खजुराहो मंदिर का इतिहास और खजुराहो कैसे जाएँ?

Khajuraho Temple History in Hindi: भारत में अनेक हैरतंगेज गाँव, शहर और जगह मौजूद है, लेकिन पर्यटकों की आँखे खजुराहो पर आकर रुक जाती है। यहाँ बने चित्र और मूर्तियाँ सभी को झकझोर देने वाली है। खजुराहो मंदिरों का शहर कहलाता है, यहाँ पर हिन्दू और जैन मंदिर बहुत अधिक है। लेकिन इसकी सबसे विशेष बात यह है कि यहाँ पर कामुक मूर्तियों का संग्राहलय बनाया गया है।

Khajuraho Temple History in Hindi
खजुराहो मंदिर

यह भारत के मध्यप्रदेश छतरपुर जिले में है। खजुराहो मंदिर का इतिहास (khajuraho mandir ka itihaas), कलाकृति, यहाँ की संस्कृति इत्यादि के बारें में जानने के लिए इस आर्टिकल को पूरा जरुर पढ़ें। खजुराहो अपने आप में ही ख़ास माना जाता है और यहाँ पर हजारों वर्षों पुराना इतिहास मौजूद है। इसलिए यूनेस्को वर्ल्ड हेरीटेज साईट में भी इसे शामिल किया गया है।

खजुराहो मंदिर का इतिहास (Khajuraho Temple History in Hindi)

नामखाजुराहो मंदिर
कहाँ स्तिथ हैमध्यप्रदेश के छतरपुर जिले का एक छोटा सा कस्बा है
खजुराहो मंदिरों का निर्माण किसने करवायाचन्देल वंश राजाओं के द्वारा
इन मंदिरों को कब बनवाया गया950-1050 ईस्वी के मध्य में
विशेषताकामक्रिया को दर्शाने वाली मूर्तिशिल्प
अन्य नामकजारा, जेजाक भुक्ति, खजरपुर, खजुरवाहक, जेजाहुती, ची:ची: तौ इत्यादि

माना जाता है कि खजुराहो के मंदिरों का निर्माण वहां के चंदेला वंश के राजाओं ने करवाया था। कहा जाता है यह वंश भगवान चन्द्र के बेटे ने शुरू किया था। उनका राज खजुराहो ही नहीं उत्तरप्रदेश के मोहबा तक फैला हुआ था। वह जहाँ राज करते थे, उस जगह को बुंदेलखंड के नाम से जाना जाता है।

चंदेलवंश के राजाओं ने इन मंदिरों का निर्माण 9वीं शताब्दी में करवाया था, जिसका जिक्र हमें अबू रिहान अली बरुनी और इब्न बतूता की लिखी पुस्तकों में मिलता है। उनके अनुसार यहाँ के चंदेल राजाओं ने 84 ऐसे मंदिर बनाये थे, लेकिन आज तक खोज 22 मंदिरों की ही हुई है।

इतिहासकारों के अनुसार चंदेला वंश ने खजुराहो मंदिर बनाने के पीछे भी एक महत्व था, उन्होंने संसार को कामवासना से मुक्त होने की एक राह दिखाई थी। आज भी इन शिल्पमूर्तियों पर विज्ञान भी खोज कर रही है और यहाँ से अनेक तरह का ज्ञान प्राप्त होता है। यहाँ आपको परिवार, देव और देवताओं का मिलन, बच्चे की उत्पति, बच्चे का जन्म, बच्चे का 9 महीने का सर्कल इत्यादि सब मूर्तियों के रूप में दिखाया गया है। कुछ लोगों का मानना है कि यहाँ पर शरीर की रचना और शरीर का अंत दिखाया गया है।

चंदेला वंश जब दिल्ली सल्तनत के साथ हुए युद्ध में हार गया तो दिल्ली सल्तनत ने खजुराहो पर कब्जा कर लिया और उस समय उनके अधिकार में यहाँ पर अनेक बदलाव हुए। अनेक मंदिरों को उन्होंने लूट लिया तो कुछ मंदिरों को हमेशा के लिए लुप्त कर दिया। 13वीं शताब्दी से 18वीं शताब्दी तक यह मंदिर मुस्लिम शासकों के अधिकार में रहा।

