कैप्टन विक्रम बत्रा का जीवन परिचय

Captain Viram Batra Biograohy in Hindi: अक्सर हम सभी लोग अपने जीवन में बॉलीवुड सेलिब्रिटी और बड़े बड़े बिजनेसमैन के बारे में अवश्य ही जानते हैं और एक दूसरे से बातें भी करते हैं, परंतु हम कभी भी सरहद पर वीरता और साहस के साथ लड़ने वाले लोगों के नाम याद नहीं रखते।

नमस्कार दोस्तों! आज हम आप सभी लोगों को भारत के एक ऐसे शख्स के बारे में बताने वाले हैं, जिन्होंने भारत के लिए सीमा पर अपने प्राणों की बलि दे दी। यह शख्स भारत के एक ऐसे वीर है जिन्होंने सीमा पर जाते हुए कहा था, कि “लहराते तिरंगे के पीछे आऊंगा या तिरंगे में लिपटा वापस आऊंगा”।

Image: Captain Viram Batra Biograohy in Hindi

अब आप तो समझ गए होंगे, कि आप किसकी बात कर रहे हैं, जी हां आप सभी लोगों ने बिल्कुल सही समझा हम बात कर रहे हैं, भारत के वीर और जवान सिपाही कैप्टन विक्रम के बारे में। आज हम आप सभी लोगों को अपने इस महत्वपूर्ण लेख के माध्यम से बताने वाले हैं, कैप्टन विक्रम के संपूर्ण जीवन परिचय के विषय मे।

आज आप सभी लोगों को इस लेख में जानने को मिलेगा, कि शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा कौन थे? (Captain Viram Batra Biograohy in Hindi) कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म, कैप्टन विक्रम बत्रा की कहानी, कैप्टन विक्रम बत्रा का कारगिल युद्ध इत्यादि। चलिए शुरू करते हैं, कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन परिचय को।

कैप्टन विक्रम बत्रा का जीवन परिचय | Captain Viram Batra Biograohy in Hindi

कैप्टन विक्रम बत्रा के विषय में संक्षिप्त जानकारी

नामकैप्टन विक्रम बत्रा
उपनामशेरशाह
जन्म9 सितंबर 1974
जन्म स्थानपालमपुर हिमाचल प्रदेश
माताकमल कांता बत्रा
पितागिरधारी लाल बत्रा
भाई एवं बहनविशाल बत्रा, सीमा और नूतन
गर्लफ्रेंडडिंपल चीमा
पेशाभारतीय आर्मी
रैंककैप्टन
सर्विस डेट1996 से 1999
Captain Viram Batra Biograohy in Hindi

कैपिटल विक्रम बत्रा कौन थे?

कैप्टन विक्रम बत्रा भारत के एक जवान है। कैप्टन विक्रम बत्रा ने कारगिल युद्ध में अपना बहुत ही बड़ा योगदान दिया। इनके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता, इस युद्ध में इन्होंने काफी वीरता और साहस के साथ अपना कौशल दिखाया और खुशी खुशी अपने प्राणों की बलि भी दे दी। कैप्टन विक्रम बत्रा ने इतने विश्वास का काम किया की भारत सरकार के द्वारा इन्हें शहीद हो जाने के उपरांत अदम्य साहस के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म

चलिए जानकारी प्राप्त करते हैं, कैप्टन विक्रम बत्रा के जन्म के विषय में। कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म हिमाचल प्रदेश में हुआ था। इनका जन्म वर्ष 1974 ईस्वी में 9 सितंबर को पालमपुर नामक स्थान में हुआ था। इनके माता-पिता इन्हें काफी ज्यादा प्यार करते थे। कैप्टन विक्रम बत्रा का प्रारंभिक जीवन काफी अच्छे से बेटी हुआ है।

