हिमा दास का जीवन परिचय

हिमा दास पहली ऐसी भारतीय खिलाड़ी जिन्होंने आईएएएफ के ट्रैक स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करके स्वर्ण पदक हासिल किया क्योंकि अब तक भारत के इतिहास में किसी भी महिला या पुरुष खिलाड़ी ने जूनियर व सीनियर किसी भी स्तर पर विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल प्राप्त नहीं किया था लेकिन अब यह किताब हिमा दास प्राप्त कर चुकी हैं।

हिमा दास का परिवार चावल की खेती करते हैं है। यह निश्चित ही जानने लायक है कि आखिर चावल की खेती से किस तरीके से बाहर निकलकर हिमा दास जिसे उड़न परी के नाम से इतिहास रच दी और भारत के खेल जगत में अपना मुकाम हासिल किया।

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इन्होंने जीवन में बहुत सफलता प्राप्त की वह भी मात्र 21-22 की उम्र में जो सच में काबिले तारीफ है। हिमा दास का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण इन्हें जीवन में कई संघर्षों का सामना करना पड़ा लेकिन तमाम संघर्षों का सामना डट कर किया।

इस लेख में हम जानेंगे कि किस तरीके से हिमा दास अपने जीवन के तमाम संघर्षों का सामना करते हुए विश्व प्रसिद्ध धावक बनी। इसके अतिरिक्त इस लेख में हम इनके प्रारंभिक जीवन,इनके इनके माता-पिता, भाई-बहन, इनका करियर और इनसे जुड़े कुछ रोचक तथ्य भी जानेंगे।

हिमा दास का जीवन परिचय ( जन्म, शिक्षा, परिवार, नेट वर्थ और रिकार्ड्स)

हिमा दास की जीवनी एक नजर में

नामहिमा दास
उपनामगोल्डन गर्ल, ढिंग एक्सप्रेस
पेशाधावक
जन्म9 जनवरी 2000
जन्मस्थानढिंग, नगाँव, असम
माताज्ञात नहीं
पितारणजीत दास
शिक्षाबैचलर ऑफ आर्ट्स में स्नातक कर रही है।
स्कूलढिंग पब्लिक हाई स्कूल और जवाहर नवोदय विद्यालय /कॉटन यूनिवर्सिटी,
राष्ट्रीयताभारतीय
धर्महिंदू
वजन55 किलो
लंबाई5 फुट 5 इंच
प्रतिस्पर्धा400 मीटर
कोचनिपोन दास
रिकॉर्डरिकॉर्ड (Record)            विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप (400 मीटर दौड़ ) जीतने वाली प्रथम भारतीय महिला  
राशिमकर राशि

हिमा दास का प्रारंभिक जीवन

हिमा दास का जन्म 9 जनवरी 2000 को असम राज्य के नगाँव नामक जिले के कांधूलिमारी गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम रणजीत दास है वही माता का नाम जोनाली दास है। इनके पिता किसान है, जो चावल की खेती करते हैं। इनकी माता सामान्य गृहणी है। हिमा दास के चार भाई बहन भी हैं जिनमें से यह सबसे छोटी हैं।

हिमा दास की शिक्षा

हिमा दास ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ढिंग पब्लिक हाई स्कूल और जवाहर नवोदय विद्यालय से पूरी की है। साल 2019 में हिमा दास 12वीं क्लास पास हुई अब वह कॉटन यूनिवर्सिटी, असम से बैचलर ऑफ आर्ट्स में स्नातक कर रही है।

हिमा दास जीवन संघर्ष

जब हिमा दास स्कूल में पढ़ाई करती थी उस दौरान खेलों के प्रति काफी ज्यादा आकर्षित थी। स्कूल की शिक्षा के दौरान यह अक्सर कई तरह के खेल में भाग लिया करती थी। हालांकि उन सभी खेलों में इनकी सबसे ज्यादा रुचि फुटबॉल में थी। यहां तक कि यह अपने स्कूल में लड़कों की टीम के साथ फुटबॉल भी खेला करती थी, जिस कारण इन्होंने भविष्य में फुटबॉल में अपना करियर बनाने का निर्णय लिया था। यह बस इंतजार कर रही थी भारत के फुटबॉल टीम में जुड़ने का।

लेकिन उन्हें फुटबॉल टीम में जाने का मौका नहीं मिला जिसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय के एक शारीरिक अध्ययन के शिक्षक ने इन्हें दौड़ने की सलाह दी। वैसे भी हिमा दास मे बचपन से अलग-अलग तरह के खेल में रुचि होने के कारण इनका स्टैमिना काफी ज्यादा बढ़ चुका था। जब यह दौड़ती थी तो जल्दी से थकती नहीं थी और काफी तेज दौड़ा करती थी।

