ग्रीन हाउस प्रभाव क्या होता है? (परिभाषा, फायदे और नुकसान)

दोस्तों आप जानते हैं कि मौसम और जलवायु में अक्सर बदलाव होते रहता है हालांकि इन दोनों शब्दों में काफी अंतर है। साल भर में 3 मौसम आते हैं ठंडी, गर्मी और बारिश। मौसम का बदलना हमें पता चलता है परंतु जलवायु के बदलने का एहसास हमें तुरंत नहीं होता यह अत्यंत धीमी प्रक्रिया है।

वैसे ब्रह्मांड में नौ ग्रहों में से केवल पृथ्वी पर जीवन ही संभव है। इसके पीछे का कारण यही है कि यहां की जलवायु जीवों के रहने के लिए योग्य है। यहां का तापमान संतुलित है, जिस कारण इस ग्रह पर जीवन संभव है। लेकिन अभी के जलवायु की तुलना यदि हम पहले से करें तो काफी अंतर देखने को मिलता है।

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पहले के समय में इतनी ज्यादा जलवायु में बदलाव नहीं देखने को मिलती थी, जितना अभी देखने को मिलता है। अभी दिन प्रतिदिन तापमान में वृद्धि होती जा रही है।

जलवायु के परिवर्तन के कारण मौसम परिवर्तन का भी निश्चित समय नहीं है। जहां हर 4 महीने में ठंडी, गर्मी और बारिश होती थी वहीं अब साल के किसी भी मौसम बारिश हो जाती है। वैसे क्या आप जानते हैं जलवायु का इतना बड़ा परिवर्तन का कारण क्या है? इसका कारण ग्रीन हाउस प्रभाव है।

एक ओर ग्रीन हाउस पर्यावरण के लिए फायदेमंद भी है, वही दूसरी ओर यह पर्यावरण के लिए नुकसानदायक भी है। यदि जलवायु को संतुलित करना है, तो हर किसी को ग्रीन हाउस के प्रभाव से अवगत होना पड़ेगा। इसलिए आज का यह लेख हम लेकर आए हैं, जिसमें हम आपको ग्रीन हाउस प्रभाव क्या होता है?, ग्रीन हाउस प्रभाव के फायदे और इसके नुकसान के बारे में जानने वाले हैं। तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

ग्रीन हाउस प्रभाव क्या होता है? (परिभाषा, फायदे और नुकसान)

ग्रीन हाउस प्रभाव क्या होता है?

ग्रीन हाउस प्रभाव एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। वायुमंडल में कई प्रकार के गैस हैं जिनमें से ओजोन, कार्बन डाइऑक्साइड, जल वाष्प और नाइट्रस ऑक्साइड जैसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैस के है। यह ग्रीन हाउस प्रभाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब सूर्य की किरणें पृथ्वी पर पड़ती है तब यह गैसे सूर्य की कुछ उष्मा को अवशोषित कर लेती है जिससे पृथ्वी का तापमान संतुलित रहता है और बाकी हानिकारक और अवांछित किरण को वापस अंतरिक्ष में भेज देती है।

जैसे आप जानते हैं कि सूर्य की रोशनी हानिकारक होती है, इसे अल्ट्रावायलेट रे भी कहा जाता है। यदि यह सीधे जीवों पर पड़े तो त्वचा को हानि पहुंचा सकता है। वर्तमान में हमारे वायुमंडल का औसतन तापमान 15 डिग्री सेल्सियस है जो हर प्रकार के जीवो के अस्तित्व के लिए योग्य है। इसका कारण ग्रीन हाउस प्रभाव भी है।

यदि ग्रीन हाउस गैस वायुमंडल में नहीं होती तो पर्यावरण का तापमान  -18 डिग्री सेल्सियस रहता, जिससे पेड़-पौधे, मनुष्य और किसी भी प्रकार के जीव जंतु का जीवन संभव नहीं हो पाता। ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण ही दिन के तापमान और रात्रि के तापमान का अंतर बराबर रह पाता है। इस तरीके से ग्रीन हाउस प्रभाव पृथ्वी के वायुमंडलीय तापमान को संतुलित रखता है।

हालांकि अब तक तो ग्रीन हाउस गैसें हमारे लिए लाभकारी थी लेकिन मानव की खराब गतिविधियों के कारण ग्रीन हाउस गैसों का बुरा प्रभाव हम पर पड़ रहा है। वायुमंडल में जब तक उचित मात्रा में ग्रीन हाउस गैसें हैं तब तक तो यह लाभकारी है लेकिन इसकी मात्रा बढ़ जाने से इसके बुरे प्रभाव पड़ने लगते हैं।

वर्तमान में बढ़ती टेक्नोलॉजी, औद्योगिकरण, वनो की कटाई, बढ़ती प्रदूषण इत्यादि के कारण ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा बढ़ रही है और लगातार ओजोन परतो में भी छेद हो रहा है, जिसके कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है और जलवायु लगातार परिवर्तित हो रही है, जो कई प्रकार के जीवो के अस्तित्व के लिए खतरनाक बनते जा रहा है।

ग्रीन हाउस गैसे कौन सी है?

