संख्यावाचक विशेषण (परिभाषा, भेद और उदाहरण)

संख्यावाचक विशेषण (Sankhya Vachak Visheshan): हिंदी व्याकरण में विशेषण शब्द का काफी महत्व होता है और वाक्यों में विशेषण शब्द का प्रयोग अवश्य होता है। इन विशेषण शब्द के आधार पर वाक्यों में सुधार आता है और विशेषण शब्द के आधार पर वाक्य के उच्चारण में बदलाव आता है।

Sankhya Vachak Visheshan
Sankhya Vachak Visheshan

आज हम यहां पर संख्यावाचक विशेषण की परिभाषा, भेद और उदाहरण के बारे में विस्तार से जानने वाले है।

संख्यावाचक विशेषण की परिभाषा किसे कहते है?

संख्यावाचक विशेषण की परिभाषा: ऐसे शब्द जो विशेषण के रूप में किसी भी संज्ञा और सर्वनाम का बोध करवाते हैं, उन शब्दों को संख्यावाचक विशेषण के अंतर्गत रखा गया है।

उदाहरण: चार, पांच, दौ गुना, पांच गुना आदि।

संख्यावाचक विशेषण के उदाहरण

  • दो कुत्ते झगड़ रहे हैं।

ऊपर दिए गए इस वाक्य में दो शब्द का प्रयोग संख्या के बोध के रूप में किया गया है और इस उदाहरण में दो शब्द का प्रयोग संख्यावाचक विशेषण के रूप में किया गया है। इस शब्द से कुत्तों की संख्या का पता चल रहा है। इसलिए इस शब्द को संख्यावाचक विशेषण के अंतर्गत रखा गया है।

  • चार लड़कियां झगड़ रही है।

इस वाक्य में चार शब्द का प्रयोग लड़कियों के लिए किया गया है और लड़कियों की संख्या का ज्ञान करवाया गया है। इसलिए इस उदाहरण को संख्यावाचक विशेषण के तहत रखा गया है।

संख्यावाचक विशेषण के प्रकार

संख्यावाचक विशेषण 2 प्रकार का होता है, जो निम्न है:

  1. निश्चित संख्यावाचक विशेषण
  2. अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण

निश्चित संख्यावाचक विशेषण

वह विशेषण जिससे हमें किसी व्यक्ति (संज्ञा), वस्तु या सर्वनाम आदि का निश्चित बोध करवाते हो, उन्हें निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहा जाता है।

जैसे: पांच पेन, दो पेड़, 6 कुते, एक दर्जन केले आदि।

निश्चित संख्यावाचक विशेषण के प्रकार

  1. पुर्ण संख्या बोधक निश्चित संख्यावाचक विशेषण: ऐसे विशेषण शब्द जो किसी भी निश्चित संख्या का बोध करवाते हैं उन वाक्यों को निश्चित संख्यावाचक विशेषण के अंतर्गत रखा गया है। जैसे: 8 किलो, 5, 10, एक इत्यादि।
  2. अपूर्ण संख्या बोधक निश्चित संख्यावाचक विशेषण: इस प्रकार के शब्द जिनके जरिए संख्या का बोध नहीं होता है। मतलब यह है कि मात्रा का पता चलता है लेकिन संख्या का पता नहीं चलता है। जैसे: आधा किलो, ढाई किलो, सवा किलो इत्यादि।
  3. क्रंमवाचक निश्चित संख्यावाचक विशेषण: जिन शब्दों के जरिए संख्या में क्रम का बोध होता है, उन्हें क्रमवाचक निश्चित संख्यावाचक प्रणाम कहते हैं। मतलब यह है कि संख्या का बोध हो रहा है। परंतु संख्या का बोध क्रम के रूप में हो रहा है। जैसे: दूसरा, तीसरा, चौथा, सातवां, आठवां।
  4. आवृत्ति वाचक निश्चित संख्यावाचक विशेषण: ऐसे शब्द जिनके माध्यम से सिर्फ आवृत्ति का बोध कराया जाता है। उदाहरण के तौर पर दौगुना, तिगुना इत्यादि।
  5. समूहवाचक निश्चित संख्यावाचक विशेषण: ऐसे शब्द जिनके माध्यम से समूहों और समुदाय का बोध होता है, उन्हें समूहवाचक निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहा जाता है। उदाहरण: पांचो आठों, चारों इत्यादि।
  6. प्रत्येक बोधक निश्चित संख्यावाचक विशेषण: ऐसे वाक्य जिनके माध्यम से हर एक संख्या का बोध और ग्रुप से होता है, उन्हें प्रत्येक बोधक निश्चित वाचक विशेषण की श्रेणी में रखा गया है। जैसे हर, हर एक, एक-एक, दो-दो, प्रत्येक इत्यादि।

निश्चित संख्यावाचक विशेषण के उदाहरण

  • कल मेरे दो मित्र घर आए थे।

इस वाक्य में दो शब्द का प्रयोग संख्या के रूप में बताया गया है। इसलिए इसे निश्चित संख्यावाचक विशेषण के तहत रखा गया है।

  • एक स्कूल में 400 विद्यार्थी है।

ऊपर दिए गए इस वाक्य में 400 शब्द का प्रयोग विद्यार्थियों की संख्या का बोध कराने के लिए किया गया है। इसलिए यह निश्चित संख्यावाचक विशेषण के अंतर्गत आता है।

अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण

ऐसे विशेषण शब्द जिनमें संज्ञा व सर्वनाम की निश्चित संख्या का बोध नहीं होता है। मतलब यह है कि अनिश्चित संख्या का बोध जिन शब्दों के जरिए होता है, उन शब्दों को अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण की श्रेणी में रखा जाता है। जैसे: कई, हजारों, अनेक, बहुत सारे, बहुत ज्यादा, अनगिनत इत्यादि।

अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण के उदाहरण

  • कुछ मिठाई खा लो।

इस वाक्य में कुछ शब्द का प्रयोग मिठाई का अनिश्चित संख्या के रूप में बौद्ध करवाने के लिए किया गया है। लेकिन इस वाक्य में संख्या का निश्चित बोध नहीं होता है और इसीलिए इस वाक्य को अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण के तहत रखा गया है।

  • जयपुर बहुत सारे लोग आते हैं।

ऊपर दिए गए इस वाक्य में बहुत सारे शब्द का प्रयोग जयपुर आने वाले लोगों की संख्या के रूप में किया गया है। लेकिन इस शब्द के जरिए जयपुर आने वाले लोगों की निश्चित संख्या का पता नहीं चलता है और इसीलिए इस वाक्य को अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण के तहत रखा गया है।

निष्कर्ष

हमने यहां पर संख्यावाचक विशेषण (Sankhya Vachak Visheshan) की परिभाषा, भेद और उदाहरण के बारे में विस्तार से जाना है। उम्मीद करते हैं कि आपको यह समझ आ गया होगा। यदि आपका इससे जुड़ा कोई सवाल है तो कमेंट बॉक्स में जरूर पूछे।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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