प्रकृति के वरदान।
इसे नष्ट करने के लिए
तत्पर खड़ा है क्यों इंसान।
इस धरती ने सोना उगला
उगलें हैं हीरों के खान
इसे नष्ट करने के लिए
तत्पर खड़ा है क्यों इंसान।
धरती हमारी माता है
हमें कहते हैं वेद पुराण
इसे नष्ट करने के लिए
तत्पर खड़ा है क्यों इंसान।
हमने अपने कूकर्मों से
हरियाली को कर डाला शमशान
इसे नष्ट करने के लिए
तत्पर खड़ा है क्यों इंसान।

पर्यावरण पर हिंदी कविता (Hindi Poems on Environment)

न नहर पाटो, न तालाब पाटो,
बस जीवन के खातिर न वृक्ष काटो।

ताल तलैया जल भर लेते,
प्यासों की प्यास, स्वयं हर लेते।

सुधा सम नीर अमित बांटो,
न नहर पाटो, न तालाब पाटो,
स्नान करते राम रहीम रमेश,
रजनी भी गोते लगाये।

क्षय करे जो भी इन्हें, तुम उन सब को डाटो,
न नहर पाटो, न तालाब पाटो,
नहर का पानी बड़ी दूर तक जाये,
गेहूं चना और धान उगाये।

फिर गेंहू से सरसों अलग छाटों,
न नहर पाटो, न तालाब पाटो,
फल और फूल वृक्ष हमें देते,
औषधियों से रोग हर लेते।

लाख कुल मुदित हँसे,
न नहर पाटो, न तालाब पाटो,
स्वच्छ हवा हम इनसे पाते,
जीवन जीने योग्य बनाते
दूर होवे प्रदूषण जो करे आटो,
न नहर पाटो, न तालाब पाटो।

पर्यावरण पर कविता (Environment Poem in Hindi)

भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
हम सबको ही मिल करके
सम्भव हर यत्न करके
बीडा़ यही उठाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
होगा जब ये भारत स्वच्छ
सब जन होंगे तभी स्वस्थ
सबको यही समझाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
गंगा माँ के जल को भी
यमुना माँ के जल को भी
मोती सा फिर चमकाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
आओ मिल कर करें संकल्प
होना मन में कोइ विकल्प
गन्दगी को दूर भगाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
देश को विकसित करने का
जग में उन्नति बढ़ाने का
नई नीति सदा बनाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
हम सबको ही मिल करके
हर बुराई को दूर करके
आतंकवाद को भी मिटाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
मानवता को दिल में रखके
धर्म का सदा आचरण करके
देश से कलह मिटाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
सत्य अहिंसा न्याय को लाकर
सबके दिल में प्यार जगाकर
स्वर्ग को धरा पर लाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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