तितली रानी पर कविताएँ

Poem on Butterfly in Hindi: हमारी पृथ्वी पर कई प्रकार के जीव-जंतु है, जो प्रकृति को और भी ज्यादा खुबसूरत बनाते हैं। छोटे से बड़े जीव-जन्तु प्रकृति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इन सबसे से ही पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाया है। इन जीवों में एक नाम आता है “तितली” जिसे तितली रानी से भी पुकारा जाता है।

Titli Udi Poem in Hindi

रंगबिरंगे और कोमल पंख लिए जब तितली उड़ती है तो वातावरण और भी मनमोहक हो जाता है। आज हम इस पोस्ट में आपके लिए तितली पर हिन्दी कविताएँ लेकर आये हैं। हम उम्मीद करते हैं कि आपको यह हिंदी कविताएँ (Hindi Poems) पसन्द आयेंगी।

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तितली रानी पर कविताएँ – Poem on Butterfly in Hindi

तितली पर कविता इन हिंदी (Titli Rani Poem in Hindi) -1

चंचल नैनों वाली तितली
चमचम तारों जैसी छाई।

काश हम भी तितली होते,
हमारे भी रंग-बिरंगे पंख होते।

हम भी आसमान पर छा जाते,
हम भी फूलों पर मंडराते।
तितली आई, तितली आई,
रंग-बिरंगी ति‍तली आई।

तितली पर कविता हिंदी में (Poem of Butterfly in Hindi) – 2

अब क्यों आई तितली रानी।
जब वर्षा ले आई पानी।।
गर्मी भर तुम कहाँ छिपी थी।
लेकर अपने पंखे धानी।।

गर्मी को पड़ती मुँह खानी।
देख तुम्हारे पंखे धानी।।
इतनी बात समझ न पाई।
बनती हो तुम बड़ी सयानी।।

तुम भी करती हो मनमानी।
पर अब न करना नादानी।।
गर्मी की परवाह न करना।
तुम्हें पिलाऊँ जी भर पानी।।

तितली रानी पर प्रसिद्ध कविता (Butterfly Poems in Hindi) – 3

रंग रंग के पंखोवाली
तितली हमें लुभाती है
फूल फूल से मधु संचय कर
पल पल उड़ती जाती हैं
अपने छोटे छोटे पंखों से वह
मृदु संगीत सुनाती है
मुझे न पकड़ो, फूल न तोड़ो
हम सबकों बतलाती है।

Poem of Butterfly in Hindi

नटखट तितली (Famous Poem on Butterfly in Hindi) – 4

कभी बसंती, कभी नारंगी,
रंग-रंग में आती हो।
कभी दमकती, कभी चमकती,
कभी इंद्रधनुष सी हो जाती हो।
कली-कली पर भौरों के संग घूम-घूमकर,
फूलों पर मंडराती हो।
कितनी सुन्दर, कितनी कोमल,
सोचकर खुद ही इतराती हो।
कभी पास आकर मेरे,
सतरंगी कर मेरे मन को,
झट दूर कहीं आसमाँ में उड़ जाती हो।

-Nidhi Agarwal

Famous Poem on Butterfly in Hindi

तानाशाह और तितली (Titli Poem in Hindi) – 5

न जाने वह कौनसा भय था
जिससे घबराकर वह बेहद खूबसूरत तितली
तालाब के पानी में गिर पड़ी
भीगे पंखों से उसने उड़ने की कोशिश की
लेकिन उसकी हल्की कोमल काया
पानी पर बस हल्की छपाक-छपाक में ही उलझ गयी।

किनारे पर की गंदगी में अनेक जीव थे
जो उसे खा सकते थे
लेकिन नन्ही तितली की चीख उनके कानों तक नहीं पहुँची
तितली ने ईश्वर से प्रार्थना की
ईश्वर ने भविष्य के तानाशाह की आँखों को
तितली की कारूणिक स्थिति देखने को विवश किया
छटपटाती तितली को देखकर उसका मन पसीज गया
उसे तैरना नहीं आता था
फिर भी वह पानी में कूद पड़ा।

