राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास

History of RSS in Hindi: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिसे आरएसएस के नाम से भी जाना जाता है। आरएसएस के नाम से पूरे देश और दुनिया में फेमस भी है। क्योंकि आज की दुनिया में पूरे नाम से ज्यादा उसके निकनेम या यूं कहे कि छोटे नाम प्रसिद्ध है। आरएसएस एक ऐसा संघ है, जो आज की तारीख में सबसे बड़ा संगठन है।

History of RSS in Hindi
History of RSS in Hindi

चलिये आज के इस लेख में हम आपको राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानि आरएसएस के बारे में पूरी जानकारी देंगे, जिसके अंतर्गत इसके गठन से लेकर इसकी विचारधारा तक सारा निचोड़ होगा तो स्क्रॉल कीजिये और बड़े आराम से लेख को पढ़िये।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास | History of RSS in Hindi

आरएसएस की स्थापना कैसे हुई?

आरएसएस जिसे आम बोलचाल की भाषा में संघ कहा जाता है, इसकी स्थापना विजयादशमी के दिन हुई थी। 27 सितम्बर 1925 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना इनके संस्थापक डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी।

अब यहाँ एक रोचक बात यह थी कि 27 सितम्बर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अनौपचारिक ढंग से स्थापना हुई थी। क्योंकि कोई भी एक संगठन या संस्था खोलने के लिए पहले उसके नियम कानून, जिसे संविधान कहते है, उसके कार्यालय/ऑफिस के साथ-साथ पैसों के बारे में चर्चा होती है।

लेकिन आरएसएस की स्थापना (rss ki sthapna) बिलकुल ही अलग तरीके से हुई थी। डॉक्टर जी ने अपने घर 15-20 चुनिंदा लोगों को बुलाया और उनसे कहा कि आज से हम संघ शुरू कर रहे है और संघ शुरू हो गया। संघ शुरू करने का केवल एक ही मकसद था कि ब्रिटिशराज भारत में हिंदुओं को संगठित करना।

शुरुआत में संघ के सदस्यों को सभासद कहा जाता था और सारे सभासदों से इतनी उम्मीद रखी जाती थी कि वे पर्याप्त मात्रा में एक्सरसाइज़ करें और सप्ताह में एक बार सभी सभासद इकट्ठा हो।

डॉ. हेडगेवार बचपन को से ही ब्रिटिश राज से नफरत थी, वे उनके द्वारा लिए गए सारे क़ानूनों के खिलाफ थे। जब वो स्कूल पास करके कॉलेज में जा रहे थे तब कलकत्ता में भारत को आज़ाद करवाने के लिए एक लहर उठी थी, उसी लहर को ध्यान में रखते हुए हेडगेवार ने कलकत्ता से मेडिकल की परीक्षा दी और पास भी हो गए।

वहाँ कलकत्ता में अनेक क्रांतिकारियों से मिलते और उनसे विचार-विमर्श करते थे, उसी के चलते उन्होने नागपुर महाराष्ट्र में संघ की स्थापना की।

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आरएसएस का नामकरण

ठीक छ: महीने बाद यानि 17 अप्रैल 1926 के दिन डॉक्टर हेडगेवार ने अपने सहयोगियों संग एक बैठक अपने घर बुलाई। उस बैठक का मुख्य उद्देश्य संघ के नामकरण का था, उसके साथ संघ की विचारधारा स्पष्ट करना भी था। नामकारण के लिए सदस्यों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए, जिसमें तीन नामों पर विस्तार से चर्चा करना तय हुया। वो तीन नाम ये थे:

  1. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
  2. जरपटिका मण्डल
  3. भारतोद्धारक मण्डल

काफी विचार-विमर्श करने के बाद सभी सदस्यों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नाम पर मुहर लगाई और इसके साथ संघ के सदस्यों को सभासद ना कह कर स्वयंसेवक कहा जाएगा, ऐसा भी निर्णय लिया गया।

आरएसएस का फुल फॉर्म क्या है? (RSS Full Form in Hindi)

आरएसएस का फुल फॉर्म “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की क्रिया प्रणाली

इतवार दरवाजा प्राथमिक शाला के मैदान में हर रविवार प्रात: 5 बजे सैनिक शिक्षण का अभ्यास होता था, जिसे आज संघ में समता कहते है। सप्ताह में दो दिन भिन्न-भिन्न विषयों पर भाषण होते थे, जिसे राजकीय वर्ग कहते थे। 1927 के बाद से राजकीय वर्ग का नाम बदल कर बौद्धिक वर्ग कर दिया गया। यह बौद्धिक वर्ग के कार्यक्रम कभी डॉक्टर जी के घर तो कभी किसी अन्य स्वयंसेवक के घर पर होते थे।

