समुच्चय बोधक (परिभाषा, भेद और उदाहरण)

समुच्चय बोधक (परिभाषा, भेद और उदाहरण) | Samuchaya Bodhak Kya Hota Hai

Samuchaya Bodhak Kya Hota Hai
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समुच्चय बोधक किसे कहते हैं?

समुच्चय बोधक (Conjunction): यदि सरल शब्दों में समझा जाए तो दो या दो से अधिक शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों को जोड़ने वाले शब्द को समुच्चय बोधक कहते हैं। समुच्चय बोधक को दूसरे शब्दों में योजक भी कहा जाता है।

उदाहरण- तब, और, वरना, किंतु, परंतु, इसलिए, बल्कि, ताकि, क्योंकि, या, अथवा, एवं, तथा, अन्यथा, आदि शब्द जो कि दो या दो से अधिक वाक्यों को जोड़ने वाले हैं वैसे शब्द को समुच्चयबोधक शब्द कहा जाता हैं।

कुछ उदाहरणों द्वारा हम समझेंगे कि कैसे समुच्चयबोधक शब्द दो शब्दों और वाक्यों को जोड़ते हैं:

  • राम कल घर आया और जल्दी सो गया।
  • श्याम को मोहन ने बहुत समझाया लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी।
  • यदि राम मोहन को बुलाता तो वह जरूर आता।
  • सीता और गीता पड़ रही है।
  • मोहन ने बहुत मेहनत की फिर भी वह सफल नहीं हो पाया।
  • मुझे टीवी या मोबाइल चाहिए।
  • सीता और गीता आपस में कुछ खास बातें कर रहे हैं।
  • क्या वह क्या हुआ वह अगर कंजूस है लेकिन वह गरीबों की मदद करता है।

समुच्चयबोधक के भेद

समुच्चयबोधक दो प्रकार के होते हैं, जो निम्न है:

  1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक
  2. व्‍यधिकरण समुच्‍चयबोधक

1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक

वैसे समुच्चय बोधक शब्द जो दो समान वाक्यों को जोड़ने वाला हो, तो मुख्य वाक्यों को जोड़ने वाला हो ऐसे शब्द को समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं। उदाहरण- एवं, तथा,और, तो आदि।

समानाधिकरण समुच्चयबोधक को हम कुछ उदाहरण द्वारा हम समझेंगे

  • मोहन चला जाएगा तो श्याम क्या करेगा।
  • लव और कुश भगवान राम के दो पुत्र थे।
  • गुलाब तथा चमेली सुगंधित फूलों के उदाहरण हैं।

समानाधिकरण समुच्चयबोधक के उपभेद

समानाधिकरण समुच्चयबोधक 6 उपभेद हैं:

  1. सयोंजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
  2. विभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
  3. विकल्पसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
  4. विरोधदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
  5. परिमाणदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
  6. वियोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक

1.सयोंजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक:- वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो या दो से अधिक वाक्यों को एक साथ जोड़ते हैं, या जो दो या दो से अधिक शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों परस्‍पर संबद्ध रखते हैं, वैसे शब्द को सयोंजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं। उदाहरण- तथा, एवं,और, व,भी आदि।

कुछ उदाहरण द्वारा हम समझेंगे सयोंजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक:-

  • रमेश और मीरा दोनों भाई बहन हैं।
  • आम तथा केला फल के उदाहरण है।
  • भगवान राम एवं माता सीता दोनों बहुत ही कृपालु और दयालु है।
  • मीरा और गीता दोनों सहेली हैं।
  • मोहन कक्षा में होते हुए भी उसका ध्यान कहीं और था।

2. विभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक: वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो या दो से अधिक शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों और उपवाक्य में परस्पर विभाजन प्रकट करें, वैसे शब्द को विभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं। उदाहरण- ताकि, चाहे-चाहे, क्या-क्या, ना-ना, न कि, नहीं तो, परंतु, तो, या, चाहे, अथवा, अन्यथा, मगर आदि।

कुछ उदाहरण द्वारा हम समझेंगे विभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक:-

  • चाहे जैसे भी हो यह काम करना ही होगा।
  • मोहन आया परंतु श्याम नहीं आया।
  • क्या अमीर क्या गरीब सभी भगवान की भक्ति में आनंदित हो रहे थे।
  • मीरा मेहनत से पढ़ाई कर रही है ताकि वह परीक्षा में सफल हो सके।