यही देखते हुए  इनके शिक्षक ने नगाँव स्पोर्ट्स एसोसिएशन के गौरी शंकर रॉय से कराई। शुरुआत में हिमा दास के पास दौड़ने के लिए अच्छे रनिंग ट्रेक की सुविधा नहीं थी, जिस कारण में शुरुआती दिनों में रेसिंग की प्रैक्टिस मिट्टी के फुटबॉल मैदान में किया करती थी। धीरे-धीरे इसी तरह प्रैक्टिस करने के बाद जिला स्तरीय प्रतियोगिता में चयनित हुए और इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर इन्होंने दो स्वर्ण पदक भी हासिल किये।

इंटर डिस्ट्रिक्ट कंपटीशन के इस प्रतिस्पर्धा में हिमा दास 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में भाग ली थी, जिसमें हिमा दास सस्ते जूते पहनकर दौड़ लगाई थी लेकिन उसके बावजूद भी इन्होंने प्रथम स्थान हासिल किया। जिस गति से वह इस रेस में दौड़ी वहां खड़े सभी दर्शकों को हैरान कर दिया।

इसी दौरान ‘स्पोर्ट्स एंड यूथ वेलफेयर’ के निपोन दास हिमा दास से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने हिमा दास के परिवार वालों को हिमा दास को गुहावटी भेजने के लिए आग्रह किया।

लेकिन गुवाहाटी इनके गांव से 140 किलोमीटर दूर था। जिस कारण शुरुआत में इनके परिवार ने हिमा दास को वहां भेजने से मना कर दिया लेकिन अंततः वे हिमा दास को वहां भेजने के लिए मान गए।

हालांकि हिमा दास का परिवार काफी गरीब था जिस कारण हिमा दास के ट्रेनिंग के खर्चे को उठा पाने में असक्षम थे। जिस कारण इनके कोच निपुण दास ने हीं हिमा दास के खर्चे की व्यवस्था कराई। इनके कोच ने हिमा दास को शुरुआत में 200 मीटर के लिए तैयार कराया लेकिन बाद में जब इनका स्टैमिना बढ़ने लगा तो 400 मीटर के ट्रैक पर दौड़ने के लिए तैयार किया।

हिमा दास का इंटरनेशनल करियर

हिमा दास ने बैंकॉक देश में आयोजित हुई एशियाई यूथ चैंपियनशिप के  200 मीटर रेस में भाग लिया था, जो इनका सबसे पहला इंटरनेशनल रेसिंग टूर्नामेंट था। 18 वर्ष की उम्र में हिमा दास ने ऑस्ट्रेलिया में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम में हिस्सा लिया। हालांकि अच्छा प्रदर्शन दिखाने में असफल रही। इस 400 मीटर के फाइनल रेस में छठे स्थान पर ही रही थी।

इसके बाद 18 वर्ष की उम्र में ही हिमा दास ने आईएएएफ विश्व अंडर 20 चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। इस चैंपियनशिप कंपटीशन में इन्होंने जीत भी हासिल की यह 400 मीटर का रेस था जिसे इन्होंने 51.46 सेकेंड में पूरा किया।

हालांकि आज तक कोई भी भारतीय महिला खिलाड़ी ने इस टूर्नामेंट के 400 मीटर रेस में जीत प्राप्त नहीं की थी लेकिन हिमा दास ने यह खिताब जीत लिया। इस रेस में हिमा दास चौथे नंबर के लेन में थी।

रेस में वह लगातार चार धावकों से पीछे थी। शुरुआत के 35 सेकंड तक हिमा दास इन लोगों के पीछे थी लेकिन जैसे-जैसे अंतिम लाइन करीब आ रही थी मानो हिमा दास के पैरों में पंख लग रहे हो। उनकी स्पीड भी बहुत तेज होते जा रही थी और अंततः वह रोमानिया के खिलाड़ी को पछाड़कर आखरी लाइन तक पहुंच गई।

19 दिन में पांच स्वर्ण पदक जीते

हिमा दास ने 2 जुलाई 2019 से लेकर 22 जुलाई 2019 तक यूरोप में होने वाले विभिन्न प्रकार के रेस प्रतियोगिता में लगातार पांच स्वर्ण पदक हासिल करके खेल के क्षेत्र में इतिहास रच दिया इन्होंने देश का नाम गौरवान्वित किया।