जैसा मैंने पहले बताया कि स्वयंसेवक को सैनिक शिक्षण मिलता था, उसके लिए शरीर को हृष्ट पुष्ट बनाना जरूरी होता था। इसलिए संघ के सारे स्वयंसेवक नागपुर व्यायाम शाला, महाराष्ट्र व्यायाम शाला और प्रताप अखाड़ा में हर रोज व्यायाम करते थे। व्यायामशालाओं में कुछ परेशानी आने पर संघ ने एक फैसला लिया और इतवार दरवाजा विद्यालय के मैदान में दण्ड यानि लाठी चलाने के कार्यक्रम शुरू कर दिये।

अंत में संघ प्रार्थना होती थी, उस प्रार्थना में अखाड़ों में अभ्यास करने वाले सारे सदस्य सम्मिलित होते थे, धीरे-धीरे आगे चलकर सप्ताह में एक दिन मिलने वाला कार्यक्रम हर रोज होने लग गया था।

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संघ की शाखा

नए-नए स्वयंसेवक शाखा में आने लगे तो इतवार दरवाजा प्राथमिक शाला का मैदान छोटा पड़ने लगा, जिसके कारण साल 1928 में शाखा मोहिते बाड़ा में लगाई जाने लगी। आज संघ का मुख्य प्रधान ऑफिस नागपुर में उसी स्थान पर बनाया हुआ है।

शाखा के अंदर तरह-तरह के खेल खिलाये जाते, युद्ध प्रशिक्षण दिया जाता, लाठी चलाना सिखाया जाता है और सिखाये जाते भी थे। कुछ भी लिखना पढ़ना या आज्ञा देनी होती तो अँग्रेजी में ना देकर संस्कृत भाषा का उपयोग किया जाता था।

मोहिते बाड़े में शाखा शुरू होते ही स्वयंसेवकों को सैनिक शिक्षा दी जाने लगी थी, जिससे इस शिक्षा के बाद पथ संचलन यानि मार्चपास्ट निकालने का विचार आया। लेकिन उसके लिए बैंड यानि घोष की आवश्यकता महसूस हुई। इसके लिए बहुत सारे स्वयंसेवकों ने पैसा बचाना शुरू किया।

कुछ स्वयंसेवकों ने मंदिर में भोज करने के बाद जो दक्षिणा मिलती है, उसे इकट्ठा करना शुरू किया और संघ का पहला घोष खरीदने में अपना योगदान दिया। उनकी वजह से संघ का पहला घोष भी मिला।

शाखा में व्यायाम, खेल, सूर्य नमस्कार, समता, गीत और प्रार्थना होती है। सामान्यतः शाखा हर रोज एक घंटे की ही लगती है। शाखाएँ निम्न प्रकार की होती हैं:

  • प्रभात शाखा: सुबह लगने वाली शाखा को “प्रभात शाखा” कहते है।
  • सायं शाखा: शाम को लगने वाली शाखा को “सायं शाखा” कहते है।
  • रात्रि शाखा: रात्रि को लगने वाली शाखा को “रात्रि शाखा” कहते है।
  • मिलन: सप्ताह में एक या दो बार लगने वाली शाखा को “मिलन” कहते है।
  • संघ-मण्डली: महीने में एक या दो बार लगने वाली शाखा को “संघ-मण्डली” कहते है।

पूरे भारत में लगभग 55,000 से ज्यादा शाखा लगती हैं। विश्व के अन्य देशों में भी शाखाओं का कार्य चलता है।

शाखा में कार्यवाह का पद सबसे बड़ा होता है। उसके बाद शाखाओं का नियमित रूप से व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए मुख्य शिक्षक का पद अलग से होता है।

संघ की व्यवस्था कुछ इस प्रकार होती है – केंद्र, क्षेत्र, प्रान्त, विभाग, जिला, तालुका/तहसील/महकमा, नगर, खण्ड, मण्डल, ग्राम और शाखा।

संघ की गणवेश

शुरुआत में संघ की गणवेश खाकी निकर घुटनों तक, खाकी कमीज के साथ दो बटनों वाली खाकी टोपी थी। 1930 में खाकी टोपी की जगह काली टोपी कर दी गई। फिर 1940 में खाकी कमीज की जगह सफ़ेद कमीज कर दी गई।

1973 में लॉन्ग बूट की जगह चमड़े के काले जूते और 2010-11 में चमड़े के बेल्ट की जगह मोटे कपड़े की पेटी कर दी गई। काफी समय तक संघ के स्वयंसेवकों की पहचान रही खाकी निकर की जगह 11 अक्टूबर 2016 से हल्के भूरे रंग की पूरी पैंट कर दी गई।

