जावेद अख़्तर शायरी

Javed Akhtar Shayari In Hindi

Javed Akhtar Shayari In Hindi
Javed Akhtar Shayari In Hindi

जावेद अख़्तर शायरी |Javed Akhtar Shayari In Hindi

तमन्‍ना फिर मचल जाए,
अगर तुम मिलने आ जाओ
यह मौसम ही बदल जाए,
अगर तुम मिलने आ जाओ

बहाना ढूँडते रहते हैं कोई रोने का
हमें ये शौक़ है क्या आस्तीं भिगोने का

छोड़ कर जिस को गए थे आप कोई और था,
अब मैं कोई और हूँ वापस तो आ कर देखिए !

अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी
हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का
– जावेद अख़्तर

मुझे गम है कि मैने जिन्‍दगी में कुछ नहीं पाया
ये गम दिल से निकल जाए,
अगर तुम मिलने आ जाओ

धुआँ जो कुछ घरों से उठ रहा है
न पूरे शहर पर छाए तो कहना

जो फ़स्ल ख़्वाब की तैयार है तो ये जानो
कि वक़्त आ गया फिर दर्द कोई बोने का
– जावेद अख़्तर

नहीं मिलते हो मुझसे
तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे
ज़माना मुझसे जल जाए,
अगर तुम मिलने आ जाओ

“इन चराग़ों में तेल ही कम था
क्यूं गिला फिर हमें हवा से रहे”
“हम तो बचपन में भी अकेले थे
सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे”
– जावेद अख़्तर

आज फिर दिल ने एक तमन्ना की,
आज फिर दिल को हमने समझाया….
– जावेद अख़्तर

जिधर जाते हैं
सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता
मुझे पामाल*
रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता

मुझे दुश्मन से भी
ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है
किसी का भी हो
सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता

तुम फ़ुज़ूल बातों का दिल पे बोझ मत लेना
हम तो ख़ैर कर लेंगे ज़िंदगी बसर तन्हा.!

ये ज़िन्दगी भी अजब कारोबार है कि मुझे
ख़ुशी है पाने की कोई न रंज खोने का
– जावेद अख़्तर

ग़लत बातों को ख़ामोशी
से सुनना, हामी भर लेना
बहुत हैं फ़ायदे इसमें
मगर अच्छा नहीं लगता

****

इसी जगह इसी दिन तो हुआ था ये एलान
अँधेरे हार गए ज़िंदाबाद हिन्दोस्तान

आगही से मिली है तन्हाई
आ मिरी जान मुझ को धोका दे

खुला है दर प तिरा इंतिज़ार जाता रहा
ख़ुलूस तो है मगर ए’तिबार जाता रहा

है पाश-पाश मगर फिर भी मुस्कुराता है
वो चेहरा जैसे हो टूटे हुए खिलौने का
– जावेद अख़्तर

Javed Akhtar Shayari In Hindi

बुलंदी पर इन्हें मिट्टी की
ख़ुशबू तक नहीं आती
ये वो शाखें हैं जिनको
अब शजर* अच्छा नहीं लगता

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ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों
पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है
कम बे-शक पर उन को
मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे

ख़ून से सींची है
मैं ने जो ज़मीं मर मर के
वो ज़मीं एक
सितम-गर ने कहा उस की है

ये दुनिया भर के झगड़े घर
के किस्‍से काम की बातें,
बला हर एक टल जाए,
अगर तुम मिलने आ जाओ.!

एहसान करो तो दुआओं में मेरी मौत मांगना,
अब जी भर गया है जिंदगी से !
एक छोटे से सवाल पर इतनी ख़ामोशी क्यों…
बस इतना ही तो पूछा था-
‘कभी वफा की किसी से’ …
– जावेद अख़्तर

ये क्यूँ बाक़ी रहे आतिश-ज़नों*,
ये भी जला डालो
कि सब बेघर हों और मेरा हो घर,
अच्छा नहीं लगता

तू तो मत कह हमें बुरा दुनियातू
ने ढाला है और ढले हैं हम
तब हम दोनों वक़्त चुरा कर लाते थे
अब मिलते हैं जब भी फ़ुर्सत होती !

सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है
हर घर में बस एक ही कमरा कम है
– जावेद अख़्तर

तुमको देखा तो ये ख़याल आया
ज़िन्दगी धूप तुम घना साया

डर हम को भी लगता है
रस्ते के सन्नाटे से
लेकिन एक सफ़र पर
ऐ दिल अब जाना तो होगा

दुख के जंगल में फिरते हैं
कब से मारे मारे लोग
जो होता है सह लेते हैं
कैसे हैं बेचारे लोग

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे
हमने क्या खोया, हमने क्या पाया

जब जब दर्द का बादल छाया, जब ग़म का साया लहराया
जब आंसू पलकों तक आया,जब यह तनहा दिल घबराया
हमने दिल को यह समझाया, दिल आखिर तू क्यों रोता है,
दुनिया में यूँ ही होता है.!

“ऊंची इमारतों से मकां मेरा घिर गया
कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए”
– जावेद अख़्तर

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते
वक़्त ने ऐसा गीत क्यूँ गाया

****

एक ये दिन जब अपनों ने
भी हम से नाता तोड़ लिया
एक वो दिन जब पेड़ की
शाख़ें बोझ हमारा सहती थीं

अब अगर ाओ तोह जाने के लिए मत आना,
सिर्फ एहसान जताने के लिए मत
आना मैंने पलकों पे तमन्नाएं सजा रखी हैं!

वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही है
ज़मीन सूरज की उँगलियों से फिसल रही है
– जावेद अख़्तर

रंज और दर्द की बस्ती का मैं बाशिन्दा हूँ
ये तो बस मैं हूँ के इस हाल में भी ज़िन्दा हूँ
ख़्वाब क्यूँ देखूँ वो कल जिसपे मैं शर्मिन्दा हूँ
मैं जो शर्मिन्दा हुआ तुम भी तो शरमाओगी

Javed Akhtar Shayari In Hindi

तुम ये कहते हो
कि मैं ग़ैर हूँ फिर भी शायद
निकल आए कोई
पहचान ज़रा देख तो लो

दिल में उम्मीद की सौ शम्में जला रखी हैं
ये हसीं शम्में बुझाने के लिए मत आना.!

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जो मुझको ज़िंदा जला रहे हैं वो बेख़बर हैं
कि मेरी ज़ंजीर धीरे-धीरे पिघल रही है
– जावेद अख़्तर

क्यूं मेरे साथ कोई और परेशान रहे
मेरी दुनिया है जो वीरान तो वीरान रहे
ज़िन्दगी का ये सफ़र तुमको तो आसान रहे
हमसफ़र मुझको बनाओगी तो पछताओगी

उस दरीचे में भी अब
कोई नहीं और हम भी
सर झुकाए हुए चुप-चाप गुज़र जाते हैं

जाते जाते वह मुझे, अच्छी निशानी दे गया,
उम्र भर दोहराऊंगा, ऐसी कहानी दे गया
उस से मैं कुछ पा सकू, ऐसी कहां उम्मीद थी…!

एक मैं क्या अभी आयेंगे दीवाने कितने
अभी गूंजेगे मुहब्बत के तराने कितने
ज़िन्दगी तुमको सुनायेगी फ़साने कितने
क्यूं समझती हो मुझे भूल नही पाओगी

अक़्ल ये कहती दुनिया
मिलती है बाज़ार में
दिल मगर ये कहता है
कुछ और बेहतर देखिए

ग़म भी वह शायद, बारे –ऐ- मेहरबानी दे गया खैर ,
मैं प्यासा रहा, पर उसने इतना तोह किया
मेरी पलकों की कतारों को वह पानी दे गया..!

दर्द के फूल भी खिलते है
बिखर जाते है जख्म कैसे भी हो
कुछ रोज़ में भर जाते है .
– जावेद अख़्तर

*****

छत की कड़ियों से उतरते हैं
मिरे ख़्वाब मगर
मेरी दीवारों से टकरा के बिखर जाते हैं

क्यों डरें ज़िन्दगी में क्या होगा,
कुछ न होगा तोह तज़ुर्बा होगा
हँसती आँखों में झांक कर देखो,
कोई आंसूं कहीं छुपा होगा.!