3. विकल्पसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक: वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो या दो से अधिक शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों में विकल्पों का पता लगे वैसे शब्द को विकल्पसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं। उदाहरण- पर, अन्यथा, अथवा, की, या, आदि।

कुछ उदाहरण विकल्पसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक:-

  • तुम अंग्रेजी भाषा सीख सकती हो या स्पेनिश भाषा।
  • तुम पूरे मन से काम को पूरा करो अन्यथा तुम्हारी नौकरी जा सकती है।
  • मीरा जाएगी अथवा सीता जाएगी।

4. विरोधदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधक: वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो या दो से अधिक विरोधी शब्द द्वारा वाक्यों या उपवाक्य को जोड़ने का काम करता, वैसे शब्द को विरोधदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।
उदाहरण- वरन, पर, परन्तु, किन्तु, मगर, बल्कि, लेकिन आदि।

कुछ उदाहरण द्वारा हम समझेंगे विरोधदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधक:-

  • डॉक्टर ने बहुत कोशिश की परंतु वह अपने मरीज को बचा नहीं सका।
  • सोहन ने बहुत मेहनत की लेकिन वह प्रथम नहीं हो सका।
  • अच्छा हो या बुरा हो पर हमें यह जीवन जीना ही पड़ता है।
  • हमें कितना भी डर लगे किंतु हमें आगे बढ़ना ही होता है।
  • हम किसी काम को करने से पहले बहुत डरते हैं लेकिन जैसे ही वह काम हो जाता है हमारा डर भाग जाता है।

5. परिमाणदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधक:- वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो या दो से अधिक शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों या उपवाक्य को जोड़कर उसके परिणाम का ज्ञान देता हो वैसे शब्द को परिमाणदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।

उदाहरण- इस कारण, अत:, अतएव, फलत:, परिणाम स्वरूप, इसलिए, फलस्वरूप, अन्यथा, इसीलिए आदि।

कुछ उदाहरण द्वारा हम समझेंगे परिमाणदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधक:-

  • सीमा इंग्लिश भाषा में कमजोर है अतः उसने इंग्लिश क्लासेस शुरू की।
  • शोभा बहुत ही छोटी है इसलिए वह अभी स्कूल नहीं जाती है।
  • मोहन ने कड़ी मेहनत की जिसके परिणाम स्वरूप उसे एक अलग पहचान मिली है।
  • अब रात होने वाली है इसलिए मुझे अब घर जाना चाहिए।

6. वियोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक: वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो या दो से अधिक शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों जोड़ने के बाद वियोजक का काम अर्थात एक त्याग करने का आभास कराएं वैसे शब्द को वियोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं। उदाहरण- या, न,अथवा आदि।

कुछ उदाहरण द्वारा हम समझेंगे वियोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक:-

  • सीता अथवा अजीता दोनों में से कोई भी विद्यालय नहीं गई थी।
  • मुझे तुमसे अथवा तुम्हारी बहन से कोई मतलब नहीं है।
  • या तो तुम इस घर में रहोगी या तो मैं घर में रहूंगा।

2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक

वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो किसी वाक्य के प्रधान या उपवाक्य या किसी वाक्य पर आश्रित/निर्भर वाक्यों को परस्पर जोड़ने का कार्य करते हैं, वैसे समुच्चयबोधक शब्द को व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं। उदाहरण- इसलिए, यद्यपि, तथापि आदि।

कुछ उदाहरण द्वारा हम समझेंगे व्यधिकरण समुच्चयबोधक:-

  • राधा अच्छा लिखती होगी तथापि महादेवी वर्मा जैसा नहीं।
  • हमें अपने जीवन में कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए ताकि हम अपने जीवन में आगे बढ़ते रहें।
  • सीमा बहुत ही कमजोर है इसलिए वह चल नहीं सकती।
  • मोहन ने परीक्षा में चोरी की है इसलिए अब उसे दंड मिलेगी।

व्यधिकरण समुच्चयबोधक के उपभेद

व्यधिकरण समुच्चयबोधक निम्न 4 उपभेद हैं:

  1. कारणसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक
  2. संकेतसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक
  3. उद्देश्यसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक
  4. स्वरुपसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक

