लम्हा शायरी

Lamha Shayari in Hindi

Lamha Shayari in Hindi
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लम्हा शायरी |Lamha Shayari in Hindi

ढून्ढ रहे हे मगर नाकाम रहे अब तक ,
वो लम्हा जिस मैं तू याद न आया हो..!!

जलने दो ज़माने को चलो एक साथ चलते हैं,
नयी दुनिया बसाने को चलो एक साथ चलते हैं,
हमें जीवन का हर लम्हा तुम्हारे नाम करना है,
यही वादा निभाने को चलो एक साथ चलते हैं।

मैं कुछ लम्हा और तेरा साथ चाहता था,
आँखों में जो जम गयी वो बरसात चाहता था,
सुना हैं मुझे बहुत चाहती है वो मगर,
मैं उसकी जुबां से एक बार इज़हार चाहता था।

मैं ख़ामोशी तेरे मन की,
तू अनकहा अलफ़ाज़ मेरा…
मैं एक उलझा लम्हा,
तू रूठा हुआ हालात मेरा…

इश्क हो तो सदिया लम्हो में कट जाती है,
और लम्हे सदियो में नहीं कटते.

यादें करवट बदल रही हैं
और मैं तनहा तनहा सा हूँ,
वक़्त भी जिससे रूठ गया है
मैं वो बेबस लम्हा हूँ।

तुमसे दूरी का एहसास जब सताने लगा,
तेरे साथ गुज़ारा हर लम्हा याद आने लगा,
जब भी कोशिश की तुम्हें भुलाने की,
तू और भी इस दिल के करीब आने लगा।

लम्हा लम्हा रोज़ सँवरने वाला तू,
लम्हा लम्हा लम्हा रोज़ बिखरने वाला मैं.

मेरा हर लम्हा चुरा लिया आपने,
आँखों को एक चाँद दिया आपने,
हमें जिंदगी दी और किसी ने,
पर प्यार इतना देकर जीना सिखा दिया आपने।

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एक उम्र है जो तेरे बगैर गुज़ारनी है,
और एक लम्हा भी तेरे बगैर गुज़रता नही…

मेरी ज़िन्दगी में एक ऐसा शक्श भी है,
जो मेरी पूरी ज़िन्दगी है
और मै उसका एक लम्हा भी नही.

तेरी आवाज़ सुनने को तरश्ता है दिल मेरा,
तेरी एक झलक पाने को बेकरार है दिल मेरा,
अपनी ज़िन्दगी का हर लम्हा तेरे साथ गुज़ारू,
हर पल बस यही चाहता है दिल मेरा।

सारी उम्र आंखो मे एक सपना याद रहा,
सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा,
ना जाने क्या बात थी उनमे और हममे,
सारी महफ़िल भूल गए वह चेहरा याद रहा ।

दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बैठे,
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बैठे,
वो हमे एक लम्हा न दे पाए प्यार का,
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बैठे।

Lamha Shayari in Hindi

हर लम्हा अपनी पलकों पर बिठाया तुझे,
फिर भी ये इश्क़ मेरा न रास आया तुझे,
किस्मत की भी है यह अजीब दास्ताँ,
कभी हंसाया तो कभी रुलाया मुझे.

अकसर गुमसुम रहने वाला नग्मा हूँ मैं,
आपकी यादो में रहने वाला लम्हा हूँ मैं,
आप मेरी जान हो तो एक बात बताओ,
आपके होते हुए भी क्यों तन्हा हूँ मैं।

न जाने क्यूँ वक़्त इस तरह गुजर जाता है,
जो वक़्त था वो पलट कर सामने आता है,
और जिस वक़्त को हम दिल से पाना चाहते हैं,
वो तो बस एक लम्हा बनकर बीत जाता है।

लाख बंदिशें लगा ले दुनिया हम पर,
मगर हम दिल पर काबू नहीं कर पाएंगे,
वो लम्हा आखिरी होगा जीवन का हमारा,
जिस दिन हम यार तुझको भूल जायेंगे।

इस दिल को अगर तेरा एहसास नहीं होता,
तो दूर भी रह कर के यूँ पास नहीं होता,
इस दिल ने तेरी चाहत कुछ ऐसे बसा ली है,
एक लम्हा भी तुझ बिन कुछ खास नहीं होता।

एक लम्हा खुद को भी
देना कभी वक्त निकालकर,
शायद तुमसे नाराज
तुमसे और कोई भी ना हो.

