परिश्रम का महत्व पर निबंध

Essay on Parishram Ka Mahatva in Hindi : नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करने जा रहे हैं परिश्रम के महत्व के बारे में। परिश्रम का अर्थ होता है मेहनत करना। परिश्रम से ही हम अपने भोजन की व्यवस्था कर सकते हैं। अगर भोजन नहीं होगा तो हम जीवन में जी नहीं सकते, इसीलिए हर इंसान को परिश्रम करना बहुत ही आवश्यक है। आइए से जुड़ी कुछ बातें जानते हैं। हम यहां पर परिश्रम का महत्व पर निबंध शेयर कर रहे है। इस निबंध में परिश्रम का महत्व के संदर्भित सभी माहिति को आपके साथ शेअर किया गया है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

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परिश्रम का महत्व पर निबंध | Essay on Parishram Ka Mahatva in Hindi

परिश्रम का महत्व पर निबंध  (250 शब्द)

हमारे जीवन में परिश्रम का उतना ही महत्वपूर्ण होता है, जितना जीवित रहने के लिए भोजन। परिश्रम को सफलता की कुंजी कहा जाता है। आज तक इतिहास में किसी भी व्यक्ति को देखा जाए तो, वह अपने आप अचानक से सफल नहीं होता। सफल होने के लिए कठिन परिश्रम करने की आवश्यकता होती है।

आसान शब्दों में कहा जाए तो परिश्रम का अर्थ है किसी काम को करने में हमारे द्वारा किया जाने वाला श्रम ही परिश्रम कहलाता है। देखा जाए तो हर व्यक्ति ही परिश्रम करता है लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि कौन अधिक परिश्रम करता है और कौन कम परिश्रम करता है। परिश्रम ही तय करता है कि हम कितना सफल हो पाएंगे।

परिश्रम दो मुख्य प्रकार के होते हैं एक परिश्रम वह होता है, जो हम आमतौर पर शरीर के द्वारा करते हैं। जिसे हम शारीरिक परिश्रम कहते हैं। अधिकतर यह परिश्रम मजदूर वर्ग के लोगों में देखा जा सकता है।

दूसरा परिश्रम वह होता है, जिसमें हम अपनी मानसिक एवं बौद्धिक क्षमताओं का उपयोग करते हैं। वह मानसिक परिश्रम कहलाता है। किसी भी नई चीज के शुरुआत करने के लिए शारीरिक और मानसिक परिश्रम दोनों ही बहुत जरूरी है।

देखा जाए तो, परिश्रम के बिना मनुष्य का जीवन पशु के समान है। एक पशु भी अपने भोजन के लिए ही परिश्रम करता है। यदि हम भी सिर्फ इतने के लिए ही परिश्रम करेंगे, तो फिर हम में और जानवर में कोई अंतर नहीं रह जाएगा।

परिश्रम का महत्व पर निबंध (850 शब्द)

प्रस्तावना

अगर हम जीवन में सफलता और खुशी चाहते हैं, तो इसका हमारे पास एकमात्र तरीका है परिश्रम करना। परिश्रम से संबंधित भर्तृहरि जी ने एक श्लोक कहा है।

उद्यमें नहि सिध्यंति

कार्याणि ना मनोरथि

हीं सुप्तस्य सिंहस्य

प्रविशांति मुखे मृगा

इसका मतलब है सिर्फ मन में कामना कर लेने भर से कोई कार्य संपन्न नहीं हो जाता है। उसके लिए हमें कठिन परिश्रम करना पड़ता है। ठीक उसी तरह जैसे सोते हुए शेर के मुख में हिरण खुद नहीं आ जाता।

परिश्रम का महत्व

देखा जाए तो परीक्षण को कुछ ही शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता है क्योंकि किसी व्यक्ति के जीवन में परिश्रम है अर्थात वह परिश्रम करने से नहीं डरता तो उसके लिए कोई भी काम असंभव नहीं है। वह हर असंभव काम को संभव बना सकता है। इसीलिए कहा जाता है कि दुनिया में कोई भी काम असंभव नहीं है। जरूरी है तो हमारा परिश्रम करना।

इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि जो इंसान अधिक परिश्रम करता है। वह जिंदगी में सब कुछ पा सकता है उसके लिए कोई भी सीमा बाधित नहीं है।

परिश्रम से सिर्फ धनसंपदा की प्राप्ति नहीं होती बल्कि साथ में यश कीर्ति सुख और आनंद की भी प्राप्ति होती है। इसी के साथ परिश्रमी व्यक्ति सिर्फ अपना ही भला नहीं करता है बल्कि अपने साथ-साथ समाज और देश का भी भला करता है।

परिश्रम का वास्तविक स्वरूप

देखा जाए तो, हम सब इसी उलझन में रहते हैं कि आखिर परिश्रम का वास्तविक स्वरूप क्या है? किसी को अपने जीवन में कब परिश्रम करना चाहिए? इसका सही समय क्या होना चाहिए? इत्यादि उलझनों में हम घेरे रहते हैं।

परिश्रम का वास्तविक स्वरूप यह है कि हमें बिना फल के कर्म करते रहना चाहिए। भगवान कृष्ण ने भी गीता में यही कहा था कि कर्म करते रहो फल की इच्छा ना करो। अगर आपको कुछ भी चाहिए तो आप उसके लिए परिश्रम करते रहिए। कभी ना कभी वह आपको जरूर हासिल होगा।

परिश्रम के लाभ

सब लोग यही चाहते हैं, कि हमें सफलता पाने का कोई भी आसान सा तरीका मिल जाए। लेकिन सफलता सिर्फ परिश्रम से ही पाई जा सकती है। इसीलिए आपको निरंतर परिश्रम करते रहना चाहिए।

