कजरी तीज का महत्व, कथा और पूजा विधि

Kajari Teej Kab Hai Mahatva Vrat Katha: हमारे देश में कई त्यौहार मनाये जाते हैं। हम जो भी त्यौहार मानते हैं वो कही न कही हमारी धार्मिक आस्था से जुड़े होते हैं। इन त्योहारों में जैसे होली, दिवाली, रक्षा बंधन इत्यादि त्यौहार मुख्य है।

इन सब त्योहारों के अलावा देश में ऐसे कई त्यौहार मनाये जाते हैं, जिनको हमारे देश में विशेष महत्व दिया जाता है। आज हम आपको ऐसे ही एक त्यौहार के बारे में बता रहे हैं जो कि कजरी तीज के नाम से जाना जाता है। यह त्यौहार महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला मुख्य त्यौहार है।

Kajari Teej Kab Hai Mahatva Vrat Katha
Image: Kajari Teej Kab Hai Mahatva Vrat Katha

यहां पर हम कजरी तीज क्या हैं?, कजरी तीज का महत्व, कजरी तीज का इतिहास, कजरी तीज की कथा और पूजा विधि आदि के बारे में विस्तार से जानने वाले है। कजरी तीज के बारे में सम्पूर्ण जानकारी के लिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़े।

कजरी तीज का महत्व, कथा और पूजा विधि | Kajari Teej Kab Hai Mahatva Vrat Katha

कजरी तीज क्या हैं?

इस त्यौहार को एक व्रत के रीति रिवाज के तौर पर देखा जाता हैं। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए कामना करती हैं और उनके लिए व्रत रखती है। यह एक धार्मिक त्यौहार हैं, जिसमें केवल महिलाएं ही शामिल होती हैं। इस त्यौहार को हर साल रक्षा बंधन के समय के साथ मनाया जाता हैं।

इस त्यौहार की अपनी कई मान्यताएं हैं। महिलाएँ हर साल अपने पति की लंबी कामना के लिए कई व्रत रखती हैं, जिसमे महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। इन व्रत के त्यौहार में कजरी तीज का त्यौहार भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है।

कजरी तीज का इतिहास

पुराणों की माने तो प्राचीन समय में भारत के मध्य भाग में एक कजरी नाम का वन था। उस वन में एक राजा का निवास था, जिसे दादुरे के नाम से जानते थे। इस वन में रहने वाले लोग कजली के नाम के गीत गाते थे, जिसके बाद उस स्थान का नाम काफी दूर-दूर तक फ़ैल गया।

उसके कुछ समय बाद उस राजा की मृत्यु हो गई और उस राजा की पत्नी रानी नागमती सती हो गई। इस घटना के बाद वहां के लोग काफी दुखी हुए और उसके बाद वहां के लोग जन्म के साथ से ही कजरी का गीत गाने लगे। इसकी के बाद ही कजरी तीज को जाना जाने लगा और महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए कजरी का व्रत करने लगे।

कजरी तीज का महत्त्व

हमारे देश में कजरी तीज के कई धार्मिक महत्त्व हैं। कजरी तीज का व्रत प्राचीन समय से महिलाओं द्वारा किया जाता हैं। इस त्यौहार में महिलाएं अपने पति की सलामती के लिए व्रत करती हैं और लंबी उम्र की कामना करती हैं। यह त्यौहार शादीशुदा जोड़ो के लिए भी एक महत्वपूर्ण त्यौहार हैं।

आज के समय में तो इस त्यौहार को कुवारी लड़कियां भी अपने होने वाले पति के लिए इस व्रत को करती हैं। ऐसा माना जाता हैं कि शादी के बाद इस व्रत को करने से शादीशुदा लोगों का बंधन अटूट बन जाता हैं, जो कभी नहीं टूटता, इस प्रकार की धार्मिक मान्यतायें भी हैं।

कजरी तीज कब मनाई जाती हैं? 

हमारे देश में यह त्यौहार हर साल भाद्रपद मास में मनाया जाता हैं। कजरी तीज का त्यौहार हर साल भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की तृतीय को मनाया जाता हैं। इस दिवस पर सुहागन अपने पति की लंबी उम्र के लिए कामनाएँ करती हैं और उनकी लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।

इस साल 2021 में यह कजरी तीज का त्यौहार सम्पूर्ण देश में 25 अगस्त को बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। 

कजरी तीज पूजा विधि

कजरी तीज की पूजा करने की भी अपनी एक विधि हैं। इस विधि में महिलाएं स्नान करने के बाद शिव जी भगवान की और माता गौरी की मिट्टी की मूर्ति बनाती हैं। इसके बाद उन मूर्ति को एक स्थान पर चोकी के समान बना कर उस पर लाल कपड़े पर स्थापित करती हैं।

इसके बाद उस मूर्ति की पूजा की जाती है । इस पूजा में काम में आने वाली सामग्री, जो इस पूजा का एक अभिन्न अंग हैं। इसके बिना पूजा कुछ अधूरी सी रह जाती है। पूजा में काम आने वाली चीज़े कुछ इस प्रकार हैं:

  • एक छोटा सातू का लडडू
  • नीमड़ी
  • दीपक
  • केला
  • अमरुद या सेब
  • ककड़ी
  • दूध मिश्रित जल
  • कच्चा दूध
  • नीबू
  • मोती की लड़/नथ के मोती
  • पूजा की थाली
  • जल कलश

कजरी तीज की पूजा की तैयारी कैसे करें?

