लक्ष्य निर्धारण का महत्व क्या है और इसे कैसे पूरा करें?

Lakshya Nirdharan Ka Mahatva: बिना लक्ष्य के जीवन की यात्रा का कोई अंत नहीं। हर मनुष्य के जीवन में लक्ष्य का होना अनिवार्य है क्योंकि बिना लक्ष्य के व्यक्ति पशुओं के जैसे ही विचरण करता है। वह खूब परिश्रम करता है लेकिन उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाता क्योंकि उसके पास कोई उद्देश्य ही नहीं है। व्यक्ति के पास लक्ष्य नहीं रहेगा तो उसे पता ही नहीं रहेगा कि उसे जीवन में किस ऊंचाई तक पहुंचना है।

बिना लक्ष्य के व्यक्ति मेहनत तो करता है लेकिन उसको यह नहीं पता कि वह यह मेहनत किस लिए कर रहा है। जितने भी लोग आज सफल है, उनका भी एक लक्ष्य था। आज वे सफलता इस मुकाम तक तभी पहुंच पाए, जब उन्होंने अपना एक लक्ष्य निर्धारित किया था और उस लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरीके से जुट गए थे।

हम जब भी ऐसे सफल लोगों के बारे में पढ़ते हैं, उन्हें देखते हैं तो हमारे मन में भी यह इच्छा तो जरुर प्रकट होती है कि हम भी उनकी तरह सफल बने, हम भी उनकी तरह इतनी ऊंचाई पर पहुंचे। लेकिन बिना लक्ष्य के सफलता हासिल करना मुमकिन नहीं। इसलिए यदि जीवन में कुछ बड़ा बनना है, कुछ करके दिखाना है तो सबसे पहले एक लक्ष्य निर्धारित करना पड़ेगा और उस लक्ष्य पर दृढ़ रहना पड़ेगा।

तब जाकर आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे और एक सफल व्यक्ति बन पाएंगे। लेकिन लक्ष्य निर्धारित करना इतना आसान नहीं। क्योंकि कई लोग हैं जो जीवन में कुछ करना तो चाहते हैं लेकिन वह इस बात की विडंबना में रहते हैं कि आखिर वह क्या करें? क्योंकि परिस्थितियां उनके लक्ष्य को बदल देती है।

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ऐसे में आज के हमारे इस लेख को जरूर पढ़ें। जिसमें हम आपको जीवन में लक्ष्य के महत्व (Importance of Goal Setting In Hindi) को कैसे निर्धारित करें बताएंगे।

लक्ष्य निर्धारण का महत्व | Lakshya Nirdharan Ka Mahatva

इतिहासकारों और विद्वानों द्वारा लक्ष्य का महत्व

लक्ष्य के महत्व को इतिहास के सभी विद्वानों ने और महान व्यक्तियों ने परिभाषित किया है। उन्होंने भी लक्ष्य के महत्व को बताया है। महान क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस भी जीवन में लक्ष्य के महत्व को बताते हुए कहते हैं कि जीवन में कोई भी चीज इतनी हानिकारक और खतरनाक नहीं है, जितना बिना लक्ष्य के डांवाडोल स्थिति में रहना है।

महात्मा गांधी ने भी लक्ष्य के महत्व को बताते हुए कहा है कि अपने लक्ष्य पर दृढ़ आस्था हो तो इतिहास की धारा को भी बदला जा सकता है।

नेपोलियन हिल ने भी लक्ष्य के महत्व पर कहा है कि एक लक्ष्य एक समय सीमा के साथ देखा गया ऐसा सपना है, जिसके लिए व्यक्ति यदि सब कुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार हो जाए तो उसका एक दिन जितना सुनिश्चित है।

स्वामी विवेकानंद जी भी लक्ष्य के महत्व को बताते हैं। उनके अनुसार जीवन में एक ही लक्ष्य बनाओ और दिन-रात उसी लक्ष्य के बारे में सोचो, सपने में भी उसी लक्ष्य को देखो और फिर उस लक्ष्य को पाने में जुट जाओ। इस तरीके से आप भले ही एक छोटा सा लक्ष्य बनाओ लेकिन उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूरा मेहनत करो और तब तक मत रुको जब तक वह लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता। जब आप एक लक्ष्य को प्राप्त कर लेते हैं बड़ा लक्ष्य बनाने के लिए आप में आत्मविश्वास आ जाता है।

