नकारात्मक सोच को कैसे दूर करें?

नकारात्मक सोच को कैसे रोके (Negative Thinking Dur Krne ke Aasan Upay): आज के समय में अधिकतर लोग अपनी नकारात्मक मानसिकता के कारण परेशान रहते है। यही नकारात्मक रहने की आदत हमें आगे बढ़ने से रोकती है। हमें काम में सफलता मिलेगी या असफलता यह भी हमारी सोच पर निर्भर करती है।

ऐसा नहीं है कि सकारात्मक लोग कभी भी नकारात्मक नहीं होते। उन पर भी नकारात्मकता हावी होती है लेकिन समय रहे वे उस पर काबू पा लेते है। यही खूबी उनको बाकि लोगों से अलग बनाती है।

अगर हम भी यह तय कर लें कि हमें नकारात्मकता के चुंगल से बाहर निकलना है तो यह बहुत आसान है। एक बार इसका रास्ता मिल जाये फिर यह कभी भी हम पर हावी नहीं हो सकेगी।

Negative Thinking Dur Krne ke Aasan Upay
Negative Thoughts ko Kaise Roke

यदि आपका भी सवाल है कि नेगेटिव सोच कैसे दूर करे (Nakaratmak Soch se Kaise Bache) तो हम यहां पर कुछ ऐसे आसान से उपाय बताएँगे, जिससे आप अपने अंदर नकारात्मक सोच को दूर कर सकते हैं और अपने अंदर सकारात्मक सोच पैदा कर सकते हैं।

नकारात्मक सोच को कैसे दूर करें? | Negative Thinking Dur Krne ke Aasan Upay

नकारात्मक सोच को कैसे दूर करें? (Negative Thoughts ko Kaise Roke)

आप जब भी अपने से बात करें तब हमेशा पॉजिटिव अंदाज में बात करें। अगर आप ऐसा करने में कामयाब हो जाते है तो आधी जंग तो आप वैसे ही जीत जायेंगे।

हमेशा छोटी छोटी खुशियों को एन्जॉय करने की कोशिश कीजिये। अक्सर हम बड़ी खुशियों की तलाश में इन छोटे छोटे खुशियों के पलों को नजरंदाज करते है। फिर इसकी हमें आदत लग जाती है, जो हमारे लिए परेशानी भरी होती है। इसलिए हमेशा छोटी छोटी चीज़ों में खुशियां ढूंढने की कोशिश करें।

जब भी समय मिले खुद से बात कीजिये, खुद को आज़ादी दें खुल के हंसने की, मुस्कुराने की जो दिल करे उसे करने की पूरी आज़ादी दें। एक बात याद रखें हर व्यक्त परेशान रहने से कभी भी आपकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। इसलिए जितना संभव हो सके खुद को इससे दूर रखें।

कठिन काम करने के लिए हमेशा तैयार रहें, क्योंकि इससे आपमें परिपक्वता आएगी। मुश्किल काम पूरे करने से आपके अवचेतन मन यह बात पक्की होगी कि आप कुछ भी कर सकते है। इससे आपके अन्दर आत्मविश्वास पैदा होगा, जो एक सफल व्यक्ति की पहचान है।

अक्सर हम पुरानी बातों को सोच सोच कर परेशान होते रहते है। पुरानी बातों को याद करने से केवल परेशानी ही हाथ आने वाली है, इसलिए खुद से कुछ वक्त बात करें और इस बारे में खुद अच्छी तरह से समझें। अतीत की चिंता करने से केवल ऊर्जा खर्च तो होती ही है लेकिन निरंतर चिंता करते रहने से मानसिकता पर भी भारी प्रभाव पड़ता है।

नकारात्मकता को दूर करने के टिप्स (Negative Thoughts ko Kaise Dur Kare)

नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूर रहे

आपके आसपास के लोगों के विचार भी आपको प्रभावित करते हैं। आपके आसपास जिस तरह के लोग रहते हैं, आप उन्हीं की तरह सोचते हैं। इसीलिए अपने आपको ऐसे लोगों के बीच में रखें जो सकारात्मक सोचते हो, जो आपको प्रेरणा देते हो।

