इंडिया गेट का इतिहास एवं रोचक तथ्य

India Gate History in Hindi: राजधानी दिल्ली में हमें बहुत से ऐतिहासिक स्मारक देखने को मिल जाते हैं और इन्हीं सभी ऐतिहासिक स्मारकों की वजह से ही भारतीय इतिहास में हुई महत्वपूर्ण घटनाओं का भी वर्णन हमें जानने को मिलता है। उन्हीं सभी प्रसिद्ध आकर्षक स्मारकों में से एक इंडिया गेट भी है।

इंडिया गेट भारत के वीर सैनिकों के सम्मान के लिए समर्पित है। इंडिया गेट को प्रसिद्ध अखिल भारतीय युद्ध स्मारक के नाम से भी जानते हैं। इसकी भव्यता और आकर्षण की तुलना अक्सर फ्रांस में मौजूद आर्क डी ट्रायम्फ और मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया से की जाती हैं।

India Gate History in Hindi

आज इस लेख के माध्यम से हम आपको इंडिया गेट का इतिहास (India Gate Story in Hindi) और उस से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों (Facts About India Gate in Hindi) के बारे में जानने वाले हैं। यदि आप भी जान कुर्बान करने वाले सैनिकों को समर्पित इस स्मारक के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमारे इस लेख को अंतिम तक अवश्य पढ़ें।

इंडिया गेट का इतिहास – History of India Gate in Hindi

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प्रथम विश्वयुद्ध और तीसरे एंगलो अफगान युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना के 90 हजार सैनिकों ने शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य की रक्षा करते हुए, अपने आपको न्योछावर कर दिया और अपने प्राणों की आहुति दे दी। यही कारण है, कि दिल्ली के राजपथ में मौजूद इंडिया गेट का निर्माण शहीद हुए उन सभी सैनिकों की याद में किया गया था।

इंडिया गेट (India Gate in Hindi) की पूरे दीवारों पर प्रथम विश्वयुद्ध और तीसरे एंगलो अफगान युद्ध में शहीद हुए सभी भारतीय ब्रिटिश सैनिकों का नाम अंकित किया गया है। वीर सैनिकों को समर्पित इंडिया गेट का निर्माण (india gate ka nirman) कार्य वर्ष 1921 में किया गया था।

द ड्यूक ऑफ कनॉट में 10 फरवरी 1921 को इस युद्ध स्मारक (about india gate in hindi) की नींव रखी थी। इसके अतिरिक्त इस स्मारक का उद्घाटन भारत के वायसराय लॉर्ड इरविन ने 12 फरवरी 1921 को किया था।

इंडिया गेट (india gate information in hindi) दिल्ली के दिल के रूप में जानी जाती है और इस गेट पर कुल 95300 स्वतंत्रता सेनानियों का नाम अंकित है। समय इंडिया गेट को जाने-माने आर्किटेक्चर एडविन लुटियंस ने डिजाइन किया था। इसके निर्माण में ग्रेनाइट के साथ-साथ लाल और पीले रंग के स्टैंड स्टोन का प्रयोग किया गया है। भारत के इस आकर्षित स्मारक को देखने के लिए दूर-दूर से विदेशी सेनानी आते रहते हैं।

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इंडिया गेट का डिजाइन

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आश्चर्यचकित कर देने वाले वस्तु कला से निर्मित इंडिया गेट (Information on India Gate in Hindi) का डिजाइन तैयार करने का जिम्मा एडविन लुटियंस उठाया था। इंडिया गेट के 650 मीटर के व्यास में एक हेक्सागोनल परिसर केंद्र स्थित है।

इंडिया गेट का कुल 360000 वर्ग मीटर का क्षेत्रफल है। यदि हम इंडिया गेट (information about india gate in hindi) की ऊंचाई और चौड़ाई की बात करें, तो इसकी ऊंचाई 42 मीटर और इसकी चौड़ाई लगभग 9.1 मीटर है।

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चित्र स्रोत: wikimedia.org

इंडिया गेट जाति संप्रदाय से परे एक धर्मनिरपेक्ष स्मारक है। इसके अतिरिक्त इंडिया गेट के 150 मीटर की दूरी पर एक शानदार एक छतरी जैसी संरचना है, जिसे एडविन लुटियंस निर्माण का रूप दिया था। इस संरचना में लोड जॉर्ज पंचम की मूर्ति पहले मौजूद थी, लेकिन बाद में इसे वहां से हटा दिया गया था।

