कार्यालयी पत्र (सरकारी या कार्यालयी पत्र, प्रारूप और उदाहरण)

कार्यालयी पत्र (सरकारी या कार्यालयी पत्र, प्रारूप और उदाहरण) | Karyalayi Patra

Karyalayi Patra
Image:Karyalayi Patra

जैसा की हम सभी जानते है विचारो के आदान प्रदान के कई सारे माध्यम होते है। उनमे से एक प्रमुख माध्यम पत्र को माना जाता है। पत्र सन्देश वाहक होते है एक जगह से दूसरी जगह पत्रों के माध्यम से ही संदेशो को भेजा और प्राप्त किया जाता है।

पत्र के दो प्रकार होते है।

औपचारिक पत्र के अंतर्गत कार्यालयी पत्र आते है। कार्यालयी पत्र को अंग्रेजी में official letter कहते है।

इन कार्यालयी पत्रों का आदान प्रदान

  1. एक देश की सरकार से दूसरी देश के सरकारों के मध्य संपर्क के लिए
  2. केंद्र और राज्य सरकार के मध्य, सरकार तथा दूतावास के मध्य
  3. राज्य सरकारों बीच
  4. सरकार और दूसरे विभागों के बीच
  5. सरकार तथा विशेष व्यक्ति
  6. कार्यालयों तथा व्यक्ति विशेष के बीच सूचनाओ के आदान प्रदान के लिए किया जाता है।

यह सभी पत्र और इनके पत्राचार के व्यापक सीमाए कार्यालयी पत्रों के अंतर्गत आती है। यहाँ कार्यालय के अंतर्गत सभी सरकारी, गैर सरकारी, अर्द्ध सरकारी, जहाँ प्रशासनिक व्यवस्थाओ का संचालन होता है। आदि वह सभी विभाग आते है।

इन्हे शासकीय अथवा प्रशासकीय पत्र भी कह सकते है। कार्यालयों के दृष्टिकोण सरकारी कार्यालय में बहुत सारे विभाग होते है। ये अपना व्यापक क्षेत्र रखते है। अत: इस प्रकार के पत्रों को लिखते समय इसका सही ज्ञान होना आवश्यक है।

सभी कार्यालय के पत्र और सरकारी पत्र के प्रतिरूप में समानता होती है।

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कार्यालय के पत्रों को लिखते समय ध्यान रखने योग्य नियम

  1. ऐसे पत्रों में ऊपर दाई ओर विभाग, संस्था, कार्यालय अथवा मंत्रालय का नाम मुद्रित होना चाहिए। यही पर पता तथा पिनकोड लिखा जाता है।
  2. वही नीचे की ओर दिनांक लिखते है और कभी कभी दिनांक को पत्र के नीचे वाले भाग में अंतिम में बायीं ओर लिख सकते है।
  3. भेजने वाले का नाम और पता लिखना भी महत्वपूर्ण होता है।
  4. प्रेषक (पत्र भेजने वाला) अपना नाम और पता लेख्नेके पश्चात् उसके नीचे सेवा में लिखकर पत्र पाने वाले का नाम और पता तथा पद लिखना चाहिए।
  5. पत्र का जो भी विषय है उसको पत्र में लिखना आवश्यक होता है। अत: विषय प्रेषिती के नीचे वाले भाग में मध्य स्थान पर ”विषय” लिखकर उसका उल्लेख कर देना चाहिए।
  6. प्रेषिती को संबोधित करने के लिए ”महोदय”,”महोदय”, ”मान्यवर” जैसे आदरसूचक शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।
  7. पत्र को शुरू करने से पहले प्राप्त पत्र अथवा कोई ऐसा पत्र जिसे पहले प्रेषित किया गया हो उस पत्र की संख्या और तारीख का संस्मरण करना आवश्यक होता है।
  8. इन सब कार्यो के पश्चात् ही मूल पत्र की ओर बढ़ना चाहिए।
  9. हर एक बात के लिए अलग अलग अनुच्छेदों को उपयोग में लाना चाहिए।
  10. पत्र लिखने में अन्य पुरुष शैली अर्थात यह, वह, इन्हें, उन्हें का प्रयोग उचित रहता है। उतम पुरुष शैली जैसे – मैं, हम के प्रयोग से बचना चाहिए।
  11. पत्र लेखन में शुद्ध भाषा का होना आवश्यक होता है। अत: शिष्ट, सरल और सुसंगत भाषा का ही प्रयोग करना चाहिए।
  12. जब पत्र लेखन समाप्त हो जाये तब बायीं ओर कुछ विशेष शब्दों जैसे – भवदीय, सद्भावनापूर्वक या विश्वासपात्र जैसे शब्द लिखने चाहिए और वहीं हस्ताक्षर कर देना उचित होता है।
  13. तथा हस्ताक्षर के नीचे अपना नाम कोष्ठक में अंकित कर देना चाहिए इस बात का ध्यान रखे अगर ऊपर की ओर पता तथा पद नही लिखा है तो नीचे भी लिख सकते है।
  14. पत्र से जुड़े हुए अधिकारी अथवा विभाग पत्र का पृष्ठांकन करे, यह आवश्यक है।
  15. पत्रों में संलग्नता होना महत्वपूर्ण है, अत: संलग्न क्रम संख्या डालकर पत्र को अंतिम रूप देना चाहिए।

कार्यालय के पत्र की छोटी सी रूपरेखा

संख्या –
प्रेषक –
रमेश शर्मा
पत्र संख्या आ 25/350
नगर निगम
उत्तर प्रदेश ,दिनांक – 15/06/2021

प्रशासक नगर निगम
उत्तर प्रदेश
प्रेषिती का नाम पद और पता

सेवा में,
मुख्य सचिव
प्रदेश सरकार
लखनऊ

विषय – अनुदान वृद्धि के संबंध में पत्र

संबोधन: महानुभाव
(पत्र प्रारंभ:)
आपके पत्र संख्या 13क /6/2021 दिनांक 6 जून 2021 के उत्तर में मुझे यह पत्र लिखने का आदेश हुआ है।

कि…………………………………………….…….…………………………………………………………………….…………………………………………….…….…………………………………………………………………….…………………………………………………………………………….……………………
आपका विश्वासपात्र……………………………………………………….……………………
स्वनिर्देशित हस्ताक्षर……………………………………………………….……………………
(रमेश शर्मा)

संलग्न पत्र सूची:
संलग्न

(1)….
(2)….
(3)…..

