वफ़ा शायरी

Wafa Shayari in Hindi

वफ़ा शायरी (Wafa Shayari in Hindi)

Shayari on Wafa in Hindi

ना अदा से होंगी ना वफा से होंगी
अब मोहब्बत जिससे भी होगी
एग्जाम के बाद होंगी

वो मिली भी तो क्या मिली बन के बेवफा मिली,
इतने तो मेरे गुनाह ना थे जितनी मुझे सजा मिली।

सारे सपने तोड़कर बैठे हैं,दिल का अरमान छोड़कर बैठे हैं..
ना कीजिये हमसे वफ़ा की बातें, अभी-अभी दिल के टुकड़े जोड़कर बैठे हैं…!

तेरा ख्याल दिल से मिटाया नहीं अभी,
बेवफा मैंने तुझको भुलाया नहीं अभी।

Wafa Shayari in Hindi
Wafa Shayari in Hindi

दिल के दरिया में धड़कन की कश्ती है,
ख़्वाबों की दुनिया में यादों की बस्ती है,
मोहब्बत के बाजार में चाहत का सौदा है,
वफ़ा की कीमत से तो बेवफाई सस्ती है।

ढूंढ़ तो लेते अपने प्यार को हम,
शहर में भीड़ इतनी भी न थी,
पर रोक दी तलाश हमने,
क्योंकि वो खोये नहीं बदल गए थे।

कैसे लोग बसते है इस जहाँ में,
एक से वफ़ा कर नही सकते,
दूसरे से दिल लगा लेते है..

बहुत अजीब हैं ये मोहब्बत करने वाले,
बेवफाई करो तो रोते हैं और वफा करो तो रुलाते हैं।

मेरी दास्ताँ-ए-वफ़ा बस इतनी सी है,
उसकी खातिर उसी को छोड़ दिया…

हमसे न करिये बातें यूँ बेरुखी से सनम,
होने लगे हो कुछ-कुछ बेवफा से तुम।

अपने तजुर्बे की आज़माइश की ज़िद थी,
वर्ना हमको था मालूम कि तुम बेवफा हो जाओगे।

कितनी भी सच्ची मोहब्बत कर लो,
वफा का लोग साथ छोड़ ही देते है.

यूँ है सबकुछ मेरे पास बस दवा-ए-दिल नही,
दूर वो मुझसे है पर मैं उस से नाराज नहीं,
मालूम है अब भी मोहब्बत करता है वो मुझसे,
वो थोड़ा सा जिद्दी है लेकिन बेवफा नहीं।

मेरे अलावा किसी और को अपना महबूब बना कर देख ले,
तेरी हर धड़कन कहेगी उसकी वफ़ा मैं कुछ और बात थी…

उँगलियाँ आज भी इसी सोच में गुम हैं,
कि कैसे उसने नए हाथ को थामा होगा।

Read Also

वफ़ा शायरी

नज़ारे तो बदलेंगे ही ये तो कुदरत है,
अफ़सोस तो हमें तेरे बदलने का हुआ है।

मेरी तलाश का है जुर्म या मेरी वफा का क़सूर,
जो दिल के करीब आया वही वफा ना कर सका

रुशवा क्यों करते हो तुम इश्क़ को, ए दुनिया वालो,
मेहबूब तुम्हारा बेवफा है, तो इश्क़ का क्या गनाह।

डरा -धमका के तुम हमसे वफ़ा करने को कहते हो
कहीं तलवार से भी पाँव का काँटा निकलता है?

मोहब्बत से रिहा होना ज़रूरी हो गया है,
मेरा तुझसे जुदा होना ज़रूरी हो गया है,
वफ़ा के तजुर्बे करते हुए तो उम्र गुजरी,
ज़रा सा बेवफा होना ज़रूरी हो गया है।

वो जमाने में यूँ ही
बेवफ़ा मशहूर हो गये दोस्त,
हजारों चाहने वाले थे किस-किस से
वफ़ा करते.

क्या जानो तुम बेवफाई की हद दोस्तों,
वो हमसे इश्क सीखती रही किसी ओर के लिए।

दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो,
वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं..

अब वफ़ा का नाम न ले कोई
हमें बेवफ़ा की तलाश है,
पत्थर का दिल सीने में हो
हमें उस खुदा की तलाश है.