कैप्टन विक्रम बत्रा का पारिवारिक संबंध

कैप्टन विक्रम बत्रा के माता-पिता के द्वारा इन्हें काफी प्यार प्राप्त हुआ। कैप्टन विक्रम बत्रा भी अपने माता-पिता से काफी प्यार करते थे। इन्होंने सीमा पर जाते हुए अपने माता पिता से कहा था, कि लहराते हुए तिरंगे के पीछे आऊंगा या लिपटे हुए तिरंगे से आऊंगा।

विक्रम बत्रा के पिता का नाम गिरधारी लाल बत्रा है, इनके पिता सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत थे। विक्रम बत्रा के पिता अपने परिवार का ध्यान रखने के लिए काफी सक्षम थे और इन्होंने अपने परिवार का ध्यान काफी अच्छे से रखा भी था।

इतना ही नहीं विक्रम बत्रा के माता का नाम कमला भत्ता था, जो कि पेशे से एक स्कूल में टीचर थी। यह दोनों लोग ही एक टीचर थी, जिसके कारण इन्हें किसी भी चीज की कमी न थी और विक्रम बत्रा को अपने माता-पिता से काफी सहयोग प्राप्त हुआ, जिसके कारण उन्होंने भारतीय आर्मी ज्वाइन किया।

कैप्टन विक्रम बत्रा को प्राप्त शिक्षा

कैप्टन विक्रम बत्रा के माता पिता दोनों ही सरकारी स्कूल के अध्यापक थे, जिसके कारण इन्होंने अपने बेटे को भी बचपन से ही पढ़ाई लिखाई के तरफ काफी सक्षम बना दिया था। कैप्टन विक्रम बत्रा को बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में काफी रूचि थी, पढ़ाई लिखाई में रुचि होने के साथ-साथ इन्हें इंडियन आर्मी में भी काफी ज्यादा जी हो गया।

कैप्टन विक्रम बत्रा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल से पूरा किया। इन्होंने इसके बाद स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने के लिए केंद्रीय विद्यालय चुनाव इन्होंने डीएवी कॉलेज से बीएससी चिकित्सा विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। विक्रम बत्रा ने इसके बाद अंग्रेजी भाषा से m.a. की शिक्षा प्राप्त करने के लिए पंजाब विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया, परंतु इनकी रूचि भारतीय सेना की तरफ और भी ज्यादा बढ़ गई इसके कारण इन्होंने अपनी शिक्षा को बीच में ही छोड़ छोड़।

कैप्टन विक्रम बत्रा का व्यक्तिगत जीवन

विक्रम बत्रा अविवाहित थे। हालांकि कैप्टन विक्रम बत्रा की मंगनी हो चुकी थी। कैप्टन विक्रम बत्रा के मंगेतर का नाम डिंपल चीमा था। कारगिल युद्ध से पहले विक्रम बत्रा होली की छुट्टियों में घर आए हुए थे इसी बीच उन्होंने अपनी मंगेतर डिंपल चीमा से मिलने के लिए उनके फेवरेट कैफे में चले गए हैं। डिंपल उस समय विक्रम बत्रा को लेकर काफी ज्यादा चिंतित थी, इन्होंने उनसे कारगिल युद्ध के दौरान उनका ख्याल रखने के लिए कहा। डिंपल चीमा के ऐसा कहने पर विक्रम बत्रा ने कहा “या तो मैं अपनी जीत का तिरंगा लहराता हुआ आऊंगा या फिर उसी तिरंगे में अपनी आंखें बंद करके लिपटा हुआ आऊंगा।”

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कैप्टन विक्रम बत्रा की ट्रेनिंग

हमने आपको बताया विक्रम बत्रा ने अपनी m.a. की पढ़ाई को बीच में ही छोड़कर आर्मी की तैयारी में जुट गए थे, इसके बाद उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब के रूप में ट्रेवल एजेंसी भी ज्वाइन कर ली। विक्रम बत्रा ने इस ट्रैवल एजेंसी पर ब्रांच मैनेजर के रूप में कार्यरत थे।