बड़े जतन के बाद वह तितली को बचाकर लाया
गुनगुनी धूप में तितली जल्द ही सूखकर उड़ने लगी
भविष्य के तानाशाह के कन्धे पर
वह तमगे की तरह बैठी और बाग़ीचे की तरफ उड़ चली।

भविष्य के तानाशाह को तितली बहुत पंसद आई
अगले दिन से उसने सफाचट चेहरे पर
तितली जैसी सुंदर मूंछें उगानी शुरू कर दीं।

उस तितली के उसने बहुत से चित्र बनाये
उसकी भिनभिनाहट की उसने
कुछ सिम्फनियों से तुलना की
जिस दिन तानाशाह की ताजपोशी हुई
तितलियाँ बहुत घबरायीं
अचानक वे एक दूसरे राष्ट्र में जा घुसीं।

तानाशाह ने तितलियों की तलाश में सेना दौड़ा दी
सैनिकों ने तलाशी के लिए
रास्ते भर के फूल
अपने टोपियों और संगीनों में टाँग लिये
लेकिन तितलियाँ उन्हें नहीं मिलीं।

तानाशाह ने इस विफलता से घबराकर
तितलियों की छवियाँ तलाश की
जिन सुंदर पुस्तकों में तितलियाँ
और उनके सपने हो सकते थे
वे सब उसने जलवा डालीं
जहाँ कहीं भी तितलियों जैसी
खूबसूरत ख़्वाबजदा दुनिया हो सकती थी
वे सब नष्ट करवा डालीं।

अपने आखि़री वक़्त में तानाशाह
पानी में डूबी तितली की तरह चीखा
लेकिन उसे बचाने कोई नहीं आया
जिस बंकर में तानाशाह ने मृत्यु का वरण किया
उसके बाहर उसी तितली का पहरा था
जिसे तानाशाह ने बचाया था।

-प्रेमचन्द गांधी

तितली पर सर्वश्रेष्ठ कविता (Butterfly Kavita in Hindi) – 6

तितली एक देवाली पर
वहीं सुबचनी जाली पर
पकड़ै के मनसूबा में
छलै बिछुतिया टेबा में
तितली के सुन्दर छै आँख
होकरा से सुन्दर छै पाँख
कलेॅ-कलेॅ हौ ठीक गेलै
तितली के नजदीक गेलै
टिकटिकिया खूंखार बड़ी
झपटै लेॅ तैय्यार खड़ी
मतर पकड़ के पहिनें तितली
उड़ी गेलै बेकहिने तितली
खीझी होकरो चाली पर
बैठलै उड़ी केॅ डाली पर।।

-दिनेश बाबा

तितली रानी (Poem on Butterfly in Hindi) – 7

ओ री तितली रानी! पास तो आ जरा,
क्यों? मुझसे तुम डरती हो,
मेरे बाँगो में तुम,
छुप-छुप के उड़ती रहती हो।

ओ री प्यारी! तितली रानी,
जो तुम मेरे पास आ जाओ,
तेरे सतरंगी पंखों को,
मैं प्यार से सहलाऊ।

करूँ कुछ बातें तुझसे मैं,
अपने मन को बहलाऊ,
तेरी रंग-बिरंगी दुनिया से,
मैं भी थोड़ा मिल आऊ।

मेरी प्यारी तितली रानी,
क्यो! पास नही तुम आती,
चुपके से ही बस,
मेरे बाँगो में तुम मंडराती।

-निधि अग्रवाल

तितली पर कविता (Titli Par Kavita) – 8

रंग बिरंगी चंचल तितली
सबके मन को हरती।
फूल फूल पर उड़ती रहती
जीवन में रंग भरती।।

जाने किस मस्ती में डूबी
फिरती है इठलाती।
आखिर किसे खोजती रहती
हरदम दौड़ लगाती।।

पीछे पीछे दौड़ लगाता
हर बच्चा मतवाला।
तितली है या जादूगरनी
सब पर जादू डाला।।

काश, पंख होते अपने
तितली सी मस्ती करते।
हम भी औरों के जीवन में
खुशियों के रंग भरते।।

