डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर निबंध

Essay On Sarvepalli Radhakrishnan In Hindi: आज के आर्टिकल जिसमें हम डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर निबंध के बारे में बात करने वाले है। इस आर्टिकल में हम डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर निबंध के बारे में बात करने वाले है।

Essay On Sarvapalli Radhakrishnan In Hindi
Essay On Sarvepalli Radhakrishnan In Hindi

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डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर निबंध | Essay On Sarvepalli Radhakrishnan In Hindi

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर निबंध (200 शब्द)

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का नाम तो सुना होगा। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1881 में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। शुरुआत की शिक्षा इनकी साधारण रही और उसके पश्चात उन्होंने कई उपाधियाँ हासिल की। डॉक्टर सर्वपल्ली राधा कृष्ण की शादी 16 वर्ष की उम्र में हो गई थी और 30 वर्ष की उम्र में इन्होंने नैतिक किंग जॉर्ज वी चेयर संभाली थी।

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जो भारत के उपराष्ट्रपति भी रह चुके हैं। भारत के उप राष्ट्रपति के रूप में इन्होंने अपनी सेवा सन 1952 से 1962 तक दी है। सन 1975 में उन्हें पुरस्कार से भी नवाजा गया था और 1975 में ही इनका निधन हो गया। इसके पश्चात सन 1989 मे डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के नाम की एक स्कॉलरशिप योजना शुरू हुई तो आज भी चल रही है।

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्ण जो कि नेक इंसान रहे हैं और इन्होंने अपना हर 1 मिनट देश के विकास में न्योछावर किया है। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जो महान राजनीतिक नेता भी रह चुके हैं। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्ण द्वारा कई प्रकार की किताबें भी लिखी गई। सन 1923 में इनकी एक किताब भारतीय दर्शनशास्त्र प्रकाशित हुई। इन्होंने अपने जीवन में शिक्षक का किरदार भी निभाया है।

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर निबंध (600 शब्द)

प्रस्तावना

30 वर्ष की उम्र में इन्हें कोलकाता के वॉइस चांसलर के द्वारा मानसिक एवं नैतिक किंग जॉर्ज वी चेयर की उपाधि से नवाजा गया। सर्वपल्ली राधाकृष्णन आंध्र यूनिवर्सिटी के वॉइस चांसलर बने। उसके पश्चात 3 वर्षों के लिएऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में नीतिशास्त्र के प्रोफ़ेसर रहे। वे अच्छे लेखक भी थे। कई लेख किताबें भी लिखी।

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1952 से 62 तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को रत्न से भी नवाजा गया हैं। इसके पश्चात राष्ट्रपति पद पर भी नियुक्त किए गए। उपनिषद ब्रह्मसूत्र गीता शंकर माधव रामानुजन की व्याख्या और बुद्धिस्ट और जैन धर्म की अच्छी जानकारी थी। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के एक महान व्यक्ति और प्रसिद्ध शिक्षक थे।

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन व्यापक दृष्टिकोण नियमों व सिद्धांतों को मानने वाले व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत के प्रमुख कार्यकारी की भूमिका का निर्वहन किया। जिनका जन्म दिवस भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन बहुत ही ज्यादा सर्व सम्मानित व्यक्ति थे, जिन्हें हम शिक्षक दिवस के दिन सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के रूप में याद करते हैं।

सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने भारतीय परंपरा धर्म-दर्शन कई लेख पुस्तकें लिखी। सर्वपल्ली राधाकृष्णन महान शिक्षाविद और मानवतावादी थे। इसी वजह से शिक्षकों के प्रति प्रेम सम्मान प्रदर्शित करने के लिए पूरे देश भर में के द्वारा विद्यार्थियों के द्वारा उनके जन्म दिवस पर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म और शिक्षा

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरुतनी में 5 सितंबर 1888 को हुआ। एक ग्रामीण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी था, जो कम मानदेय पर जमीनंदारी का कार्य करते थे। इनकी माता का सीतामा था। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उन्होंने अपने संपूर्ण शिक्षा छात्रवृति के सहारे पूरी की।

इन्होंने अपने प्रारंभिक शिक्षा तमिलनाडु के क्रिश्चियन मिशनरी संस्थान से पूरी की। इसके पश्चात मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से उन्होंने अपने बीए की डिग्री प्राप्त की। 16 वर्ष की आयु में इन्होंने सिवाकामू से विवाह कर लिया। इनको मद्रास प्रेसिडेंसी मैं सहायक लेक्चरर के पद पर कार्य करने का अवसर मिला। मैसूर यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर के रूप में नौकरी मिली।

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की उपाधियाँ

अपने बाद के जीवन में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने प्लेटो व अन्य कई लेखकों की अस्तित्ववाद के दर्शन की व्याख्या को पढा। उन्होंने द फिलोसोफी रवींद्रनाथ टैगोर क्वेस्ट, द राइन ऑफ रिलीजन कंटेंपोरेरी फिलोसोफी, द इंटरनेशनल जनरल ऑफ एथिक्स, जनरल ऑफ फिलोसोफी आदि ख्याति प्राप्त जनरल के लिए कई आर्टिकल लिखें।

सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने दर्शनशास्त्र की लाइब्रेरी के लिए प्रोफ़ेसर के निवेदन पर दूसरी पुस्तक भारतीय दर्शनशास्त्र का लेखन किया जो कि 1923 में प्रकाशित हुई। सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 1975 मैं पुरस्कार जीता। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1961 मे जर्मन बुक ट्रेड का शांति पुरस्कार भी जीता।

1989 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने यूनिवर्सिटी में छात्रवृत्ति की शुरुआत की जिसे बाद में राधाकृष्णन चिवनिग स्कॉलरशिप का नाम दिया गया। सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने आशीर्वाद को पाने के अध्ययन के लिए कैंब्रिज को छोड़ने के दौरान निवासन रामानुजन नामक प्रतिभाशाली गणितज्ञ से वो मिले। वर्षों तक देश को अपने महान सेवा देने के पश्चात 17अप्रैल 1975 को डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का निधन हो गया।

निष्कर्ष

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्ण जिनको एक महान इंसान माना गया। क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में हर समय को कीमती समझते हुए उसका सदुपयोग किया और देश के लिए हर पल को न्योछावर किया सर्वपल्ली राधाकृष्ण जी ने शिक्षक से लेकर उपराष्ट्रपति तक का सफर तय किया।

अंतिम शब्द

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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