रक्षा बंधन पर निबंध

Raksha Bandhan Par Nibandh: रक्षा बंधन का सीधा सा मतलब होता है कलाई में धागा बंधने के बाद पहनाने वाले की ताउम्र रक्षा करना। रक्षा बंधन का पर्व भाई बहिन का एक प्यारा सा पर्व होता है। इस पर्व का सनातन धर्म में बहुत ही ज्यादा महत्व है और सबसे बड़े त्योहार में से एक त्योहार भी है।

Raksha Bandhan Par Nibandh
Raksha Bandhan Par Nibandh

हम यहां पर अलग-अलग शब्द सीमा में रक्षा बंधन पर निबंध (Raksha Bandhan Essay in Hindi) शेयर कर रहे हैं। यह निबन्ध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित होंगे।

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रक्षा बंधन पर निबंध – Raksha Bandhan Par Nibandh

रक्षा बंधन पर निबंध (250 शब्द)

प्रस्तावना

रक्षा बंधन हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है, इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती है और अपने भाई की लंबी उम्र के लिए भगवान से प्रार्थना करते है। भाई अपनी बहिन की रक्षा करने का वचन देता है।

राखी का त्योहार पूरे भारत में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है, इस दिन बहनें भाई के घर मिठाइयाँ और रक्षा सूत्र ले कर जाती है और भाई दक्षिणा स्वरूप अपनी बहनों को पैसे या कोई भी उपहार देता है।

रक्षा बंधन का महत्व

हिन्दू संवत के श्रावण महीने की पूर्णिमा को राखी का त्योहार आता है। इस दिन जनेऊ धारी जातक अपनी जनेऊ बदलते भी है।

पुराने समय में घर की छोटी बेटी अपने पिता को राखी बाँधती थी तथा इसके साथ ही गुरुओं द्वारा अपने यजमान को भी रक्षा सूत्र बांधा जाता था। जहाँ पहले रेशम का धागा बांध देने मात्र से ही सारा प्यार आ जाता था, अब मोती या सोना-चाँदी की राखी पहना देने से वो वाला प्यार नहीं मिलता।

आज कल समय के अभाव में लोग औपचारिकता करने में ही विश्वास करने लगे है। जहाँ अब सोशल मीडिया में राखी की शुभकामनायें भेज देने को त्योहार मना लेना समझ जाते है। वहाँ पहले के समय केवल एक राखी भेज देने से युद्ध के परिणाम को बदल दिया जाता था।

निष्कर्ष

राखी केवल भाई-बहिन के प्रेम के लिए ही नहीं वरन गुरु-शिष्य, पिता-पुत्री के प्रेम को भी परिभाषित करता है। अगर किसी को भी एक रेशम का रक्षा सूत्र बांध दिया जाता था तो वो अपनी बहिन समझ कर उसकी रक्षा हर हालात में करते थे।

Raksha Bandhan Par Nibandh
Raksha Bandhan Par Nibandh

रक्षा बंधन पर निबंध (800 शब्द)

प्रस्तावना

राखी का त्योहार एक ऐसा त्योहार जो सीधा इंसान की भावनाओं के साथ जुड़ा हुआ है। भाई और बहिन का रिश्ता दुनिया में सबसे अनमोल रिश्ता होता है। आज की महिलाएँ जहाँ सशक्त हो रही है और साथ में वे खुद अपनी रक्षा कर सकती हैं।

रक्षा बंधन मनाने की विधि

यह पर्व श्रावण महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें सुबह-सुबह स्नान करके पूजा की थाल को सजाने में लग जाती है। पूजा की थाली में कुमकुम, रक्षा सूत्र, मौली या रोली, अक्षत या चावल, दीपक और मिठाई होती है। इसके बाद बहनें अपने भाई को घर के पूर्व दिशा में आसन पर बैठा कर भाई की आरती उतारी जाती है, सिर पर अक्षत डाला जाता है, माथे पर कुमकुम का तिलक लगा कर कलाई में राखी बांधी जाती है। फिर अंत में मीठा खिलाया जाता है। कही जगह बहनें हाथ में श्रीफल देने के साथ दक्षिणा भी देती है।

इसके बाद भाई बहनों को उपहार देते है, अगर भाई बहिन से छोटा होता है तो बहिन ही उसे उपहार देती है।

रक्षा बंधन का इतिहास

पौराणिक कथाओं के अनुसार देवताओं और असुरों में युद्ध चल रहा होता है और उस युद्ध में देवताओं को हार का सामना करना पड़ता है। इसके अंदर उन्होंने अपना राज-पाठ सब युद्ध में गँवा देते है। थक हार कर देवराज इंद्र ने देवगुरु बृहस्पति से मदद की गुहार लगाई उसके बाद बृहस्पति जी ने श्रावण मास की पूर्णिमा के सूर्योदय के समय एक मंत्र का जाप करते है जिससे इन्द्र को वापस उनका राज-पाठ दिलाया जाता है।

येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रों महाबल:।
तेन त्वामभिवन्धामि रक्षे मा चल मा चल:।।