बंध गई थी दिल में कुछ उम्मीद सी
ख़ैर तुम ने जो किया अच्छा किया
– जावेद अख़्तर

ग़ैरों को कब फ़ुर्सत है दुख देने की
जब होता है कोई हमदम होता है

उफुक फलांग के उमरा हुजूम लोगों का
कोई मीनारे से उतरा, कोई मुंडेरों से किसी
ने सीढियां लपकीं, हटाई दीवारें…!

मैं क़त्ल तो हो गया तुम्हारी गली में लेकिन
मिरे लहू से तुम्हारी दीवार गल रही है.
– जावेद अख़्तर

Javed Akhtar Shayari In Hindi

बस चन्द करोड़ों सालों में सूरज की आग
बुझेगी जब और राख उड़ेगी
सूरज से जब कोई चाँद न डूबेगा !

इस शहर में जी ने के अंदाज निराले है ,
होंठो पे लतीफे है आवाज़ में चाले है !
– जावेद अख़्तर

हर तरफ़ शोर उसी
नाम का है दुनिया में
कोई उस को जो
पुकारे तो पुकारे कैसे

मैं उड़ते हुए पंछियों को डराता हुआ
कुचलता हुआ घास की कलगियाँ गिराता
हुआ गर्दनें इन दरख्तों की,छुपता हुआ जिनके.!

न जलने पाते थे जिसके चूल्हे भी हर सवेरे
सुना है कल रात से वो बस्ती भी जल रही है.
– जावेद अख़्तरइक मोहब्बत की ये

इक मोहब्बत की ये
तस्वीर है दो रंगों में
शौक़ सब मेरा है
और सारी हया उस की है

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तुम्हारी फुर्कत में जो गुजरता है,
और फिर भी नहीं गुजरता,
मैं वक्त कैसे बयाँ करूँ , वक्त और क्या है?
कि वक्त बांगे जरस नहीं जो बता रहा है.!

वो मुफ़लिसों से कहता था ,
की दिन बदल भी सकते हैं !
– जावेद अख़्तर

धीरे धीरे वह पूरा गोला निगल के बाहर निकलती है रात,
अपनी पीली सी जीभ खोले, गुलाम है वक्त गर्दिशों का,
कि जैसे उसका गुलाम मैं हूँ !!

तुम अपने कस्बों में जाके देखो वहां
भी अब शहर ही बसे हैं
कि ढूंढते हो जो जिंदगी तुम
वो जिंदगी अब कहीं नहीं है
– जावेद अख़्तर

****

उस के बंदों को देख कर कहिए
हम को उम्मीद क्या ख़ुदा से रहे

अपनी वजहें-बर्बादी सुनिये तो मजे की
है जिंदगी से यूं खेले जैसे दूसरे की है
– जावेद अख़्तर

मैं बचपन में खिलौने तोड़ता था
मिरे अंजाम की वो इब्तिदा थी

“इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं
होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं”
– जावेद अख़्तर

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया
उम्र भर दोहराऊँगा ऐसी कहानी दे गया
उससे मैं कुछ पा सकूँ ऐसी कहाँ उम्मीद थी
ग़म भी वो शायद बरा-ए-मेहरबानी दे गया
सब हवायें ले गया मेरे समंदर की कोई
और मुझ को एक कश्ती बादबानी दे गया
ख़ैर मैं प्यासा रहा पर उस ने इतना तो किया
मेरी पलकों की कतारों को वो पानी दे गया
– जावेद अख़्तर

Javed Akhtar Shayari In Hindi

कोई शिकवा न ग़म न कोई याद
बैठे बैठे बस आँख भर आई
– जावेद अख़्तर

किन लफ़्ज़ों में इतनी कड़वी,
इतनी कसैली बात लिखूं
शेर की मैं तहज़ीब निभाऊं या
अपने हालात लिखूं
– जावेद अख़्तर

अगर दुसरो के जोर पर उड़कर दिखाओगे
तो अपने पैरो से उड़ने की हुनर भूल जाओगे
– जावेद अख़्तर