कार्बन डाइऑक्साइड, मेथेन, जलवाष्प, नाइट्रस ऑक्साइड इत्यादि गैसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है।

इसके अतिरिक्त क्लोरोफ्लोरोमिथेन जिसे फ्रीऑन 12 भी कहा जाता है। टेट्राफ्लोरोमेथेन, हेक्जेक्लोरोमिथेन भी ग्रीन हाउस गैस में शामिल है।

ग्रीन हाउस प्रभाव के फायदे

ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण ही पृथ्वी पर जीवन संभव है। यह पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित बनाए रखने में मदद करता है, जिस कारण विभिन्न प्रकार के जीव जंतु और मनुष्य का रहना संभव हो पाता है।

ओजोन गैस ग्रीनहाउस गैस में आता है। पृथ्वी के क्षोभ मंडल में ओजोन स्तर बना हुआ है, जो सूर्य की हानिकारक किरणों जिसे अल्ट्रावायलेट किरने बोलते हैं। उसे पृथ्वी की सतह तक सीधे आने से रोकता है। यदि ओजोन स्तर हमारे वायुमंडल में नहीं होता तो सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरने सीधे आकर हमारे स्किन को नुकसान पहुंचाती और स्किन कैंसर जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती।

ग्रीन हाउस गैसे सूर्य से आने वाली हानिकारक और अवांछित किरणों को वापस अंतरिक्ष में भेज देती है। इस तरीके से ग्रीनहाउस गैसे सूर्य की हानिकारक किरणों का फिल्ट्रेशन करती है और  पर्यावरणीय जीवन चक्र सही तरीके से नियंत्रित रखने में मदद करती हैं।

ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण ही धरती पर पानी का स्तर नियंत्रित है क्योंकि मध्यम तापमान के कारण ना ही बर्फ पूरी तरीके से पिघलता है नाही पृथ्वी के पानी का वाष्पीकरण पूरी तरीके से होता है। इससे धरती के सतह पर हमेशा ही पानी की मात्रा नियंत्रित रहती है।

यदि ग्रीन हाउस प्रभाव नहीं होता तो ध्रुव प्रदेश के बर्फ पूरी तरीके से पिघल जाते और धरती पर पानी का स्तर बढ़ जाता जिससे शायद जीवन खत्म हो जाता।

ग्रीन हाउस प्रभाव के नुकसान

पृथ्वी पर मानव की गतिविधियां पर्यावरण के साथ खिलवाड़ कर रही है। शुरुआत में वायुमंडल में ग्रीन हाउस की गैसों की सांद्रता संतुलित थी, जिस कारण पृथ्वी पर जलवायु भी संतुलित रहता था लेकिन अब मानव की गतिविधियों के कारण वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसों की वृद्धि लगातार होते जा रही है, जिसके कई दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

ग्रीन हाउस गैसों की वृद्धि के कारण लगातार तापमान में वृद्धि हो रही है, जिस कारण ध्रुव प्रदेशों की बर्फ पिघलने लगे हैं।कार्बन डाइऑक्साइड गैस जो प्रमुख ग्रीन हाउस गैस है। हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और वाहनों और फैक्ट्री से निकलने वाले धूंए के कारन कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ रही है।

जिस कारण न केवल यह मानव जीवन पर प्रभाव डाल रहा है बल्कि पेड़ पौधों के प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया में भी बाधा उत्पन्न कर रहा है। इसके कारण वायुमंडल से ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जा रही हैं।

ग्रीन हाउस प्रभाव से ना केवल मानव के रहन-सहन में बदलाव आए हैं बल्कि अर्थव्यवस्था में भी असर देखने को मिल रहा है। बढ़ते ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण वैश्विक उत्पादन में लगभग 4% से भी ज्यादा कमी होने की संभावना है। यदि उत्पादन में कमी हुआ तो पूरे दुनिया में खाने पीने की कमी आ जाएगी और लोगों को भुखमरी का शिकार होना पड़ेगा।

ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण मौसम में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। कुछ जगह तो बिना मौसम के ही बारिश हो रही है तो कहीं गर्मी ज्यादा है तो कहीं ठंड ज्यादा है, कहीं अचानक तूफान आ जाता है तो कहीं मूसलाधार बारिश होने लगती हैं।

ग्रीन हाउस का कृषि पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ा है। मौसम के बदलाव के कारण फसलों को नुकसान हो रहा है। इससे न केवल देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति भी खराब हो रही है।

ग्रीन हाउस प्रभाव को नियंत्रित करने के उपाय

आज ग्रीन हाउस प्रभाव मानव जीवन को बहुत बुरी तरीके से प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि हम इसे पूरी तरीके से खत्म तो नहीं कर सकते हैं लेकिन इसे बहुत हद तक कम करने के लिए उचित कदम जरूर उठा सकते हैं। यदि पूरी दुनिया साथ मिलकर ग्रीन हाउस प्रभाव को कम करने के लिए योगदान दे, तो भविष्य में होने वाले बहुत बड़े विध्वंस को रोका जा सकता है।