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तेरा मिलना, मेरे लिए ख्वाब सा सही,
पर तुझे भूलूँ मैं ऐसा
कोई लम्हा मेरे पास नहीं।

ख्यालों का कोहरा कुछ यादों की धुंध,
चाय की चुस्की और थोडी सी तुम.

हमने ही बरसों लगा दिए,
वरना एक लम्हा काफी था
तुझे भूल जाने को।

मैंने उस शख्स को
कभी हासिल ही नहीं किया,
फिर भी हर लम्हा लगता है
कि, मैंने उसे खो दिया…..

मेरा हर लम्हा चुराया आपने,
आँखों को एक ख्वाब दिखाया आपने,
हमें ज़िन्दगी दी किसी और ने,
पर प्यार में जीना सिखाया आपने.

ख्यालों में बीत रहा, हर लम्हा तेरा है,
असलियत भी तेरी थी, ख्याल भी तेरा है।

मैंने उसे कभी हासिल ही नही किया
फिर भी लगता है
हर लम्हा कि मैने उसे खो दिया.

मैं वक़्त बन जाऊं,
तू बन जाना कोई लम्हा…
मैं तुझमे गुज़र जाऊं,
तू मुझमें गुज़र जाना…

******

अगर जिंदगी में जुदाई ना होती,
तो कभी किसी की याद आई ना होती,
साथ ही गुजरता हर लम्हा तो शायद,
रिश्तों में इतनी गहराई ना होती.

वो लम्हा लम्हा हम में घुलती रही,
तुम बेपरवाह सदा तुम ही रहे।

Lamha Shayari in Hindi

बंधी है हाँथ में सबके घडीयाँ मगर,
पकड़ में एक भी लम्हा भी नहीं.

वो मेरी पूरी जिंदगी है…
क्या मैं उसका,
एक लम्हा भी नहीं।

क्या बताऊँ कैसे खुद को दर-ब-दर मैंने किया,
उम्र भर किस किस के हिस्से का सफ़र मैंने किया,
तू तो नफरत भी न कर पायेगा इस शिद्दत के साथ,
जिस बला का प्यार बेखबर तुझसे मैंने किया।

एक तो तेरी आवाज़ याद आएगी,
तेरी कही हुई हर बात याद आएगी,
दिन ढल जायेगा, रात को याद आएगी,
हर लम्हा पहली मुलाकात याद आएगी.

लम्हा भर मिल कर रूठने वाले,
ज़िंदगी भर की दास्तान है तू ।

अगर जिंदगी में जुदाई ना होती;
तो कभी किसी की याद आई ना होती;
साथ ही गुजरता हर लम्हा तो शायद;
रिश्तों में इतनी गहराई ना होती।!!!!

फुरसत के लम्हों का खिलौना बना कर,
वो हमको लुभाते हैं,
जब उनका दिल करे तब आते है,
नही तो छुप जाते है.

जन्नत का हर लम्हा…दीदार किया था
गोद मे उठाकर जब मॉ ने प्यार किया।

एक लम्हा युगों से है ज़िन्दा,
कौन कहता है दुनिया फ़ानी है.

जी लो हर लम्हा बीत जाने से पहले,
लौट कर यादें आती है वक़्त नहीं.

दिल की धड़कनो को एक लम्हा सब्र नहीं,
शायद उसको अब मेरी ज़रा भी कदर नहीं,
हर सफर में मेरा कभी हमसफ़र था वो,
अब सफर तो हैं मगर वो हमसफ़र नहीं।

याद जब आती है तुम्हारी तो सिहर जाता हूँ मैं,
देख कर साया तुम्हारा अब तो डर जाता हूँ मैं,
अब न पाने की तमन्ना है न खोने का डर,
जाने क्यूँ अपनी ही चाहत से मुकर जाता हूँ मैं।

हैं दर्द सीने में मगर
होंठों पे जज़्बात नहीं आते,
आखिर क्यों वापिस वो
बीते हुए लम्हात नहीं आते.