महाभारत से सिखे लक्ष्य का महत्व

लक्ष्य के महत्व को महाभारत के कथा से भी समझ सकते हैं। एक बार गुरु द्रोणाचार्य पांचो पांडव अर्जुन, नकुल, भीम, युधिष्ठिर और सहदेव को जंगल में बुलाते हैं और एक पेड़ की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि पेड़ पर बैठी लकड़ी के चिड़िया की आंख पर तीर मारना है।

इस तरीके से द्रोणाचार्य बताते हुए सबसे पहले युधिष्ठिर को बुलाते हैं और उनके हाथों में तीर कमान थमाते हुए पूछते हैं कि युधिष्ठिर तुम्हें क्या दिख रहा है? तब युधिष्ठिर कहते हैं कि गुरुदेव मुझे मेरे भाई, आप यह पेड़ और पेड़ पर बैठी चिड़िया सब कुछ दिख रहा है। यह सुनते ही गुरु द्रोणाचार्य उसके हाथों से तीर कमान वापस ले लेते हैं और कहते हैं कि तुम अभी तक इस परीक्षा के लिए तैयार नहीं हो।

उसके बाद द्रोणाचार्य भीम को बुलाते हैं भीम से भी वही प्रश्न पूछते हैं लेकिन भीम के प्रश्नों से भी गुरु द्रोणाचार्य को संतुष्टि नहीं होती है, जिसके प्रश्नों का उत्तर सुनकर उनके हाथों से भी तीर कमान वापस ले लेते हैं। इस तरीके से एक-एक करके सभी पांडल पुत्रों को बुलाते हैं और यही प्रश्न करते हैं। लेकिन किसी के भी जवाब से गुरु द्रोणाचार्य संतुष्ट नहीं होते हैं।

तब वे आखिर में अर्जुन को बुलाते हैं। अर्जुन के हाथ में तीर कमान देते हुए गुरु द्रोणाचार्य अर्जुन से भी वही सवाल पूछते हैं कि वत्स बताओ तुम्हें क्या दिख रहा है? अर्जुन कहते हैं कि गुरुदेव मुझे चिड़िया की आंख दिख रही है। गुरुदेव पूछते हैं तुम्हें और कुछ भी नहीं दिख रहा? अर्जुन कहते है नहीं गुरु जी मुझे केवल मेरा लक्ष्य दिख रहा है, मुझे चिड़िया की आंख पर निशाना मारना है और मुझे केवल उसकी आंख दिख रही है।

इस जवाब को सुनकर गुरु द्रोणाचार्य प्रसन्न हो जाते हैं। इस तरह गुरु द्रोणाचार्य सभी पांचों पांडवों को यह सिख देना चाहते थे कि यदि सफलता पाना है तो ध्यान लक्ष्य पर होना चाहिए। इस कहानी से आपको भी यही सीखना है कि जीवन में सफलता तभी मिलती है जब आपका पूरा ध्यान लक्ष्य पर रहता है। जब ध्यान पर एकाग्रचित्त होकर मेहनत करते हैं तभी एक दिन सफलता मिलती है।

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लक्ष्य निर्धारित कैसे करें? (Importance of Goal Setting In Hindi)

जीवन में जितना जल्दी अपना लक्ष्य निर्धारित करेंगे, आपको उतनी जल्दी सफलता मिल जाएगी। इसलिए जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी आप अपने लक्ष्य को निर्धारित करने की कोशिश करें। हालांकि लक्ष्य निर्धारित करने की उम्र नहीं होती, जिस उम्र में इंसान को कुछ करने की चाहत उत्पन्न हो जाती है, उसी उम्र से उसका लक्ष्य बन जाता है।

लेकिन सबके साथ ऐसा नहीं होता। कुछ बच्चे होते हैं जो बचपन से ही कुछ बनने का सपना लिए वह आगे भी मेहनत करते हैं अपने उस इच्छा पर दृढ़ रहते हैं और फिर वह जीवन में सफलता पा लेते हैं। लेकिन सभी के मामले में यह एक समान नहीं होता। 