मुस्लिम शासकों का यूँ मंदिरों पर किया गया अत्याचार देखकर हिन्दू और जैन धर्म के लोग एक हुए और मुस्लिम शासकों का विरोध किया। उनकी कोशिश की बदौलत कुछ मंदिर बच पाए लेकिन बाद में समय के साथ जंगल विकसित हुआ और यह मंदिर एक बार फिर लुप्त हो गये। 1838 में जब अंग्रेजों ने भारत में पैर पसारे तो वहां का एक इंजिनियर टी.एस.बर्ट ने भारत की यात्रा करी और इन मंदिरों की खोज की, उसके बाद यहाँ के राजाओ ने इन मंदिरों की मरम्मत करवाई।

आज खजुराहो में 22 मंदिर है और यह 6 किलोमीटर के दायरे में फैले हुए है, पुरात्तव विभाग यहाँ पर हमेशा कुछ ना कुछ खोजने में लगा रहता है। उनके अनुसार अभी भी यहाँ पर बहुत कुछ खोजने लायक है। उनके अनुसार यहाँ 85 मंदिर थे और 30 किलोमीटर के दायरे में फैले हुए थे।

खजुराहो मंदिर बनाने के पीछे कहानी

इन मंदिरों के निर्माण के पीछे की एक कथा बहुत प्रचलित है। कहते है कि एक ब्राह्मण की पुत्री हेमवती जब यहाँ नदी से पानी लेने के लिए आई तो चन्द्रदेव प्रकट हुए और हेमवती पर मोहित हो गये। दोनों के बीच प्रेम-प्रसंग चला और हेमवती ने एक पुत्र को जन्म दिया। इस पुत्र का नाम चन्द्रवर्मन रखा गया।

हेमवती का सपना था कि उसका बेटा राजा बने तो चन्द्रदेव की कृपा से उनका बेटा यहाँ का राजा बना और चंदेला वंश शुरू हुआ। हेमवती चाहती थी कि मनुष्य की सभी मुद्रा यहाँ उल्लेखित हो, इसलिए उसने अपने बेटे को जो राजा था, उसे इस तरह के मंदिर बनाने के लिए उकसाया। हेमवती की बदौलत आज खजुराहो मंदिर हमें देखने को मिला है।

मंदिर की बनावट एवं वास्तुकला

यह मंदिर मुड़े हुए पत्थरों से बने हुए है। प्रत्येक मंदिर पर मनुष्य की संभोगक्रीडा को दिखाया गया है। स्त्री को चरम तक पहुँचाने की हर एक पोजीशन यहाँ पर मूर्ति के रूप में या वास्तुकला के रूप में दिखाई गई है। यहाँ पर अनेक मंदिर है, जिनमें शिवजी का मंदिर सबसे अहम माना जाता है। कुछ मंदिरों की दीवारों पर भगवान की प्रतिमा है तो कुछ जगहों पर मनुष्यों या देवी-देवताओं की संभोग क्रीडा को दिखाया गया है।

खजुराहो के मंदिर में बहुत सारे कमरे हैं और सभी कमरे पूर्व से पश्चिम की ओर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। प्रत्येक कमरे में बहुत सारी कलाकृतियों का निर्माण किया गया है और उन कलाकृतियों की चमक हमेशा बनी रहे इसीलिए कमरों की खिड़कियों को इस तरीके से बनाया गया है कि सूर्य की रोशनी खिड़की से आते ही उन कलाकृतियों पर पड़े।

यहाँ लगभग सभी देवी-देवताओं का चित्रण है। माना जाता है कि यह मंदिर वैज्ञानिक दृष्टि से बना हुआ है। यहाँ पर विज्ञान के हर सवाल का जवाब मिलता है बस खोजने वाला होना चाहिए। खजुराहो के मंदिर में जितनी भी मूर्तियां बनी है, इसमें से ज्यादातर मूर्तियां लाल बलुए पत्थरों से बनाए गए हैं। हालांकि कुछ मूर्तियों का निर्माण ग्रेनाइट के पत्थरो के इस्तेमाल से भी बनाया गया है।

यहां पर महादेव मंदिर, ब्रह्मा मंदिर, चौसठ योगिनी का मंदिर आदि ग्रेनाइट के पत्थरों से बनाए गए हैं। यहां के मंदिर की कलाकृति के भाव बहुत सजीव लगते हैं। यहां की मूर्तियां बोलती हुई प्रतीत होती हैं। यही कारण है कि बड़े-बड़े कलाकारों ने भी इस मंजिल के मूर्ति कला की सराहना की है।

खजुराहो के मंदिर की एक और विशेषता यह है कि यहां पर भव्य मंदिरों का निर्माण बिना किसी परकोटे के ऊंचे चबूतरे पर किया गया है, जिसके कारण इन मंदिरों की खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ जाती है। खजुराहो का मंदिर प्राचीन भारत की अनूठी परंपरा और कलाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।