मत रख हमसे वफा की उम्मीद ऐ सनम,
हमने हर दम बेवफाई पायी है,
मत ढूंढ हमारे जिस्म पे जख्म के निशान,
हमने हर चोट दिल पे खायी है।

कभी न कभी वो मेरे बारे में सोंचेगी ज़रूर,
के हासिल होने की उम्मीद भी नहीं फिर भी वफ़ा करता था…

आग दिल में लगी
जब वो खफ़ा हो गए,
महसूस हुआ तब जब वो
जुदा हो गए.
करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो हमें,
पर बहुत कुछ दे गए जब बेवफ़ा हो गए.

वफ़ा का नाम मत लो यारों.
वफ़ा दिल को दुखाती है.
वफ़ा का नाम लेने से हमें
एक बेवफा की याद आती है.

मैं नादान था जो
वफ़ा को तलाश करता रहा ग़ालिब,
ये भी ना सोचा की अपनी सांस भी
एक दिन बेवफा बन जाएगी.

बिछड़ के तुमसे ज़िन्दगी सज़ा लगती है,
ये सांस भी जैसे मुझसे ख़फ़ा लगती है,
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किससे करूँ?
मुझको तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफा लगती है.

वफ़ा पर शायरी

मुझसे मेरी वफ़ा का सबूत मांग रहा है,
खुद बेवफ़ा हो के मुझसे वफ़ा मांग रहा है.

अब इस से बढ़ कर क्या हो एह्तायत-ए-वफ़ा,
मैं तेरे शहर से गुजरूँ तुझे खबर न करूं.

वफाये मांगते फिरते है फकीरों की तरह
अजीब लोग है कहते है मुहब्बत की है।

एक जाम उलफत के नाम,
एक जाम मुहब्बत के नाम.
एक जाम वफ़ा के नाम,
पूरी बोतल बेवफा के नाम,
और पूरा ठेका दोस्तों के नाम

मुझे भी बना दे ऐ खुदा -दिल तोड़ने वाला
कबतक वफा करूँगा – बेवफाओ के शहर मे.

उन्हें बेवफा कहूँ तो तोहीन हो वफा की… .
वो वफा निभा तो रहे है कभी इधर कभी उधर

मेरी वफा कि गवाही सितारे देते रहेँ,
बस मेरे चाँद को ही मुझ पे यकीन ना आया.

टूट गए हम तुम्हे चाहते चाहते
अब हमसे वफ़ा की उम्मीद ना करना।

मेरी किस्मत में है एक दिन गिरफ्तार-ए-वफ़ा होना
मेरे चेहरे पे तेरे प्यार का इलज़ाम लिखा है.

उँगलियाँ मेरी वफ़ा पर न उठाना लोगों,
जिसको शक हो वो मुझसे निबाह कर देखे।

हमें मालूम है
दो दिल जुदाई सह नहीं सकते
मगर रस्मे-वफ़ा ये है कि
ये भी कह नहीं सकते
जरा कुछ देर तुम उन साहिलों कि
चीख सुन भर लो
जो लहरों में तो डूबे हैं,
मगर संग बह
नहीं सकते

बात वफाओं की होती तो
कभी न हटते हम,
खेल नसीब का था.
उसे किस तरह तब्दील करते.

आज के दौर में उम्मीद वफ़ा कैसे रखें,
धूप में बैठा है खुद पेड़
लगाने वाला.

बहुत रोती हैं वो आँखें जो मुहब्बत करती हैं,
वफा की बूँदों में अधूरी कहानी लिख जाती हैं.

चलो छोड़ो ये बहस कि
वफ़ा किसने की
और बेवफा कौन है
तुम तो ये बताओ कि आज
तन्हा कौन है.

Bewafa Shayari In Hindi

मोहब्बत का नतीजा दुनिया में
हमने बुरा देखा,
जिन्हे दावा था वफा का उन्हें भी
हमने बेवफा देखा.

किसी की खातिर
मोहब्बत की इन्तेहाँ कर दो,
लेकिन इतना भी नहीं कि
उसको खुदा कर दो,
मत चाहो किसी को टूट कर
इस कदर इतना,
कि अपनी वफाओं से उसको
बेवफा कर दो.

