सुबह पर बेहतरीन कविताएं

नमस्कार दोस्तों, यहां पर हमने सुबह पर बेहतरीन कविता (Good Morning Poem in Hindi) का संग्रह किया है। यह सुबह की कविता आप अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिवार वालों को सुबह के समय में भेजकर उनको एक नए दिन की शुरुआत करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि आपको यह गुड मोर्निंग पोएम हिंदी पसंद आयेंगी।

Good Morning Poem in Hindi

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सुप्रभात हिंदी कविताएं – Good Morning Poem in Hindi

सुबह का सूरज

सुबह की चाय कविता (Good Morning Love Poems in Hindi)

सुबह का सूरज
कितना प्यारा, कितना सुंदर
रंग-बिरंगी किरणें उसकी
रोम-रोम में बस जाती हैं
खुशबू सी महका जाती हैं

सुबह का सूरज
लेकर आता आस नई
बाहर-भीतर, रौशन-रौशन
कर जाता है तन-मन सारा

ये जीवन जो तुम्हें मिला है
इसको यूँ ही मत जाने दो
सूरज सा इसको चमका दो
फूलों सा इसको महका दो
ये ही तुमसे कहता है
जब आता है सुबह का सूरज

सुबह का सूरज
कितना प्यारा, कितना सुंदर

-मुकेश मानस

सुबह पर कविता

सुप्रभात पर कविता (Hindi Poems on Good Morning)

रुपहले ओस की मोतियों में,
झलकती है आसमान की लाली,
मधुर चूड़ियों की खनखनाहट भरी
स्वप्नों के बोझ से लदी रात अब जा रही है
डाल पर बैठी बुलबुल जोर से हुंकारा भारती है
‘ऐSS देखो!’
देती दिलासा वह क्रोड़ में दुबके खग शिशुओं को
‘लो सुबह, अब आ रही है!’
या कि स्वीकारती शुभ प्रभात को
‘आओ! स्वागत लाल सूर्य तुम्हारा स्वागत!’
वह गा रही है हेरती न जाने किसे टेरती
पुकारती समस्त विजन को
दुलारती हवाओं के संग
शांत झरोके रूक-रूक कर सहलाते हैं
चांदी सी चमकीली झील के साए को
एक पथिक छोड़ते हुए पुरानी लीक को
मुड़कर देखता है क्या पीछे सवेरा आ रहा है?
कैसी भी गर्म उमस भरी थी शाम
फिर कितनी ठंढ़ी बोछारों में भीगी रात
विदा!
पर विदा लेगी वह अंतिम प्रहार में
प्रभात के आने पर क्यों कर थमेगी वह
हमारे रोके न रूकेगी

सुबह

आज की सुबह कविता (Subah Kavita in Hindi)

जागती नहीं सुबह सबकी तरह किसी निश्चित समय पर
जगी रहती है बैठी देखती हुई बिताती रात
सुख- दुख के अदभुत नृत्य
आलिंगन और संताप
सुनती हुई मौन के विकल आलाप
फड़फड़ाकर गिरना किसी चिड़िया का स्वप्न से बाहर
सुबक कर सोये किसी बच्चे की डूबती साँस
करती हुई नहीं मगर कोई यत्न उबारने या बचाने का किसी को
विरल निःसंगता में घटित होने देती है सब कुछ
जैसे उन्हें होना है किसी नियति के तहत

नहीं आती सुबह यूँ ही कभी औचक
वह चली रहती है रात से ही
जैसे कोई स्वप्न पिछली नीन्द से

-सविता सिंह

ये सुबह की हवा

गुड मोर्निंग कविता (Good Morning Kavita)

ये सुबह की हवा! ये सुबह की हवा!
हैं सभी रोगों की एक अच्छी दवा।

भोर होते ही घर से निकल जाइए,
दूर तक जा के थोड़ा टहल आइए,
ताजगी अपनी साँसों में भर लाइए,
ये सुबह की हवा! ये सुबह की हवा!

उगते सूरज की रंगोली को देखिए,
इन परिंदों की उस टोली को देखिए,
फूूल-पत्तों की हमजोली को देखिए,
ये सुबह की हवा! ये सुबह की हवा!

ये नजारा है बस थोड़ी ही देर का,
है किसे फिर पता वक्त के फेर का,
मुफ्त ले लीजिए बस मज़ा खेल का,
ये सुबह की हवा! ये सुबह की हवा!

जिंदगी में है सेहत नियामत बड़ी,
इसके आगे न दुनिया की दौलत बड़ी,
कौन जाने कहाँ है मुसीबत खड़ी,
ये सुबह की हवा! ये सुबह की हवा!

