क्या है मकर सक्रांति? जाने इसका महत्व और मनाने का कारण

क्या है मकर सक्रांति? जाने इसका महत्व और मनाने का कारण (Importance and Significance of Makar Sankranti in Hindi): विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है, जहां पर सबसे ज्यादा पर्व या उत्सव मनाएं जाते हैं। इस कारण ही भारत पूरे विश्व में अपनी अलग ही छवि बनाये हुए है। भारत में सभी पर्वों का विशेष महत्व होता है। उसी में से एक मकर सक्रांति का भी हिंदू धर्म (Hindu Religion) में विशेष महत्व है। भारत में इस पर्व को मनाने का तरीका अलग अलग जगह पर अलग अलग है।

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क्या है मकर सक्रांति? जाने इसका महत्व और मनाने का कारण (Importance and Significance of Makar Sankranti in Hindi):

मकर सक्रांति क्या है?

हमारे मन में एक सवाल जरूर आता होगा कि मकर सक्रांति (Makar Sankranti) क्या है? असल में सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही मकर सक्रांति कहा जाता है। मकर सक्रांति में मकर शब्द मकर राशि (Capricorn) को दर्शाता है जबकि सक्रांति शब्द “संक्रमण” अर्थात् प्रवेश को दर्शाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि (Sagittarius) से मकर राशि में प्रवेश करता है। इस विस्थापन (Shift) को ही सक्रांति कहते है। सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इस कारण इसे मकर सक्रांति कहा जाता है।

कब मनाया जाती है मकर सक्रांति?

कभी-कभी यह पर्व एक दिन पहले या एक दिन बाद में मनाया जाता है अर्थात् 13 या 15 जनवरी लेकिन ऐसा कम ही होता है। इस पर्व का सीधा संबंध पृथ्वी के भूगोल और सूर्य की स्थिति से है। जब भी सूर्य मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश करता है, उस दिन 14 जनवरी ही होता है। इसलिए यह पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है।

क्या होता है इस दिन?

इस दिन सूर्य उतरायण हो जाता है अर्थात् इस दिन धरती का उतरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड जाता है तो उतर से ही सूर्य निकलने लग जाता है। 6 माह सूर्य उतरायण रहता है और 6 माह दक्षिणायन रहता है। मान्यताओं की माने तो उतरायण में मृत्यु होने से मोक्ष प्राप्ति की सम्भावना रहती है। इस पर्व को लोग धार्मिक महत्व और प्रकृति से जोड़कर देखते है। इस दिन ऊर्जा और रोशनी देने वाले सूर्य भगवान की पूजा की जाती है। इस दिन वसंत ऋतु (Spring Season) की शुरुआत होती है।

क्या करते है इस दिन?

मकर सक्रांति को स्नान और दान का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन तीर्थों और पवित्र नदियों में स्नान को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन तिल, गुड़, फल और खिचड़ी दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन किये गये दान से सूर्य देवता बहुत प्रशन्न होते है। इस दिन पतंग (Kite) उड़ाने का विशेष महत्व है। इस दिन लोग बड़े उमंग से पतंगबाजी (Kite Flying) करते है और कई जगहों पर पतंगबाजी के बड़े बड़े आयोजन किये जाते है।

मकर सक्रांति का महत्व

एक साल में कुल 12 सक्रान्तियां आती है। इनमें मकर सक्रांति का सर्वाधिक महत्व है। क्योंकि यहीं से उतरायण पुण्य काल आरम्भ होता है। उतरायण को देवताओं के काल के रूप में पूजा जाता है। वैसे तो इस सम्पूर्ण काल को ही पवित्र (Holy) माना जाता है। परंतु इस समय का कुछ महत्व अधिक है। इसी के बाद ही सभी त्यौहार (Festival) आरम्भ होते है।

अलग अगल जहग पर अलग अलग तरीका

मकर सक्रांति को भारत के अलग अलग जगह पर अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। आंध्रप्रदेश, केरल और कर्नाटक में इसे सक्रांति कहा जाता है और तमिलनाडु में इसे पोंगल पर्व के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में नई फसल के स्वागत के रूप मनाया जाता है, जहां इसे लोहड़ी कहा जाता है। वहीं असम में इसे बिहू के रूप में इस पर्व को उल्लास से मनाया जाता है। हर प्रान्त और जगह पर इसके मनाने का तरीका अलग है।

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