पृष्ठांकन:

प्रतिलिपि निम्नलिखित विभागों को प्रेषित है:
(1)….
(2)….
(3)….

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कार्यालयी पत्रों के प्रकार

कार्यालयी पत्र निम्न प्रकार के होते है।

1.शासनादेश वाले पत्र (government order)
2.कार्यालय में आदेश दिए जाने वाले पत्र(office order)
3.परिपत्र (circular)
4.अनुस्मारक या स्मरण पत्र(reminder)
5.अर्द्धसरकारी पत्र(semi official letter)
6.अधिसूचना वाले पत्र(notification)
7.कार्यालय में ज्ञापन(office memorandum)
8.ज्ञापन देने वाले पत्र(memorandum)
9.अशासनिक पत्र (non-official letter in Hindi)
10.पृष्ठांकन(endorsement)
11.संकल्प या प्रस्ताव(resolution)
12.स्वीकृति या मंजूरी(sanction letter)
13.प्रेस विज्ञप्ति(press communique / Pru – note)
14.सूचना( notice)
15.पावती(acknowledgement)
16.तार
17.मितव्यय पत्र

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कार्यालय पत्र के उदाहरण

शासनादेश (Government order latter)

शासनादेश पत्रों को government order latter कहते हैं। यह पत्र सरकार द्वारा किए गए किसी भी निर्णय को सरकार के अधीन विभागों को भेजा जाता है।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि

  • शासनादेश पत्र अधिकतर सरकार के सचिव विभागों को भेजते हैं।
  • पत्र को लिखने वाला सामान्यत: पत्र को प्रारंभ निम्न शब्दों से करता है।
  • “यह आदेश दिया जाता है कि अथवा सूचित किया जाता है कि….”
  • कभी-कभी पत्र की शुरुआत “आदेश दिया जाता है कि……” से भी प्रारंभ किया जा सकता है।

इन पत्रों को लिखते समय प्रथम पुरुष का एकवचन प्रयोग करते हैं अर्थात यह पत्र “मैं” से प्रारंभ होता है। ज्यादातर यह पत्र किसी नीतिगत आदेश, किसी वित्तीय स्वीकृति के लिए कर्मचारियों को, वेतन भत्ता संबंधी नियमों के संबंध में सरकार द्वारा जो निर्णय किए जाते हैं वह क्रियान्वित हो सके इसके लिए शासनादेश पत्र लिखे जाते हैं।

इस प्रकार के पत्रों के लेखन के समय ध्यान देने योग्य बातें-

  1. पत्र में सबसे ऊपर पत्र की संख्या लिखी जाती है।
  2. तत्पश्चात सरकार मंत्रालय अथवा विभाग को उल्लिखित किया जाता है।
  3. इसके पश्चात स्थान और दिनांक को दाएं ओर लिखा जाता है।
  4. बाई तरफ पत्र भेजा जा रहा है उसका नाम पता लिखते हैं लेकिन यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इसे बार-बार नहीं लिख सकते
  5. प्राप्त करने वाले का नाम पता और उसे संबोधित नहीं किया जाता है।
  6. पत्र को भेजने के लिए संबंधित विभागों को इसी पत्र की एक कॉपी भेज दी जाती है।
  7. और अंतिम में हस्ताक्षर तथा पद का वर्णन किया जाता है.

उदाहरण के लिए

पत्र संख्या – क/6/30/2021 (छ)
उत्तर प्रदेश सरकार
शिक्षा मंत्रालय
लखनऊ

दिनांक-30/06/2021

प्रेषक,
राजेश तिवारी
सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार
शिक्षा विभाग,
आदेश दिया जाता है कि नीचे दिए गए प्रपत्र और पत्रों में राजभाषा के रूप में केवल हिंदी भाषा ही प्रयोग की जाए।

  • यात्रा बिल, वेतन, सभी प्रकार के आवेदन पत्र इन सभी के संबंध में किए जाने वाले सभी प्रकार के पत्राचार में हिंदी भाषा ही प्रयोग की जाएगी।
  • टिप्पणियों और आदेश के सभी प्रकार।
  • हिंदी भाषा अधिक बोले जाने वाले राज्यों के साथ पत्रों का आचार विचार।
  • केंद्र सरकार द्वारा प्राप्त किए गए पत्र में प्रश्नों के उत्तर हिंदी में दें।
  • तथा अंग्रेजी भाषा में लिखे गए सभी पत्र पर हिंदी में हस्ताक्षर किए जाएंगे।

हस्ताक्षर….
शासन सचिव

इस पत्र की प्रतिलिपि आवश्यक कार्यवाही हेतु निम्नांकित विभागों और अधिकारियों को प्रेषित है –

  1. सचिव और राज्यपाल
  2. सचिव और मुख्यमंत्री
  3. सभी सचिव, उप सचिवऔर राज्य सचिवालय में
  4. सरकार के अधीन आने वाले सभी कार्यालय अध्यक्ष और विभागाध्यक्ष को।

कार्यालय आदेश

कार्यालय आदेश को अंग्रेजी में office order कहते हैं। इस प्रकार के पत्रों का पत्राचार किसी भी विभाग और कार्यालय के कर्मचारियों तथा मंत्रालय में कर्मचारियों की नियुक्ति, उनकी पदोन्नति, उनके स्थानांतरण, तथा अवकाश प्राप्त करने की स्वीकृति और अस्वीकृति से संबंधित विषयों में आंतरिक रुप से प्रशासन संबंधी सभी आदेशों और सूचना का प्रसार आता है।

कार्यालय आदेश पत्र लिखते समय निम्न बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