यहाँ पर बनी नग्न प्रतिमा किसी भी तरह से लोगों को शर्मसार नहीं करती, एक बार देखने पर हमें नग्न जरुर प्रतीत होती है लेकिन यह किसी को शर्मसार कर दे ऐसा कुछ नहीं है। यहाँ स्त्री और पुरुष के चेहर पर एक अनोखी चमक नजर आती है। कुल मिलाकर यह मंदिर कामशास्त्र और विज्ञान का मेल है।

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खाजुराहो में बने प्रमुख मंदिर

वैसे तो खजुराहो में अनेक मंदिर बने हुए है, लेकिन हम यहाँ पर कुछ मंदिरों की एक लिस्ट दे रहे है, जो खजुराहो में स्तिथ है:

पार्वती मंदिर

पार्वती मंदिर खजुराहो मंदिर के अंदर ही स्थित है। यह मंदिर पार्वती माता को समर्पित है और इस मंदिर पर भी बहुत खूबसूरत नक्काशी किए गए हैं। इस मंदिर में देवी गंगा भी विराजमान है।

सूर्य मंदिर

खजुराहो में स्थित सूर्य मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित बहुत ही मशहूर मंदिर है। इस मंदिर में भगवान सूर्य देव की लगभग 7 फीट ऊंची प्रतिमा विराजमान है और यह प्रतिमा सात घोड़े वाले रथ को चलाती हुई प्रतीत होती है।

नंदी मंदिर

खजुराहो में स्थिति नंदी मंदिर देखने लायक मंदिरों में से एक है। भगवान महादेव के वाहक नंदी को समर्पित यह मंदिर 12 खंभों से बना हुआ है। इस मंदिर की आकृति काफी हद तक विश्वनाथ मंदिर के समान है।

कंदरिया महादेव मंदिर

कंदरिया महादेव का मंदिर खजुराहो में सबसे विशाल और भव्य मंदिर है। इस मंदिर की ऊंचाई करीब 31 मीटर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है लेकिन इस मंदिर के बाहर 872 मूर्तियां कामुकता को दर्शाती हुई नजर आती है और प्रत्येक मूर्ति की ऊंचाई लगभग 1 मीटर है।

लक्ष्मण मंदिर

लक्ष्मण मंदिर खजुराहो खजुराहो मंदिर के अतिरिक्त एक भव्य मंदिर है। यह खजुराहो का सबसे पुराना मंदिर है। इसे रामचंद्र चतुर्भुज मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसका निर्माण चंदेल वंश के शासकों के समय ही किया गया था। इस मंदिर के गर्भ ग्रह के रूप में वैकुंठ विष्णु का चित्र उकेरा गया है।

मंदिर के अंदर प्रवेश द्वार पर एक सुंदर महिला की आकृति देखने को मिलती है। इसके अतिरिक्त यहां पर स्थित ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव की दिव्य त्रिमूर्ति इस मंदिर के प्रवेश द्वार की शोभा और भी ज्यादा बढ़ा देती है। इस मंदिर में हिंदू देवी देवताओं के लगभग 600 नक्काशी है।

देवी जगदंबा मंदिर

देवी जगदंबा का मंदिर खजुराहो में बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है, जो कुंडलीदार और बेहद जटिल रचनाओं के साथ तैयार किया गया है। यह मंदिर कंदरिया महादेव के उत्तर की तरफ स्थित है। यह कामुक मूर्तियों के लिए खजुराहो में बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है।

चौंसठ योगिनी मंदिर

खजुराहो में स्थित चौंसठ योगिनी मंदिर चंदेल कला की प्रथम कृति है। यह मंदिर चौसठ योगिनियो को समर्पित है। यह मंदिर निर्माण की दृष्टि से बहुत अधिक प्राचीन है। इन मंदिर का निर्माण ग्रेनाइट के सुंदर पत्थरो से किया गया है। इस मंदिर की यह खासियत है कि यह मंदिर 18 फुट जगती पर आयताकार रूप में निर्मित किया गया है।

इस मंदिर में 2.5 फुट चौड़ी और 4 फुट लंबी बहुत सारी कोठारिया बनी हुई है, जिनका प्रवेश द्वार 32 इंच ऊंचा और 16 इंच चौड़ा है। इस मंदिर में स्थित हर एक कोठारी के ऊपर छोटे-छोटे कोणस्तुपाकार शिखर है। मंदिर के सभी कोठरियों के शिखर का निचला भाग चैत्यगवाक्षों के समान त्रिभुजाकार है।

