आत्मसम्मान पर निबंध

Essay on Self Respect in Hindi: इंसान की सबसे प्यारी वस्तु उसका खुद का सम्मान/इज्जत/आबरू होती है, जिसे आत्मसम्मान के नाम से भी जानते है। जब इंसान के सामने खुद की इज्जत की बात आती है तो वो कुछ भी कोई भी काम कर लेगा लेकिन अपनी इज्ज़त गँवाने नहीं देगा।

इसमें कोई महिलाओं को पुरुषों से ज़्यादा तवज्जो देते हैं क्योंकि उनकी इज्ज़त जाना मतलब पूरे परिवार की इज्ज़त जाना समझा जाता है।

लेकिन पुरुषों की जब इज्ज़त जाती है तो वो आग बबूले हो कर कोई ऐसा काम कर देते हैं जिसके बाद उनके साथ साथ उनके परिवार को भी भुगतना पड़ता है।

Essay on Self Respect in Hindi

जैसा आपने देखा कि सम्मान के मामले में कोई लिंग स्पेशल नहीं होता है, सबको अपनी अपनी इज्ज़त प्यारी होती है। क्योंकि आत्मसम्मान करना जरूरी भी है। आइये आज इसके बारे में कुछ और जानकारी जुटा लेते है।

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आत्मसम्मान पर निबंध – Essay on Self Respect in Hindi

प्रस्तावना

इंसान जब भी बड़ा होता है तो उसको सुनने को मिलता है कि तेरे को कुल का नाम रोशन करना है, कुल का सम्मान बढ़ाना है, कुल के लिए कुछ ऐसा मत कर देना जिससे हमें शर्मिंदगी महसूस हो। यानि कि कुल मिला कर बच्चा जब तक बड़ा होता है, उसे अपने परिवार कि शान को मिट्टी में ना मिलाएँ ऐसे ही समझाया जाता है। लेकिन कोई ये नहीं कहते है कि तुम अपनी इज्ज़त पर भी आँच ना आने देना, अपनी इज्ज़त की बारी आए तो उसे हर हालात में लड़ना चाहिए और उसे पर एक उंगली भी नहीं उठनी चाहिए।

आत्मसम्मान क्यों करना चाहिए?

साथियों सीधी-सी बात है जब तक आप अपना सम्मान नहीं करोगे तो दूसरे भी नहीं करेंगे। तो खुद की इज्ज़त करना पहले सीखे फिर बाद में दूसरों की इज्ज़त करना। खुद की इज्ज़त तभी कर पाएंगे जब हमारे अंदर आत्मविश्वास होगा। आत्मविश्वास नहीं है तो आप खुद की इज्ज़त करना तो दूर खुद को कही पर रिप्रजेंट भी नहीं कर सकते है।

इसलिए अपने अंदर आत्मविश्वास की कमी नहीं लाना क्योंकि इसके कम होने के कारण आत्मसम्मान में कमी आती है। जब आत्मविश्वास बढ़ेगा तो अपने आप को अच्छे से दूसरों के सामने रख पाओगे और आपकी तारीफ करेंगे। बस इसी कारण से हमको आत्मसम्मान करना चाहिए।

आत्मसम्मान के प्रकार

लुईस हॉर्नस्टीन ने अपनी किताब आत्मसम्मान और पहचान, अहंकार और सामाजिक मूल्य के अंदर स्वाभिमान को चार प्रकार में बाँटा है। उनका मानना है कि स्वयं मूल्यांकन किसी का कम या ज्यादा होता है। इसलिए इसे चार भागों में विभाजित कर सकते है।

नीचे उन 4 भागों के बारे में बताया जा रहा है:

  1. उच्च और स्थिर आत्मसम्मान – इस प्रकार के मनुष्य को उनके आस पास जो घटनाएँ घटित होती है और बाहर की स्थिति का उनके आत्मसम्मान के ऊपर कोई भी असर नहीं पड़ता है। इस प्रकार के लोग खुले तरीके से सामने आते है और अपनी छवि बचाने के लिए हर कोशिश करते है।
  2. उच्च और अस्थिर आत्मसम्मान – इस प्रकार के लोगों में उच्च आत्मसम्मान होता है लेकिन पूरी ज़िंदगी उसी स्वाभिमान से जीना असमर्थ होता है। क्योंकि ये अस्थिर होते है, जिसके कारण जब भी ये अपने काम में असफल होते है तब इनका मन अधीर हो जाता है।
  3. कम और स्थिर आत्मसम्मान – इस प्रकार के लोगों के मन में हमेशा डर बना रहता है और उनके मन में डिसीजन लेने में हमेशा असमंजस बना रहता है। जब ये खुद के अंदर झांकते है तो उन्हें हमेशा नकारात्मक बाते ही सामने दिखती है। ज़्यादातर यह स्वाभिमान अवसादग्रस्त लोगों के अंदर होता है।
  4. कम और अस्थिर आत्मसम्मान – इस प्रकार के मनुष्य को आस पास की परिस्थितियाँ बहुत ही ज्यादा प्रभावित करती है और अपने जीवन में सारी घटनाओं के प्रति संवेदनशील होते है। जब सफल होते है तो आत्मसम्मान बढ़ता है और अगले ही पल निराश हो जाते है।

निष्कर्ष

आत्मसम्मान मन के सारे बुरे कर्मों को भगा देता है, खुद को अलग तरीके से रिप्रजेंट करने का मौका मिलता है। अपने भविष्य के लिए आत्मसम्मान बहुत जरूरी है, अपने मन के डर को भगाने के लिए पहले आत्मविश्वास करना जरूरी है फिर अपनी खुद की इज्ज़त। अपनी इज्ज़त कीजिये और दूसरों के मन में अपना नाम बनाइये।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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