-त्रिलोक सिंह ठकुरेला

Poem on Butterfly in Hindi – 9

रंग बिरंगी प्यारी तितली
सबके मन को भाती तितली।
इस बगिया से उस बगिया में
उड़कर धूम मचाती तितली।।

कभी फूल का रस पीती तितली
कभी दूर उड़ जाती तितली।
कभी बैठ ऊंची डाली पर
अपने पंख नचाती तितली।।

रामू जीकेश गीता सीता
सबका मन भूलाती तितली।
पर जैसे ही हाथ बढ़ाते
झट से वह उड़ जाती तितली।।

बच्चों तितली रानी उड़ कर
देती है तुम को यह संदेश।
तोड़ बेड़िया शंख बजाओ
जिससे जागे भारत देश।।

Poem on Butterfly in Hindi – 10

न जाने वह कौनसा भय था
जिससे घबराकर वह बेहद खूबसूरत तितली।
तालाब के पानी में गिर पड़ी
भीगे पंखों से उसने उड़ने की कोशिश की
लेकिन उसकी हल्की कोमल काया।।

पानी पर बस हल्की छपाक-छपाक में ही उलझ गयी
किनारे पर की गंदगी में अनेक जीव थे।
जो उसे खा सकते थे
लेकिन नन्ही तितली की चीख उनके कानों तक नहीं पहुँची।।

तितली ने ईश्वर से प्रार्थना की
ईश्वर ने भविष्य के तानाशाह की आँखों को।
तितली की कारूणिक स्थिति देखने को विवश किया
छटपटाती तितली को देखकर उसका मन पसीज गया।।

उसे तैरना नहीं आता था
फिर भी वह पानी में कूद पड़ा।
बड़े जतन के बाद वह तितली को बचाकर लाया
गुनगुनी धूप में तितली जल्द ही सूखकर उड़ने लगी।।

भविष्य के तानाशाह के कन्धे पर
वह तमगे की तरह बैठी और बाग़ीचे की तरफ उड़ चल ।
भविष्य के तानाशाह को तितली बहुत पंसद आई
अगले दिन से उसने सफाचट चेहरे पर।।

तितली जैसी सुंदर मूंछें उगानी शुरू कर दीं
उस तितली के उसने बहुत से चित्र बनाये।
उसकी भिनभिनाहट की उसने
कुछ सिम्फनियों से तुलना की।।

जिस दिन तानाशाह की ताजपोशी हुई
तितलियाँ बहुत घबरायीं।
अचानक वे एक दूसरे राष्ट्र में जा घुसीं
तानाशाह ने तितलियों की तलाश में सेना दौड़ा दी।।

सैनिकों ने तलाशी के लिए
रास्ते भर के फूल।
अपने टोपियों और संगीनों में टाँग लिये
लेकिन तितलियाँ उन्हें नहीं मिलीं।।

तानाशाह ने इस विफलता से घबराकर
तितलियों की छवियाँ तलाश की।
जिन सुंदर पुस्तकों में तितलियाँ
और उनके सपने हो सकते थे।।

वे सब उसने जलवा डालीं
जहाँ कहीं भी तितलियों जैसी।
खूबसूरत ख़्वाबजदा दुनिया हो सकती थी
वे सब नष्ट करवा डालीं।।

अपने आखि़री वक़्त में तानाशाह।
पानी में डूबी तितली की तरह चीखा
लेकिन उसे बचाने कोई नहीं आया।।

जिस बंकर में तानाशाह ने मृत्यु का वरण किया।
उसके बाहर उसी तितली का पहरा था
जिसे तानाशाह ने बचाया था।।

Poem on Butterfly in Hindi – 11

नीली, पीली और चटकीली
पंखों की प्रिय पँखड़ियाँ खोल।
प्रिय तितली! फूल-सी ही फूली
तुम किस सुख में हो रही डोल।।

चाँदी-सा फैला है प्रकाश,
चंचल अंचल-सा मलयानिल।
है दमक रही दोपहरी में
गिरि-घाटी सौ रंगों में खिल।।