1.कारणसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक:- वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो या दो से अधिक वाक्यों या उपवाक्य परस्पर जोड़ते हुए उस वाक्यों में हो रहे कार्य का कारण स्पष्ट होता हो या वैसे समुच्चयबोधक शब्द जिससे किसी वाक्य का कारण ज्ञात होता है, वैसे समुच्चयबोधक शब्द को कारणसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।

उदाहरण- क्योंकि, जोकि, इसलिए कि, इस कारण, इस लिए, चूँकि, ताकि, कि आदि।

कुछ उदाहरण द्वारा हम समझेंगे कारणसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक:-

  • मैं खेलने के लिए मैदान नहीं जा सका क्योंकि वर्षा हो रही थी।
  • सीमा पर कोई भरोसा नहीं करता है क्योंकि सीमा झूठ बोलती है।
  • राधा बहुत ही कोमल और सुंदर है इसलिए राधा को हर कोई पसंद करता है।

2. संकेतसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक:- वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो या दो से अधिक वाक्यों या उपवाक्य परस्पर जोड़ते हुए उस वाक्यों में हो रहे कार्य का संकेत स्पष्ट होता हो, या वैसे समुच्चयबोधक शब्द जिससे किसी वाक्य का संकेत ज्ञात होता है, वैसे समुच्चयबोधक शब्द को संकेतसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।

उदाहरण- यदि, तो, तथापि, यद्पि, परन्तु आदि।

कुछ उदाहरण द्वारा हम समझेंगे संकेतसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक:-

  • जीवन में कुछ करना है तो मन से पढ़ाई करो।
  • यदि राम अच्छे से मेहनत करके पड़ेगा तो सफल जरूर होगा।
  • श्याम पढ़ने में तो तेज है परंतु वह बहुत आलसी है जिससे उसे असफलता मिल सकती है।

3. उद्देश्यसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक:- वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो या दो से अधिक वाक्यों या उपवाक्य परस्पर जोड़ते हुए उस वाक्यों में हो रहे कार्य का उद्देश्य स्पष्ट होता हो, या वैसे समुच्चयबोधक शब्द जिससे किसी वाक्य का उद्देश्य ज्ञात होता है, वैसे समुच्चयबोधक शब्द को उद्देश्यसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।

उदाहरण- ताकि, कि, जो, इसलिए कि, जिससे आदि।

  • कुछ उदाहरण द्वारा हम समझेंगे उद्देश्यसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक:-
  • श्याम खूब मन लगाकर पढ़ाई कर रहा है ताकि वह परीक्षा में अव्वल आ सके।
  • मीरा के आने से पहले हैं सीता जा चुकी थी ताकि वह मीरा से ना मिले।
  • मोहन मीरा की बहुत मदद करता है जिससे मीरा मोहन से दोस्ती कर लेती है।
  • सीमा आज सारा काम जल्दी कर रही है ताकि वह जल्दी घर जा सके।

4. स्वरुपसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक:- वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो या दो से अधिक वाक्यों या उपवाक्य परस्पर जोड़ते हुए उस वाक्यों में हो रहे कार्य का स्वरुप/अर्थ स्पष्ट होता हो, या वैसे समुच्चयबोधक शब्द जिससे किसी वाक्य का स्वरुप ज्ञात होता है, वैसे समुच्चयबोधक शब्द को स्वरुपसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।

उदाहरण- यानी, कि, अथार्त, मानो, जैसे आदि।

कुछ उदाहरण द्वारा हम समझेंगे स्वरुपसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक:-

  • मुझे देखकर वह इतना डर गया था कि शायद मैंने उसकी कुछ चोरी पकड़ ली होगी।
  • मां राधा रानी के चेहरे पर है ऐसी चमक, मानो चांद का टुकड़ा हो।

हमने क्या सीखा?

हमने यहां पर समुच्चय बोधक किसे कहते है? (Samuchaya Bodhak Kya Hota Hai) इसकी परिभाषा, भेद और उदाहरण आदि के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की है। यदि आपका इससे जुड़ा कोई सवाल है तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। इस जानकारी को आगे शेयर जरूर करें।

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औपचारिक पत्र लेखनशब्द शक्तितत्सम और तद्भव शब्द

इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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