  1. पत्र में ऊपर बाएं और अन्य सामान्य पत्र की तरह।
  2. प्रेषक का और पत्र प्राप्त करने वाले का नाम और पता तथा संबोधन उपयोग में नहीं लाया जाता है।
  3. नीचे समान सूचक शब्द जैसे भवदीय,
  4. आपका प्रिय जैसा स्वनिर्देशन भी इन पत्रों में लागू नहीं होता।
  5. पत्र के अंत में दाई तरफ पत्र भेजने वाले का हस्ताक्षर और पद का नाम होता है।
  6. वहीं पर अंत में ही भाइयों पत्र प्राप्त करने वाले विभाग अथवा कर्मचारी का नाम अंकित कर दिया जाता है।
  7. इस पत्र को लिखते समय “अन्य पुरुष” प्रयोग करते हैं।
  8. तथा शेष सभी नियम अन्य पत्रों वाले ही लागू होते हैं।

उदाहरण –

पत्र संख्या – नि.का.सा. /70.225.300
राजस्थान सरकार
शिक्षा मंत्रालय
जयपुर

दिनांक – 30.06.2021

शिक्षा विभाग के कुछ अधोलिखित महानुभाव को दिनांक 7.09. 2021 से 25000 की वेतन श्रृंखला के साथ अनुभाग के अधिकारियों के रूप में प्रोन्नति प्रदान की जाती है।श्री राकेश मीणा पुत्र हरीश मीणाश्री भरत शर्मा पुत्र श्याम लाल शर्मा श्रीमती मीना देवी पत्नी श्री सूरज प्रसाद।

हस्ताक्षर
सचिव

आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रतिलिपि प्रेषण के संबंध में सूचना

  1. निदेशक ,भाषा विभाग
  2. श्री राकेश मीणा
  3. श्री भरत शर्मा
  4. श्रीमती मीना देवी
  5. लेखा एवं संस्थापक शाखा विभाग

परिपत्र (circular)

ऐसा पत्र जिसके माध्यम से किसी एक सूचना या निर्देश को एक साथ अनेक मंत्रालय कार्यालय विभाग और अधिकारियों तथा कर्मचारियों को भेजा जाता है वह पत्र परिपत्र कहलाता है।

परिपत्र को लिखते समय निम्न बातों का ध्यान में रखना आवश्यक है।

  1. ऊपर में बाई तरफ प्रेषक का नाम पद और पता नहीं लिखना चाहिए।
  2. जिन्हें पत्र प्रेषित किया जा रहा है उनका पद नाम और पता अंतिम में बाई तरफ लिख दे तो अच्छा होगा.
  3. कई बार ऐसा होता है कि ज्ञापन, कार्यालय ज्ञापन परिपत्र के अंतर्गत आ जाते हैं
  4. स्वनिर्देशित शब्दों भवदीय ,आपका विश्वासपात्र का प्रयोग नहीं करना उचित होता है।
  5. परिपत्र में अन्य पुरुष की शैली का प्रयोग करते हैं
  6. कभी-कभी ऐसा होता है कि प्रेषक का नाम और पता तथा पद और सेवा में जैसा शब्द डालकर ही पत्र प्राप्त करने वाले का पद पता और संबोधन वही कर दिया जाता है.
  7. कुछ ऐसे पत्र भी लिखे जाते हैं जिनमें पत्र का विषय अंकित होता है।

उदाहरण: 1

परिपत्र संख्या 26.5.96/रा. स./200
समाज कल्याण विभाग
मध्य प्रदेश सरकार
भोपाल

दिनांक – 30/04/2021

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री जी इस बात की जानकारी चाहते हैं कि, प्रदेश के विद्यालयों में तथा महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों की कितनी बालिकाओं को विद्यालय में प्रवेश दिया गया है? वर्तमान समय में प्रदेश के शिक्षण संस्थान मे शिक्षा प्राप्त कर रही छात्राओं की संख्या क्या है।
पिछले 3 वर्षों में इन आंकड़ों में वृद्धि का प्रतिशत कितना है। उपयुक्त मंत्रालय 1 महीने के भीतर सभी आंकड़े प्राप्त कराएं।

हस्ताक्षर
सचिव
समाज कल्याण विभाग
मध्यप्रदेश,भोपाल

प्रतिलिपि प्राप्त करने वाले विभाग:

  1. स्कूली शिक्षा के निदेशक
  2. कॉलेज की शिक्षा के निदेशक
  3. समस्त जिला शिक्षा अधिकारी
  4. समस्त शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य
  5. और महाविद्यालय में प्रतिष्ठित कुलसचिव

उदाहरण: 2

परिपत्र संख्या 255/5/100
शासन सचिवालय
उत्तर प्रदेश सरकार
लखनऊ

दिनांक 5.06.2021

प्रेषक:
मुख्य सचिव
उत्तर प्रदेश सरकार
लखनऊ

सेवा में,
उत्तर प्रदेश के समस्त जिलाधिकारी

विषय – फसल( गेंहू ) को लेवी

महानुभाव,
उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल द्वारा यह निर्देशित किया गया है कि आपको यह सूचित किया जाता है, की खाद्यान्न संकट का ध्यान रखते हुए इस वर्ष सभी गांव में प्रत्येक किसान गेहूं अनिवार्य लेवी के लिए आवश्यक करें, और ठोस क़दम उठाएं तथा इसके लिए समुचित व्यवस्था का निर्देश है। जिससे उत्तर प्रदेश सरकार को गेहूं का समुचित रूप से संग्रहण करने में मदद मिलेगी।

हस्ताक्षर
मुख्य सचिव

अनुस्मारक या स्मरण पत्र (Reminder Letter in Hindi)

यदि भेजे गए पत्र का समय से उत्तर ना मिले तब उसके लिए एक और पत्र भेजा जाता है जो पहले भेजे गए पत्र के स्मरण में होता है इस पत्र का प्रारूप पहले जैसा ही होता है लेकिन स्थिति के अनुसार थोड़ी सख्त भाषा का भी प्रयोग किया जा सकता है।

अनुस्मारक पत्र के बाद यदि और भी अनुस्मारक भेजने की आवश्यकता पड़ती है तब पहले भेजे गए सभी पत्रों और उनकी संख्या का उल्लेख करना आवश्यक होता है। अनुस्मारक पत्रों का आकार सामान्य होता है जो सामान्य रूप से भेजे गए पत्रों की अपेक्षा आकार में छोटे होते हैं।