कुछ लोग अपने लक्ष्य को निर्धारित नहीं कर पाते। हालांकि वे लक्ष्य निर्धारित करना चाहते हैं लेकिन उन्हें समझ में नहीं आता क्योंकि कई बार वे एक लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं और उस पर मेहनत भी करना शुरू कर देते हैं। लेकिन कुछ समय के बाद उन्हें अपने निर्णय पर संदेह होने लगता है।

ऐसे में जब तक आप एक ऐसा लक्ष्य निर्धारित नहीं कर लेते जिस पर आप हमेशा दृढ़ रहे तब तक आप सफलता नहीं पा सकते। इसीलिए लक्ष्य निर्धारित करना है तो आप निम्नलिखित बातों को ध्यान रखें।

अपने लक्ष्य को स्वयं चुने, किसी और पर निर्भर ना रहे

हम में से कई लोग होते हैं जो अपने लक्ष्य को अन्य पर छोड़ देते हैं। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपने माता पिता की इच्छाओं को ही अपना लक्षृय समझ लेते हैं। माता-पिता बचपन से अपने बच्चे को कुछ बनाने की इच्छा रखते हैं और बच्चे को भी लगता है कि हमारा लक्ष्य वही है।

हालांकि बच्चे में कुछ और चीज की योग्यता होती है। उसकी इच्छा कुछ और करने की होती है लेकिन वह अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध नहीं जाना चाहता। लेकिन यदि आप अपनी इच्छा से लक्ष्य का चयन नहीं करते तो आप उस लक्ष्य को पाने के लिए दृढ़ भी नहीं रह पाते।

यदि आपको वह लक्ष्य प्राप्त हो भी जाती है तभी आप संतुष्ट नहीं रह पाते। इसीलिए परिवार या अन्य के इच्छा के विपरीत अपने इच्छा को ध्यान में रखते हुए लक्ष्य को निर्धारित करें।

अपनी योग्यता को पहचाने

जीवन में हर कोई सफल होना चाहता है, कुछ अच्छा करके दिखाना चाहता है। लेकिन उसके लिए एक लक्ष्य चाहिए और जब तक आपको पता नहीं रहेगा कि क्या करना है?, क्या बनना है? तब तक आप मेहनत शुरू नहीं कर सकते। ऐसे में यदि आपको लक्ष्य निर्धारित करने में दिक्कत हो रही है तो सबसे पहले तो आप अपनी योग्यता को पहचाने।

आप अपनी इच्छाओं को जाने, कुछ देर शांति से बैठे और अपने आपसे पूछे कि आपको किस चीज में रुचि है, किस चीज को पाने के लिए आप लगातार मेहनत कर सकते हैं। जब आपको जवाब मिल जाए तो उसी चीज को अपना लक्ष्य बनाते हुए आगे बढ़े।

लक्ष्य को पूरा करने में आने वाली बाधाओं का विश्लेषण करें

जब आप अपना एक लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं तो उसके बाद आपको उस लक्ष्य को पूरा करने में किन-किन बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। उसका विश्लेषण करें क्योंकि यदि आप में परेशानियों को सहने की क्षमता नहीं है तो आप लक्ष्य को नहीं पा सकते।

क्योंकि किसी भी लक्ष्य को पाने में मार्ग में बाधा तो अवश्य आती है और जो व्यक्ति सफलता की राह में आने वाली सभी समस्याओं का सामना करके आगे बढ़ता है। वह निश्चित रूप से अपने लक्ष्य को एक दिन प्राप्त कर लेता है। इसीलिए आपके लिए अच्छा होगा कि आप आगे बढ़ने से पहले ही बाधाओं का विश्लेषण करके अपने आप को मजबूत बना लें।

लक्ष्य को कैसे प्राप्त करें?