RSS History In Hindi

संघ का संविधान

1948 तक संघ बिना किसी नियम कानून से चलता रहा, 1940 में डॉक्टर हेडगेवार के बाद गुरुजी माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर संघ के दूसरे सरसंघचालक बने और 1948 में संघ पर प्रतिबंध लग गया था।

इस प्रतिबंधित काल में संघ का संविधान लिखा गया और उसे गुरुजी ने जेल में रहते हुए ही स्वीकृति दे दी थी। संघ की कार्य-पद्धति ऐसे ही आगे बढ़ती गयी और शाखा ही संघ को चलाती रही। शाखाओं से कार्यकर्ता और प्रचारक अपने काम को विस्तार से बढ़ा पाएँ।

संघ की संरचना

संघ में संगठनात्मक रूप से सबसे ऊपर सरसंघचालक का स्थान होता है, जो पूरे संघ को लेकर चलता है, उन्हें राह दिखाता है। अभी वर्तमान में संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत है। सरसंघचालक की नियुक्ति मनोनयन द्वारा होती है, मतलब कि अपना उत्तराधिकारी की घोषणा खुद सरसंघचालक ही करते है।

संघ के ज़्यादातर कार्य शाखा के माध्यम से हो जाता है। क्योंकि सुबह या शाम को एक घंटे के लिए स्वयंसेवकों का मिलना हो जाता है। संघ के सरसंघचालक कुछ इस प्रकार रहे है:

  • डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार (डॉक्टर जी): 1925–1940
  • माधव सदाशिवराव गोलवलकर (गुरुजी): 1940–1973
  • मधुकर दत्तात्रेय देवरस (बालासाहेब देवरस: 1973-1993
  • प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया): 1993-2000
  • कृपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन (सुदर्शनजी): 2000-2009
  • डॉक्टर मोहनराव मधुकरराव भागवत: 2009-वर्तमान

संघ के साथ जुड़े अन्य संगठन

अनेक संगठन हैं, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित हैं और स्वयं को संघ परिवार के सदस्य बताते हैं। संघ दुनिया के लगभग 80 से अधिक देशों में कार्यरत है। संघ के लगभग 50 से ज्यादा संगठन राष्ट्रीय ओर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है और लगभग 200 से अधिक संगठन क्षेत्रीय प्रभाव रखते हैं। जिसमे कुछ प्रमुख संगठन है, जो संघ की विचारधारा को आधार मानकर राष्ट्र और सामाज के बीच सक्रिय है।

जिनमें कुछ राष्ट्रवादी, सामाजिक, राजनैतिक, युवा वर्गों के बीच में कार्य करने वाले, शिक्षा के क्षेत्र में, सेवा के क्षेत्र में, सुरक्षा के क्षेत्र में, धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में, संतो के बीच में, विदेशों में, अन्य कई क्षेत्रों में संघ परिवार के संघठन सक्रिय रहते हैं। वो संगठन कुछ इस प्रकार है:

  • भारतीय जनता पार्टी
  • विश्व हिन्दू परिषद
  • बजरंग दल
  • हिन्दू जागरण मंच
  • भारतीय किसान संघ
  • हिन्दू स्वयंसेवक संघ
  • लघु उद्योग भारती
  • विवेकानंद केंद्र
  • भारतीय मजदूर संघ
  • सेवा भारती
  • राष्ट्र सेविका समिति
  • अखिल भारतीय विश्व परिषद
  • विद्या भारती
  • सरस्वती शिशु मंदिर
  • वनवासी कल्याण आश्रम
  • मुस्लिम राष्ट्रीय मंच
  • राष्ट्रीय सिख संगत
  • विश्व संवाद केंद्र
  • स्वदेशी जागरण मंच

संघ की प्रार्थना

संघ की प्रार्थना पूरी संस्कृत में है लेकिन आखिरी की पंक्ति हिन्दी में है। यह प्रार्थना संघ की शाखा जब समाप्त होती है तब ध्वज के सामने गाई जाती है। पूरी प्रार्थना नीचे लिखी है:

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते।।१।।

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम्
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।
अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम्
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्णमार्गम्
स्वयं स्वीकृतं नः सुगंकारयेत्।।२।।

समुत्कर्ष निःश्रेयसस्यैकमुग्रम्
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम्।
विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्।।३।।

