सुप्रभात मंगल श्लोक हिंदी अर्थ सहित

Good Morning in Sanskrit: सुप्रभात दोस्तों, हमने यहां पर सुप्रभातम् श्लोक (Good Morning Wishes in Sanskrit) शेयर किये है। आप इन सुप्रभातम् संस्कृत श्लोक को अपने परिवारजनों, मित्रों, रिश्तेदारों आदि के साथ शेयर करके अपने दिन की अच्छी शुरुआत कर सकते हैं।

यह Sanskrit Shloka आप में एक नई ऊर्जा का प्रवाह करेंगे, पूरे दिन आपमें सकारात्मक विचारों का आगमन होगा। आपसे नकारात्मकता दूर रहेगी, आप इन श्लोकों को पूरा जरूर पढ़े।

सुप्रभात मंगल श्लोक – Good Morning in Sanskrit

सुप्रभात श्लोक (Good Morning Message in Sanskrit)

सुप्रभातम्

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अलसस्य कुतो विद्या, अविद्यस्य कुतो धनम्।
अधनस्य कुतो मित्रम्‌, अमित्रस्य कुत: सुखम्।।

भावार्थः
आलसी को विद्या कहाँ, अनपढ़/मूर्ख को धन कहाँ, निर्धन को मित्र कहाँ और अमित्र को सुख कहाँ।

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Good Morning Wishes in Sanskrit

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Good Morning Status in Sanskrit

विवेकख्यातिरविप्लवा हानोपायः।

भावार्थः
निरंतर अभ्यास से प्राप्त​ निश्चल और निर्दोष विवेकज्ञान हान (अज्ञानता) का उपाय है।

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अति सर्वनाशहेतुर्ह्यतोऽत्यन्तं विवर्जयेत्।

भावार्थः
अति सर्वनाश का कारण है।
इसलिये अति का सर्वथा परिहार करे।

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Good Morning Message in Sanskrit

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How to Say Good Morning in Sanskrit

न कालमतिवर्तन्ते महान्तः स्वेषु कर्मसु।

भावार्थः
महान लोग अपने कर्तव्यों में देरी नहीं करते हैं।

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सुप्रभात श्लोक (Sanskrit me Good Morning)

शतहस्त समाहर सहस्रहस्त संकिर।

भावार्थः
सौ हाथ से कमाओ और हजार से दान करो।

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सिंहवत्सर्ववेगेन पतन्त्यर्थे किलार्थिनः।।

भावार्थः
जो कार्य संपन्न करना चाहते हैं, वे सिंह की तरह अधिकतम वेग से कार्य पर टूट पड़ते हैं।

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Good Morning Message in Sanskrit

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सुप्रभातम् संस्कृत श्लोक (Suprabhat Sanskrit Shlok)

जीवेषु करुणा चापि मैत्री तेषु विधीयताम्।

भावार्थः
जीवों पर करुणा एवं मैत्री कीजिये।

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स्वस्मै स्वल्पं समाजाय सर्वस्वं।

भावार्थः
अपने लिए थोड़ा और दूसरों के लिए सब कुछ।

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नातिक्रान्तानि शोचेत प्रस्तुतान्यनागतानि चित्यानि।

भावार्थः
बीती बातों पर दुःख न मनाये। वर्तमान की तथा भविष्य की बातों पर ध्यान दें।

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सुप्रभात मंगल श्लोक (Good Morning Sanskrit Shlok)

चन्दनं शीतलं लोके, चन्दनादपि चन्द्रमाः।
चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगतिः।

भावार्थः
संसार में चन्दन को शीतल माना जाता है लेकिन चन्द्रमा चन्दन से भी शीतल होता है। अच्छे मित्रों का साथ चन्द्र और चन्दन दोनों की तुलना में अधिक शीतलता देने वाला होता है।
सुप्रभातम्

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Sanskrit Good Morning Sms

आलसय्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान्‌ रिपुः।
नास्त्युद्यमसमो बन्धु: कृत्वा यं नावसीदति।

भावार्थः
मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही (उनका) सबसे बड़ा शत्रु होता है। परिश्रम
जैसा दूसरा (हमारा) कोई अन्य मित्र नहीं होता।

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कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थिते गौरी प्रभाते करदर्शनम्।।

भावार्थः
हथेली के सबसे आगे के भाग में लक्ष्मी जी, बीच के भाग में सरस्वती जी और मूल बाग में ब्रह्माजी निवास करते हैं, इसलिए सुबह दोनों हथेलियों के दर्शन करना चाहिए।

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Sanskrit Good Morning Image

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Good Morning Sanskrit Quotes

सर्वं परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्।
एतद् विद्यात् समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः।।

भावार्थः
जो सब अन्यों के वश में होता है, वह दुःख है। जो सब अपने वश में होता है, वह सुख है। यही संक्षेप में सुख एवं दुःख का लक्षण है।