आज मैंने अपना फिर सौदा किया
और फिर मैं दूर से देखा किया
ज़िन्‍दगी भर मेरे काम आए असूल
एक एक करके मैं उन्‍हें बेचा किया
कुछ कमी अपनी वफ़ाओं में भी थी
तुम से क्‍या कहते कि तुमने क्‍या किया
हो गई थी दिल को कुछ उम्‍मीद सी
खैर तुमने जो किया अच्‍छा किया
– जावेद अख़्तर

सँवरना ही है तो किसी की नजरों में संवरिये,
आईने में खुद का मिजाज नहीं पूछा करते
– जावेद अख़्तर

एक ये घर जिस घर में मेरा साज़-ओ-सामाँ रहता है
एक वो घर जिस घर में मेरी बूढ़ी नानी रहती थीं
– जावेद अख़्तर

आप भी आए, हम को भी बुलाते रहिए
दोस्ती ज़ुर्म नहीं, दोस्त बनाते रहिए
– जावेद अख़्तर

“मैं भूल जाऊं अब यही मुनासिब है,
मगर भुलाना भी चाहूं तोह किस तरह भुलाऊँ,
की तुम तोह फिर भी हकीकत हो, कोई ख्वाब नहीं.”
– जावेद अख़्तर

बहुत आसान है पहचान इसकी
अगर दुखता नहीं तो दिल नहीं है
– जावेद अख़्तर

****

यही हालात इब्तदा से रहे लोग हमसे ख़फ़ा-ख़फ़ा-से रहे
बेवफ़ा तुम कभी न थे लेकिन ये भी सच है कि बेवफ़ा-से रहे
इन चिराग़ों में तेल ही कम था क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे
बहस, शतरंज, शेर, मौसीक़ी तुम नहीं रहे तो ये दिलासे रहे
उसके बंदों को देखकर कहिये हमको उम्मीद क्या ख़ुदा से रहे
ज़िन्दगी की शराब माँगते हो हमको देखो कि पी के प्यासे रहे
– जावेद अख़्तर

ज़रा सी बात जो फैली तो दास्तान बनी
वो बात ख़त्म हुई दास्तान बाक़ी है
– जावेद अख़्तर

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ख़ुदकुशी क्या दुःखों का हल बनती
मौत के अपने सौ झमेले थे
– जावेद अख़्तर

ज़हनो-दिल आज भूखे मरते हैं
उन दिनों हमने फ़ाक़े झेले थे
– जावेद अख़्तर

ढलता सूरज फैला जंगल रस्ता गुम
हमसे पूछो कैसा आलम होता है
– जावेद अख़्तर

हमको तो बस तलाश नए रास्तों की है…
हम हैं मुसाफ़िर ऐसे जो मंज़िल से आए हैं…
– जावेद अख़्तर

Javed Akhtar Shayari In Hindi

ग़ैरों को कब फ़ुरसत है दुख देने की
जब होता है कोई हमदम होता है
– जावेद अख़्तर

ज़हन की शाख़ों पर अशआर आ जाते हैं
जब तेरी यादों का मौसम होता है,
– जावेद अख़्तर

ये तसल्ली है कि हैं नाशाद सब
मैं अकेला ही नहीं बरबाद सब
– जावेद अख़्तर

सब की ख़ातिर हैं यहाँ सब अजनबी
और कहने को हैं घर आबाद सब
– जावेद अख़्तर

उस से मैं कुछ पा सकू ऐसी कहाँ उम्मीद थी
ग़म भी शायद बराए मेहरबानी दे गया
– जावेद अख़्तर

भूलके सब रंजिशें सब एक हैं
मैं बताऊँ सबको होगा याद सब.
– जावेद अख़्तर

चाँद यादों के दिये थोड़ी तमन्ना कुछ ख्वाब ,
ज़िन्दगी तुझ से ज़्यादा नहीं माँगा हम नैय…
– जावेद अख़्तर

सब को दावा-ए-वफ़ा सबको यक़ीं
इस अदकारी में हैं उस्ताद सब
– जावेद अख़्तर

चार लफ़्ज़ों में कहो जो भी कहो
उसको कब फ़ुरसत सुने फ़रियाद सब
– जावेद अख़्तर

शहर के हाकिम का ये फ़रमान है
क़ैद में कहलायेंगे आज़ाद सब
– जावेद अख़्तर

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 4 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 5 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।

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