अर्द्धशासकीय अर्द्धसरकारी पत्र (semi official letter in Hindi)

अर्द्धशासकीय पत्र में सरकारी पत्र के प्रारूप होते हैं दोनों में केवल इतना अंतर होता है कि एक औपचारिक होता है तथा दूसरा अनौपचारिक। अर्द्धशासकीय पत्र अनौपचारिक रूप से लिखे जाते हैं जबकि शासकीय पत्र औपचारिक रूप से लिखे जाते हैं।इन पत्रों का रूप व्यक्तिगत होता है।

जब एक अधिकारी व्यक्तिगत स्तर पर दूसरे अधिकारी से कोई जानकारी लेना चाहता है या किसी मुद्दे की तरफ ध्यानाकर्षण करना चाहता है तो अर्द्ध शासकीय पत्र द्वारा यह कार्य किया जाता है। अधिकारी की यह इच्छा है कि दूसरा अधिकारी व्यक्तिगत रूप से कार्यों को संपन्न करा ले जिससे कार्यालय कार्य जल्द से जल्द संपन्न हो जाए।

अर्द्धशासकीय पत्र निम्न उद्देश्य से लिखा जाता है:

  • जब कार्यालय के कार्यों के संपन्न होने में देरी हो रही है तब
  • जब कार्यों को जल्दी से जल्दी खत्म कराना हो तब
  • जब पत्र प्राप्त करने वाला अधिकारी उस पत्र पर ध्यान ना दे रहा हो तब

अर्द्धशासकीय पत्र को लिखते समय निम्न बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

  1. यह पत्र व्यक्तिगत तौर पर लिखा गया है इस पत्र का प्रारूप अनौपचारिक है एक अधिकारी दूसरे अधिकारी को व्यक्तिगत नाम से इसे प्रेषित करता है।
  2. इस प्रकार की पत्रों में उत्तम पुरुष अर्थात एकवचन की शैली मैं का प्रयोग किया जाता है.
  3. यह पत्र मैत्री भाव से युक्त होता है इसमें भाषा की आत्मीयता होती है।
  4. संबोधन के लिए प्रिय, श्रीयुत … जैसे शब्द लिखे जा सकते हैं
  5. पत्र में बाई और प्रेषक का नाम और पता लिखा जाता है
  6. पत्र भेजने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर पत्र में नीचे होते हैं तथा नीचे की ओर पद नाम और पता अंकित करना आवश्यक नहीं होता।
  7. पत्र के अंत में दाएं तरफ नीचे अधिकारी के हस्ताक्षर से पहले स्वनिर्देश के लिए भवनिष्ट , आपका, सद्भावी लिखा जाता है। भवदीय जैसे औपचारिक शब्द यहां वर्जित होते हैं।
  8. यह पत्र सीधा संबंधित अधिकारी के हाथ में दिया जाता है. किसी अन्य डाक सामग्री की तरह इसे कार्यालय में खोला नहीं जाता ना ही सभी अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किया जाता है.
  9. आवश्यकतानुसार पत्र के ऊपर गोपनीय लिख सकते हैं ताकि कोई अन्य कर्मचारी उसे भूल से भी खोल ना पाए.
  10. पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी का नाम पद और पता अंत में नीचे बाएं तरफ लिख देते हैं।

उदाहरण:

रमेश महाजन
मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय
दिल्ली

भारत सरकार
मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय
दिल्ली

अर्द्धशासकीय पत्र 66/शि. वि./67/300 दिनांक – 12.06.2021

सेवा में,
श्री श्री नरेंद्र शर्मा जी
मुख्य सचिव
राजस्थान सरकार

प्रिय श्री शर्मा जी,
कृपया विभाग के पत्रांक 26/ने.रो./111/200 दिनांक 06/04/ 2021 ….को देखने की कृपा करें पत्र द्वारा मांगी गई सूचना मंत्रालय को अभी तक नहीं मिली है।

आपसे अनुरोध है कि महात्मा गांधी रोजगार योजना की क्रियान्वित आंकड़ों को अपनी टिप्पणी के साथ अविलंब हमें उपलब्ध कराने का कष्ट करें।

भवनिष्ट
हस्ताक्षर

अधिसूचना वाले पत्र (notification Letter in Hindi)

सरकारी राजपत्र में प्रकाशित होने वाली सूचनाएं जिन्हें हम अधिसूचना के नाम से जानते हैं उनको लिखते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए

  1. अधिसूचना का संबंध व्यापक क्षेत्र से होता है किसी भी उच्च अधिकारी की नियुक्ति, उनका स्थानांतरण अधिनियम में संशोधन आदि बहुत से ऐसे क्षेत्र आते हैं जो अधिसूचना के अंतर्गत शामिल होते हैं।
  2. सरकार की ओर से जारी की गई अधिसूचना सरकारी कार्यालय संबंधित अधिकारियों जनसाधारण को जानकारी के लिए इस प्रकार के पत्र लिखे जाते हैं और जारी होते है।
  3. अधिसूचना वाले पत्रों में यह अति आवश्यक होता है कि उसे गजट के किस भाग में प्रकाशित होना है साथ ही भाग का अनुभव भी उल्लेखित होना चाहिए।
  4. अधिसूचना वाले पत्रों में महोदय जैसे शब्दों का संबोधन वर्जित होता है।
  5. इसमें अन्य पुरुष शैली का प्रयोग करते हैं।
  6. पत्र के अंत में किसी भी प्रकार का भवदीय अथवा स्वनिर्देशित शब्दों का उपयोग नहीं किया जाता है।

उदाहरण:

भारत के राज्य पत्र भाग 3 के अनुभाग 6 में प्रकाशित अनुच्छेद

भारत सरकार
शिक्षा मंत्रालय
नई दिल्ली

दिनांक – 22.06.2021

श्री रामनाथ अन्नास्वामी को जोकि वर्तमान में मध्य प्रदेश सरकार में विभागाध्यक्ष आई.ए.एस है उन्हें दिनांक 1.07.2021 से शिक्षा विभाग में अपर सचिव के रूप में प्रतिनियुक्ति किए जाते हैं।