ग्रीन हाउस प्रभाव को रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगा सकते हैं। यदि हम लकड़ियों के इस्तेमाल को कम कर दे तो हमें पेड़ पौधों को काटने की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ेगी। अन्य लोगों को भी ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

रासायनिक खादों का इस्तेमाल भी ग्रीन हाउस प्रभाव को उत्पन्न करने में जिम्मेदार हैं। इसीलिए हमें ज्यादा से ज्यादा जैविक खाद के इस्तेमाल पर ध्यान देना चाहिए।

हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर ,जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि होती है। इसलिए हमें ज्यादा से ज्यादा इन उपकरणों के इस्तेमाल को कम करना चाहिए। विश्व में लगातार बढ़ती जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए।

लकड़ी ,पेट्रोल, डीजल जैसे इस्तेमाल किए जा रहे जीवाश्म ईंधन ग्रीन हाउस प्रभाव के महत्वपूर्ण कारक है। इसीलिए ग्रीन हाउस प्रभाव को कम करने के लिए हमें इनके स्थान पर सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए।

क्लोरोफ्लोरोकार्बन ग्रीन हाउस प्रभाव के लिए बहुत ज्यादा जिम्मेदार है। इसे खरीदने वाले देशों पर कड़े कानून लगाने चाहिए, इस गैस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

सोलर प्लांट, गोबर गैस को अधिक से अधिक बढ़ावा देकर प्रदूषण की वृद्धि को रोकने की कोशिश करनी चाहिए। वाहनों में इस्तेमाल किए जाने वाले पेट्रोल और डीजल के स्थान पर ज्यादा से ज्यादा सीएनजी और एलपीजी गैस का उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वाहनों को बनाने पर ध्यान देना चाहिए ताकि भविष्य में पेट्रोल, डीजल की उपयोगिता पर कटौती लगाई जा सके।

हमारे आसपास कई ऐसे लोग हैं जिन्हें ग्रीनहाउस प्रभाव के बारे में जानकारी नहीं होता। हमें उन्हें इसके प्रति जागरूक करना चाहिए और इसके दुष्परिणामों से अवगत कराना चाहिए। ताकि वह भी ग्रीन हाउस प्रभाव को कम करने में अपना योगदान दे सकें।

FAQ

कौन कौन सी गैसे ग्रीन हाउस गैसों में शामिल है?

कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, जलवाष्प, नाइट्रस ऑक्साइड इत्यादि प्रमुख ग्रीन हाउस गैसें हैं।

ग्रीन हाउस का क्या दुष्परिणाम है?

ग्रीन हाउस गैसों की बढ़ती मात्रा के कारण ग्लेशियर की बर्फ पिघल रही है, समुद्र के पानी का स्तर बढ़ रहा है, रेगिस्तान में बाढ़ आ रहा है तो कहीं वर्षा कम हो रही है।

कौन-कौन से उपकरण ग्रीन हाउस गैसों को बढ़ाने में कारक है?

एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर जैसी इलेक्ट्रोनिक उपकरण ग्रीनहाउस गैस को बढाने में कारक है।

ग्रीन हाउस के प्रभाव को किस तरीके से संतुलित किया जा सकता है?

कम से कम इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग, कम से कम वाहनों का उपयोग, प्रदूषण को कम कर के और अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाकर बढ़ती ग्रीन हाउस गैसों को कम कर सकते हैं।

ग्रीन हाउस प्रभाव फायदेमंद है या नुकसानदायक

ग्रीन हाउस प्रभाव फायदेमंद और नुकसान दायक दोनों ही। वातावरण में मौजूद ग्रीन हाउस गैसों की संतुलित मात्रा पृथ्वी के तापमान को संतुलित रखने में मदद करती है लेकिन , मानव द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण, फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषण इत्यादि वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसों में वृद्धि कर रहे हैं जो वातावरण के तापमान को असंतुलित असंतुलित कर रहे हैं।

निष्कर्ष

अब तक हम पर्यावरणीय घटनाओं का आनंद लेते आ रहे थे, परंतु बढती टेक्नोलॉजी और मानव की गतिविधियों ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। अब पर्यावरण पर जो कहर बरसा है उसका प्रभाव मानव जीवन पर होगा। ग्रीन हाउस गैसों में होने वाली वृद्धि के कारण लगातार तापमान में वृद्धि हो रही है इस कारण जलवायु परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

लगातार बढ़ता तापमान और जलवायु परिवर्तन चिंता का विषय है, जिस पर पूरी दुनिया को ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि यदि इसे अभी नहीं रोका गया तो आने वाले समय में धरती से पूरी तरीके से जीवन समाप्त हो जाएगा।

इसीलिए जरूरी है हर एक व्यक्ति पर्यावरण के संतुलन को बनाने में अपना योगदान दें, ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाए और दूसरों को भी प्रोत्साहित करें। उम्मीद करते हैं कि आज के इस लेख के जरिए ग्रीन हाउस प्रभाव क्या होता है? (परिभाषा, फायदे और नुकसान) इत्यादि के संबंधित सभी जानकारी मिल गई होगी।

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