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मा कुरु धनजनयौवनगर्वं हरति निमेषात्कालः सर्वम्।
मायामयमिदमखिलं हित्वा ब्रह्मपदं त्वं प्रविश विदित्वा।।

भावार्थः
धन, जन, और यौवन पर घमण्ड मत करो; काल इन्हें पल में छीन लेता है। इस माया को छोड़ कर इस ज्ञान से ब्रह्मपद में प्रवेश करो।

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विवादो धनसम्बन्धो याचनं चातिभाषणम्।
आदानमग्रतः स्थानं मैत्रीभङ्गस्य हेतवः।।

भावार्थः
वाद-विवाद, धन के लिये सम्बन्ध बनाना, माँगना, अधिक बोलना, ऋण लेना, आगे निकलने की चाह रखना – यह सब मित्रता के टूटने में कारण बनते हैं।

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Sanskrit Good Morning

यस्य कृत्यं न विघ्नन्ति शीतमुष्णं भयं रति।
समृध्दिरसमृद्धिर्वा स वै पण्डित उच्यते।।

भावार्थः
जिसका कार्य कभी ठंढ, ताप, भय, प्रेम, समृद्धि, या उसका अभाव से बाधित नहीं होता, केवल वही वास्तव में श्रेष्ठ है।

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Good Morning Quotes in Sanskrit

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Good Morning Quotes in Sanskrit

यथा चित्तं तथा वाचो यथा वाचस्तथा क्रिया।
चित्ते वाचि क्रियायां च साधूनामेकरूपता।।

भावार्थः
जैसा मन होता है वैसी ही वाणी होती है, जैसी वाणी होती है वैसे ही कार्य होता है।
सज्जनों के मन​, वाणी और कार्य में एकरूपता (समानता) होती है।

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भद्रं भद्रं कृतं मौनं कोकिलैर्जलदागमे।
दर्दूराः यत्र वक्तारः तत्र मौनं हि शोभते।।

भावार्थः
वर्षा ऋतु के प्रारंभ में कोयलें चुप हो जाती है, क्योंकि बोलने वाले जहाँ मेंढक हो वहाँ चुप रहना ही शोभा देता है।

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Suprabhat Shlok

धनानि भूमौ पशवश्च गोष्ठे भार्या गृहद्वारि जनः श्मशाने।
देहश्चितायां परलोकमार्गे कर्मोनुगो गच्छति जीव एकः।।

भावार्थः
धन भूमि पर, पशु गोष्ठ में, पत्नी घर में, संबन्धी श्मशान में और शरीर चिता पर रह जाता है। केवल कर्म ही है जो परलोक के मार्ग पर साथ-साथ आता है।

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कल्पयति येन वृत्तिं येन च लोके प्रशस्यते सद्भिः।
स गुणस्तेन च गुणिना रक्ष्यः संवर्धनीयश्च।।

भावार्थः
जिस गुण से आजीविका का निर्वाह हो और जिसकी सभी प्रशंसा करते हैं, अपने स्वयं के विकास के लिए उस गुण को बचाना और बढ़ावा देना चाहिए।

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स्वस्तिप्रजाभ्यः परिपालयन्तां न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः।
गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु।।

भावार्थः
सभी लोगों की भलाई शक्तिशाली नेताओं द्वारा कानून और न्याय के साथ हो। सभी दिव्यांगों और विद्वानों के साथ सफलता बनी रहे और सारा संसार सुखी रहे।

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वाणी रसवती यस्य, यस्य श्रमवती क्रिया।
लक्ष्मी: दानवती यस्य, सफलं तस्य जीवितं।।

भावार्थः
जिस मनुष्य की वाणी मीठी है, जिसका कार्य परिश्रम से परिपूर्ण है, जिसका धन दान करने में प्रयोग होता है, उसका जीवन सफ़ल है।

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प्रथमे नार्जिता विद्या द्वितीये नार्जितं धनम्।
तृतीये नार्जितं पुण्यं चतुर्थे किं करिष्यसि।।

भावार्थः
यदि जीवन के प्रथम भाग में विद्या, दूसरे में धन और तीसरे में पुण्य नही कमाया, तो चौथे भाग में क्या करोगे?

