मजबूर शायरी

Majboor Shayari

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मजबूर शायरी | Majboor Shayari

जीने की चाह थी पर मजबूर थे कितने,
तलाश थी हमें तुम्हारी पर तुम दूर थे कितने.

किसी की मजबूरी
कोई समझता नहीं
दिल टूटे तो दर्द होता है
मगर कोई कहता नहीं !!

मै क्या किसी को रास्ता दिखाऊंगा
मै तो खुद भटक रहा हूँ मंजिल की तलाश में

धीरे-धीरे दूर होते गये,
वक्त के आगे मजबूर होते गये,
इश्क़ में हम ने ऐसी चोट खाई कि
हम बेवफ़ा और वो बेकसूर होते गये.

कभी गम तो कभी ख़ुशी देखी
हमने अक्सर मजबूरी और बेबसी देखी
उनकी नाराज़गी को हम क्या समझें
हमने तो खुद अपनी तकदीर
की बेबसी देखी !!

तसल्ली से पढा होता तो समझ मे आ जाते हम
कुछ पन्ने. बिना पढे ही पलट दिये होग तुमने

वफ़ाओ की बातें की जफ़ाओ के सामने,
ले चले हम चिराग हवाओं के सामने,
उठे है जब भी हाथ बदली है किस्मतें,
मजबूर है खुदा भी दुआओं क सामने.

क्या गिला करें तेरी मजबूरियों का हम
तू भी इंसान है कोई खुदा तो नहीं
मेरा वक़्त जो होता मेरे मुनासिब
मजबूरिओं को बेच कर तेरा
दिल खरीद लेता !!

दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे
वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे

किसी की अच्छाई का इतना फायदा न उठायें,
कि वो बुरा बनने के लिए मजबूर हो जाए.

आप दिल से यूँ पुकारा ना करो
हमको यूँ प्यार से इशारा ना करो
हम दूर हैं आपसे ये मजबूरी है हमारी
आप तन्हाइयों मे यूँ रुलाया ना करो !!

अगर मोहब्बत नही थी तो बता दिया होता
तेरे एक चुप ने मेरी ज़िन्दगी तबाह कर दी

मजबूरियॉ ओढ़ के निकलता हूं
घर से आजकल
वरना शौक तो आज भी है
बारिशों में भीगनें का !!

आदत तो मजबूर कर देती है हर इंसान को
कभी उन्हें भी तो रूठने का मौका दिया करों,
अक्सर तुम रूठ के मनवाने का लुफ्त उठाते हो
तो कभी उन्हें मनाने का मजा भी लिया करो

चाँद की चांदनी आँखों में उतर आयी
कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरी तन्हाई
ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के हल्के
कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई !!

कोई ठुकरा दे तो हँस कर जी लेना
क्युकी मोहब्बत की दुनिया में जबरजस्ती नही होती

वक्त नूर को बेनूर कर देता हैं,
छोटे से जख्म को नासूर कर देता है,
कौन चाहता है अपने से दूर होना,
लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता हैं.

मिलना एक इत्तेफ़ाक है
और बिछड़ना मजबूरी है
चार दिन की इस जिन्दगी में
सबका साथ होना जरूरी है !!

हमारी ज़िन्दगी में कुछ लोग ऐसे भी होते है
जिनके साथ कितना भी झगडा हो जाए पर
उसे छोड़ना बहुत मुश्किल होता है !!

मोहब्बत किस को कहते हैं,
मोहब्बत कैसी होती हैं,
तेरा मजबूर कर देना
मेरा मजबूर हो जाना.

ज़िन्दगी में बेशक हर मौके का फायदा उठाओ !
मगर किसी के हालात और मजबूरी का नहीं !!

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Majboor Shayari

कितने मजबूर हैं हम
प्यार के हाथों
ना तुझे पाने की औकात
ना तुझे खोने का हौसला !!

ख़ामोश थे हम तो मगरूर समझ लिया,
चुप हैं हम तो मजबूर समझ लिया,
यही आप की खुशनसीबी है कि हम इतने करीब है,
फिर भी आप ने दूर समझ लिया.

जब कोई आपसे मजबूरी में जुदा होता है
जरूरी नही वो इंसान वेबफा होता है
जब कोई देता आपको जुदाई के आँसू
तन्हाइयों में वो आपसे ज्यादा रोता है !!

हालात मुझे कितना मजबूर करती हैं,
इल्म नही उसे, वो मुझे मजबूत करती है.

थके लोगों को मजबूरी में
चलते देख लेता हूँ
मैं बस की खिड़कियों से ये
तमाशे देख लेता हूँ !!

फिर यूँ हुआ कि जब भी
जरुरत पड़ी मुझे
हर शख्स इत्तफाक से
मजबूर हो गया !!

वो होकर मजबूर हमारी जिंदगी से चले गये,
आजकल उनका रहना हमारे ख्यालों में होता है.

मेरे दिल की मजबूरी को कोई इल्जाम न दे
मुझे याद रख बेशक मेरा नाम न ले
तेरा वहम है कि मैंने भुला दिया तुझे
मेरी एक भी साँस ऐसी नहीं जो
तेरा नाम न ले !!

सुकून हम अपने दिल का अब खो चुके है,
हम खुद को गम-ऐ-सागर में डुबो चुके हैं,
क्यों मजबूर करते हो हमें, ये खत दिखाकर
हम पहले से ही उदास है, बहुत रो चुके हैं.

हमने खुदा से बोला वो छोड़ के चली गई
न जाने उसकी क्या मजबूरी थी
खुदा ने कहा इसमें उसका कोई कसूर नहीं
ये कहानी तो मैंने लिखी ही अधूरी थी !!

