कृष्ण जन्माष्टमी पर निबंध

Essay On Krishana Janmashtami In Hindi: नमस्कार दोस्तों, श्री कृष्ण जन्माष्टमी को संपूर्ण भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। श्री कृष्ण को सनातन धर्म के अंतर्गत महाभारत काल के दौरान से लेकर वर्तमान समय तक मुख्य रूप से पूजा जाता है।

महाभारत काल के समय महाभारत युद्ध में भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिए गए उपदेश पर बनी श्रीमद्भगवद्गीता आज के समय में सबसे अधिक ज्ञान तथा सनातन धर्म की सबसे बड़ी और पवित्र पुस्तक अर्थात धर्म ग्रंथ है।

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इस निबंध में कृष्ण जन्माष्टमी के संदर्भित सभी माहिति को आपके साथ शेयर किया गया है। यह कृष्ण जन्माष्टमी पर निबंध हिंदी में (Janmashtami Par Nibandh) सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

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कृष्ण जन्माष्टमी पर निबंध | Essay On Krishana Janmashtami In Hindi

कृष्ण जन्माष्टमी पर निबंध (200 शब्द)

कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता हैं। श्री कृष्ण के जन्म दिवस के रूप में हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि के दिन कृष्ण जन्माष्टमी पर मनाया जाता है। यह हिंदुओं का प्रमुख त्योहार हैं। यह त्योहार भारत के अलग-अलग राज्य में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता हैं।

यह पर्व भगवान कृष्ण के लिए इसीलिए मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण ने धरती पर जन्म लिया था। जब कंस के अत्याचार बढ़ गए थे तब देवताओं की विनती सुन कर कृष्ण जी ने अवतार लिया था। भगवान कृष्ण का जन्म देवकी और वासुदेव के यहां हुआ था। कृष्ण जन्माष्टमी विदेशों में भी बड़ी धामधूम के साथ मनाया जाता है।

इस दिन लोग दही हांडी का महोत्सव भी करते हैं। इस पर्व पर मंदिरों में साज सजावट और भजन कीर्तन भी किया जाता है। इस दिन अधिकतर लोग भगवान कृष्ण के लिए व्रत करते हैं। उनकी बाल प्रतिमा को अपने घर में लाकर उनका साज-श्रृंगार करके उनको पालने में झूल झुलाते हैं।

लोग पूरे दिन भजन कीर्तन करके तथा रात को 12:00 बजे उनकी पूजा-अर्चना करके सात्विक भोजन से भोग लगाते हैं। यह श्री कृष्ण का आठवां अवतार हैं, इसलिए दुनिया भर में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाता हैं तथा यह सनातन धर्म के अनुसार बहुत ही आनंद तथा भक्ति भाव के साथ मनाया जाता हैं।

Essay On Krishana Janmashtami In Hindi

श्री कृष्ण जन्माष्टमी निबंध (400 शब्दों में)

प्रस्तावना

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण को याद किया जाता है। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर भगवान श्री कृष्ण के मंदिर जाते हैं। वहां पर पूजा अर्चना करते हैं। भगवान को प्रसाद चढ़ाते हैं, पुष्प अर्पित करते हैं तथा दिन पर भजन-कीर्तन और शाम के समय दही-हांडी जैसे विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करवाए जाते हैं। सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण का विशेष महत्व दिया गया है। भगवान श्री कृष्ण के उपदेश सनातन धर्म के धर्म ग्रंथों में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

कृष्ण जन्माष्टमी को भगवान श्री कृष्ण के जन्म के अवसर पर मनाया जाता है। भगवान श्री कृष्ण ने पृथ्वी पर राक्षसों का अंत करने के लिए जन्म लिया था। भगवान श्री कृष्ण को विष्णु का अवतार कहा जाता है। कृष्ण ने अपने बाल्यकाल से लेकर संपूर्ण जीवन में अंधकार पर उजाला तथा अधर्म पर धर्म की विजय का स्तंभ खड़ा किया।