  • पहला स्वर्ण पदक 2 जुलाई 2019 को पोलैंड में आयोजित पोजनान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में 200 मीटर रेस को 23.65 सेकंड में पूरी कर जीता।
  • 7 जुलाई को पोलैंड में कुनटो एथलेटिक्स मीट रेस आयोजित हुआ था, जिसमें 200 मीटर रेस को 23.97 सेकंड में पूरा करके स्वर्ण पदक की विजेता हुई थी।
  • 13 जुलाई 2019 को चेक रिपब्लिक में क्लाद्नो एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर रेस को  23.43 सेकेंड में पूरी करके स्वर्ण पदक हासिल किया था।
  • चौथा स्वर्ण पदक यह 17 जुलाई को आयोजित चेक रिपब्लिक में ताबोर एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर रेस 23.25 सेकंड में पूरा करके जीता था।
  • वहीं 20 जुलाई को ‘नोवे मेस्टो नाड मेटुजी ग्रांप्री’ में 400 मीटर रेस को 52.09 सेकंड में पूरा करके पांचवा स्वर्ण पदक जीता।

हिमा दास की पसंद

हिमा दास को बचपन से ही स्पोर्ट्स की तरफ काफी झुकाव था और बचपन में यह फुटबॉल खेलना पसंद करती थी जिस कारण फुटबॉल और रेसिंग इनका पसंदीदा खेल है। बात करें इनके फेवरेट प्लेयर की तो निकोलस वेलेज जो फुटबॉल खिलाड़ी हैं इनके पसंदीदा स्पोर्ट्समैन है।

आलिया भट्ट इनकी पसंदीदा अभिनेत्री है वही विकी कौशल इनके पसंदीदा अभिनेता हैं। बात करें हिमा दास के पसंदीदा फिल्मों की तो इन्हें मिशन चाइना, जय, मोन जैसी फिल्में पसंद है। वही जुबीन गर्ग इनके फेवरेट सिंगर हैं। हिमा दास को घूमना फिरना भी पसंद है हिमाचल प्रदेश का शिमला इनका पसंदीदा टूरिस्ट प्लेस है।

हिमा दास से के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • यह बहुत काबिले तारीफ है कि हिमा दास ने केवल साल 17 से ही अपने कोच से दौड़ने की ट्रेनिंग लेना शुरू की और इतने कम समय में ही इन्होने रेस में इतनी कामयाबी हासिल की।
  • हिमा दास को यूनिसेफ इंडिया ने 14 नवंबर 2018 को इन्हें पहली युवा राजदूत नियुक्त किया था।
  • हिमा दास के बेहतरीन खेल प्रदर्शन के कारण भारत के राष्ट्रपति ने 25 सितंबर 2018 को हिमा दास को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था।
  • हिमा दास को सम्मानित करने के लिए बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क ने जुलाई साल 2019 को एक बाघिन शावक को ‘हिमा’ नाम दिया था।
  • साल 2019 के कौन बनेगा करोड़पति शो जिसे जाने-माने अभिनेता अमिताभ बच्चन होस्ट करते हैं उसमें हिमा दास को बुलाया गया था।
  • हिमा दास के द्वारा टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हमारे देश के राष्ट्रपति ने ट्वीट करके इन्हें इनकी कामयाबी के लिए बधाई दी थी।
  • आईएएएफ विश्व U-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ के सेमीफाइनल को जतने के बाद भारतीय एथलेटिक्स संघ द्वारा हिमा दास के अंग्रेजी भाषा को लेकर ट्वीट के जरिए मजाक बनाया गया था लेकिन फाइनल जीतने के बाद उन्होंने दोबारा ट्वीट के जरिए हिमा दास से क्षमा मांगी थी।
  • हिमा दास एक गरीब परिवार से हैं इनके पिता किसान है उनके पास मात्र 2 बीघा जमीन है जिस पर वे चावल की उपज करके अपने घर को चलाते थे।
  • हिमा दास अपने स्कूल के समय में फुटबॉल खेल को पसंद करती थी और वह फुटबॉल टीम में जुड़ने का सपना भी देख रखी थी। लेकिन जब आखिरकार वह फुटबॉल टीम में नहीं जुड़ पाई तब इनके एक शिक्षक ने दौड़ने की सलाह दी। क्योंकि वह काफी फास्ट दौडा करती थी और इनका स्टैमिना भी काफी ज्यादा था।
  • हिमा दास अभी बहुत कम उम्र की है। वह अभी भी अपना स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। वह जिस कॉलेज में अपने स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं वह कॉलेज उनके गांव से 1 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।
  • रेसिंग के ट्रेनिंग के लिए इन्हें अपने गांव से 140 किलोमीटर दूर गोहाटी में आकर रहना पड़ा।
  • हिमा दास ने आईएएएफ की ड्रेस स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल करके इतिहास रच दिया क्योंकि आज तक किसी भी भारतीय खिलाड़ी ने एथलेटिक्स इतिहास में स्वर्ण पदक हासिल करने वाला नही किया था।
  • साल 2021 के फरवरी में अरे सर हिमा दास को असम राज्य का उप पुलिस अधीक्षक आसाम बनाया गया। यह इनके लिए गौरव की बात है और इन्होंने अपनी खुशी को भी जाहिर करते हुए बताया कि इनकी मां हमेशा इन्हें राज्य के हित में कार्य करने के लिए कहती थी आज यह पुलिस की वर्दी में इन्हें बहुत गौरव महसूस हो रहा है।