तुम मधु की कुसुमित अपसरी-सी
उड़-उड़ फूलों को बरसाती।।
शत इन्द्र चाप रच-रच प्रतिपल
किस मधुर गीत-लय में जाती।।

तुमने यह कुसुम-विहग लिवास
क्या अपने सुख से स्वयं बुना।
छाया-प्रकाश से या जग के
रेशमी परों का रंग चुना।।

क्या बाहर से आया, रंगिणि
उर का यह आतप, यह हुलास।
या फूलों से ली अनिल-कुसुम
तुमने मन के मधु की मिठास।।

चाँदी का चमकीला आतप
हिम-परिमल चंचल मलयानिल।
है दमक रही गिरि की घाटी
शत रत्न-छाय रंगों में खिल।।

इस सुख का स्रोत कहाँ
जो करता निज सौन्दर्य-सृजन।
’वह स्वर्ग छिपा उर के भीतर’
क्या कहती यही, सुमन-चेतन।।

-सुमित्रानंदन पंत

Poem on Butterfly in Hindi – 12

तितली रानी तितली रानी
कितनी प्यारी कितनी सयानी
रंग बिरंगे पंख सजीले
लाल गुलाबी नीले पीले
फूल फूल पर जाती हो
गुनगुन गुनगुन गाती हो
मीठा मीठा रस पीकर उठ जाती हो
अपने कोमल पंख दिखाती
सबकों उनसे सहलाती
तितली रानी तितली रानी
कितनी सुंदर तितली रानी
इस बगिया में आना रानी
तितली रानी तितली रानी।।

मैं तितली हूँ (Poem on Butterfly in Hindi) – 13

मैं उड़ी इधर, मैं उड़ी उधर,
मैं तितली हूँ, उड़ती दिन-भर।

हर फूल मुझे रंगीन लगा
हर डाली मुझको प्यारी है,
जब भी मैं यहाँ-वहाँ उड़ती
तब संग-संग हँसती क्यारी है।
मैं उड़ी कल्पना के नभ में–
अपने सतरंगे पंखों पर।

मैं यहाँ गयी, मैं वहाँ गयी
लेकर पराग घर आयी हूँ,
मैं सबको अच्छी लगती हूँ
मैं सबके मन को भायी हूँ।
मैं सुन्दर सपने देख रही–
इन पंखुड़ियों के बिस्तर पर।

-सूर्यकुमार पांडेय

प्यारी तितली (Poem on Butterfly in Hindi) – 14

सुंदर पंखों वाली तितली,
रंग रंगीली प्यारी तितली।
पंखों को तू है फड़काती,
फूल-फूल पर है मड़राती।
फूलों को तू बहुत चाहती,
फूल बिना प्यासी रह जाती।
फूलों से तू रस है भरती,
और ना जाने क्या-क्या करती?
कठिन परिश्रम तू है करती,
मानव से तू बहुत है डरती।

-सर्वेश कुमार मारुत

तितली से (Poem on Butterfly in Hindi) – 15

मेह बरसने वाला है
मेरी खिड़की में आ जा तितली।

बाहर जब पर होंगे गीले,
धुल जाएँगे रंग सजीले,
झड़ जाएगा फूल, न तुझको
बचा सकेगा छोटी तितली,
खिड़की में तू आ जा तितली!

नन्हे तुझे पकड़ पाएगा,
डिब्बी में रख ले जाएगा,
फिर किताब में चिपकाएगा
मर जाएगी तब तू तितली,
खिड़की में तू छिप जा तितली।

-महादेवी वर्मा

तितली (Poem on Butterfly in Hindi) – 16

तितली
परदों वाले घर में रहती थी
हालांकि
कभी.कभार ही निकल पाती थी
घर से बाहर

और जब घर से बाहर निकलती थी देखते ही बनती थी
उसकी बाहें मचलने लगती थीं पंखों की तरह
हवा से बातें करने का हुनर
उमग उठता था भीतर उसके
सब देखते रह जाते थे उसे

वह किसी को तब नज़र भर देखती थी
जब कोई पुकारता था उसे
मन नही मन
ऐ! तितली!!