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अतितृष्णा न कर्तव्या तृष्णां नैव परित्यजेत्।
शनैः शनैश्च भोक्तव्यं स्वयं वित्तमुपार्जितम्।।

भावार्थः
अत्यधिक इच्छाएँ नहीं करनी चाहिए पर इच्छाओं का सर्वथा त्याग भी नहीं करना चाहिए। अपने कमाये हुए धन का धीरे धीरे उपभोग करना चाहिये।

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Inspirational Sanskrit Quotes with Meaning

लये संबोधयेत् चित्तं विक्षिप्तं शमयेत् पुनः।
सकशायं विजानीयात् समप्राप्तं न चालयेत्।।

भावार्थः
जब चित्त निष्क्रिय हो जाये, तो उसे संबुद्ध करो। संबुद्ध चित्त जब अशान्त हो, उसे स्थिर करो। चित्त पर जमे मैल (अहंकार तथा अज्ञानता) को पहचानो। समवृत्ति को प्राप्त होने पर इसे फिर विचलित मत करो।

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आरोप्यते शिला शैले यथा यत्नेन भूयसा।
निपात्यते सुखेनाधस्तथात्मा गुणदोषयोः।।

भावार्थः
जैसे कोई पत्थर बड़े कष्ट से पहाड़ के ऊपर पहुँचाया जाता है पर बड़ी आसानी से नीचे गिर जाता है, वैसे ही हम भी अपने गुणों के कारण ऊँचे उठते हैं किंतु हम एक ही दुष्कर्म से आसानी से गिर सकते हैं।

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विद्या विवादाय धनं मदाय शक्तिः परेषां परिपीडनाय।
खलस्य साधोर् विपरीतमेतद् ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय।

भावार्थः
दुर्जन की विद्या विवाद के लिये, धन उन्माद के लिये और शक्ति दूसरों का दमन करने के लिये होती है। सज्जन इसी को ज्ञान, दान, और दूसरों के रक्षण के लिये उपयोग करते हैं।

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स्वस्तिप्रजाभ्यः परिपालयन्तां न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः।
गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु।।

भावार्थः
सभी लोगों की भलाई शक्तिशाली नेताओं द्वारा कानून और न्याय के साथ हो। सभी दिव्यांगों और विद्वानों के साथ सफलता बनी रहे और सारा संसार सुखी रहे।

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रात्रिर्गमिष्यति भविष्यति सुप्रभातं भास्वानुदेष्यति हसिष्यति पङ्कजश्रीः।
इत्थं विचिन्तयति कोशगते द्विरेफे हा हन्त हन्त नलिनीं गज उज्जहार।।

भावार्थः

रात खत्म होकर दिन आएगा, सूरज फिर उगेगा, कमल फिर खिलेगा- ऐसा कमल में बन्द भँवरा सोच ही रहा था और हाथी ने कमल को उखाड़ फेंका।

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कुसुम-सधर्माणि हि योषितः सुकुमार-उपक्रमाः।
ताः तु अनधिगत-विश्वासैः प्रसभम् उपक्रम्यमाणाः संप्रयाग-द्वेषिण्यः भवन्ति। तस्मात् साम्ना एव उपचरेत्।।

भावार्थः
स्त्रियाँ फूल के समान होती हैं, इसलिये उनके साथ बहुत सुकुमारता से व्यवहार करना चाहिए। जब तक पत्नी के हृदय में पति के प्रति पूर्ण विश्वास उत्पन्न न हो जाय तब कोई क्रिया जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए।

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ॐ सर्वेशां स्वस्तिर्भवतु
सर्वेशां शान्तिर्भवतु
सर्वेशां पूर्णंभवतु
सर्वेशां मङ्गलंभवतु
लोका: समस्ता: सुखिनो भवन्तु
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः

भावार्थः
सब का भला हो! सब को शान्ति मिले! सभी को पूर्णता हासिल हो! सब का मंगल हो! सारे लोक सुखी हों!

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नमोऽसत विद्यावितताय चक्रिणे
समस्तधीस्थानकृते सदा नमः।।
पद्मपुराण सृष्टिखण्ड।।

भावार्थः
जो समस्त विद्याओं के आश्रय, चक्रधारी तथा समस्त ज्ञानेन्द्रियों को व्याप्त करके स्थित हैं (यहां ब्रहमा जी का सर्वव्यापक स्वरूप वर्णित है), उन ब्रहमा जी को सदा नमस्कार है।

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यथा ह्यल्पेन यत्नेन च्छिद्यते तरुणस्तरुः।
स एवाऽतिप्रवृध्दस्तु च्छिद्यतेऽतिप्रयत्नतः।।
एवमेव विकारोऽपि तरुणः साध्यते सुखम्।
विवृध्दः साध्यते कृछ्रादसाध्यो वाऽपि जायते।।

भावार्थः
जैसे छोटे पौधे आसानी से तोड़े जा सकते हैं पर बड़े पेड़ नहीं, वैसे ही रोग का शुरुआत में ही उपचार करना आसान होता है, बढ़ने पर साध्य से असाध्य ही हो जाता है।

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स्वस्ति: प्रजाभ्यः परिपालयंतां
न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः।
गो ब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं
लोकाः समस्ताः सुखिनोभवंतु।।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः

भावार्थः
शक्ति शाली और सत्तातंत्र द्वारा सभी लोगों की भलाई न्यायूपर्वक हो! ईश्वर सभी विद्वानों और भले लोगों का हर दिन शुभ करें! सारे लोक सुखी हों!

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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