सबसे पहले गोबर या मिट्टी का एक छोटा सा तालाब बनाकर, उसे दिवार के सहारे रख दें। उस तालाब में एक नीम की छोटी-सी टहनी रोप दें, जिस पर घी, गुड और पाल बाँधा जाता हैं, उसके बाद उस तालाब में दूध भर दें।

तालाब में पानी नहीं भरा जाता हैं बल्कि उसी जगह कुछ पानी भरा जाता हैं। उसके बाद उसमें एक छोटा-सा दिया जला कर रख दें। इसके बाद तालाब में और उसके आसपास कुछ सामग्री जैसे नीम्बू, ककड़ी, केला, सेब इत्यादि रख दें। इस पूजा में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता हैं सातु का लड्डू जो कि इस पूजा सामग्री का अहम हिस्सा होता हैं। इसके अलावा कच्चा दूध भी इसके लिए बेहद ही जरुरी होता हैं।

कजली तीज के लिए शुभ मुहूर्त

इस साल कजली तीज 25 अगस्त को मनाई जायेगी। यह दिन सामान्यत रक्षा बंधन के 3 दिन बाद मनाई जाती है। इस साल मनाई जाने वाली इस तीज का मुहूर्त हमने इन्टरनेट पर उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से लिया हैं। इस मुहूर्त में परिवर्तन हो सकता हैं।

कजरी तीज व्रत की तृतीया तिथि का प्रारंभ 24 अगस्त 2021, बुधवार को शाम 4.05 बजे से हो रहा है तथा 25 अगस्त 2021, गुरुवार को शाम 04.18 मिनट पर तृतीया तिथि समाप्त होगी। इस साल 25 अगस्त को मनाई जाने वाले इस त्यौहार में इस साल धृति योग बन रहा हैं। ज्योतिष में इस मुहूर्त को शुभ माना जाता हैं। इस साल बन रहा यह धृत मुहूर्त इस बार कजरी तीज पर सुबह 05.57 मिनट तक धृति योग रहेगा।

कजरी तीज व्रत कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार एक गांव में गरीब ब्राह्मण और ब्राह्मणी रहते थे। ब्राह्मणी ने भाद्रपद महीने में आने वाली कजली तीज के दिन कजरी माता का व्रत रखा और ब्राह्मण से कहा कि आज उसके व्रत है और उसके लिए कहीं से चने के सतू लेकर आये।

ब्राह्मण ने जवाब दिया कि वह सतू कहा से लेकर आये? तो ब्राह्मणी बोली की सतू के लिए आप चोरी करो या डाका डालो, उसको नहीं पता लेकिन उसके लिए सतू लेकर आये।

रात बहुत हो चुकी थी। रात में ही ब्राह्मण घर से निकल गया और एक साहूकार की दुकान में घुस गया। दुकान में रखे चने की दाल, शक्कर, घी आदि को सवा किलो तोलकर उसने सतू बनाना शुरू किया। सतू बनाकर वह वहां से जाने लगा तो आवाज सुनकर वहां के नौकरों की नींद खुल गई और सब चोर-चोर चिल्लाने लगे।

वहां के चोरों ने ब्राह्मण को पकड़ लिया और साहूकार के पास लेकर गये तो ब्राह्मण बोला कि “वह चोर नहीं है, वह तो एक गरीब ब्राह्मण है और मेरी पत्नी ने कजरी तीज का व्रत रखा है। उसके लिए सवा किलो सतू बनाकर लेकर जा रहा हूँ।”

साहूकार ने ये सब सुनकर उस गरीब ब्राह्मण की तलाशी ली। लेकिन ब्राह्मण के बाद सतू के अलावा कुछ नहीं निकला।

इधर दिन हो रहा था और ब्राह्मणी अपने पत्नी का इंतजार कर रही थी।

ब्राह्मण की बात सुनकर साहूकार ब्राह्मण से बोला कि आज से तुम्हारी पत्नी को मैं अपनी धर्म बहन मानूंगा। इतना कहने के बाद साहूकार ने ब्राह्मण को सतू के साथ मेहंदी, रुपये, गहने आदि देकर वहां से सम्मानपूर्वक विदा किया।

फिर सबने मिलकर कजरी माता की पूजा की और सबके लिए कामना की कि जिस तरह ब्राह्मण के दिन फिरे वैसे ही सबके दिन फिरे और सभी पर कजरी माता की कृपा बनी रहे।

चंद्रोदय के बाद खोला जाता हैं व्रत?

हमारे देश में मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाले इस त्यौहार का व्रत चन्द्रोदय के बाद ही खोला जाता हैं। यह व्रत करवा चौथ से मिलता जुलता ही व्रत हैं। इसमें महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को सूर्योदय के बाद व्रत खोलती हैं।

निष्कर्ष

हमारे देश में धार्मिक मान्यताओं के साथ कई त्यौहार मनाये जाते हैं। उन सभी त्योहारों में यह त्यौहार भी शामिल हैं। हमारे देश में कजली तीज का भी काफी ज्यादा महत्त्व हैं। इस त्यौहार को भी हमारे देश काफी धूम धाम से मनाया जाता हैं।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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