राष्ट्रीय पक्षी मोर पर कविताएं

कई बार छोटी कक्षाओं में राष्ट्रीय पक्षी मोर पर कविता (Poem on Peacock in Hindi) बोलने को कहा जाता है। इसलिए आज हम इस पोस्ट में बहुत ही सुंदर मोर पर कविताएं प्रस्तुत कर रहे हैं। यह सभी कविताएं इन्टरनेट पर उपलब्ध विभिन्न स्त्रोतों से ली गई है, जो आपको बहुत पसंद आयेंगी।

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राष्ट्रीय पक्षी मोर पर कविताएं – Poem on Peacock in Hindi

मोर पर कविता -1

Poem on Peacock in Hindi

आओ आओ बच्चो की टोली
सुनो मोर की कुंह कुंह बोली।।

आसमान में बादल छाए
मोर थई थई नाच दिखाए
अपने पंखों को फैलाकर
पैसो की बरसात दिखाए
उसके सर पे कलगी ऐसी
बादशाह के ताज जैसे
मोर छमाछम नाच दिखाए
भारत का राष्ट्रीय पक्षी कहलाये
हम सब को है नाज इसपे
मिल कर हम सब इसे बचाएं
वन उपवन कभी न काटे
इस के रहने की जगह बचाएं।।

मोर पर कविता – 2

Mor Par Kavita Hindi

खोलूँ जब पंख अपने
और बरसात में नाचूँ ज़ोर ज़ोर
हूँ मैं बड़ा चित्‍त चोर
हाँ मैं हूँ मोर
पक्षियों का मैं कहलाता हूँ राजा
मुरलीधर के मुकुट को मैं ही सजाता
हाँ मैं वही मोर हूँ।

मयूर (मोर पर कविता) – 3

Mor Par Kavita

इंद्रधनुषी रंगों से सुसज्जित,
वर्षा ऋतु को शोभायमान करता।
भारत वर्ष का गौरव,
सबके हृदय को प्रफुल्लित करता।

विहगों में सर्वोत्तम और विशिष्ट,
पवित्र जीवन बनाता इसको उत्कृष्ट।
श्याम चित्त की शोभा की गरिमा,
कर देता है इसको देवनिर्दिष्ट।

नंदन और उपवन को,
गुंजायमान कर, करता आकर्षित।
नृतकप्रिय, मनमोहक है,
सबके मन को करता हर्षित।

मयूर, मोर नाम है इसके,
नीलकंठ नाम से भी है प्रचलित।
कृष्ण प्रिय ये कहलाता,
अपनी कला से उपवन को करता सुशोभित।

-निधि अग्रवाल

पक्षियों का राजा मोर (मोर पर कविता) – 4

Peacock Par Kavita

पक्षियों का राजा हूँ
बारिश का दीवाना हूँ
काले -काले बदल देख
भावविभोर हो जाता हूँ
बताओ मैं कौन हूँ?
मैं नर्तकप्रिय मयूर हूँ
मयूर हूँ ………. मयूर हूँ …….मयूर हूँ!!

सिर पर ताज लिए रहता हूँ
मेहप्रिय कहलाता हूँ
रंग बिरंगे बूटों से सजी
मेघ देख पंखों को फैलता हूँ
बताओ मैं कौन हूँ?
मैं नर्तकप्रिय मयूर हूँ
मयूर हूँ ……….मयूर हूँ ……..मयूर हूँ!!

शांत जगह मुझे है भाता
झुण्ड में रहना चाहता हूँ
मनमोहक छवि है मेरी
मैं चित्त चोर कहलाता हूँ
बताओ मैं कौन हूँ?
मैं नर्तकप्रिय मयूर हूँ
मयूर हूँ ……….मयूर हूँ ……..मयूर हूँ!!

मेरा पंख अतिशय शुभ है
विद्यादायनी कहलाता है
जिस घर रहता शुभ करता
कान्हा का मुकुट सजता है
बताओ मैं कौन हूँ?
मैं नर्तकप्रिय मयूर हूँ
मयूर हूँ ……….मयूर हूँ ……..मयूर हूँ!!

मोर पर कविता – 5

National Bird Peacock Poem in Hindi

मैं हूं मोर पक्षियों का राजा
सबसे सुंदर में कहलाता हूं
दूर देखकर बादलों को
मैं नाचता जाता हूं।

बच्चे देख खुश हो जाते हैं
में भाग ना जाऊं चुप हो जाते हैं
चुपके चुपके पास आ जाते हैं
खुशी में झूम जाते हैं।

देखकर मैं डर जाता हूं
दूर गगन में भाग जाता हूं
लगता हूं मैं बहुत ही प्यारा
रंग-बिरंगे पँखो वाला
देखकर मैं अपनी सुंदरता को
खुद भी शर्मा जाता हूं।

मैं हूं मोर पक्षियों का राजा
सबसे सुंदर मैं कहलाता
दूर देखकर बादलों को
मैं नाचता जाता हूं।

नानी तेरी मोरनी (मोर पर कविता) – 6

Best Poem on Peacock in Hindi

नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए
बाकी जो बचा था काले चोर ले गए।

खाके पीके मोटे होके, चोर बैठे रेल में
चोरों वाला डिब्बा कट कर, पहुँचा सीधे जेल में
नानी तेरी मोरनी को…

उन चोरों की खूब खबर ली, मोटे थानेदार ने
मोरों को भी खूब नचाया, जंगल की सरकार ने
नानी तेरी मोरनी को…

अच्छी नानी प्यारी नानी, रूसा-रूसी छोड़ दे
जल्दी से एक पैसा दे दे, तू कंजूसी छोड़ दे
नानी तेरी मोरनी को…

मोर पर कविता – 7

Mayur Poem in Hindi

कितनी सुंदर कितनी प्यारी,
सबसे मनहर सबसे न्यारी।
काले बादल छाते हैं जब,
झूम-झूम कर आते हो तब।।

जब है बादल घिर घिर आते,
पंख फैला तुम नाच दिखाते।
बरखा का संदेशा लाते,
सबके मन को हर्षाते।।

कैसा रूप है तुमने पाया,
रंग मनोहर है छिटकाया।
सिर पर सुंदर ताज सजाया,
तभी तो पक्षी-राज कहलाया।।

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