बसंत ऋतु पर कविता

Basant Ritu Par Kavita: मानव जीवन में जिस प्रकार यौवन का आगमन होता है, ठीक उसी तरह ही बसंत ऋतु का भी हमारी प्रकृति में यौवन है। बसंत ऋतु को सभी ऋतुओं का राजा भी कहा जाता है। सर्दियों का प्रस्थान, दिन का दोगुना होना, सुहानी धूप का अधिक होना हमेशा ही सबको आकर्षित करता रहा है।

बसंत ऋतु काव्य प्रेमियों की हमेशा से ही प्रिय रही है। इस ऋतु के आगमन पर प्रकृति में पुराने पतों की जगह नये पते ले लेते हैं और पूरे वातावरण में सिर्फ रंग बिरंगे फूल ही नजर आने लगते हैं। सभी और लहराती फसलें सबको अपनी ओर लुभाने लगती है।

Basant Ritu Par Kavita

आज हम यहां पर बसंत ऋतु पर कविताएँ शेयर कर रहे हैं। इन हिंदी कविताओं में वसंत ऋतु का बहुत अच्छे से वर्णन किया गया है। आपको यह वसंत ऋतु पर कविता इन हिंदी कैसी लगी, हमें कमेंट बॉक्स में बताना ना भूलें।

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बसंत ऋतु पर कविता – Basant Ritu Par Kavita

बसंत ऋतु है आयी

Poem On Basant Ritu in Hindi

देखो बसंत ऋतु है आयी।
अपने साथ खेतों में हरियाली लायी।।

किसानों के मन में हैं खुशियाँ छाई।
घर-घर में हैं हरियाली छाई।।

हरियाली बसंत ऋतु में आती है।
गर्मी में हरियाली चली जाती है।।

हरे रंग का उजाला हमें दे जाती है।
यही चक्र चलता रहता है।।

नहीं किसी को नुकसान होता है।
देखो बसंत ऋतु है आयी।।

आई बसंत

हर जुबा पे है छाई ये कहानी।
आई बसंत की ये ऋतू मस्तानी।।

दिल को छू जाये मस्त झोका पवन का।
मीठी धूप में निखर जाए रंग बदन का।।

गाये बुजुर्गो की टोली जुबानी।
आई बसंत की ये ऋतू मस्तानी।।

झूमें पंछी कोयल गाये।
सूरज की किरणे हँसती जमी नहलाये।।

लागे दोनों पहर की समां रूहानी।
आई बसंत की ये ऋतू मस्तानी।।

टिमटिमायें ख़ुशी से रातों में तारे।
पिली फसलों को नहलाये दूधिया उजाले।।

गाते जाए सब डगर पुरानी।
आई बसंत की ये ऋतू मस्तानी।।

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आ गया बसंत

Basant Ritu Par Kavita Hindi Mein

आ गया बसंत है, छा गया बसंत है
खेल रही गौरैया सरसों की बाल से
मधुमाती गन्ध उठी अमवा की डाल से
अमृतरस घोल रही झुरमुट से बोल रही
बोल रही कोयलिया

आ गया बसंत है, छा गया बसंत है
नया-नया रंग लिए आ गया मधुमास है
आंखों से दूर है जो वह दिल के पास है
फिर से जमुना तट पर कुंज में पनघट पर
खेल रहा छलिया

आ गया बसंत है छा गया बसंत है
मस्ती का रंग भरा मौज भरा मौसम है
फूलों की दुनिया है गीतों का आलम है
आंखों में प्यार भरे स्नेहिल उदगार लिए
राधा की मचल रही पायलिया
आ गया बसन्त है छा गया बसंन्त है

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वसंत ऋतु पर छोटी कविता

Rainy Season Short Poem in Hindi

पानी आया… पानी आया…
गरज रहे बादल घनघोर
ठमक-ठमक कर नाचे मोर
पी-पी रटने लगा पपीहा
झन-झन-झन झींगुर का शोर
दूर कहीं मेंढक टर्राया
पानी आया… पानी आया…
रिमझिम-रिमझिम बूंदें आईं
खुशियों की सौगातें लाईं
पेड़ों के पत्तों ने भरभर
झूम-झूमकर तालियां बजाईं
गर्मी का हो गया सफाया
पानी आया… पानी आया…
भीग रहे कुछ छाता ताने
रानू-मोनू लगे नहाने
छप-छप-छप-छप करते फिरते
सपने जैसे हुए सयाने
बच्चों का मन है हर्षाया

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बसंत पंचमी पर कविता

Poem on Basant Panchami in Hindi

मन में हरियाली सी आई,
फूलों ने जब गंध उड़ाई।
भागी ठंडी देर सवेर,
अब ऋतू बसंत है आई।।