हस्ताक्षर
सचिव
भारत सरकार

अधिसूचना संख्या 30/08/100
उपर्युक्त अधिसूचना की प्रतिलिपि निम्न विभागों को सूचनार्थ है।

  1. स्थापना शाखा, शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली
  2. कोषाधिकारी नई दिल्ली
  3. मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश सरकार, भोपाल
  4. श्री रामनाथ अन्ना स्वामी आईएएस, मध्य प्रदेश
  5. प्रबंधक मुद्रणालय, दिल्ली।

कार्यालय में ज्ञापन (office memorandum Letter in Hindi)

कार्यालय ज्ञापन जैसे पत्रों का प्रयोग अलग-अलग मंत्रालयों के बीच जो सूचनाएं आदान प्रदान की जाती है उसके लिए किया जाता है कार्यालय ज्ञापन वाले पत्रों को लिखते समय निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

  1. कार्यालय ज्ञापन में अन्य पुरुष शैली का प्रयोग किया जाता है।
  2. इसमें प्रिय महोदय जैसे शब्दों का संबोधन नहीं करते हैं।
  3. पत्र के अंत में भवदीय याद भी नहीं लिखते हैं, पत्र भेजने वाले अधिकारी का नाम हस्ताक्षर पद और पता इस पत्र में अंकित नहीं होता है।
  4. ज्ञापन पाने वाले मंत्रालय का उल्लेख पत्र के अंत में बाएं तरफ होता है।
  5. अधीनस्थ कार्यालय से सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए इस प्रकार के पत्रों का प्रयोग नहीं करते ।
  6. कार्यालय ज्ञापन में अधिकतर पत्र का प्रारंभ
  7. इस प्रकार के वाक्य से करते हैं-“अधोहस्ताक्षरी को यह निर्देशित हुआ है कि”।
  8. ज्ञापन वाले पत्रों में विषय लिखना आवश्यक होता है।

उदाहरण:

संख्या – 36.12.100

उत्तर प्रदेश सरकार
शिक्षा मंत्रालय
भाषा विभाग।
लखनऊ,

दिनांक – 12.06.2021

सेवा में,
उत्तर प्रदेश राज्य के समस्त मंत्रालय और विभाग

विषय -भाषा हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रयोग

अधोहस्ताक्षरी को यह निर्देश हुआ है कि भाषा हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रयोग संबंधी शासनादेश 522/रा. भा./100 दिनांक 01.01.2021 की ओर ध्यान दें, तथा निर्देशन का पालन जल्द से जल्द कराने के लिए समुचित व्यवस्था करें। सभी राज्य सरकार के विभागों कार्यालयों को पुनः निर्देशित किया जाता है कि संपूर्ण पत्राचार की भाषा हिंदी ही होगी।

हस्ताक्षर
संयुक्त सचिव
उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ

ज्ञापन देने वाले पत्र (memorandum in Hindi)

ज्ञापन अर्थात memorandum की रूपरेखा कार्यालय ज्ञापन से अलग नहीं होती है इन दोनों में केवल इतना सा अंतर है कि कार्यालय ज्ञापन विभिन्न मंत्रालयों में भेजा जाता है जबकि ज्ञापन मंत्रालयों के अंदर अच्छा विभागों के अंदर प्रयोग होता है। ज्ञापन से पत्राचार में आवेदन पत्रों के उत्तर के साथ साथ पत्र को प्राप्त करने की सूचना याचिकाएं इन सभी के उत्तर दिया जाना शामिल होता है।

उदाहरण:

संख्या- 97-09- 2021

मध्य प्रदेश सरकार
उच्च शिक्षा निदेशालय
शिक्षा विभाग

भोपाल
दिनांक – 12.07.2021

सेवा में,
श्री रामस्वरूप वर्मा
24, रीवा जिला
भोपाल।

विषय – शिक्षकों की तदर्थ नियुक्ति

श्री रामस्वरूप वर्मा जी को उनके आवेदन पत्र दिनांक – 12.07.2021 के उत्तर में यह सूचना दी जाती है कि मध्य प्रदेश सरकार ने तदर्थ शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आपके विद्यालय में अनुदान आयोग के द्वारा सभी निर्धारित नियमों को मान्य कर दिया है।

आवेदन पत्रिका तथा नियमावली के तहत मात्र 100/- मनीआर्डर इस कार्यालय के उपनिदेशक अकादमी में भेजें।

हस्ताक्षर
संयुक्त निदेशक
उच्च शिक्षा

अशासनिक पत्र (non-official letter in Hindi)

अशासनिक पत्र को अंग्रेजी में non-official letter कहते हैं। इसका उपयोग अनौपचारिक निर्देशों तथा अशासनिक टिप्पणी के पत्राचार के लिए करते हैं। इस तरह के पत्र मे किसी मंत्रालय अथवा विभाग के समक्ष कोई समस्या है अथवा किसी प्रस्ताव पर टिप्पणी करनी है किसी पूर्व आदेश का स्पष्टीकरण जानना है, तभी इसका प्रयोग करते हैं।

अशासनिक पत्रों के दो रूप होते हैं।

या तो संबंधित विभाग में उसी से संबंधित फाइल पर टिप्पणी करके उसे वापस मंत्रालय में भेज दिया जाए।

अथव

टिप्पणी स्वतंत्र रूप से लिख दी जाए और फाइल को वापस मंत्रालय ना भेजा जाए।

अशासनिक पत्रों में कोई विशेष औपचारिक रूप नही दिखाया जाता, इसमें

  1. इसमें किसी प्रकार के संबोधन का प्रयोग नही होता।
  2. इसमें स्वनिर्देश के लिए कोई शब्द नही लगाते है।
  3. पत्र में ऊपर मंत्रालय, विभाग तथा स्थान और दिनांक सामान्य पत्र की तरह ही अंकित कर देते है।
  4. इसके बाद विषय का उल्लेख करते है।
  5. पत्र में नीचे पद का नाम तथा हस्ताक्षर लिखना होता है।

उदाहरण:

कार्मिक विभाग
झारखण्ड सरकार

रांची
दिनांक – 12 जुलाई 2021

विषय – व्याख्यानदाता के वरीयता क्रम सम्बन्धी पत्र

शासनादेश सं. 25/3क /400 दिनांक 1.02. 202….. के अनुसार यह निर्देशित किया जाता है कि तदर्थ रूप में उच्च विद्यालयों में नियुक्त सभी शिक्षकों को अस्थाई तौर पर नियुक्त किया जाता है।

अब यह व्याख्याता वरीयता क्रम निर्धारित रूप से अपने अस्थाई सेवाकाल को भी इसमें शामिल की आशा रखते हैं।
पत्र के संबंध में विधि के विभाग से निर्देश देना आवश्यक है, अतः इस विभाग द्वारा विधि विभाग से यह आग्रह किया जाता है कि वास्तविक वैधानिक स्थिति का स्पष्टीकरण दें।

हस्ताक्षर
उपसचिव

विधि विभाग
झारखंड सरकार
अशासनिक टिप्पणी संख्या 11/का. वि./68/400

पृष्ठांकन (Endorsememt)

किसी आदेश की मूल पत्रिका अथवा उसकी प्रतिलिपि को अन्य मंत्रालयों और विभागों को प्रेषित किया जाता है उसका उल्लेख किया जाता है, जिसे पत्र का पृष्ठांकन कहते हैं।

  • पत्रों के पृष्ठांकन से पूर्ण वाक्य लिखे जाते हैं।
  • मूल पत्र या कॉपी
  • आवश्यक कार्यवाही के लिए
  • शीघ्र अनुपालन हो इसके लिए
  • रिकॉर्ड रखने के लिए
  • शीघ्र उत्तर मिले इसके लिए
  • क, ख, ग मूल रूप में प्राप्त हो इसके लिए
  • अ, ब, स का आवश्यकतानुसार परीक्षण किया जा सके।
  • क, ख, ग का पत्रांक …और दिनांक…. में उत्तर प्रेषित हो सके इसके लिए

उदाहरण:
पृष्ठांकन

संख्या – 69/का.शी.नि./35/280

उत्तर प्रदेश सरकार
गृह मंत्रालय

लखनऊ, दिनांक 12.02.2021 प्रतिलिपि निम्न विभागों में सूचना और कार्यवाही के लिए प्रेषित है।

  1. वित्त विभाग ,उत्तर प्रदेश सरकार
  2. विधि विभाग , उत्तर प्रदेश सरकार
  3. कार्मिक विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार

हस्ताक्षर
उपसचिव
गृह मंत्रालय
उत्तर प्रदेश सरकार

संकल्प या संस्ताव (Resolution)

संकल्प या संस्ताव अर्थात resolution का प्रयोग अधिसूचना के जैसे राजपत्र (गजट) में प्रकाशित करते हैं, गजट में भाग अनुभाग का अपना महत्वपूर्ण होता है।

संकल्प पत्र लिखते समय निम्न निम्न बातों पर ध्यान दे

  • नीतिगत प्रश्न और समस्याओ पर सरकार के निर्णयों की घोषणा करने के लिए
  • कोई समस्या उत्पन्न हो गयी है तो निष्पक्ष सम्मति के लिए जाँच समिति का गठन करना
  • आयोग अथवा जाँच समिति के लिए प्रतिवेदन को घोषित करना

संकल्प पत्रों में विषयों के आधार और कारण को तथा जो सरकार के द्वारा निर्देश दिए जा रहे है। उनकी प्रतियाँ कहा कहा भेजनी है यह सब अंकित किया जाता है।

उदाहरण:

(सरकार के राजपत्र भाग 5 खंड 3 में प्रकाशित निर्देश)

संख्या 34/उ ./वी. /212/301

शासन सचिवालय
मध्य प्रदेश सरकार

भोपाल
दिनांक – 18.08.2021

संकल्प

मध्य प्रदेश में कुछ विशेष क्षेत्र चिन्हित किये गये है। जहाँ साम्प्रदायिक दंगें और जातिगत हिंसा तथा तनाव से ग्रसित माहौल देखने को मिला है, इस कारण सरकार द्वारा एक समिति बनाने का निर्णय लिया गया है।
इस समिति का कार्य कुछ इस प्रकार है की बढ़ते साम्प्रदायिक दंगो और तनाव पूर्ण वातावरण को कैसे रोका जाये इसपर विचार करेगी और समस्या निवारण के लिए सुझाव दिनांक 18.12.2021 तक सरकार को प्राप्त कराएगी।

समिति के सदस्यों का विवरण इस प्रकार है की

  • श्री मोहनलाल शर्मा जी ( संसद सदस्य )
  • श्री गोपालदास जी, गृह विभाग सचिव, मध्य प्रदेश
  • मौलाना हामिद अंसारी जी, अध्यक्ष, साम्प्रदायिक शांति समूह

समिति की अध्यक्षता श्री मोहनलाल शर्मा जी करेंगे

हस्ताक्षर
मुख्य सचिव
मध्य प्रदेश सरकार
भोपाल 18.08 .2021

संख्या 34/म./स./ 33/321

सरकार द्वारा यह आदेश दिया जाता है की संकल्प प्रतिलिपि पत्र को उपर्युक्त तीनो महोदयो को प्रेषित किया जाये
साथ ही इस आदेश को सचिव, गृह विभाग तथा प्रबंधक और राजकीय मुद्रालय को भी कार्यवाही हेतु जल्द से जल्द इसकी छायाप्रति प्रेषित कर दी जाये।

हस्ताक्षर
मुख्य सचिव
मध्य प्रदेश सरकार

स्वीकृत्ति या मंजूरी पत्र (Sanction letter)

स्वीकृति या मंजूरी पत्र (sanction letter) का प्रयोग तब करते है, जब राष्ट्रपति या राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त हो, कुछ ऐसे मामले होते है। जिनमे वित्तीय प्रावधान करने की आवश्यकता होती है। लेकिन उससे पहले राष्ट्रपति या राज्यपाल से मंजूरी आवश्यक है। यदि किसी विभाग में कोई नया पद तैयार करना है तो राज्यपाल और राष्ट्रपति महोदय की अनुमति आवश्यक है।