इस मंत्र के जाप से जो धागा/सूत्र प्राप्त हुये उसे इंद्र के हाथ में बांध दिया। जिसके बाद इंद्र ने वापस जंग करके अपना गंवाया सारा राज-पाठ ले लेता है। तब से ही रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाने लगा।

रक्षा बंधन का महत्व

चित्तौड़गढ़ की रानी कर्णावती ने जब देखा कि उनके सैनिक बल बहादुर शाह के सैन्य बल के आगे टिक नहीं पायेंगे तो उन्होने मेवाड़ की रक्षा हेतु मुगल सम्राट हुमायूँ को राखी भेज कर ये संदेशा भी भेजा कि इस राखी का मान रखना। दूसरे मज़हब के सम्राट हुमायूँ ने जब ये संदेशा और राखी देखा तो उसके सम्मान के लिए उन्होने अपनी एक टुकड़ी मेवाड़ भेज दी और बहादुर शाह से युद्ध कर के रानी कर्णावती को युद्ध में विजय दिलवाई।

द्वापरयुग के अंदर जब श्री कृष्ण के उंगली कट जाने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी के एक कोने को फाड़ कर कृष्ण के हाथ में बांध देती है, कथानुसार द्रौपदी के सबसे मुश्किल समय में श्री कृष्ण ने उस साड़ी के एक टुकड़े का कर्ज़ द्रौपदी के चीर हरण होने से बचा कर पूरा किया था। क्योंकि कृष्ण ने उस साड़ी के टुकड़े को राखी समझ कर स्वीकार किया था।

रक्षा बंधन किस-किस जगह मनाई जाती है?

राखी का त्योहार मुख्य रूप से भारत और नेपाल में मनाया जाता है, इसके अलावा मलेशिया और जहाँ भारतीय रहते है वहाँ बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

रक्षा बंधन के दिन सरकार के कार्यक्रम

भारत सरकार द्वारा रक्षा बंधन के पर्व के अवसर पर डाक सेवा विशेष छूट देती है। इस दिन 10 रुपए वाले स्पेशल राखी के लिफ़ाफ़े भारतीय डाक में उपलब्ध होते है। इस लिफ़ाफ़े में बहिने अपने भाई के लिए राखी भेज सकती है। यह लिफाफा 50 ग्राम को होता है और इसमें एक साथ 4 से 5 राखी एक साथ भेजी जा सकती है। बाजार में मिलने वाले लिफ़ाफ़े 20 ग्राम के होते है और उसमें एक या दो राखी ही भेज सकते है।

दिल्ली में बस, ट्रेन और मेट्रो में महिलाओं से राखी के दिन टिकिट नहीं लिया जाता है। राजस्थान मे भी बस का किराया माफ होता है। इसके अलावा भारतीय डाक एक विशिष्ट डाक टिकिट भी जारी करता है।

रक्षा बंधन का पर्व कौन नहीं मनाता है?

यह खुशियों का त्योहार है, इसलिए हमारे हिन्दू समाज में वो लोग यह त्योहर नहीं मनाते जिनके परिवार में कोई गुजर गया होता है। यानि कि हिन्दू समाज के अनुसार किसी परिवारजन की मृत्यु हो जाती है तो उसके आगे आने वाले त्योहार को वो एक साल तक नहीं मनाते है। जब निधन हुए इंसान के सारे रिवाज पूरे हो जाते हैं तब घर में सारे त्योहार वापस से मनाए जाने लगते हैं।

हमारे हिन्दू समाज में कुछ ऐसी परम्पराएँ है जो आज भी उसी ढंग से मनाई जाती है और कुछ ऐसी परम्पराएँ है जो आज के जमाने में दूर करनी जरूरी भी है। जैसे बाल विवाह, नर बलि, सती प्रथा जैसी कुरीतियों को दूर करना।

निष्कर्ष

जैन धर्म के अनुसार एक मुनि ने 700 मुनियों के प्राण बचाए थे इस वजह से जैन धर्म के अनुयायी इस दिन हाथ में सूती का डोर बांधते है। बहन-भाई का रिश्ता बड़ा ही खट्टा-मीठा जैसा होता है, कभी प्यार तो कभी नफरत चलता रहता है। एक दूसरे से झगड़े बिना रह नहीं सकते और प्यार भी बेईंतहा करते है।

रक्षा बंधन के पर्व को भाई बहिन के जीवन समर्पण दिन से भी जाना जाता है, इसलिए इस उत्सव को परंपरागत विधि से मनाते है। राखी के दिन भाई अपनी बहिन को उसकी फेवरेट जगह ले जा कर उसे सरपराइज़ दे सकता है। अपनी अपनी पसंद के अनुसार दोनों आपस में गिफ्ट दे सकते है।

किसी भी पुरुष द्वारा महिला के प्रति भाई का फर्ज़ निभाने पर उसे भी रक्षा सूत्र बांध सकते है। हमें हमारे पूर्वजों द्वारा बनाए गए पर्वों, त्योहारों एवं उपवास को उनके विधि-विधान के द्वारा ही सम्पन्न करना चाहिए, उसमें कभी भी छेड़खानी नहीं करनी चाहिए।

अंतिम शब्द

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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