ऐसे लोगों से दोस्ती करें जो जोश और उमंग से भरे हो, जो हंसमुख हो जिनके साथ रहकर आप का भी तनाव दूर हो सके। नकारात्मक लोगों के बीच रहने से आप भी नकारात्मक सोचने लगते हैं, इसीलिए नकारात्मक सोच वाले व्यक्तियों से हमेशा दूर रहे और सकारात्मक लोगों से संपर्क बनाएं।

योग और प्राणायम करें

कभी-कभी शारीरिक रूप से अस्वस्थ होना भी नकारात्मक विचार का कारण बन जाता है। इसीलिए अपने आपको स्वस्थ रखने की कोशिश करें। आप हर सुबह योग और प्राणायाम करें।

इससे आपके नकारात्मक विचार दूर होंगे और पॉजिटिव विचार आपके दिमाग में आएंगे और साथ ही आप शारीरिक रूप से स्वस्थ और मजबूत हो पाएंगे, इसीलिए अपने दिनचर्या में योग और प्राणायाम को शामिल करें।

संगीत सुनें

मधुर और प्रेरणादाई संगीत आपके नकारात्मकता को दूर करके आपको जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। मधुर संगीत आपके तनाव को भी दूर करते हैं। इसीलिए जब भी आप नकारात्मक सोच रहे हो या आप तनाव से त्रस्त हो तो आप अच्छे संगीत सुन सकते हैं।

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आसपास सफाई रखें

गंदे माहौल में रहना भी नकारात्मकता का कारण होता है। गंदा वातावरण आपके नकारात्मक विचार को बढ़ाता है। इसीलिए आप हमेशा अपने आसपास सफाई रखने की कोशिश करें। अपने आप को साफ सुथरा जगह पर रखें।

आप अपने घर में अपने, कमरे की दीवारों पर प्रेरणादायक विचार लिख कर चिपका सकते हैं, आप ऐसे पोस्टर लटका सकते हैं, जिसे देख कर आप को प्रेरणा मिले। आपके आसपास जितना अच्छा माहौल होगा आपको उतना ही अच्छा महसूस होगा और इससे आप में सकारात्मकता विचार आएगा।

ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें

जब आप तनाव में होते हैं तब आपको कोई भी काम करने का मन नहीं करता। यह तनाव आपको नकारात्मकता से भर देती है, जो आपके सफलता की बाधा बन जाती है। इस तरीके से नकारात्मकता में जीकर आप सफलता नहीं पा सकते। इसीलिए ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें।

आप अपने मन को भटकने ना दे। आप चाहे तो अपने तनाव को कम करने के लिए ईस्वर का ध्यान लगा सकते हैं। ईस्वर का ध्यान लगाने से नकारात्मकता दूर होती है‌। जरूरी नहीं कि आप दिन पर पूजा पाठ करें लेकिन दिन में एकआध घंटा पूजा पाठ में लगाए, कुछ समय मंदिर में बिता सकते हैं। क्योंकि मंदिर का वातावरण आपको शांति देता है और आपको तनावमुक्त रखता है।

आप हर सुबह मेडिटेशन करने की भी कोशिश करें। मेडिटेशन आपके ध्यान को केंद्रित करने में मदद करता है। हालांकि शुरुआत में ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत हो सकता है। लेकिन हर दिन जब मेडिटेशन करते हैं तो आपकी आदत बन जाएगी और बहुत ही जल्द आप अपने ध्यान को केंद्रित कर पाने में सक्षम हो पाएंगे।

हंसते रहे

हंसना तनाव का इलाज होता है। जब आप छोटी-छोटी बातों पर तनाव में रहते हैं तब वह चीज आपके मन में नकारात्मकता भर देती है। इसीलिए जितना हो सके उतना हंसने की कोशिश करें। इसके लिए मजेदार कहानियां या जॉक पढ सकते हैं, कॉमेडी वीडियोस देख सकते हैं।

ज्यादा से ज्यादा समय आप अपनों के साथ बिताए है, उनके साथ हंसी मजाक करें अपने आप को अकेला समय ना दे। आप हर उस चीज करने की कोशिश करें जो आपके चेहरे पर मुस्कान लाएं। जितना ज्यादा आप अपने आपको खुश रखेंगे, आपका तनाव भी उतना ही कम होगा।