जब उनकी अनुमति मिल जाये तभी किसी नये पद का सृजन किया जा सकता है। इस प्रकार की स्वीकृतियों के लिए राज्यपाल और राष्ट्रपति की अनुमति आवश्यक है। इस प्रकार के मंजूरी पत्र की प्रतिलिपि बनाकर उसे महालेखापाल और लेखापाल तथा वित्त मंत्रालयों में प्रेषित किया जाता है, इस प्रकार के पत्र सरकार संबंधित विभागों को लिखती है।

उदाहरण:

संख्या 605/शि./का./250/115

शासन सचिवालय
छत्तीसगढ़ सरकार, रायपुर

दिनांक -12.06.2021

प्रेषक,
रामस्वरूप वर्मा
मुख्य सचिव
छत्तीसगढ़ सरकार, रायपुर

सेवा में,
शिक्षा मंत्रालय
उच्च शिक्षा
रायपुर

विषय- उच्च शिक्षा निदेशालय में संयुक्त निदेशक के पद को स्वीकार्यता प्रदान करने के विषय में पत्र।

मान्यवर,
मुझे यह निर्देश मिला है कि मैं आपको यह सूचना उपलब्ध प्राप्त कराऊ कि, आपके कॉलेज की शिक्षा में महामहिम राज्यपाल द्वारा निदेशालय में अंबिकापुर प्रभाग के लिए 15000-500-20,000 के वेतनमान मैं संयुक्त निर्देशक पद की स्वीकार्यता दी जाती है। इस पद पर खर्च होने वाले सभी व्यय वित्तीय प्रावधान के अनुसार दिए जाएंगे।

भवदीय
हस्ताक्षर
मुख्य सचिव
छत्तीसगढ़ सरकार
दिनांक -12.06.2021

संख्या : 215/112

इस मंजूरी पत्र की प्रतिलिपि आवश्यक कार्यवाही के लिए निम्न विभागों में प्रेषित की जाती है।

  • वित्त विभाग,
  • लेखापाल तथा
  • कार्मिक विभाग एवं
  • उच्च शिक्षा निदेशालय।

हस्ताक्षर
मुख्य सचिव
छत्तीसगढ़ सरकार

प्रेस विज्ञप्ति (press communique or press-note)


प्रेस विज्ञप्ति सरकार द्वारा दिए गए आदेशों प्रस्तावों या लिए गए किसी निर्णय को बड़े स्तर पर सार्वजनिक करने के लिए प्रयोग किया जाता है। समाचार पत्रों में प्रकाशित करने के लिए प्रेस विज्ञप्ति भेजी जाती है।

प्रेस विज्ञप्ति की निम्नलिखित विशेषताएं हैं।

  1. 1.जो व्यक्ति समाचार पत्र का संपादन करने वाला है, वह अपने अनुसार प्रेस विज्ञप्ति में किसी प्रकार का बदलाव नहीं कर सकता, उसे जैसा मिला है उसे वैसे ही प्रकाशित करना होगा।
  2. लेकिन कोई सामग्री अभी छपने के लिए भेजी गई है तो संपादक उसका संपादन अपने हिसाब से कर सकते हैं तथा सुविधा के लिए उसका छोटा रूप कर सकता है।
  3. प्रेस विज्ञप्ति को समय से पूर्व प्रकाशित नहीं किया जा सकता है उसमें सबसे ऊपर प्रकाशन की तिथि लिखी होती है यह आवश्यक है।
  4. प्रेस विज्ञप्ति में संबोधन अथवा अथवा निर्देशन के लिए कोई स्थान नहीं होता है, इसके पास स्वयं का शीर्षक उपलब्ध होता है।
  5. प्रेस नोट के अंत में बाई तरफ नीचे हस्ताक्षर और पद का नाम अंकित करते हैं।
  6. तथा नीचे बाए तरफ मंत्रालय विभाग का नाम और तिथि लिख देते हैं।
  7. प्रेस विज्ञप्ति को सर्वप्रथम सूचना अधिकारी के पास प्रेषित किया जाता है ना कि सीधे समाचार पत्र प्रकाशित करने वाले कार्यालय में।

उदाहरण:

दिनांक 02.03. 2021 से पहले इस प्रेस विज्ञप्ति को प्रकाशित न किया जाए।

प्रेस विज्ञप्ति

भारत और पाकिस्तान के बीच वर्षों से कश्मीर विवाद चला आ रहा है। लेकिन अब इस समस्या का दोनों पक्षों ने समाधान खोज लिया है तथा समझौते को तैयार हैं। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने सहमति के लिए कुछ पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और समझौते को लागू करने के लिए तैयार है। कश्मीर के विवादित क्षेत्र को सीमा रेखा मानकर दोनों देश किए गए समझौते को स्वीकार करते हैं।

भारत सूचना अधिकारी, विज्ञप्ति सूचना ब्यूरो, भारत सरकार नई दिल्ली से प्रकाशित।

हस्ताक्षर
सचिव, भारत सरकार

परराष्ट्र मंत्रालय
नई दिल्ली
दिनांक 25.02. 2021

सूचना (Notice)

सूचना या नोटिस का प्रकाशन प्रेस विज्ञप्ति जैसी ही होती है से भी रोज के समाचार पत्रों में जनसाधारण तक पहुंचाने के लिए ही प्रकाशित किया जाता है। लेकिन इसका विषय थोड़ा अलग होता है इसमें सरकार जनसाधारण जीवन के हितों के लिए जो फैसले लेती है, जैसे रोजगार संबंधी सूचना, यदि किसी व्यक्ति को न्यायालय में आना है इत्यादि इस तरह की जो सूचनाएं होती है “नोटिस” द्वारा प्रकाशित कराती हैं।

ज्यादातर सरकारी विज्ञापन भी नोटिस की श्रेणी में आते हैं। नोटिस के अंत में प्रकाशन अधिकारी का नाम उसका पदनाम लिखा होता है कभी-कभी केवल नाम अंकित रहता है।

इस प्रकार के सूचनाओं का दैनिक समाचार पत्रों में आना सामान्य है।

उदाहरण:

कार्यालय पंचायत समिति, गोरखपुर

क्रमांक: लेखा /हड्डी /22/201दिनांक- 12.01.2020

नीलामी हड्डी ठेका वर्ष 2020

जनसाधारण के लिए यह सूचना प्रकाशित की जाती है कि पंचायत समिति गोरखपुर के जंगल थाना क्षेत्र में मृतक पशुओं की हड्डियों को बटोरने का ठेका 2020 के लिए गोरखपुर पंचायत समिति मुख्यालय पर दिनांक 25.01.2020 से खुली बोली द्वारा इसकी नीलामी होगी।

नीलामी में भाग लेने से पहले 3000/- रुपए सुरक्षा राशि के तौर पर जमा करा ली जाएगी। बाकी नियमों और शर्तों की जानकारी कार्यालय आने पर अधोहस्ताक्षरी से मिलेगी।

हस्ताक्षर….
नाम….
विकास अधिकारी
पंचायत समिति, गोरखपुर

पावती पत्र (acknowledgement)

देश के प्रधानमंत्री जी तथा मुख्य मंत्रियों एवं अन्य मंत्रियों के पास सामान्य जनता के पत्र आते ही रहते हैं इन पत्रों में वे अपनी शिकायतों लिखते हैं किसी कार्यालय अथवा किसी अधिकारी की शिकायत व्यक्तिगत समस्या के निवारण हेतु वे इन्हे को पत्र लिखा करते हैं।

लेकिन इन पत्रों का इन महोदय द्वारा पर पाना संभव नहीं होता है इसलिए इन पत्रों को उनके निजी सचिव या सहायक ही पढ़ते हैं। आगे की कार्यवाही के लिए संबंधित कार्यालयों में अधिकारियों को प्रेषित कर देते हैं।

लेकिन पत्र भेजने वाले को संतोष प्राप्त हो इसके लिए पत्र प्राप्ति की स्वीकृति या कोई सूचना देना इनका कर्तव्य है इस कारण वे प्रेषक को पुनः एक पत्र भिजवाते हैं।

यह पावती पत्र पहले से छपे हुए होते हैं इनमें व्यक्ति विशेष का नाम और दिनांक भरकर उसे भेज दिया जाता है।

उदाहरण:

श्री मोहनलाल वर्मा जी। प्रधानमंत्री
42, सिविल लाइन।
भारत सरकार, सरकार
हरिओम नगर, लखनऊ दिल्ली
दिनांक – 15.03.2021

प्रिय मान्यवर आपका पत्र प्रधानमंत्री जी को प्राप्त हो चुका है इस कारण निश्चिंत हो जाएं आपके द्वारा की गई शिकायत पर कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।

भवदीय
हस्ताक्षर
निजी सचिव
प्रधानमंत्री
भारत सरकार, नई दिल्ली

तार (Telegram)

यदि कोई तत्काल कार्यवाही करनी है तब पत्राचार के रूप में तार का इस्तेमाल करते हैं तार का स्वरूप छोटा होता है। इसलिए संक्षिप्त रूप में और स्पष्ट तरीके से लिखना चाहिए।

लिखने की विधि से या दो रूप के होते हैं।

1.सरल और स्पष्ट तार (Simple and clear telegram) तथा
2.बिजांक अथवा कूट भाषा वाला तार (Cypher and code telegram)

पहले वाले तार में सरल और स्पष्ट भाषा का प्रयोग करते हैं। इस प्रकार के तार को आसानी से समझा जा सकते हैं। जबकि दूसरे प्रकार के तार में गोपनीय भाषा का प्रयोग किया जाता है तथा गुप्त संदेश भेजे जाते हैं। पहले प्रकार के तार का पुष्टिकरण डाक से पत्र भेजकर हो जाता है लेकिन कूट भाषा में लिखे गए तार का पुष्टिकरण आवश्यक नहीं।

समस्याओं की गंभीरता का प्रदर्शन करने के लिए इस प्रकार के पत्र (तार) का उपयोग करते हैं।

इनमे कुछ सांकेतिक शब्द भी प्रयोग किए जाते हैं।

  1. आवश्यक या महत्वपूर्ण (important)
  2. अति आवश्यक (urgent)
  3. तात्कालिक पत्र (immediate)
  4. जीवन की रक्षा के लिए संकट वाले संदेश (S.D.S) तथा
  5. सैन्य तात्कालिक पत्र (operation immediate)

उदाहरण:

तारसरकारमहत्वपूर्ण

………………………………………………………………………………………………………
विभागाध्यक्ष(गणित विभाग), राजकीय विश्वविद्यालय, गोरखपुर
………….………………………………………………………………………………………………
शिक्षक सम्मेलन 15 मार्च को

निदेशक

तार शामिल ना हो
संख्या: 12/56 दिनांक 10 मार्च, 2021
निदेशक, उच्च शिक्षा, उत्तर प्रदेश

मितव्यय पत्र (Saving-ram)

मितव्यय पत्रों का प्रयोग विदेशों में स्थित दूतावास द्वारा भेजा जाने वाला तार होता है, जिसे विदेशी सरकार को प्रेषित किया जाता है। यह तार हवाई डाक द्वारा भेजे जाते हैं तथा कूटनीतिक लिफाफे में पूरी तरह से बंद होते हैं और इनके ऊपर मितव्यय पत्र अंकित रहता है, गोपनीय संदेशों के लिए इन तारों में कूट भाषा का उपयोग होता है।

उदाहरण:

मितव्यय पत्र
भारत सरकार
परराष्ट्रीय मंत्रालय

प्रेषक-
परराष्ट्रीय, नई दिल्ली
सेवा में,
भारतीय दूतावास, नेपाल

नेपाल सरकार को यह सूचना देने की नेपाल में आई वैश्विक महामारी में पीड़ित व्यक्तियों की मदद के लिए भारत सरकार द्वारा बीस हजार टन गेहूं, चालीस हजार टन चावल, तथा एक करोड़ तक जीवन रक्षा हेतु दवाइयां तुरंत भेज रही है।

हस्ताक्षर
सचिव, भारत सरकार

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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