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लाख बंदिशें लगा ले ये दुनिया हम पर,
मगर हम दिल पर काबू नहीं कर पाएंगे,
वो लम्हा आखिरी होगा ज़िन्दगी का हमारा,
जिस दिन हम यार तुझको भूल जायेंगे।

जरा साहिल पे आकर वो थोड़ा मुस्कुरा देती,
भंवर घबरा के खुद मुझ को किनारे पर लगा देता,
वो ना आती मगर इतना तो कह देती कि आँऊगी,
सितारे, चाँद, सारा आसमान राहों में बिछा देता।

जिसमे दोस्त साथ होते है,
लेकिन उससे भी खूबसूरत है,
वो लम्हें जब दूर रहकर भी,
वो हमें याद करते है.

उतना हसीन फिर कोई लम्हा नहीं मिला,
तेरे जाने के बाद कोई भी तुझ सा नहीं मिला,
सोचा करूँ मैं एक दिन खुद से ही गुफ्तगू,
लेकिन कभी मैं खुद को तन्हा नहीं मिला।

*****

कैसे कहें कि आपके बिन यह ज़िंदगी कैसी है,
दिल को हर पल जलाती यह बेबसी कैसी है,
न कुछ कह पाते हैं और न कुछ सह पाते हैं,
न जाने तक़दीर में लिखी यह आशिकी कैसी है।

वो मेरी पूरी जिंदगी है,
क्या मैं उसका एक लम्हा भी नहीं.

तिनकों से बना पल, पल से बना लम्हा,
और लम्हों ने वक़्त को चुना,
हर पल कोई किसी के साथ नहीं रह सकता,
इसीलिए तो खुदा ने यादों को चुना।

Lamha Shayari in Hindi

वो मेरे पाँव को छूने झुका था जिस लम्हे
जो माँगता उसे देती अमीर ऐसी थी

महसूस खुद को तेरे
बिना मैंने कभी किया नहीं,
तू क्या जाने लम्हा कोई
मेने कभी जिया नहीं.

वो लम्हा भर की कहानी कि उम्र भर में कही
अभी तो ख़ुद से तक़ाज़े थे इख़्तिसार के भी

इश्क़ में हर लम्हा ख़ुशी का एहसास बन जाता है,
दीदार-ए-यार भी खुदा का दीदार बन जाता है,
जब होता है नशा मोहब्बत का,
तो अक्सर आईना भी ख्वाब बन जाता है।

हर वक़्त का हँसना तुझे बर्बाद न कर दे
तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर

जूनून-ए-इश्क था
तो कट जाती थी रात ख्यालो में,
सजा-ए-इश्क आयी तो
हर लम्हा सदियों सा लगने लगा।

गर सुकूँ चाहिए इस लम्हा-ए-मौजूद में भी
आओ इस लम्हा-ए-मौजूद से बाहर निकलें

वक़्त बीतने के बाद
अक़्सर ये अहसास होता है।
कि, जो छूट गया वो
लम्हा ज्यादा बेहतर था।

गुजरते लम्हों में सदियाँ तलाश करता हूँ,
प्यास इतनी है कि नदियाँ तलाश करता हूँ,
यहाँ पर लोग गिनाते है खूबियां अपनी,
मैं अपने आप में कमियाँ तलाश करता हूँ।

लम्हा लम्हा सांसें ख़तम हो रही हैं,
ज़िंदगी मौत के पहलू में सो रही है,
उस बेवफा से ना पूछो मेरी मौत की वजह,
वो तो ज़माने को दिखाने के लिए रो रही है।

यादें अगर आँसू होती तो चली जाती,
यादें अगर लिखावट होती तो मिट जाती,
यादें ज़िंदगी में बसा वो लम्हा हैं,
जो लाख कोशिशों के बाद भी
लफ़्ज़ों में नहीं सिमट पाती।

यादें करबट बदल रहीं हैं
और मैं तन्हा तन्हा हूँ,
वक़्त भी जिस से रूठ गया है
मैं वो बेबस लम्हा हूँ।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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