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इंडिया गेट पर मौजूद अमर जवान ज्योति का इतिहास

इंडिया गेट के ठीक नीचे एक “अमर जवान ज्योति” (amar jawan jyoti in hindi) का निर्माण किया गया है, यह उन जवानों की याद दिलाता है, जिन्होंने त्याग बलिदान और अपने देश के लिए कुर्बानी दी है। यह “अमर जवान ज्योति” उन सभी भारतीय सैनिकों को समर्पित है, जिन्होंने भारत पाकिस्तान के युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।

इन सभी देश के रक्षा करते हुए मिटने वाले सैनिकों की याद में “अमर जवान ज्योति” का निर्माण साल 1971 में किया गया था।

चित्र स्रोत: theweek.in

अमर जवान ज्योति का उद्घाटन 1972 की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था और उन्होंने इस स्मारक पर अमर सैनिकों को भाव पूर्ण तरीके से श्रद्धांजलि अर्पित की थी। तभी से प्रति वर्ष गणतंत्र दिवस के परेड के मौके पर देश के प्रधानमंत्री और भारतीय शक्ति के तीनों सेना प्रमुख इस पावन भूमि पर मौजूद होते हैं और उन सभी वीर पुरुषों को सच्ची एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि प्रदान करते हैं।

इसके अतिरिक्त इस शहीद भूमि पर शहीद दिवस एवं विजय दिवस समेत कई अन्य यादगार मौकों पर भारत के तीनों सेना प्रमुख मौजूद होते हैं और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस ज्योति के निर्माण में पूरी तरह से संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है और इसमें बड़े बड़े अक्षरों से “अमर जवान ज्योति” लिखा गया है।

इसके अतिरिक्त इस स्मारक के ठीक ऊपर L1A1 की एक स्व-लोडिंग राइफल रखी गई है। इसकी शोभा को और बढ़ाने के लिए इसके शीर्ष पर एक सैनिक का हेलमेट स्थापित किया गया है। इस जवान ज्योति की सबसे महत्वपूर्ण एवं खास बात यह है, कि यहां पर शहीदों की याद में हमेशा एक अनंत ज्योति (amar jawan jyoti) प्रज्वलित रहती है।

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हमेशा अमर जवान ज्योति की लौ कैसे जलती रहती है

“अमर जवान ज्योति” स्मारक के अगल-बगल चार कलश रखे गए हैं और इनमें से एक में 1971 से पूरे साल 24 घंटे अग्नि प्रज्वलित रहती है, पहले ज्योति एलपीजी गैस के प्रयोग से चलती थी, लेकिन 2006 से ज्योति को सीएनजी गैस से प्रज्वलित किया जाने लगा। इसकी सुरक्षा के लिए 24 घंटे हर दिन सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।

इंडिया गेट से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • इंडिया गेट के पूरी दीवारों पर प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के नाम को बहुत ही सुंदरता से दर्ज किया गया है। उन सभी शहीद सैनिकों के इंडिया गेट की दीवारों पर नाम आज भी साफ साफ देखे जा सकते हैं।
  • इंडिया गेट पर मौजूद अमर जवान ज्योति का उद्घाटन भारतवर्ष की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1972 में 26 जनवरी के दिन किया था।
  • इंडिया गेट के पूरे आसपास में बगीचे और खूबसूरत हरे-भरे पौधों का निर्माण किया हुआ है। जिस वजह से यह एक पिकनिक स्पॉट के रूप में भी जाना जाता है।

निष्कर्ष

इंडिया गेट एक ऐसा स्मारक है, जिसके जरिए हमारे देश के प्रत्येक नागरिक वीरगति को प्राप्त हुए सभी सैनिकों को याद करते हैं। इंडिया गेट को देखकर प्रत्येक भारतीय नागरिक का ह्रदय गर्व से ऊंचा उठ जाता है। हमारे देश के प्रत्येक सैनिकों को सम्मान की दृष्टि से देखना चाहिए।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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