इसीलिए वर्तमान समय में संपूर्ण पृथ्वी पर हिंदू धर्म के लोग भगवान श्री कृष्ण का गुणगान करते हैं, उनकी पूजा करते हैं। इसके अलावा भगवान श्री कृष्ण के उपदेश पर आधारित भगवत गीता के आधार पर ही दुनिया भर में बड़े पैमाने पर पश्चिमी देशों के लोग भी सनातन धर्म अपनाते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन लोग धूमधाम से भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं, जुलूस निकालते हैं। भगवान श्री कृष्ण को पुष्प अर्पित करते हैं। उन्हें माला पहनाते हैं, प्रसाद चढ़ाते हैं, भंडारा का आयोजन करवाते हैं। तरह-तरह के कार्यक्रम करते हैं। श्री कृष्ण की झांकियां का आयोजन होता है और भजन-कीर्तन पर चलते हैं।

इसके अलावा शाम के समय भारत में अधिकांश राज्यों में दहीहंडी महोत्सव का आयोजन करवाया जाता है, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण को बचपन में मक्खन का काफी शौक था। इसलिए गांव, शहर, गली, कस्बे, मोहल्ले में दहीहंडी महोत्सव का आयोजन होता है।

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन देश भर के नजारे

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन संपूर्ण भारत में अलग-अलग तरह से कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है, जिनमें मुख्य तौर पर उत्तर भारत और मध्य भारत में दहीहंडी महोत्सव को विशेष महत्व दिया जाता है। जबकि दक्षिण भारत में भी हर्षोल्लास के साथ कृष्ण जन्माष्टमी का आयोजन होता है।

मथुरा जोकि उत्तर प्रदेश का एक शहर है, यहां पर ही भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। इसीलिए दहीहांडी महोत्सव के दिन मथुरा नगरी को फूलों से सजा दे जाता है। इस दिन मथुरा नगरी चमचमाती नजर आती है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन उत्तर भारत के सबसे बड़े केंद्र उत्तर प्रदेश में स्थित मथुरा में भगवान श्री कृष्ण के मंदिरों में धूम देखने को मिलती हैं।

यहां पर सुबह से लेकर रात तक श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है। इसके अलावा उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में भी बड़े पैमाने पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। विशेष रूप से महाराष्ट्र में दहीहंडी महोत्सव को प्राथमिकता दी जाती है। महाराष्ट्र में दहीहंडी महोत्सव का आयोजन करवाया जाता है।

निष्कर्ष

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है, क्योंकि इस दिन कृष्ण का जन्म हुआ था। सनातन धर्म के अंतर्गत भगवान श्री राम के बाद दूसरे स्थान पर भगवान श्री कृष्ण का ही नाम आता है। भगवान श्री कृष्ण को सृष्टि का रचयिता भी कहा जाता है।

विष्णु के अवतार के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा में राक्षसों का अंत करने के लिए जन्म लिया था। इसीलिए कृष्ण के जन्म को कृष्ण जन्माष्टमी अथवा कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में संपूर्ण तरह तरह से मनाया जाता है।

कृष्ण जन्माष्टमी पर निबंध (600 शब्द)

प्रस्तावना

हमारे पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्री कृष्ण का जन्म 5000 साल पहले भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष, अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। भगवान कृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ। श्री कृष्ण के हजारों नाम हैं जैसे कि गिरधर, गोपाल, गोवर्धन, गिरधारी, मदन, केशव, बांके बिहारी इत्यादि।

भगवान कृष्ण का जन्म कहां हुआ था और यह पर्व क्यों मनाया जाता है?

भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में कंस के कारागार में रात्रि 12:00 बजे हुआ था। यह त्यौहार अगस्त या सितंबर के महीने में मनाया जाता हैं। कृष्ण के माता पिता देवकी और वासुदेव थे। जब देवकी और वसुदेव का विवाह हुआ तब उनकी विदाई के समय भविष्यवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस के वध की वजह बनेगी।

इसीलिए कंस ने आक्रोश में आकर देवकी और वसुदेव को बंदी बना लिया था। इसके पश्चात कंस ने देवकी के सात पुत्रों की हत्या भी कर दी थी। जब आठवीं संतान हुई तब स्वयं ही सभी पहरेदार सो गए उसके पश्चात वसुदेव भगवान विष्णु की आज्ञा से अपने आठवें पुत्र को यशोदा और नंद के यहां छोड़ आए थे। इसीलिए यशोदा और नंद बाबा भी भगवान कृष्ण के माता पिता कहलाते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

हिंदू परंपरा के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी का बहुत ही अत्यधिक महत्व माना गया है। भगवत गीता में बहुत ही प्रभावशाली वाक्य कहा गया है कि “जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होगी, तब तक मैं जन्म लूंगा अर्थात जब जब धरती पर अधर्म बढ़ेगा अत्याचार बढ़ेगा मैं उसे खत्म करने के लिए धरती पर जन्म लूंगा”।

यह वाक्य सृष्टि के रचयिता भगवान विष्णु द्वारा कहा गया हैं। यह त्यौहार भारतीय सभ्यता संस्कृति से आज की युवा पीढ़ी को अवगत कराता है और इसका साक्षात्कार देता है कि आज भी धरती पर भगवान मौजूद हैं।

भगवान कृष्ण की कुछ प्रमुख जीवन लीलाएं

भगवान कृष्ण ने जन्म के पश्चात बहुत ही अद्भुत लीलाएं रची थी, आइए जिनके बारे में कुछ चर्चित वाक्य बताते हैं।

  • श्री कृष्ण के बचपन को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता हैं कि उनका जिस उद्देश्य से धरती पर जन्म हुआ था। वह उन्हीं उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अवतरित हुए थे, क्योंकि उन्होंने एक के बाद एक राक्षसों का वध किया जैसे पूतना, बाघासुर, अघासुर, कालिया नाग इत्यादि।
  • उन्होंने अपने शक्तिशाली होने का प्रदर्शन कभी नही किया। वह सामान्य लोगों की तरह ही जीवन व्यतीत करते थे और उनका व्यवहार भी ऐसा ही था। जैसे मटकी तोड़ना, माखन चोरी करना, ग्वालो के साथ खेल खेलना इत्यादि तरीके से उन्होंने अपना जीवन व्यतीत किया।
  • श्री कृष्ण को प्रेम का प्रतीक भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने राधा तथा अन्य गोपियों के साथ कृष्ण लीला का बहुत ही सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया था।
  • इसके पश्चात जब भगवान कृष्ण मथुरा पहुंचे तब उन्होंने वहां कंस का वध किया तथा प्रजा को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलवाई। वह द्वारकाधीश जाकर द्वारका में रहे तथा महाभारत में अर्जुन के सारथी बने और गीता उपदेश का महत्व बताकर अर्जुन को युद्ध में विजय दिलाई।

महाराष्ट्र में दही हांडी की प्रथा

दही हांडी प्रथा वैसे तो अन्य जगहों पर मनाई जाती है। परंतु यह महाराष्ट्र और गुजरात में बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती हैं, क्योंकि श्री कृष्ण ने दूध-दही को कंस तक ना पहुंचाने का निर्णय लिया था। इसी घटना की वजह से दही हांडी का उत्सव मनाया जाता हैं।

मथुरा और वृंदावन में खास तौर पर मनाया जाता है

इस त्योहार को वैसे तो विश्व भर में मनाया जाता हैं लेकिन यह मथुरा और वृंदावन में प्रमुख रूप से मनाया जाता हैं। यहां पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर रासलीला का आयोजन होता हैं। यहां पर देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं।

निष्कर्ष

इसी प्रकार श्री कृष्ण ने अपनी लीलाओं को रचते हुए धरती के लोगों को अत्याचारों से बचाया था। हमें भगवान कृष्ण के जीवन से यह प्रेरणा मिलती हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए व्यक्ति को अपने कर्म और धर्म पर ही चलते रहना चाहिए।

अंतिम शब्द

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