-राग तेलंग

तितली उंगलियों वाले बच्चे-दो (Butterfly Poem) – 17

देस के उत्तर में,
उत्तर के पूरब में
मिर्ज़ापुर ज़िले के
अनेक छोटे गाँवों मे
हर सुबह
दो लाख नन्हें अब्दुल
सूरज के साथ-साथ उठ जाते हैं।
और
गूँजता रहता है दिन भर
दोपहर
की धूप में
उन हथकरघों पर
राग देस
देस राग
इसी तरह
सूरज के साथ-साथ
साँझ ढलते ही
अंधी दीवारों के
अंधियारे कोनों में
छिप जाते हैं
दो लाख कबिरे सूरज
सात बजे से सात बजे तक
कुल्लू उस्ताद
जो ख़ुद कालीन बुनता था
बच्चों पर निगरानी रखता है
आँख में घिरते अँधेपन से बेबस
जब कभी
नन्हा अब्दुल
काग़ज़ पर बना डिज़ाईन
कालीन पर उतारते हुए
ग़लत गाँठ बुनता है
काना कल्लू
उसे बाँस की छड़ी से धुनता है।

बारह घण्टॉं की
इस उनींदी यात्रा में
अब्दुल रोटी खा सकता है
कालीन की राजकुमारी का
गीत गा सकता है
लघुशंका जा सकता है
पीठ भी खुजला सकता है।

कल सुबह कालीनों की नई खेप
विदेश जाएगी
इसलिये, आज शाम ढले भी
नन्हा अब्दुल
हर तैयार कालीन पर
एक-एक पर्चा टाँक रहा है
जिस पर साफ सुन्दर अक्षरों में छपा है:
केवल बालिगों के श्रम से निर्मित।

-अवतार एनगिल

Poem on Butterfly in Hindi – 18

तितली रानी इतने सुंदर
पंख कहा से लाइ हो
क्या तुम कोई शहजादी हो,
परी लोक से आई हो
फूल तुम्हे भी अच्छे लगते
फूल हमें भी भाते है
वों तुमकों कैसे लगते है
जो फूल तोड़ ले जाते है।

Hindi Poem on Butterfly for Class 3 – 19

तितली रानी बड़ी सयानी
फूल फूल पर जाती है
फूल फूल से रंग चुराकर
अपनें पंख सजाती है
जब उसे जाओ पकड़ने
झट से वों उड़ जाती है।।

Hindi Poem on Butterfly for Class 3

Hindi Poem on Butterfly for Class 3 – 20

मै अपने घर से निकली,
तभी एक पीली तितली।
पीछे से आई उड़कर,
बैठ गई मेरे सिर पर।
तितली रानी बहुत भली,
मैं क्या कोई फूल-कली।

-निरंकार देव सेवक

Butterfly Poems in Hindi For Kids – 21

तितली रानी उड़ी
पर उड़ ना सकी।
बस में चढ़ी
सीट ना मिली।।

ड्राइवर बोला
आजा मेरे पास।
तितली बोली
चल हट बदमास।।

Short Poem on Butterfly in Hindi – 22

तितली के बच्चे चार
घर से निकले पंख पसार
पूरब से पश्चिम को उड़ते
उत्तर से दक्षिण को जाते
फूलों के रस चूस चूस कर
घूम लिया संसार सारा।।

Short Poem on Butterfly in Hindi – 23

हरी डाल पर लगी हुई थी,
नन्ही सुंदर एक कली
तितली उससे आकर बोली
तुम लगती हो बड़ी भली।।

अब जागो तुम आँखे खोलो
और हमारे संग खेलों
फैले सुंदर महक तुम्हारी
महके सारी गली गली।।

कली छिटककर खिली रंगीली
तुरंत सुनकर खेल की बात
साथ हवा के लगी भागने
तितली उसे छूने चली।।

Titli Udi Poem in Hindi

Titli udi poem in hindi lyrics

तितली उडी उड़ ना सकी,
बस में चड़ी, सिट ना मिली,
सिट ना मिली रोने लगी,
कंडक्टर बोला आजा मेरे पास,
तितली बोली चल हट बदमाश।

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