अपने आप को व्यस्त रखें

ज्यादातर नकारात्मक विचार आपके दिमाग में तभी आता है जब आप खाली बैठे होते हैं। हमारा मन बहुत चंचल होता है, हर जगह पर भटकते रहते हैं। ऐसे में जब आप खाली बैठे रहते हैं तो आपका मन भूतकाल में घटी बूरी घटनाओं को सोचने लगता है तो वहीँ वह भविष्य के परिणामों के बारे में सोचने लगता है, जिसके डर में नकारात्मक विचार आपके दिमाग में आने लगते हैं।

इसीलिए अपने आपको ज्यादा से ज्यादा व्यस्त रखने की कोशिश करें। आप अच्छी और प्रेरणादाई किताब पढ़ सकते हैं, अच्छी प्रेरणादायक वीडियोस या फिल्म देख सकते हैं या फिर जो भी चीज का आपको शौक है, उस चीज को खाली समय पर करें। अपने आपको जितना ज्यादा व्यस्त रखेंगे उतना ही कम नकारात्मक विचार आपके मन में आएंगे।

वर्तमान में रहना महत्वपूर्ण

यदि आपको नकारात्मकता पर विजय पाना है तो आपको वर्तमान में रहना सीखना पड़ेगा। भूतकाल में हुए सभी घटनाओं के बारे में सोचना बंद कर दे और भविष्य के परिणाम के बारे में भी ना सोचे।

भूतकाल में बीती हुई घटना को याद करने पर आपके अंदर नकारात्मकता बढ़ने लगती है। वहीँ यदि आप भविष्य के परिणाम के बारे में सोचते हैं तभी नकारात्मक विचार आपके अंदर आने लगता है। आपको यह समझना होगा कि जो होने वाला है, वह होके ही रहेगा। इसीलिए उसके बारे में सोच कर कोई फायदा नहीं। बस अपने वर्तमान को आंनद से जीए।

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खुद को प्रोत्साहित करें

हमारे नकारात्मक विचार के पीछे अन्य लोग भी जिम्मेदार होते हैं। आपकी सफलता में ज्यादातर लोग ना खुश होते हैं। वैसे लोग आपको जिंदगी में आगे बढ़ने से रोकेंगें। वे लोग सफलता पाने से पहले ही आपके अंदर असफलता के नकारात्मक विचार भर देंगे।

ऐसे में उन लोगों का सामना करने के लिए सबसे अच्छा है कि आप खुद को प्रोत्साहित करें, आप अन्य लोगों से इस बात की उम्मीद ना रखे। आप लोगों के नकारात्मक बातों को सुनना बंद कर दे और अपने आप को प्रोत्साहित करें। इससे आपके अंदर आत्मविश्वास बढ़ेगा और नकारात्मकता भी कम होगी। खुद को प्रोत्साहित करने से आपका मनोबल भी ऊंचा होगा।

खुद के निर्णय पर विश्वास करें

खुद के निर्णय पर विश्वास ना हो भी नकारात्मकता का कारण होता है और यह आत्मविश्वास की कमी के कारण होता है। जब हमारे अंदर आत्माविश्वास नहीं होता तो हमे खुदके निर्णय से डर लगता है। नकारात्मक सोच हमें अपने से ज्यादा दूसरों पर भरोसा करने के लिए मजबूर करती है।

हमें लगता है कि दूसरा व्यक्ति हमसे ज्यादा अच्छा हमारे बारे में निर्णय ले सकता है। लेकिन आपको इस बात को समझना पड़ेगा कि आप जो भी करेंगे, वह खुद के लिए करेंगे इसीलिए खुद के बारे में आपसे ज्यादा अच्छा निर्णय दूसरा कोई भी नहीं ले सकता।

इसीलिए छोटी-छोटी निर्णय पर अन्य लोगों पर निर्भर न रहकर खुद निर्णय लें और उस पर अमल करें। यह चीज आपके अंदर आत्मविश्वास जगाती हैं।