।।भारत माता की जय।।

राष्ट्रीय संघ से जुड़े आलोचना और आरोप

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाया गया था

महात्मा गांधी पर गोली चलाने वाले नाथूराम गोडसे इसी आर.एस.एस संघ के पूर्व सदस्य एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भूतपूर्व स्वयंसेवक थे। महात्मा गांधी की हत्या करने के बाद संघ पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लेकिन बाद में एक जांच समिति का गठन हुआ, जिसके रिपोर्ट के बाद संघ को इस आरोप से मुक्त किया गया और इसके ऊपर लगे प्रतिबंध को समाप्त कर दिया गया।

संघ ने शुरू से अलग रास्ता अख्तियार किया

आलोचकों का कहना है कि आरएसएस ने कभी भी भारत के किसी भी स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सेदारी नहीं लिया। यहाँ तक कि ना ही कभी गांधी की अगुवाई में चला ना कभी कांग्रेस के नेता सुभाष चंद्र बोस के आंदोलन में जुड़ें। यहां तक कि भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों से भी उनका कोई संबंध नहीं रहा।

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के वक्त भी आर.एस.एस की कोई भूमिका नहीं दिखी। इस प्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीय स्वतंत्रता के लिए कोई भूमिका नहीं निभाई।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कैसे जुड़े?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 18 साल से निम्न उम्र के बच्चों के मन में शुरू से ही देशभक्ति की भावना जागृत करने के लिए भारती और बालगोकुल जैसे कार्यक्रम चलाती है। यहां तक कि विश्वविद्यालय में छात्रों को अपनी संघ के प्रति आकर्षित करने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रमों को आयोजित करती है।

यदि आप इस में जुड़ना चाहते हैं और इनके साथ जुड़कर काम करना चाहते हैं तो आपको इस संघ के साथ साप्ताहिक, मासिक और दैनिक गतिविधियों में शामिल होकर इनका हिस्सा बनना होगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की खुद की ऑफिशियल वेबसाइट www.rss.org है। यदि आप इस संघ में जुड़ना चाहते हैं तो इनकी इस वेबसाइट पर जाकर वहां पर दी जाने वाली फॉर्म में अपने सभी पर्सनल जानकारियों को भर कर जमा कर सकते हैं और उनकी सदस्यता पा सकते हैं।

आप जहां भी रहती हो आप वहां से इसमें जुड़कर काम कर सकते हो। इस संघ की कई सारी शाखाएं भारत के हर एक क्षेत्र के विभिन्न जिले और प्रांत में मौजूद है, जहां पर यह सभी स्तर के संघ मंडली की बैठक आयोजित करते हैं, जिसमें संघ के कार्यकर्ता सूर्य नमस्कार, व्यायाम, गीत, भजन खेल, परेड जैसे कार्य करवाते हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में जुड़ने के फायदे

RSS में जुड़ने से व्यक्ति को कोई आर्थिक रूप से फायदा नहीं होता। RSS में लोग समाज सेवा और राष्ट्रीय सेवा का लाभ प्राप्त करने के लिए जुड़ते है। आप यदि समाज सेवा करना चाहते हैं, अपने देश के प्रति गर्वोन्नित महसूस करना चाहते हैं तो आप इस संघ में जुड़ सकते हैं। जहां पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम होते हैं, जो आपके मन से जाति भेदभाव जैसे बुरे ख्यालों को हटाता है।

इस संघ में जुड़ने से आपका भारत देश की संस्कृति के प्रति लगाव और भी ज्यादा गहरा हो जाता है। इस संघ में जुड़ने पर आपके मन में राष्ट्रवादी और देशभक्ति की भावना जागृत होती है। इस संघ में रहते हुए आप को सिखाया जाता है कि किस तरह प्राकृतिक आपदाओं में लोगों की मदद करनी होती है।

इस संघ के अलग-अलग शाखा में जाकर आप नए-नए लोगों से मिल सकते हैं। यह संघ विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करती है, जिसमें व्यायाम भी शामिल है। व्यायाम करने से आपका शरीर स्वस्थ रहता है और सकारात्मक विचार जागृत होता है।

इस तरीके से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में जुड़ कर आप अपने राष्ट्रीय भावना को विकसित कर सकते हैं। बस यही इस संघ में जुड़ने का फायदा है।

