क्रिसमस पर निबंध

Essay On Christmas In Hindi: दुनिया भर में कई धर्म है और सभी धर्मों में अलग-अलग तरह के त्योहार मनाए जाते हैं। लगभग सभी धर्मों में त्योहारों का महत्व समान ही है। क्योंकि त्योहार खुशियों का प्रतीक होता है, त्योहारों के कारण अपने करीब आते हैं। गिले-शिकवे भूलकर सभी आनंददायक पलों का लुफ्त उठाते हैं।

इस दुनिया में लगभग आधे से ज्यादा लोगों का समुदाय इसाई समुदाय है। ईसाइयों का सबसे लोकप्रिय त्यौहार क्रिसमस का त्यौहार होता है, जो हर साल दिसंबर के महीने में मनाया जाता है। हालांकि यह त्योहार मुख्य रूप से ईसाइयों का है लेकिन अन्य धर्मों के लोगों में भी इस त्यौहार का काफी ज्यादा महत्व है।

क्रिसमस का त्योहार बच्चों को सबसे ज्यादा पसंद होता है। इस त्यौहार का इंतजार ना केवल इसाई बच्चे बल्कि अन्य धर्म के बच्चे भी करते हैं। क्योंकि बच्चों के लिए सभी धर्मों का त्यौहार एक बराबर होता है।

Essay On Christmas In Hindi
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क्रिसमस पर निबंध (Essay On Christmas In Hindi)

क्रिसमस का त्यौहार आने से पहले विद्यालयों में बच्चों को क्रिसमस पर निबंध हिंदी में लिखने के लिए दिया जाता है ताकि बच्चे क्रिसमस के त्योहार के इतिहास के बारे में एवं इस त्यौहार के महत्व के बारे में जान सके। इसलिए आज के इस लेख में हम क्रिसमस के त्योहार पर 150, 200, 500 एवं 600 शब्दों में निबंध लेकर आए हैं।

क्रिसमस पर निबंध 150 शब्दों में (Essay on Christmas 150 Words)

क्रिसमस का त्योहार ईसाईयों का प्रमुख त्यौहार होता है। इस त्यौहार को हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। सभी त्योहारों के पीछे कुछ ना कुछ इतिहास होता है। इस त्योहार को मनाने के पीछे का कारण है कि इसी दिन ईसाइयों के प्रभु जीसस क्रिस्ट का जन्म हुआ था। उन्हीं के जन्मदिन की याद के रूप में हर साल इस त्योहार को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।

यह त्यौहार ईसाइयों के लिए बहुत महत्व रखता है। इस दिन सभी ईसाई लोग चर्च में जाते हैं और प्रभु ईसा के सामने मोमबत्ती जलाकर उनसे प्रार्थना करते हैं। उसके बाद घर पर आकर स्वादिष्ट भोजन बनाते हैं, रिश्तेदारों को क्रिसमस के त्योहार की बधाइयां देते हैं एवं गिफ्ट साझा करते हैं।

इस दिन क्रिसमस ट्री को सजाने का काफी ज्यादा महत्व रहता है। इस दिन लगभग सभी इसाई लोग अपने घरों में देवदार के वृक्ष को लाइटिंग, घंटी, स्टार इत्यादि से सजाते हैं। बच्चों में इस दिन के लिए सबसे ज्यादा उत्साह सैंटा क्लॉस को लेकर रहता है।

वे इंतजार करते हैं सेंटा क्लोज के आने का कि वे उन्हें उपहार देकर जाएं। उनकी इच्छा को पूरी करने के लिए उनके माता-पिता बच्चों को उपहार खरीद कर देते हैं। इस तरीके से इस दिन पूरे रात सभी साई परिवार में चहल-पहल रहता है।

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क्रिसमस पर निबंध 200 शब्दों में

क्रिसमस को भारत का मुख्य पर्व माना जाता है। इस त्यौहार को देश के सभी इलाकों में बड़े धूम धाम से मनाया जाया है। दक्षिण भारत में यह क्रिसमस का पर्व बहुत जयादा लोकप्रिय है।

क्रिसमस क्या है और कब मनाया जाता है?