मंतगेश्वर मंदिर

खजुराहो में मनकेश्वर मंदिर एक और आकर्षक और प्रसिद्ध मंदिर है। यह खजुराहो के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण नवी शताब्दी में राजा हर्षवर्धन के द्वारा कराया गया था। इस मंदिर में 2.5 मीटर ऊंचा शिवलिंग भी मौजूद है, जिसे पीले चुने पत्थर से तैयार किया गया है और हर सुबह यहां पर आरती होती है। इस मंदिर में वराह एवं लक्ष्मी का भी मंदिर बना है।

खजुराहो के मंदिर घूमने कैसे जाएं?

खजुराहो का प्रसिद्ध मंदिर भारत के मध्य प्रदेश राज्य के छतरपुर में स्थित है। खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिर घूमने आने के लिए भारत के विभिन्न राज्य एवं प्रदेशों से रेलवे सड़क एवं हवाई मार्ग की सुविधा है। खजुराहो का प्रसिद्ध मंदिर रेलवे माध्यम से घूमने आना चाहते हैं तो यहां का सबसे पास रेलवे स्टेशन छतरपुर रेलवे स्टेशन है और इस रेलवे स्टेशन से खजुराहो की दूरी लगभग 45 किलोमीटर है।

बात करें खजुराहो पहुंचने के लिए हवाई मार्ग की तो खजुराहो का अपना घरेलू हवाई अड्डा भी है, जिसे सिविल एरोड्रोम खजुराहो भी कहा जाता है। यह हवाई अड्डा खजुराहो के मुख्य शहर से केवल 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वाराणसी और दिल्ली से नियमित उड़ान यहां के लिए भरती है। हालांकि यह हवाई अड्डा भारत के सभी हवाई अड्डे से नहीं जुड़ा हुआ है। जो भी हवाई मार्ग से आना चाहते हैं वह वाराणसी, भोपाल या मुंबई से आ सकते हैं।

सड़क मार्ग के जरिए भी खजुराहो की यात्रा काफी आसान है। क्योंकि यह शहर मध्य प्रदेश के अन्य शहरों के साथ अच्छे सड़क संपर्क बनाता है। मध्य प्रदेश के आसपास के जिले जैसे झांसी, भोपाल, ग्वालियर, महोबा, इंदौर आदि से एमपी पर्यटन की कई सारी बसें सीधे खजुराहो के लिए उपलब्ध है।

खजुराहो घूमने का सबसे अच्छा समय

साल के किसी भी महीने खजुराहो मंदिर देखने के लिए जा सकते हैं लेकिन यदि इस मंदिर को देखने का भरपूर आनंद उठाना हो तो अक्टूबर से फरवरी का महीना दुनिया भर के पर्यटकों के लिए सबसे अच्छा समय है। क्योंकि इस दौरान हल्की हल्की ठंड के साथ वातावरण यहां के पर्यटन स्थलों की शोभा को और भी ज्यादा बढ़ा देता है।

मार्च से जून के महीने के दौरान यहां का तापमान लगभग 47 डिग्री तक चला जाता है। इतने डिग्री तापमान में खजुराहो घूमना ज्यादा आनंद दायक साबित नहीं हो सकता है। हालांकि जुलाई से सितंबर के बारिश के मौसम में भी खजुराहो के मंदिर को देखना काफी आनंददायक हो सकता है।

क्योंकि इस दौरान बारिश धुले हुए सभी मंदिर की शोभा और भी ज्यादा बढ़ जाती हैं। मानसून मौसम में घूमने जाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस दौरान काफी कम भीड़ रहती है और सस्ते में खजुराहो में रहने के लिए होटल और कई चीजें मिल जाती हैं।