FAQ

हिमा ने अपना चौथा स्वर्ण पदक कब हासिल किया था?

हिमा दास ने यूरोप की पहली प्रतियोगिता में मात्र 19 वर्ष की उम्र में ही जीत दर्ज करके चौथा स्वर्ण पदक हासिल किया था।

हिमा दास को कौन सा उपनाम दिया गया है?

हिमा दास को ‘गोल्डन गर्ल’ के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त यह असम राज्य के ढिंग गांव से होने के कारण इन्हें ‘ढिंग एक्सप्रेस’ के नाम से भी जाना जाता है।

हिमा दास ने कौन-कौन से मेडल अब तक जीत चुकी है?

हिमा दास नगर के विभिन्न प्रतियोगिताओं में जीत हासिल करके कांस्य, रजत और स्वर्ण पदक हासिल किये हैं। विश्व जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिमा दास ने जीत हासिल करके गोल्डन मेडल प्राप्त की। यह देश की पहली महिला धावक हुई जो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल प्राप्त की। इसके अतिरिक्त फिनलैंड के आईएएफ विश्व अंडर 20 चैंपियनशिप में भी 400 मीटर स्पर्धा में जीत हासिल करके गोल्डन मेडल हासिल की।

हिमा दास के सामने कौन सी चुनौतियाँ थी?

हिमा दास के पिता एक सामान्य से किसान है, जो चावल की खेती करते हैं। इस कारण उनके घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी। हिमा दास के कोच के द्वारा जब इनके माता-पिता को इन्हें इनके गांव से 140 किलोमीटर दूर गुवाहाटी में शिफ्ट होने के लिए दबाव डाला गया।

हिमा दास ने सबसे पहले कितने मीटर की दौड़ में हिस्सा लिया था?

हिमा दास जब स्कूल में थी, तब इंटर डिस्ट्रिक्ट कंपटीशन में उन्होंने 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ प्रतियोगिता में भाग लिया था और जीत हासिल करके स्वर्ण पदक हासिल किया था।

हिमा दास को क्या-क्या करना पसंद है?

हिमा दास को रेसिंग के अलावा संगीत सुनना ,फुटबॉल खेलना, शूटिंग करना और फिल्म देखना पसंद है।

निष्कर्ष

हिमा दास भारत की एक जानी-मानी रेसर हैं। इन्होंने विभिन्न देशों में हुए अलग-अलग रेसिंग टूर्नामेंट में देश का नाम रोशन किया है। इन्होंने अपने जीवन में कई संघर्षों को देखा लेकिन उन संघर्षों का सामना करते हुए वे जिस तरह आज इस मुकाम तक पहुंची है वह सच में काबिले तारीफ है।

इनका जीवन संघर्ष जीवन में आगे बढ़ने और अपनी करियर बनाने के लिए हर किसी को प्रेरित करता है। आज के इस लेख में बताए गए हिमा दास के जीवन परिचय से आपको बहुत कुछ जानने को मिला होगा। आज के इस लेख में आपने हिमा दास के प्रारंभिक जीवन, इनके परिवार, इनकी शिक्षा, इनके जीवन का संघर्ष और इनकी कामयाबी के बारे में जाना।

हमें उम्मीद है कि आज का यह लेख आपके लिए जानकारी पूर्ण रहा होगा। यदि यह लेख आपको पसंद आया हो तो इसे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम इत्यादि के जरिए अन्य लोगों के साथ जरूर शेयर करें। यदि इस लेख से संबंधित कोई भी प्रश्न या सुझाव आपके मन में हो तो आप हमें कमेंट में लिख कर बता सकते हैं।

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