हम अपने आप पर गुरूर नहीं करते,
किसी को प्यार करने पर मजबूर नही करते,
जिसे एक बार दिल से दोस्त बना ले,
उसे मरते दम तक दिल से दूर नहीं करते.

दम तोड़ जाती है हर शिकायत
लबों पे आकर
जब मासूमियत से वो कहती है
मैंने क्या किया है !!

तेरे लिए खुद को मजबूर कर लिया,
जख्मों को अपने नासूर कर लिया,
मेरे दिल में क्या था ये जाने बिना,
तूने खुद को हमसे कितना दूर कर लिया.

क्यूँ करते हो वफ़ा का सौदा
अपनी मजबूरिओं के नाम पर
मैं तो अब भी वो ही हूँ
जो तेरे लिए जमाने से लड़ा था !!

किस्मत ने तुमसे दूर कर दिया,
अकेलेपन ने दिल को मजबूर कर दिया,
हम भी जिन्दगी से मुँह मोड़ लेते मगर
तुम्हारे इन्तजार ने जीने पर मजबूर कर दिया.

लिख दूं किताबें तेरी मासूमियत
पर फिर डर लगता है
कहीं हर कोई तेरा तलबगार
ना हो जाये !!

उम्मीद ऐसी हो जो जीने को मजबूर करें,
राह ऐसी हो, जो चलने को मजबूर करें,
महक कम न हो कभी अपनी दोस्ती की,
दोस्ती ऐसी हो जो मिलने को मजबूर करें.

कोई मजबूरी होगी जो वफा
कर ना सके
मेरे मेहबूब को ना शामिल
करो बेवफाओ में !!

अब क्या कहें किस्सा हम दिल-ए-मजबूर का,
एक ही दोस्त मिला और वो भी दूर का.

महफिल मैं कुछ तो सुनाना पडता है
ग़म छुपाकर मुस्कुराना पडता है
कभी उनके हम भी थे दोस्त
आज कल उन्हे याद दिलाना पडता है !!

Majboor Shayari

राजी रहा करो खुदा की रजा में,
तुम से भी बहुत मजबूर इंसान है इस जहाँ में.

मुस्कुरा देता हूँ अक्सर देखकर पुराने खत तेरे
तू झूठ भी कितनी सच्चाई से लिखती थी !!

पैगाम कुछ ऐसा लिखों कि
कलम भी रोने को मजबूर हो जाएँ,
हर लफ्ज में वो दर्द भी दो कि
पढ़ने वाला प्यार करने को मजबूर हो जाएँ.

मजबूरी में जब जुदा होता है
ज़रूरी नहीं के वो बेवफा होता है
दे कर वो आपकी आँखों में आँसू
अकेले में आपसे भी ज्यादा रोता है !!

बोझ उठाना शौक़ कहाँ है
मजबूरी का सौदा है रहते रहते
स्टेशन पर लोग क़ुली हो जाते हैं !!

इस दिल की दुआ तूने कबूल नहीं की,
मजबूर तो हम थे, तू मजबूर नहीं थी.

ये न समझ के मैं भूल गया हूँ तुझे
तेरी खुशबू मेरी सांसो में आज भी है
मजबूरी ने निभाने न दी मोहब्बत
सच्चाई तो मेरी वफ़ा में आज भी है !!

ऐ बेवफ़ा थाम ले मुझको मजबूर हूँ कितना,
मुझको सजा न दे मैं बेकसूर हूँ कितना,
तेरी बेवफ़ाई ने कर दिया है मुझे पागल,
और लोग कहते हैं मैं मगरूर हूँ कितना.

वो रोए बहुत पर मुह मोड़ के रोए
कोई तो मजबूरी होगी दिल तोड़ कर रोए
मेरे सामने कर दिए मेरे तस्वीर के टुकड़े
पता चला पीछे वो उन्हें जोड़ के रोए !!

इंसान जब दिल के हाथो मजबूर होता है,
तो झूठे प्यार पर भी बड़ा गुरूर होता है.

खामोशी समझदारी भी है
और मजबूरी भी
कहीं नज़दीकियां बढ़ाती है
और कहीं दूरी भी !!

हमें सीने से लगाकर हमारी सारी कसक दूर कर दो,
हम सिर्फ तुम्हारे हो जाएँ हमें इतना मजबूर कर दो.

ज़िंदगी में कुछ ऐसे रास्ते भी आते
कभी-कभी
जंहा से गुजरना सिर्फ़ और सिर्फ़
मज़बूरी होती हैं !!

हिम्मत इतनी थी समुन्दर भी पार कर सकते थे,
मजबूर इतने हुए कि दो बूँद आँसुओ ने डुबो दिया.

आती जाती साँसों सी कट रही है ज़िन्दगी
साँस लेना ज़िन्दगी की मज़बूरी हो जैसे !!

Majboor Shayari

बहाना कोई तो दे ऐ जिदंगी,
कि जीने के लिए मजबूर हो जाऊं.

कोई मजबूरी होगी जो वो याद
नहीं करते
सम्भल जा ऐ दिल तुझे तो रोने
का बहाना चाहिए !!

उम्र भर कुछ खाब दिल पर दस्तकें देते रहे,
हम कि मजबूर-ए-वफ़ा थे आहटें सुनते रहे.

क्या थी मजबूरी तेरी
जो रस्ते बदल लिए तूने
हर राज कह देने वाले
क्यों इतनी सी बात छुपा ली तूने !!

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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