विक्रम बत्रा ने वर्ष 1996 ईस्वी में सीडीएस की परीक्षा दी इस परीक्षा के बाद इनका चयन इलाहाबाद के सेवा चयन बोर्ड में हो गया। इलाहाबाद के सेवा चयन बोर्ड में लगभग 35 लोगों का चयन किया गया था जिसमें से एक विक्रम बत्रा थे। विक्रम बत्रा की भारत के प्रति देशभक्ति इतनी ज्यादा बढ़ गई थी इन्होंने अपना पूरा का पूरा ध्यान आर्मी में सिलेक्शन के लिए लगा दिया और जी जान से ट्रेनिंग भी ली।

कैप्टन विक्रम बत्रा का कैरियर

कैप्टन विक्रम बत्रा को मानेकशा बटालियन IMA में शामिल कर लिया गया। कैप्टन विक्रम बत्रा ने इसके बाद सन 1997 ईस्वी में 6 दिसंबर को इन्होंने अपनी 19 महीने की ट्रेनिंग पूरी कर ली, जिसके बाद आई एम ए में स्नातक की डिग्री प्राप्त हुई। प्रशिक्षण पूरा हो जाने के बाद जम्मू और कश्मीर राइफल्स में लेफ्टिनेंट के रूप में 13वीं बटालियन के साथ इन्हें नियुक्त किया गया। इसके बाद मात्र एक ही महीने के लिए प्रशिक्षण हेतु जबलपुर मध्य प्रदेश के लिए भेज दिया गया। यहां से इन्होंने प्रशिक्षण पूरा किया और भारतीय आर्मी में कैप्टन के पद पर नियुक्त किए गए हैं।

कैप्टन विक्रम बत्रा की पोस्टिंग

कैप्टन विक्रम बत्रा ने अपनी प्रशिक्षण को पूरा करने के बाद वापिस जब कैंप पर लौटे, तब इन्हें आतंकवादी गतिविधि क्षेत्र बारामुला जिले (जो कि जम्मू और कश्मीर के सोपोर में स्थित है) में भेज दिया गया। यहां भी जाने के बाद इनका प्रशिक्षण नहीं रुका इन्हें यंग ऑफिसर कोर्स को पूरा करने के लिए 5 महीने की अवधि के लिए इन्फेंट्री स्कूल एम हाउ भेज दिया गया। जमीन का कोर्स पूरा हो गया, तब इन्हें अल्फा ग्रेडिंग से सम्मानित कर पुनः जम्मू कश्मीर के बटालियन में देश की सेवा के लिए भेज दिया गया।

कारगिल युद्ध में योगदान

विक्रम बत्रा भारत के एक ऐसे वीर थे, जिन्होंने कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की बलि देकर अपनी वीरता का परिचय दिया। इनकी वीरता कुछ ऐसी थी, जिन्होंने वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विक्रम बत्रा ने अपनी होली की छुट्टी को पूरा करने के बाद जब वह वापस जम्मू कश्मीर के कैंप पर पहुंचे तब उनकी बटालियन को शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश की तरफ से जाने के लिए कहा गया।

कैप्टन विक्रम बत्रा ने अपनी टीम को 8 माउंटेन में विभाजित की कर दिया, जिसमें से 192 माउंटेन ब्रिगेड के तहत आतंकवादियों को मार गिरा रहे थे, ऐसा करने के बाद उन्होंने जम्मू को तो पूरा कर लिया, परंतु उन्हें और उनकी बटालियन को वहां से निकलने का आदेश दे दिया।

पाकिस्तान की आर्मी सेना ने भारतीय सेना के खिलाफ सेक्टर में मजबूत किलेबंदी कर रखी थी, जिसमे स्वचालित हथियार की प्रबलता थी। विक्रम बत्रा की इस कारगिल युद्ध के दौरान 20 जून 1999 ईस्वी को कमांडर डेल्टा की कंपनी के द्वारा इन्हें 5140 पॉइंट के अंतर्गत मिशन विजय के लिए हमला करने की जिम्मेदारी को सौंप दिया गया।