खाजुराहो से जुड़ी कुछ रोचक बातें

  • यहाँ का नाम खजुराहो इसलिए पड़ा क्योंकि यहाँ पर खजूर के बाग़ हुआ करते थे।
  • माना जाता है कि यहाँ पर जो भी बना हुआ है, वह चन्द्रदेव के सुझाए गये तरीको से बना हुआ है।
  • यह मंदिर विज्ञान की हर एक टिप्पणी पर खरा उतरता है।
  • कहा जाता है कि अल्ट्रासाउंड में जिस तरह भ्रूण को दिखाया जाता है, ठीक उसी तरह यहाँ दशकों पहले कलाकृति बनाई गई है।
  • यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में इसे शामिल किया गया है।
  • यहाँ की प्रतिमा इतने वर्षो से भी आज तक एक ही चमक बनाये हुए है।
  • यहाँ बने मंदिर कब बने यह अभी तक पूरी तरह से प्रमाणित नहीं हुआ है।
  • खजुराहो मंदिर के अंदर सारे कमरे पूर्व से पश्चिम की ओर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और प्रत्येक कमरे में एक प्रवेश द्वार, एक मंदिर, एक हॉल और एक गलियारा है।
  • खजुराहो के मंदिर में विभिन्न देवी देवताओं की छवियां प्रदर्शित है और यह विभिन्न भगवानों की छवियां है जैसे शिव और शक्ति, येन और यांग, महिला और पुरुष सिद्धांत आदि।
  • इस मंदिर पर कुछ वर्षो पहले हमला हुआ था और लोगों ने यहाँ पर बनी प्रतिमा का विरोध किया था। उनके अनुसार यह अश्लीलता फ़ैलाने वाले मंदिर है।
  • पुरात्तव विभाग हर साल यहाँ से कुछ ना कुछ ऐसा खोजता है, जो साबित करता है कि यह मंदिर बहुत पुराना ही नहीं बहुत ज्यादा ऐतिहासिक और विज्ञानिक दृष्टिकोण पर बना हुआ है।
  • खजुराहो मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर कामुक मूर्तियों से भरा पड़ा हुआ है। लेकिन यहां पर केवल 10% ही कामुक मूर्तियां वर्णित है बाकी की मूर्तियों में मनुष्य के रोजाना दिनचर्या को दिखाया गया है, जिससे कि संगीतकार गीत गाते हुए, किसान को काम करते हुए, कुमार को काम करते हुए जैसी मूर्तियां यहां पर चित्रित है।
  • यहाँ सभी मंदिर जटिल और कुंडलीदार रचना के आधार पर बनाये गये है, जिन्हें देखकर सभी अचंभित हो जाते हैं कि यह बने कैसे है?

FAQ

खजुराहो शहर का नाम खजुराहो कैसे पड़ा?

खजुराहो शहर के नाम को लेकर ऐसा माना जाता है कि प्राचीन समय में खजुराहो शहर पूरी तरीके से खजूर के पेड़ से घिरा हुआ था। इसी कारण इस शहर का नाम खजुराहो पड़ा। हालांकि पहले इस शहर को खजूर पूरा के नाम से भी जाना जाता था। वैसे एक और भी मान्यता है कि खजुराहो नाम की उत्पत्ति खजूर वाहक जो भगवान शिव के प्रतीकात्मक नाम है इससे हुई है।

खजुराहो का मंदिर कहाँ है?

खजुराहो का मंदिर छतरपुर (मध्य प्रदेश) में स्थित है।

खजुराहो मंदिर का निर्माण किन पत्थरों से किया गया है?

मध्यप्रदेश के खजुराहो शहर में स्थित खजुराहो के मंदिर का निर्माण गुलाबी, पीला और बादामी रंग के साथ बलूई पत्थर से किया गया है।

खजुराहो मंदिर में कामुक मूर्तियां क्यों बनाई गई है?

कुछ विश्लेषकों के अनुसार प्राचीन समय में राजा महाराजा भोग विलासिता में बहुत अधिक लिप्त रहा करते थे, इसीलिए उनके कामोत्तेजना को दर्शाने के लिए इस मंदिर के बाहर कामुक मूर्तियों को चित्रित किया गया था।

खजुराहो मंदिर का निर्माण कब हुआ था?

खजुराहो मंदिर का निर्माण चंदेल शासक के द्वारा मध्यकालीन शताब्दी में हुआ था।

खजुराहो का मंदिर किसने बनवाया?

खजुराहो का मंदिरों का निर्माण चन्देल वंश राजाओं के द्वारा 950-1050 ईस्वी के मध्य में करवाया गया

निष्कर्ष

हमने इस आर्टिकल में खजुराहो का इतिहास (Khajuraho Temple History in Hindi) एवं मंदिरों से जुड़ी जानकारी साझा की है। आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा, हमें जरुर बताएं। हालाँकि कुछ लोग इन मंदिरों को अश्लील बताते है लेकिन मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ कि अगर एक बार आप यहाँ गये, उसके बाद आपको यह मूर्तियाँ अश्लील नहीं लगेगी।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 4 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 6 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।

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