-रमेश तैलंग

आज की सुबह

सुप्रभात कविता इन हिंदी (Good Morning Poetry in Hindi)

ताज़ा हवा से बातचीत हो सकी आज
रात की रही रंगत देखी सुबह की सड़कों पर
नदी की उनींदी और
पेड़ों की उमंग देखी आज सुबह
कल की दुनिया चलकर आई आज
वहाँ उत्सव मनाए गए थे
योजनाएँ बनी थीं और थोड़ा-बहुत
अशुभ भी घटा कुछ शहरों में
यह सुबह रद्द करती पुरानी प्रविष्टियाँ
पेश करतीं नया पृष्ठ
और उसके बाद सम्भावनाओं की
अनेक सुबहों के कोरे पन्ने
नई शुरूआत के लिए फैलाए बाँहें
आई है मुस्कुराती हुई
फिर आज की सुबह

-ब्रज श्रीवास्तव

वो सुबह कभी तो आएगी

सुबह की सैर पर कविता (Good Morning Poem in Hindi for Life)

वो सुबह कभी तो आएगी

इन काली सदियों के सर से जब रात का आंचल ढलकेगा
जब दुख के बादल पिघलेंगे जब सुख का सागर झलकेगा
जब अम्बर झूम के नाचेगा जब धरती नगमे गाएगी

वो सुबह कभी तो आएगी

जिस सुबह की ख़ातिर जुग जुग से हम सब मर मर के जीते हैं
जिस सुबह के अमृत की धुन में हम ज़हर के प्याले पीते हैं
इन भूखी प्यासी रूहों पर इक दिन तो करम फ़रमाएगी

वो सुबह कभी तो आएगी

माना कि अभी तेरे मेरे अरमानों की क़ीमत कुछ भी नहीं
मिट्टी का भी है कुछ मोल मगर इन्सानों की क़ीमत कुछ भी नहीं
इन्सानों की इज्जत जब झूठे सिक्कों में न तोली जाएगी

वो सुबह कभी तो आएगी

दौलत के लिए जब औरत की इस्मत को ना बेचा जाएगा
चाहत को ना कुचला जाएगा, इज्जत को न बेचा जाएगा
अपनी काली करतूतों पर जब ये दुनिया शर्माएगी

वो सुबह कभी तो आएगी

बीतेंगे कभी तो दिन आख़िर ये भूख के और बेकारी के
टूटेंगे कभी तो बुत आख़िर दौलत की इजारादारी के
जब एक अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाई जाएगी

वो सुबह कभी तो आएगी

मजबूर बुढ़ापा जब सूनी राहों की धूल न फांकेगा
मासूम लड़कपन जब गंदी गलियों में भीख न मांगेगा
हक़ मांगने वालों को जिस दिन सूली न दिखाई जाएगी

वो सुबह कभी तो आएगी

फ़आक़ों की चिताओ पर जिस दिन इन्सां न जलाए जाएंगे
सीने के दहकते दोज़ख में अरमां न जलाए जाएंगे
ये नरक से भी गंदी दुनिया, जब स्वर्ग बनाई जाएगी

वो सुबह कभी तो आएगी

जिस सुबह की ख़ातिर जुग जुग से हम सब मर मर के जीते हैं
जिस सुबह के अमृत की धुन में हम ज़हर के प्याले पीते हैं
वो सुबह न आए आज मगर, वो सुबह कभी तो आएगी

वो सुबह कभी तो आएगी

-साहिर लुधियानवी

सुबह

सुप्रभात कविता जिन्दगी के लिए (Good Morning Poems in Hindi for Girlfriend)

आँख मलते हुए जागती है सुबह
और फिर रात दिन भागती है सुबह

सूर्य के ताप को जेब में डाल कर
सात घोंडों का रथ हांकती है सुबह

रात सोई नहीं नींद आई नहीं
सारे सपनों का सच जानती है सुबह

बाघ की बतकही जुगनुओं की चमक
मर्म इतना कहाँ आकती है सुबह

आहटें शाम के रात की दस्तकें
गुड़मुड़ी दोपहर लांघती है सुबह

-विजय वाते

सुबह-सुबह

सुप्रभात कविता (Suprabhat Par Kavita)

सुबह-सुबह
तालाब के दो फेरे लगाए

सुबह-सुबह
रात्रि शेष की भीगी दूबों पर
नंगे पाँव चहलकदमी की

सुबह-सुबह
हाथ-पैर ठिठुरे, सुन्न हुए
माघ की कड़ी सर्दी के मारे

सुबह-सुबह
अधसूखी पतइयों का कौड़ा तापा
आम के कच्चे पत्तों का
जलता, कड़ुवा कसैला सौरभ लिया