कैप्टन विक्रम बत्रा ने पूरब दिशा की ओर से अपनी पूरी सेना के साथ शत्रु को बिना भनक पहुंचाए हुए ही उन पर हमला कर दिया हमला करते हुए यह लोग उनके क्षेत्रों में घुस गए। कैप्टन विक्रम बत्रा और उनकी टीम ने अपने दस्ते को पुनर्गठित करने पर वह दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने के लिए पहुंच गए।

यह भारत के इतिहास का एक ऐसा समय था, जिसमें इतनी निडरता के साथ शत्रु के क्षेत्र में कोई गया था। जिस समय यह घटना घटित हुई थी, उस समय इस टीम का नेतृत्व कैप्टन विक्रम बत्रा ही कर रहे थे। इन्होंने शत्रु के कैंप में घुसकर उन पर हमला किया। हमने करने के दौरान इन्होंने 4 छात्रों को मार भी गिराया जिस क्षेत्र में शत्रु थे वह क्षेत्र बेहद भयानक होने के बावजूद भी कैप्टन विक्रम बत्रा ने शत्रुओं का नाश कर दिया और उनके रेडियो स्टेशन पर भी जाकर अपनी विजय उद्घोषना किए।

कैप्टन विक्रम बत्रा की इस बहादुरी के बाद 7 जुलाई 1999 ईस्वी को 4875 पॉइंट की छोटे से कब्जे को लेकर एक अभियान शुरू कर दिया गया। इस अभियान को भी विक्रम बत्रा और उनकी टोली को सौंप दिया गया। यह एक ऐसा अभियान था, जिसे पूरा करने वाला रास्ता भी बहुत ही ज्यादा भयानक था, क्योंकि वहां पर दोनों तरफ से खड़ी खड़ी धाराम थी और केवल एक ही रास्ता था।

इस रास्ते पर भी शत्रुओं के द्वारा घेराबंदी कर दी जा गई थी। कैप्टन विक्रम बत्रा ने इतने ज्यादा सकरी रास्ते से होते हुए अपने पूरे जोश और जज्बे के साथ शत्रु के ठिकाने तक पहुंचने के बाद उन पर आक्रमण करने का निर्णय कर लिया। एक ऐसा कारगिल का युद्ध था, जिसे भारत के पूरे इतिहास में अब तक एक विशेष पहचान मिल चुकी है। कैप्टन विक्रम बत्रा ने इस आक्रमण के दौरान प्वाइंट ब्रेक रेंज के पांच शत्रुओं को मार गिराया।

कैप्टन विक्रम बत्रा की पुण्यतिथि

कारगिल युद्ध के दौरान विक्रम बत्रा को काफी ज्यादा गहरे गहरे जख्म आए हुए थे, विक्रम बत्रा ने इस जख्मों के बावजूद भी हार नहीं मानी और रेंगते हुए शत्रुओं के ऊपर बड़े-बड़े ग्रेनेड फेंकने शुरू कर दिए। विक्रम बत्रा के द्वारा फेंके गए ग्रेनेड केस कारण शत्रुओं का पूरा इलाका समाप्त हो गया और सभी शत्रु भी मारे गए। इस आक्रमण के बाद कैप्टन विक्रम बत्रा ने फिर भी हार नहीं मानी इन्होंने शत्रुओं पर प्रहार करने के लिए अपनी टुकड़ी के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और यह आगे भी बढ़े, परंतु भारी गोलाबारी की वजह से वह उसी स्थान पर लेटे लेटे अपने प्राणों की बलि दे दिए। ऐसे स्थानों से या वीरगति को प्राप्त हो गए और अपनी अंतिम सांस ली।

कैप्टन विक्रम बत्रा को मिले सम्मान

  • कैप्टन विक्रम बत्रा को पॉइंट 4785 के दौरान उनकी टीम ने शत्रुओं पर कब्जा कर लिया जिसके कारण यह एक ऐतिहासिक रूप में इस पहाड़ को बत्रा टॉप का नाम दे दिया गया।
  • कैप्टन विक्रम बत्रा की वीरता के चर्चे जबलपुर के सभी हिस्सों में फैल गए और जबलपुर की एक छावनी को विक्रम बत्रा एंक्लेव के नाम से नवासा भी गया।
  • कैप्टन विक्रम बत्रा के कारनामों के कारण इलाहाबाद में भी उन्हें खूब सराहना मिली और वहां के एक हॉल का नाम विक्रम बत्रा ब्लॉक रख दिया गया।