आजकल के लोगों का रहन सहन बहुत ही आरामदायक हो गया है। जिससे लोग आलसी स्वभाव के बन गए हैं। लेकिन युवाओं को यह समझाना चाहिए कि परिश्रम के बिना सफलता नहीं मिलती है। परिश्रम से होने वाले कुछ लाभ निम्नलिखित हैं।

नई चीजें सीखते हैं।

हमें पता है आज कल का जो दौर है, वह प्रतिस्पर्धा का दौर है। आए दिन हर कार्य में यहां पर दौड़ लगी हुई है। अगर हम मेहनत करके वह चीज सीख लेते हैं, तो हमें भी नई चीज़ सीखने को मिलती है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति किसी जगह पर तभी तक स्थाई रह सकता है जब तक वह उस जगह के लायक होगा। इसके लिए जरूरी है, कि वह खुद को हमेशा और बेहतर बनाने की कोशिश करता रहे खुद में नए बदलाव लाने के लिए और वर्तमान चुनौतियों का सामना करने के लिए जरूरी है कि हम परिश्रम करने के लिए तैयार रहे।

स्थाई सफलता मिलती है

कहते हैं ना किस्मत के बल पर ही सब कुछ नहीं मिल सकता है। अगर हमें कुछ वाकई जिंदगी में कुछ चाहिए तो हमें परिश्रम करना ही होगा। परिश्रमी व्यक्ति कभी भी अपनी और सफलता का दोषी किस्मत को नहीं मानता। वह खुद की कमियों को देखता है जिनकी वजह से वह सफल हो रहा है। उसके बाद इन पर काम करता है और सफलता मिले तो कोशिश करता रहता है। यदि परिश्रम करने के बाद भी कोई व्यक्ति और सफल हो रहा है तो उसे निराश नहीं होना चाहिए क्योंकि हमारे द्वारा की गई मेहनत का परिणाम कभी न कभी हमें जरूर मिलेगा।

नए अवसर बनते हैं

परिश्रमी व्यक्ति कभी भी अवसर आने का इंतजार नहीं करता है, बल्कि वह अपने लिए खुद अवसर बनाता है। अच्छे अवसर की तलाश में बैठे रहना यह आलसी प्रवृत्ति के लोगों का काम है, जो लोग वाकई में मेहनत करना चाहते हैं। वह अपने लिए नए नए अवसर खोजते रहते हैं।

सकारात्मकता बनी रहती है

परिश्रमी व्यक्ति के जीवन में भले ही कितनी बड़ी मुश्किल क्यों ना आ जाए। वह परेशान नहीं होता है वह थोड़ी देर के लिए परेशान हो सकता है लेकिन उस परिस्थिति में भी सकारात्मक ही बना रहता है।

अच्छे चरित्र का निर्माण होता है

मेहनत करने से व्यक्ति के अंदर अच्छे चरित्र का निर्माण होता है। मेहनती व्यक्ति मेहनत के महत्व को समझता है, इसलिए वह कभी किसी के साथ धोखा नहीं करता। सफलता पाने के लिए कोई भी गलत तरीका नहीं अपनाता और सिर्फ उतनी ही चीजों पर अपना अधिकार जताता है, जितना उसने अपनी मेहनत से हासिल किया है।

परिश्रम से सफलता प्राप्ति के कुछ उदाहरण

इतिहास में हमें बहुत से ऐसे उदाहरण देखने को मिलेंगे जिनकी हम ने कल्पना भी नहीं की होगी। धरती पर कई महान व्यक्तियों ने जन्म लिया है, जिनमें से कुछ के उदाहरण इस प्रकार हैं।

  • डॉक्टर . पी. जे. अब्दुल कलाम

डॉक्टर कलाम को मिसाइल मैन कहां जाता है। इन्होंने ही देश में मिसाइल के प्रोग्राम की शुरुआत की थी। इनका बचपन अभावों में बीता था। एक समय ऐसी स्थिति आई थी, जब कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए 1000 रुपए भी नहीं थे, परंतु उन्होंने परिश्रम करके अपने आप को इस काबिल बनाया कि वह जाने माने वैज्ञानिक भी बने और देश के राष्ट्रपति भी बने।

  • जे. जे. थॉमसन

जे. जे. थॉमसन बचपन से ही मंदबुद्धि थे। इस वजह से उनको स्कूल में से भी निकाल दिया गया था, परंतु जे. जे. थॉमसन ने इतना परिश्रम किया कि उन्होंने बल्ब का आविष्कार किया। वह बल्ब बनाने में 1000 बार फेल हुए आखिरकार उन्होंने सफलता पाई। इसीलिए कहते हैं परिश्रम करने से सफलता अवश्य मिलती ही है।

निष्कर्ष

कहते हैं भाग्य का सहारा वही लोग लेते हैं, जो कर्म हीन है। जो कर्म नहीं करना चाहते हैं, वह अपनी किस्मत का सहारा ही ले सकते हैं। अतः हम सभी को परिश्रम के महत्व को स्वीकारना एवं समझना चाहिए तथा परिश्रम का मार्ग अपनाते हुए स्वयं का ही नहीं अपितु, अपने देश और समाज के नाम को ऊंचाई पर ले जाना चाहिए और निरंतर परिश्रम करते रहना चाहिए।

अंतिम शब्द

आज के आर्टिकल में हमने  परिश्रम का महत्व पर निबंध ( Essay on Parishram Ka Mahatva in Hindi) के बारे में बात की है। मुझे पूरी उम्मीद है की हमारे द्वारा लिखा गया यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। यदि किसी व्यक्ति को इस आर्टिकल में कोई शंका है। तो वह हमें कमेंट में पूछ सकता है।

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