सुबह-सुबह
गँवई अलाव के निकट
घेरे में बैठने-बतियाने का सुख लूटा

सुबह-सुबह
आंचलिक बोलियों का मिक्स्चर
कानों की इन कटोरियों में भरकर लौटा
सुबह-सुबह

-नागार्जुन

बड़े सवेरे

Good Morning Poem in Hindi for Lover

रुपहले ओस की मोतियों में,
झलकती है आसमान की लाली,
मधुर चूड़ियों की खनखनाहट भरी
स्वप्नों के बोझ से लदी रात अब जा रही है

डाल पर बैठी बुलबुल जोर से हुंकारा भारती है
‘ऐसे देखो!’
देती दिलासा वह क्रोड़ में दुबके खग शिशुओं को

‘लो सुबह, अब आ रही है!’
या कि स्वीकारती शुभ प्रभात को
‘आओ! स्वागत लाल सूर्य तुम्हारा स्वागत!’

वह गा रही है हेरती न जाने किसे टेरती
पुकारती समस्त विजन को

दुलारती हवाओं के संग
शांत झरोके रूक-रूक कर सहलाते हैं
चांदी सी चमकीली झील के साए को
एक पथिक छोड़ते हुए पुरानी लीक को
मुड़कर देखता है क्या पीछे सवेरा आ रहा है?

कैसी भी गर्म उमस भरी थी शाम
फिर कितनी ठंढ़ी बोछारों में भीगी रात

विदा!

पर विदा लेगी वह अंतिम प्रहार में
प्रभात के आने पर क्यों कर थमेगी वह
हमारे रोके न रूकेगी

-इला कुमार

अब कोई प्यार की पहल तो करे

Good Morning Poem for Wife in Hindi

अब कोई प्यार की पहल तो करे
ज़िन्दगी का सवाल हल तो करे

कोई सूरत हो या हो वीरानी
दिल किसी बात पर अमल तो करे

राह आगे की मिल ही जायेगी
उम्र भर की कोई टहल तो करे

शोख़ियाँ, पर वे आइने में कहाँ!
उनकी हरदम करे नक़ल, तो करे

पंखड़ी है गुलाब की बेरंग
छूके होँठों से वह ग़ज़ल तो करे

-गुलाब खंडेलवाल

सुबह आयी

Motivational Good Morning Poem in Hindi

सुबह आयी
तेरे इंतज़ार की खुशबू लेकर
फिर तमाम दिन मुझे तेरा इंतज़ार रहा
शाम आयी
तेरे ना आने की मायूसी लेकर
फिर तमाम रात अंधेरो मे ढूढ़ा है तुझे
और बांधी है उम्मीद अगली सुबह से
मेरी ज़िन्दगी के हसीन पल
तू कहाँ था?
आज आया है
तो मेरी आँखों में चमक ही नहीं
बुझ गया है तेरा इंतज़ार
जला कर खुद को
तुझको पाने को लगाया था खुद को दाँव पर
ऐसा लगता है
तुझ को पाया है खोकर खुद को
मेरी ज़िन्दगी के हसीन पल
तू कहाँ था?
साथ लेकर तुझे
होकर जुदा अपनों से
मैं भटकता हूँ जैसे आज रेगिस्तानों में
इश्क़ के कतरे मुकद्दर में कभी थे ही नहीं
चंद समझोते थे
जो तेरी आहटों से
मोजुदगी से
कैद हो गए ज़रूरतो के मकानों में
मेरी ज़िन्दगी के हसीन पल
तू कहाँ था?
जी मे आता है भगा दू तुझ को
या फिर तुझसे भाग जाऊ कहीं
नहीं है तू हसीन पल जीवन का
तू मेरा वो ही पुराना साथी है
खेलता आया है जो बचपने से साथ मेरे
तेरा नाम दर्द है तू वही तन्हाई है
बस आज इस दुनिया के रंगीन मौसम में
अपनी सूरत बदल कर साथ मेरे
चल रहा है बड़ी कशिश के साथ
शायद खुश है
सुन रहा है मेरी बेचैन आवाज़
के
मेरी ज़िन्दगी के हसीन पल
तू कहाँ था?
कहाँ?