जब आप लक्ष्य निर्धारित करते हैं तो अब बारी आती है अपने लक्ष्य के लिए पूरी तरीके से जुट जाना। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले आपको अपने लक्ष्य पर दृढ़ रहना पड़ेगा। क्योंकि यदि आप अपने लक्ष्य पर दृढ़ नहीं है तो लोगों के बहकावे में आप तुरंत आ जाते हैं, छोटी सी मुश्किलों से डर के आप हार मानने लगते हैं।

अपने लक्ष्य के बारे में लोगों को बताएं क्योंकि बहुत से लोग होते हैं, जो अपने लक्ष्य को  लोगों से बताने से हिचकिचाते हैं क्योंकि उन्हें डर लगता है कि यदि वह असफल हो गए तो लोग ताना मारेंगे, लोग उनका मजाक उड़ाएंगे। लेकिन इसकी परवाह किए बिना लोगों को अपने लक्ष्य के बारे में बताएं।

आपके आसपास कई सारे ऐसे लोग होते हैं जो आपको प्रोत्साहित करेंगे, आपके हौसले को बढ़ाएंगे हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होगें जो आपको आगे बढ़ने से रोकेगें, आपको डिमोटिवेट करेंगे लेकिन आप उन लोगों से भी प्रोत्साहन पा सकते हैं ताकि सफलता पाने के बाद उन लोगों को जवाब दिया जा सके।

अपने लक्ष्य पर दृढ़ रहने के लिए आपको अपने आत्मविश्वास को बढ़ाना होगा। आपको अपने आत्मविश्वास को इस हद तक बढ़ाना है कि आपको चाहे लोग कितना ही क्यों ना कहे कि आप अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते लेकिन आपको अपने आप पर विश्वास रखना है।

अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए आपको प्रोत्साहित होना पड़ेगा और इसके लिए आप सफल लोगों के बारे में पढ़ें, उनके बारे में जाने कि उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राप्त के लिए कितना मेहनत किया। आप ऐसे लोगों से मिले जिन्होंने अपने जीवन में सफलता पा लिया है, ऐसे लोग आपको मार्गदर्शन देंगे।

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ऐसे लोगों के संपर्क में रहे, जिनका लक्ष्य आपकी तरह ही हो। क्योंकि कोई भी लक्ष्य केवल एक व्यक्ति निर्धारित नहीं करता है, एक विशेष लक्ष्य कई लोगों द्वारा निर्धारित किए गए होते हैं। ऐसे में आप उन लोगों के साथ संपर्क बनाकर रखेंगे तो आपको उनके अनुभवों से भी सीखने को मिलेगा, आपको यह भी जानने को मिलेगा कि वह अपने लक्ष्य प्राप्ती के लिए क्या रणनीति बनाए हैं ताकि आप भी उनसे कुछ फायदा ले सके।

अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मेहनत की शुरुआत आज से ही कर दें, इसके लिए किसी दिन का इंतजार ना करें। हालांकि लक्ष्य प्राप्ति के दौरान आपको कई सारी चीजों का बलिदान देना पड़ेगा जैसे पहले की तरह आप ज्यादातर समय अपने दोस्तों के साथ नहीं बिता पाएंगे, पहले की तरह बिंदास नहीं रह पाएंगे, अब आपको अपना ज्यादा समय पढ़ाई को देना पड़ेगा।

लेकिन इस बलिदान के परे आपको एक सपनों की दुनिया मिलेगी, जिसे पाकर आप अपने हर बलिदान के दुख को भूल जाएंगे।अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर रहे, कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका लक्ष्य छोटा है या बड़ा।

रात में सोते वक्त और सुबह उठते वक्त हर वक्त अपने लक्ष्य को दिमाग में रखे। जब भी आपको लग रहा है कि आप अपने राह से भटक रहे हैं तो आप अपने लक्ष्य को याद करें और अपने ध्यान को अपने लक्ष्य की ओर केंद्रित करें। अर्जुन की तरह आपको केवल अपना लक्ष्य दिखना चाहिए और कुछ भी नहीं।

निष्कर्ष

आज के लेख में हमने आपको लक्ष्य निर्धारण का महत्व (Lakshya Nirdharan Ka Mahatva), लक्ष्य को निर्धारित करने तथा लक्ष्य को प्राप्त करने के तरीके बताएं है। आप इन बातों को ध्यान में रखकर आज से ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की मेहनत शुरू कर सकते हैं।

यदि आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी तरीके से समर्पित हैं तो निश्चित ही एक दिन आपको लक्ष्य प्राप्त जरूर होगा। तो हमें उम्मीद है कि आज का यह लेख आपको अच्छा लगा होगा। इस लेख को जरूर शेयर करें।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 4 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 5 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।

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