ना पूछ मेरे सब्र की
इंतेहा कहाँ तक हैं,
तू सितम कर ले,
तेरी हसरत जहाँ तक हैं.
वफ़ा की उम्मीद,
जिन्हें होगी उन्हें होगी,
हमें तो देखना है,
तू बेवफ़ा कहाँ तक हैं.

हर किसी की जिंदगी का
एक ही मकसद है,
खुद भले हों बेवफ़ा
लेकिन तलाश वफ़ा की करते है.

थोड़ी दीवानगी मै लाऊगा,
थोड़ी वफा तुम ले आना
साझे में कर लेंगे फिर से
कारोबार-ए- मौहब्बत.

बेवफा भी कैसे कह दूँ तुमको,
वफा की बातें कभी हुई ही नही थी.

वो दिल क्या जो मिलने की दुआ न करे,
तुम्हें भुलकर जिऊ यह खुदा न करे,
रहे तेरी दोस्ती मेरी जिन्दगानी बनकर,
यह बात और है जिन्दगी वफा न करे.

अगर इश्क करो तो अदाब-ए-वफा भी सीखो
ये चंद दिन की बेकरारी मोहब्बत नहीं होती.

Wafa Shayari in Hindi

इक़रार -ऐ-मुहब्बत ऐहदे-ऐ.वफ़ा सब झूठी सच्ची बातें हैं “इक़बाल”
हर शख्स खुदी की मस्ती में बस अपने खातिर जीता है

तरस खाओ मुझ पर, बस इतना बताओ हमदम,
तुम्हें वफ़ा नहीं आती, या तुमसे की नहीं जाती.

माना कि तुम गुफ़्तगू के फन में माहिर हो,
वफ़ा के लफ्ज़ पे अटको तो हमें याद कर लेना.

वफ़ा इख़्लास क़ुर्बानी मोहब्बत
अब इन लफ़्ज़ों का पीछा क्यूँ करें हम
जौन एलिया

कैसी हया कहाँ की
वफ़ा पास-ए-ख़ल्क़ क्या
हाँ ये सही कि आप को आना
यहाँ न था

जाओ भी क्या करोगे मेहर-ओ-वफ़ा
बार-हा आज़मा के देख लिया

बूढ़ों के साथ लोग कहाँ तक वफ़ा करें
बूढ़ों को भी जो मौत न आए तो
क्या करें

दुनिया के सितम याद न
अपनी ही वफ़ा याद
अब मुझको नहीं कुछ भी
मोहब्बत के सिवा याद

2 Lines Wafa Shayari

बेवफ़ाई पे तेरी जी है फ़िदा
क़हर होता जो बा-वफ़ा होता

मोहब्बत अदावत वफ़ा बे-रुख़ी
किराए के घर थे बदलते रहे

मैं सोचती हूँ कि इक जिस्म के पुजारी को
मेरी वफ़ा ने वफ़ा का सुहाग क्यूँ समझा

वफ़ा जिस से की बेवफ़ा हो गया
जिसे बुत बनाया ख़ुदा हो गया

क्या मस्लहत-शनास था वो आदमी ‘क़तील’
मजबूरियों का जिस ने वफ़ा नाम रख दिया

मुझ से क्या हो सका वफ़ा के सिवा
मुझ को मिलता भी क्या सज़ा के सिवा

न मुदारात हमारी न अदू से नफ़रत
न वफ़ा ही तुम्हें आई न जफ़ा ही आई

कौन उठाएगा तुम्हारी ये जफ़ा मेरे बाद
याद आएगी बहुत मेरी वफ़ा मेरे बाद

वफ़ा शायरी हिंदी में

इन वफ़ादारी के वादों को इलाही क्या हुआ
वो वफ़ाएँ करने वाले बेवफ़ा क्यूँ हो गए

पाबंद-ऐ-वफा रहेंगे पर, कोई सफाई ना देंगे,
साये की तरह तेरे साथ होंगे पर, दिखाई ना देंगे.

गुज़र गया दिन अपनी तमाम रौनके लेकर
ज़िन्दगी ने वफ़ा कि तो कल फिर सिलसिले होंगे.

परवाह करने वाले रूला जाते है,
अपना समझने वाले पराया बना जाते है,
चाहे जितनी वफाऐं कर लो इनसे,
न छोडेगे तुमको कहकर छोड जाते हैं.

Read Also

इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here