आरएसएस कुछ रोचक तथ्य

  1. आरएसएस का मुख्यालय नागपुर, महाराष्ट्र में है। आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत जी है जो ब्राह्मण जाति से संबंध रखते है। मोहन भागवत भारत के उन थोड़े से लोगो में से है जिन्हें Z+ सुरक्षा दी गई है।
  2. 30 जनवरी, 1948 को बिड़ला भवन, दिल्ली में शाम 5 बजकर 10 मिनट पर नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर महात्मा गाँधी की हत्या की थी। हत्या के बाद आरएसएस का नाम उछाला गया। कहा गया कि गोडसे आरएसएस का ही सदस्य है जबकि गोडसे ने आरएसएस को सन 1930 में ही छोड़ दिया था। इसी समय पूरी दुनिया को पता चला कि भारत में कोई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम का कोई संगठन भी है।
  3. आरएसएस की पहली शाखा में सिर्फ 5 लोग (संघी) शामिल हुए थे लेकिन आज देशभर में आरएसएस की 60,000 से ज्यादा शाखाएँ है और एक शाखा में लगभग 100 स्वयंसेवक है। आज के समय में आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संस्थान है।
  4. आरएसएस की शाखाओं में शाखा के अंत में एक प्रार्थना गाई जाती है “नमस्ते सदा वत्सले”। यह संघ की स्थापना के 15 साल बाद गाई जाने लगी। इससे पहले एक श्लोक मराठी और एक श्लोक हिंदी में गाया जाता था।
  5. आरएसएस के प्रचारक को संघ के लिए काम करते समय तक अविवाहित रहना होता है और दूसरे होते है संघ के विस्तारक, जो गृहस्थ जीवन में रहकर ही संघ से किशोरों को जोड़ने का काम करते है।
  6. BJP के बड़े नेता जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी संघ के प्रचारक रह चुके है।
  7. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सिर्फ भारत में ही नही बल्कि दुनिया के 40 देशो में है। विदेश में संघ की पहली शाखा मोंबासा, केन्या में लगी थी।
  8. आरएसएस देश के लिए काम करता रहा है लेकिन इस पर आरोप भी लगते रहे है। आरएसएस ने 1962 में भारत-चीन के युद्ध में सरकार का पूरा साथ दिया था। इसी से खुश होकर नेहरू ने 1963 की गणतंत्र दिवस प्रेड में आरएसएस को शामिल होने का न्योता दिया था। आरएसएस, बाढ़ और प्राकृतिक आपदा आदि में भी देश-विदेश के लिए काम करता रहा है।
  9. आरएसएस का अपना अलग झंडा है, भगवा रंग का। सभी शाखाओं में यही झंडा फहराया जाता है। आरएसएस किसी आदमी को नहीं बल्कि भगवा ध्वज को ही अपना गुरू मानती है।
  10. आरएसएस में महिलाएँ नहीं है, क्योकिं महिलाओं के लिए राष्ट्र सेविका समिती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राष्ट्र सेविका समिति दोनों अलग-अलग है लेकिन दोनो के विचार एक है। कई लोगो को ये गलतफहमी हो जाती है कि सेविका समिति भी आरएसएस का ही भाग है, लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है।
  11. आरएसएस ने जब भी भारत पर विपदा आई है तब-तब हर एक सांस तक उस विपदा से बचने के उपाय किए है, चाहे वो भारत-चीन का युद्ध हो या चाहे गोवा का विलयीकरण। हर जगह आरएसएस के स्वयंसेवक तत्पर नजर आयें।
  12. आरएसएस ने साल 1965 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने में काफी मदद की।
  13. आरएसएस ने 1947 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को विवेकानंद रॉक मेमोरियल का उद्घाटन करने के लिए बुलाया था।
  14. आरएसएस धर्म और संस्कृति के आधार पर हिंदू समाज को शक्तिशाली बनाने की बात करता है।
  15. बीजेपी की स्थापना संघ से निकले हुए स्वयंसेवकों के द्वारा ही हुआ है।
  16. 1990-92 में अयोध्या मे गिराई गई बाबरी मस्जिद मामले में भी संघ पर ही आरोप लगाया गया था।

ख्यातिप्राप्त स्वयंसेवक

  • अटल बिहारी वाजपेयी
  • रामनाथ कोविंद
  • नरेंद्र मोदी
  • राजनाथ सिंह
  • अमित शाह
  • नितिन गडकरी
  • मुरली मनोहर जोशी
  • मनोहर पर्रिकर
  • देवेंद्र फडणवीस
  • विजय रूपाणी

FAQ

आर एस एस के संस्थापक कौन थे?

आर एस एस के संस्थापक डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार है।

आरएसएस का मुख्यालय कहाँ है?

आरएसएस का मुख्यालय नागपुर में है।

आपातकाल के समय संघ के सरसंघचालक कौन थे?

आपातकाल के समय संघ के सरसंघचालक मधुकर दत्तात्रेय देवरस (बालासाहेब देवरस) थे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना कब हुई?

आरएसएस की स्थापना 27 सितंबर 1925 को नागपुर में हुए थी।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 4 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 5 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।

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