-मनोज अहसास

सुबह की धूप

Good Morning Poems for Friends in Hindi

हम पड़े रहते हैं
नींद की चादर के नीचे
सुविधाओं को तह किए
और बाहर
सुबह की धूप हमारा इंतज़ार करती है

खिड़की-रोशनदानों पर दस्तक देती हुई
सब कुछ जानते-समझते हुए भी
हम बेख़बर रहते हैं
सुबह की इस धूप से
जो हर सुराख से पहुँच रही
अपनी चमकीली किरणों के साथ
अंधकार को भेदती हुई

यह उतरती है
पहाड़ की सबसे ऊँची चोटी पर
फिसलती हुई
घास पर पड़ी ओस की बूँदों में
मेतियों की तरह चमकती है
पेड़ की फुनगियों से झूला झूलती है
नहाती है समुद्र की लहरों में
चिड़ियों की तरह चहचहाती है
स्कूल के बच्चों की तरह
घर से बाहर निकलती है
कितनी नटखट है यह धूप

सुबह-ही-सुबह
हमारी नींद
हमारी दुनिया में हस्तक्षेप करती है
डायरी की तरह खोल देती है
एक पूरा सफ़ेद दिन

इसी तरह जगाती है
हम-जैसे सोये आदमी को
उसे ज़िन्दगी की मुहिम में
शामिल करती है हर रोज़।

-कौशल किशोर

सुबह

Good Morning Poem in Hindi

सूरज की किरणें आती हैं,
सारी कलियाँ खिल जाती हैं,
अंधकार सब खो जाता है,
सब जग सुन्दर हो जाता है।

चिड़ियाँ गाती हैं मिलजुल कर,
बहते हैं उनके मीठे स्वर,
ठंडी-ठंडी हवा सुहानी,
चलती है जैसी मस्तानी।

ये प्रातः की सुख बेला है,
धरती का सुख अलबेला है,
नई ताज़गी नई कहानी,
नया जोश पाते हैं प्राणी।

खो देते हैं आलस सारा,
और काम लगता है प्यारा,
सुबह भली लगती है उनको,
मेहनत प्यारी लगती जिनको।

मेहनत सबसे अच्छा गुण है
आलस बहुत बड़ा दुर्गुण है
अगर सुबह भी अलसा जाए
तो क्या जग सुन्दर हो पाए।

-श्रीप्रसाद

नई सुबह

Good Morning Poem in Hindi

पलकों पर
सजे सुनहरे सपने
पत्तों पर
गिरे चमकीले मोती
चांदनी पर
खिले सफ़ेद फूल
हमें बताते हैं
हमारी भूल

ये सब
बिखर जाते हैं
कुछ पल में
विचार नहीं बदलते
जीवन-भर

जीवन नदी है
कहीं नहीं रूकती
चाँद-सूरज
कभी नहीं थकते
जैसे रूका पानी
असहनीय हो जाता है
वैसे रूके विचार
अमानवीय हो जाते हैं

विचारों को
सपनों की तरह
टूटने दो
मोतियों की तरह
बिखरने दो
फूलों की तरह
झरने दो

तभी हमें
अहसास हो पाएगा
एक नई सुबह का

-किरण मल्होत्रा

सुबह का दृश्य

Good Morning Poem in Hindi

दूर से
चली आ रही
सदियों से
इतराती
ढोती
हर सुबह
सूरज-सा चमकता
पानी भरा
सिर पर धरा
कलसा

नीले आकाश में बादल
लगता है
माँ की गोद में हो
बच्चा

गोरी हैं गंगा
काली जमुना
फिर कौन हो तुम
गेहूँ-सी
दोनों के बीच

सारा दृश्य
झाँकता
अलसाई सुबह में
विलासिनी के
अंगों-सा।

-विपिनकुमार अग्रवाल

नई सुबह के तारे हम

Good Morning Poem in Hindi

हम बागों की हरियाली हैं
चिड़ियों के चहकारे हम!
हम नदियों की कल-कल, छल-छल
नई सुबह के तारे हम!

हममें है फूलों की खुशबू
झरनों का मधुमय संगीत,
हममें रंग भरे तितली के
हम प्रकृति के हैं नवगीत।
हम श्रोता हैं परी कथा के
दुनिया के उजियारे हम!

हम जीवन के मीठे सपने
हँसी-खुशी के बाइस्कोप,
हम जब खुलकर मुस्कातेहैं
दुख हो जाता पल में लोप।
चहकें-महकें मगर न बहकें
सबसे न्यारे, प्यारे हम!
हम बागों की हरियाली हैं,
चिड़ियों के चहकारे हम!

-भगवतीप्रसाद द्विवेदी

Note: यह सभी शुभ सवेरा हिन्दी कविताएँ (Good Morning Poems in Hindi) इंटरनेट परउपलब्ध विभिन्न स्त्रोतों से ली गई है। यदि आपको कोई सवाल है तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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