स्वामी विवेकानंद जी से सीखें सकारात्मक होना

एक बार स्वामी विवेकानंद जी कहीं जा रहे थे। वे एक छोटे से ब्रिज से गुजरते हैं। ब्रिज के एक ओर गहरा पानी होता है। वे ब्रिज से गुजर ही रहे होते हैं कि कुछ बंदर उनका पीछा करने लगते हैं। स्वामी जी परेशान हो जाते हैं। उन बंदरों से छुटकारा पाने के लिए वे वहां से दूर भागते हैं लेकिन बंदर भी उनके पीछे भागना शुरू कर देते हैं। तभी सामने से एक आदमी आ रहा है और वह स्वामी विवेकानंद जी को भागते हुए देखता है।

स्वामी विवेकानंद जी के पास जाता है और कहता है कि आप इन बंदरों से जितना ज्यादा डरेंगे वह बंदर आपको उतना ही डराएंगे। आप इनसे भागने की कोशिश करेंगे तो यह आपके पीछे भागेंगे। इसीलिए पीछे मुड़कर इन बंदरों का निडरता से सामना करें तभी यह बंदर भागेंगे।

उस व्यक्ति की बात सुनकर स्वामी विवेकानंद जी पीछे मुड़ते हैं और बंदरों के आंख से आंख मिलाते हुए चिल्लाते हैं, जिससे बंदर वहां से भाग जाते हैं। विवेकानंद जी के इस कहानी से आप भी यह चीज सीख सकते हैं कि जीवन में नकारात्मक विचार भी इन बंदरों की तरह ही है। आप इन से छुटकारा पाने के लिए जितना भागेंगे, यह विचार उतना ही आपके पास आएंगे।

इसीलिए इनका सामना करना जरूरी है। तनाव और परेशानियां हर किसी के जीवन में होता है लेकिन यदि आप उसका निडरता से सामना नहीं करते तो वह हमेशा ही आपको परेशान करते हैं। इसीलिए छोटे-छोटे चीजों पर परेशान होकर तनाव में रहने से अच्छा है कि आप उसका निडरता से सामना करें। यह चीज आपको जिंदगी में सकारात्मक सोचने के लिए प्रोत्साहित करता है।

FAQ

नकारात्मक विचार क्या होते हैं?

नकारात्मक विचार का अर्थ होता है ऐसा विचार जो आपको दुखी कर दें, जिससे सोचकर आप को डर लगता है। नकारात्मक विचार आपको नकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं, जिससे आपको तनाव होने लगता है और इसका असर आपके शरीर पर होता है।

नकारात्मक विचार के क्या लक्षण है?

तनाव में होना, नींद ना आना, अपनों से दूर रहना अकेले समय बिताना, हमेशा दुखी रहना, हर बात पर क्रोधित होना, यह सारी चीजें नकारात्मक विचार के लक्षण होते हैं।

सकारात्मक विचार क्या होते हैं?

सकारात्मक विचार ऐसे विचार होते हैं, जो आपके चेहरे पर मुस्कान ले आए, जो आपके अंदर आत्मविश्वास बढ़ाए और आपको प्रेरणा दें। सकारात्मक विचार आपको सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है, जिससे आप किसी भी परेशानियों से डरते नहीं हैं और मुश्किलों का निडरता से सामना करते हैं।

हमारे मन में नकारात्मक विचार कब आते हैं?

जब आपको खुद पर विश्वास ना हो या फिर जब आप अकेले बैठे हैं तब आपके मन में नकारात्मक विचार आते हैं।

सकारात्मक विचार लाने के लिए क्या-क्या कर सकते हैं?

सकारात्मक विचार लाने के लिए बहुत सारी चीजें कर सकते हैं। सकारात्मक होने के लिए सकारात्मक लोगों के बीच में समय बताएं, अच्छे और सफल इंसानों को सुनें, अच्छी किताबें पढ़ें, नई-नई चीजें सीखें।

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10 COMMENTS

  1. Agar uper ki baato ko padhne par bhi aapki hamesh negative sochane ki aadat nahi sudhar rahi hai to aapko psychiatric se treatment karwana chahiye kyu ki bahut jada sochna ya bahut jada negative sochna ek bimari bhi hoti hai.

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