कोयल गाती कुहू कुहू,
भंवरे करते हैं गुंजार।
रंग बिरंगी रंगों वाली,
तितलियों की मौज बहार।।

बाग़ में है चिड़ियों का शोर,
नाच रहा जंगल में मोर।
नाचे गायें जितना पर,
दिल मांगे ‘Once More’।।

होंठों पर मुस्कान सजाकर,
मस्ती में रस प्रेम का घोले।
‘दीप’ बसंत सीखाता हमको,
न किसी से कड़वा बोलें।।

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वसंत पर कविता

मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।
आगे-आगे नाचती – गाती बयार चली
दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगी गली-गली
पाहुन ज्यों आये हों गाँव में शहर के।
पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाये
आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाये
बांकीचितवन उठा नदी, ठिठकी, घूँघट सरके।
बूढ़े़ पीपल ने आगे बढ़ कर जुहार की
‘बरस बाद सुधि लीन्ही’
बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की
हरसाया ताल लाया पानी परात भर के।
क्षितिज अटारी गदरायी दामिनि दमकी
‘क्षमा करो गाँठ खुल गयी अब भरम की’
बाँध टूटा झर-झर मिलन अश्रु ढरके
मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।

आया बसंत

आया वसंत आया वसंत छाई जग में शोभा अनंत।
सरसों खेतों में उठी फूल बौरें आमों में उठीं झूल
बेलों में फूले नये फूल पल में पतझड़ का हुआ अंत
आया वसंत आया वसंत।
लेकर सुगंध बह रहा पवन हरियाली छाई है बन बन,
सुंदर लगता है घर आँगन है आज
मधुर सब दिग दिगंत आया वसंत आया वसंत।
भौरे गाते हैं नया गान, कोकिला छेड़ती कुहू तान हैं
सब जीवों के सुखी प्राण,
इस सुख का हो अब नही अंत घर-घर में छाये नित वसंत।

Basant Ritu Par Kavita Hindi Mein

बारिश जब आती है
ढेरो खुशिया लाती है
प्यासी धरती की प्यास बुझाती है
धुलो का उड़ना बंद कर जाती है
मिटटी की भीनी सुगंध फैलाती है
बारिश जब आती है
ढेरो खुशिया लाती है
भीषण गर्मी से बचाती है
शीतलता हमें दे जाती है
मुसलाधार प्रहारों से पतझड़ को भागाती है
बहारो का मौसम लाती है
बारिश जब आती है
ढेरो खुशिया लाती है
चारो ओर हरियाली फैलाती है
नदियों का पानी बढाती है
तालाबो को भर जाती है
बारिश जब आती है
ढेरो खुशिया लाती है
बारिश के चलते ही खेती हो पाती है
किसानो के होठो पे मुस्कान ये लाती है
रिमझिम फुहारों से सुखा मिटाती है
बारिश जब आती है
ढेरो खुशिया लाती है
मोरो को नचाती है
पहाड़ो में फूल खिलाती है
बीजो से नए पौधे उगाती है
बारिश जब आती है
ढेरो खुशिया लाती है

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Basant Panchami Poem in Hindi

Basant Panchami Par Kavita

धरा पे छाई है हरियाली
खिल गई हर इक डाली डाली
नव पल्लव नव कोपल फुटती
मानो कुदरत भी है हँस दी
छाई हरियाली उपवन मे
और छाई मस्ती भी पवन मे
उडते पक्षी नीलगगन मे
नई उमंग छाई हर मन मे
लाल गुलाबी पीले फूल
खिले शीतल नदिया के कूल
हँस दी है नन्ही सी कलियाँ
भर गई है बच्चो से गलियाँ
देखो नभ मे उडते पतंग
भरते नीलगगन मे रंग
देखो यह बसन्त मस्तानी
आ गई है ऋतुओ की रानी

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Varsha Ritu Par Kavita

Hindi Poem on Vasant

अलौकिक आनंद अनोखी छटा।
अब बसंत ऋतु आई है।
कलिया मुस्काती हंस-हंस गाती।
पुरवा पंख डोलाई है।
महक उड़ी है चहके चिड़िया।
भंवरे मतवाले मंडरा रहे हैं।
सोलह सिंगार से क्यारी सजी है।
रस पीने को आ रहे हैं।
लगता है इस चमन बाग में।
फिर से चांदी उग आई है।।
अलौकिक आनंद अनोखी छटा।
अब बसंत ऋतु आई है।
कलिया मुस्काती हंस-हंस गाती।
पुरवा पंख डोलाई है।

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