कैप्टन विक्रम बत्रा को प्राप्त पुरस्कार

विक्रम बत्रा की वीरता को देखते हुए भारत के इस महान योद्धा को इनके कौशल के कारण वीरगति प्राप्त हुई। इनके वीरगति के दौरान इन्हें भारत सरकार के द्वारा परमवीर चक्र से सम्मानित कर दिया गया।

कारगिल युद्ध पर बनी फिल्म 

हम सभी लोगों ने वर्ष 2013 में आई फिल्म एलओसी कारगिल को तो अवश्य ही देखा होगा। वर्ष 2013 में आई यह फिल्म पूरी तरह से कारगिल युद्ध पर ही आधारित थी। इस फिल्म का प्रकाशन बॉलीवुड इंडस्ट्री के द्वारा किया गया था, जिसमें अभिषेक बच्चन के द्वारा विक्रम बत्रा के महत्वपूर्ण किरदार को निभाया गया था। स्वयं अभिषेक बच्चन ने इस फिल्म को लेकर स्वयं के ऊपर गर्व महसूस किया, क्योंकि उन्होंने भारत के प्रभावशाली योद्धा विक्रम बत्रा के किरदार को निभाया था।

कैप्टन विक्रम बत्रा पर बनी फिल्म

अभी हाल ही में इसी वर्ष (2021) एक ऐसी फिल्म “शेरशाह” लांच हुई है, जो की पूरी तरह से कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर आधारित हैं। इस फिल्म में कैप्टन विक्रम बत्रा के कारगिल युद्ध के साथ-साथ उनके पर्सनल भूमिका भी दर्शाई गई है। इस फिल्म की कहानी पूरी तरह से सत्य घटना पर आधारित है। इस फिल्म में विक्रम बत्रा के जन्म से लेकर आईएमए की ट्रेनिंग और जम्मू कश्मीर में उनके कारगिल युद्ध तक की सभी घटनाओं का चित्रण किया गया है।

कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन परिचय पर बनी इस फिल्म में बॉलीवुड के सुपरस्टार अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार निभाया है। इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा ने इनके जीवन के किरदार को इतने बखूबी के साथ निभाया है, कि यह फिल्म आते ही पूरी बॉलीवुड फिल्म जगत में हिट हो गई। इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ-साथ लीड एक्ट्रेस का रोल कियारा आडवाणी ने निभाया है।

इस फिल्म में कियारा आडवाणी ने सिद्धार्थ मल्होत्रा अर्थात कैप्टन विक्रम बत्रा की गर्लफ्रेंड डिंपल चीमा का किरदार निभाया है। अबे इस फिल्म को 2 दिन पहले ही लॉन्च किया गया है, जिसके कारण या फिल्म अभी थियेटर में ही चल रही है। यदि आप इनके जीवन से इंस्पिरेशन प्राप्त करना चाहते हैं तो आप इस फिल्म को अपने आसपास के थिएटर में जाकर देख सकते हैं।

निष्कर्ष

हम उम्मीद करते हैं, कि आप सभी लोगों को हमारे द्वारा लिखा गया यह महत्वपूर्ण लेख “कैप्टन विक्रम बत्रा का जीवन परिचय (Captain viram batra biograohy in hindi)” अवश्य ही पसंद आया होगा, यदि हां! तो कृपया हमारे द्वारा लिखे गए इस महत्वपूर्ण लेख को अवश्य शेयर कीजिए, यदि आपके मन में इस लेख को लेकर किसी भी प्रकार का कोई सवाल है, तो कमेंट बॉक्स में हमें अवश्य बताएं।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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