एक लोकप्रिय रूप से क्राइस्ट के पर्व दिवस के रूप में हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। लोग घरों को सजाकर त्योहार मनाते हैं और परिवार, दोस्तों और प्रियजनों के साथ सांस्कृतिक अवकाश का आनंद लेते हैं।

ईसाइयों के लिए, यह एक विशेष दिन है। क्योंकि वे इसे ईसा मसीह के जन्म के सम्मान में मनाते हैं लेकिन केवल ईसाई ही नहीं, हर धर्म के लोग इसे पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। ईसाई त्योहार सर्दियों के मौसम में आता है, जिससे कि मौसम भी सुहाना रहता है, जोकि 15 दिन तक चलता है।

क्रिसमस त्योहार पर क्या-क्या करते हैं?

क्रिसमस तैयार पर लोग घरों को साफ सफाई करते हैं और घरों को सजाते हैं, उनको लाइटों से सजाते हैं तथा घर के बाहर मॉल में या दुकान के बाहर क्रिसमिस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस केक लाया जाता है, जो ड्राई फूड व लाजीक्ता से भरपूर होता है।

क्रिसमस क्यों मनाया जाता है?

क्रिसमस ईसा मसीह की याद में मनाया जाता है। ईसा मसीह जिन्हें करुणा, दया, बड़प्पन और अच्छे कर्मों के रूप में याद किया जाता है। ईसा मसीह ने कभी भी किसी का बुरा नहीं किया और ना किसी का बुरा सोचा लेकिन दुनिया के लोगों ने उन्हें कीलो पर लटका दिया, लेकिन वह अमर थे, वह पुनर्जीवित हो गए। क्योंकि वह लोगों की भलाई करने के लिए थे। उनकी पवित्रता और दया के कारण उन्हें याद किया जाता है।

क्रिसमस पर 500 शब्दों में निबंध

प्रस्तावना

क्रिसमस का त्योहार ईसाई समुदायों का प्रमुख त्योहार है। इस त्यौहार को हर साल शीत ऋतु में 25 दिसंबर के दिन मनाया जाता है। क्रिसमस का त्योहार 12 दिनों का त्यौहार होता है। 12 दिनों तक ईसाई लोगों में खूब चहल-पहल रहती है। क्रिसमस का त्योहार 25 दिसंबर को शुरू होता है और 3 जनवरी तक चलता है।

इन 12 दिनों में कुछ ना कुछ हर दिन खास होते रहता है। यह त्योहार भले ही ईसाई धर्म से ताल्लुक रखता हो लेकिन यह केवल इसाई धर्म तक ही सीमित नहीं रह गया है लगभग दूसरे धर्म के लोग भी मनाते हैं। इस त्यौहार को लेकर बच्चों में काफी ज्यादा उमंग रहती हैं। हालांकि बड़ों का भी उत्साह कम नहीं रहता। वे भी इस त्यौहार का बहुत बेसब्री से इंतजार करते हैं।

क्रिसमस त्योहार को मनाने का कारण

इस त्योहार को मनाने का कारण यह है कि इसी दिन ईसाइयों के प्रभु यीशु का जन्म बेथलहम में यूसुफ और मेरी के यहां हुआ था। हालांकि प्रभु यीशु के जन्मदिन का सटीक तारीख किसी को भी ज्ञात नहीं।

लेकिन बताया जाता है कि चौथी शताब्दी के शुरुआती दशक तक पश्चिम ईसाई चर्च ने 25 दिसंबर को प्रभु यीशु के जन्मदिन के रूप में घोषित किया था, जिसके बाद लोगों ने 25 दिसंबर को यीशु मसीह का जन्म तारीख ले लिया।

यहां तक कि 1870 ईसवी में संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी इस दिन को ईसा मसीह के जन्मदिन के रूप में घोषित कर दिया और तब से क्रिसमस के दिन एक संघीय अवकाश शुरू हो गया। इस दिन लगभग सभी स्कूल कॉलेजों में अवकाश रहता है। ईसाई लोग अपने ऑफिस से भी अवकाश ले लेते हैं। इस दिन वे पूरा समय अपने परिवार को देते हैं।

क्रिसमस का त्योहार किस तरह मनाते हैं?

क्रिसमस का त्योहार लोग बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। क्रिसमस के त्योहार के आने से कुछ दिन पहले से ही लोग अपने घरों के साफ-सफाई और घरों के पेंटिंग में लग जाते हैं। क्रिसमस के दिन लोग अपने घरों को ढेर सारे रंग बिरंगे रोशनी, फूल एवं मोमबत्तियों से सजा देते हैं।

इस दिन क्रिसमस ट्री का काफी ज्यादा महत्व रहता है। क्रिसमस ट्री देवदार पेड़ की तरह दिखने वाला एक सदाबहार वृक्ष होता है, जो अच्छाई एंव जिवंत का प्रतीक माना जाता है। लगभग सभी इसाईं परिवार अपने घरों में क्रिसमस ट्री को अलग-अलग रंग बिरंगी लाइटिंग, मोमबत्ती, सीनरी, रिबन, स्टार, गुब्बारे एवं फूलों से सजाते हैं।

इस दिन घंटी बजाने का भी महत्व रहता है। घंटी बजाकर सभी लोग चारों तरफ दिव्य माहौल उत्पन्न करते हैं। क्रिसमस के दिन गरीब हो या अमीर सभी लोग एक दूसरे को क्रिसमस के त्योहार की बधाई देते हैं एवं उपहार साझा करते हैं।

इस दिन सुबह सुबह सभी ईसाई लोग चर्च में जाकर प्रभु यीशु के सामने खड़े होकर प्रार्थना करते हैं। इस दिन वे आनंद गीत गाते हैं। घरों में स्वादिष्ट भोजन बनाया जाता है। इस दिन केक का भी काफी ज्यादा महत्व रहता है। लगभग सभी के घरों में केक बनना सामान्य होता है।

इस दिन सैंटा क्लॉस का महत्व

क्रिसमस के त्योहार में सैंटा क्लॉस का महत्व काफी ज्यादा रहता है और इसी के लिए बच्चे काफी ज्यादा इंतजार करते हैं। क्रिसमस के त्योहार को लेकर बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिलता है। क्योंकि इस दिन वे सैंटा क्लॉस से उपहार पाने की इच्छा रखते हैं।

क्रिसमस के दिन लगभग सभी बच्चे घरों के बाहर जुराब लटका देते हैं और उसमें अपने मनपसंद गिफ्ट का नाम लिख कर डाल देते हैं। दूसरे दिन में सबसे पहले उठने के बाद जुराव के पास जाते हैं और देखते हैं कि उनका मनपसंद गिफ्ट उपलब्ध रहता है।

दरअसल उनके माता-पिता जुराब से चिट्टे को निकालकर उनके मनपसंद गिफ्ट को पढ़ लेते हैं और अपने बच्चों को खुश करने के लिए वे उपहार ला कर रख देते हैं। बच्चों को लगता है कि सैंटा क्लॉस ने उन्हें उपहार दिया है। इस तरीके से क्रिसमस का त्यौहार सभी साईं समुदाय लोग बहुत धूमधाम से और हर्ष उल्लास के साथ मनाते हैं।

निष्कर्ष

क्रिसमस का त्योहार बुराइयों को भूलकर मिलजुल कर रहने का संदेश देता है। यह त्योहार बच्चों के साथ साथ युवा एवं बुड्ढे लोगों में भी उमंग भर देता है। जीवन में अपनों के साथ से बढ़कर कुछ नहीं है।

यह त्यौहार हर किसी को एक दूसरे की मदद करने और बुरी भावनाओं को खत्म करके भाईचारा की भावना को अपनाने का सीख देता है। इस दिन सभी लोग अपने कामकाज को भूल कर अपने परिवार एवं रिश्तेदारों के साथ आनंददायक पल का लुफ्त उठाते हैं।

अंतिम शब्द

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