गिरनार रोपवे क्या है, पूरी जानकारी

Girnar Ropeway Kya Hai: नमस्कार दोस्तों, यहाँ पर हमने गिरनार रोपवे के बारे में विस्तार से जानकारी शेयर की है। इस लेख में आपको जूनागढ़ गिरनार रोपवे क्या है, जूनागढ़ गिरनार रोपवे की लम्बाई, जूनागढ़ गिरनार रोपवे का टिकिट कितना है, इसका इतिहास, इसका उद्घाटन किसने और कब किया, यह कहाँ पर स्थित है आदि से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी मिलेगी। तो आप हमारे इस लेख को अंत तक जरूर पढ़े।

Girnar Ropeway Kya Hai

गिरनार रोपवे क्या है, लम्बाई, टिकिट की पूरी जानकारी – Girnar Ropeway Kya Hai

गिरनार रोपवे क्या है?

आपको बता दे गिरनार का पर्वत हमारे देश के सबसे बड़े पर्वतों में आता है और इस पर्वत पर माँ अम्बे का मंदिर, गोरखनाथ शिखर, गुरु दत्तात्रेय का शिखर, जैन मंदिर बने हुए है। यहाँ तक पहुँचने के लिए लोगों को 9999 सीढियाँ को पार करना पड़ता हैं अर्थात् इन सभी सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता हैं। लेकिन अब इस रोपवे से लोगों को यहां तक पहुँचने में मदद मिलेगी। आपकी सामान्य जानकारी के लिए बता दें यह रोपवे हमारे देश के गिरनार पर्वत पर बना सबसे बड़ा रोपवे है।

अब इस रोपवे से लोग बिना किसी समस्या के यहाँ पर बने मंदिर तक पहुँच सकते हैं। इस रोपवे से लोगों को बहुत सुविधा मिलेगी। अब मात्र 7 मिनिट में ही इस रोपवे की सहायता से इस ऊँचे पर्वत पर पर चढ़ा जा सकता है। यहाँ पर पहुँचने पर अद्भुत शक्ति और शांति का अनुभव होता है।

जूनागढ़ गिरनार रोपवे की विशेषता

इस रोपवे से पहले गुजरात में 3 रोपवे मौजूद है जो बनासकांठा में अंबाजी के दर्शन के लिए, सतपूड़ा में और पावागढ़ में पहले से कार्यरत है। गिरनार रोपवे गुजरात का चौथा रोप-वे होगा जो लोगों की मंदिर तक पहुँचने में मदद करेगा। इस रोपवे की कुल लम्बाई 2.3km (Girnar Ropeway Length) है जो इस रोपवे की मदद से मात्र 7.5 मिनिट में पार कर सकते हैं। शुरुआत में इस रोपवे में कुल 24 कैबिन (ट्रॉली) होंगे जो 8 लोगों को ले जाने वाले होंगे। एक चक्कर में कुल 192 यात्री इसमें यात्रा कर पाएंगे।

लोग इतनी ऊंचाई से गिरनार पर्वत की ऊंचाई का लुप्त उठा सकेंगे। रोपवे साल भर सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहेगा। 8 यात्री बैठने वाली प्रति ट्रॉली की गति प्रति सेकंड 5 मीटर होगी। दो ट्रॉली के बीच का अंतर 36 सेकंड का रहेगा। 1 घंटे में 800 यात्री जा सकेंगे। लोअर स्टेशन से अपर स्टेशन तक पहुंचने में 7 मिनट 40 सेकंड लगेंगे। रोपवे के टॉवर बिल्कुल नए हैं और हर एक टॉवर के बीच इनकी ऊंचाई 7 से 8 मंजिल तक रखी गई है।

इस रोपवे के प्रोजेक्ट में आधुनिक मोनो केबल तकनीकी का उपयोग किया गया है। इस रोपवे की डिजाइन वायु गति (एयरोडायनेमिक) के हिसाब से बनाया गया है। दो ट्रोलियों के बीच का अंतर 216 मीटर का होगा अर्थात् एक ट्रोली 216 मीटर आगे जाने पर दूसरी ट्रोली रवाना की जाएगी।

गिरनार रोपवे का उद्घाटन किसने और कब किया

गुजरात के जूनागढ़ में गिरनार रोपवे का उद्घाटन 24 अक्टूबर 2020 को भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया है। इस रोपवे के उद्घाटन से देश के सभी लोगों में ख़ुशी का माहौल है। क्योंकि इस रोपवे से इस ऊँचे पर्वत पर चढ़ने में लोगों को बहुत सहायता मिलेगी।

गिरनार रोपवे का इतिहास

गिरनार पर्वत भारत के दर्शनीय स्थलों में से मुध्य स्थल है जहाँ पर माँ अम्बे का मंदिर, गोरखनाथ शिखर, गुरु दत्तात्रेय का शिखर, जैन मंदिर बने हुए है। यहाँ पर तक पहुँचने के लिए लोगों को एक हजार सीढियाँ चढ़नी पड़ती थी। पर्यटकों की इस समस्या को देखते हुए 1983 में पर्यटन निगम लिमिटेड ने गिरनार रोपवे प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा।

इस प्रोजेक्ट में 22 एकड़ वन की भूमि के प्रयोग का सुझाव था। लेकिन गुजरात सरकार ने इसे 18 एकड़ तक कर दिया। अंत में 1995 में इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार द्वारा हरी झंडी मिल गई।

इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के विरोध में वहां के पालकी चलाने वालों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की कि इस रोपवे के बनने के कारण इनकी आजीविका बहुत प्रभावित होगी। पालकी चालक अपनी पालकी में यात्रियों को बिठाकर इन सीढ़ियों को पार करते थे, जिसकी उचित रकम तय होती थी जिनसे उनका गुजारा हो जाता था। लेकिन रोपवे बनने के बाद इनके द्वारा दायर की गई याचिका खारिज कर दी गई।

जूनागढ़ गिरनार रोपवे से जुड़े कुछ प्रश्न

इस रोपवे से जुड़े कुछ सवाल है जो हर किसी के मन में आये होंगे जो निम्न है:

गिरनार रोपवे का उद्घाटन किसने और कब किया?

गिरनार रोपवे का उद्घाटन 24 अक्टूबर 2020 को भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया है।

गिरनार रोपवे की लंबाई कितनी है?

गिरनार रोपवे की कुल लम्बाई 2.3km है जो इस रोपवे की मदद से मात्र 7.5 मिनिट में पार कर सकते हैं।

गिरनार रोपवे कहां पर है?

गिरनार रोपवे गिरनार पर्वत, जूनागढ़ (गुजरात) पर स्थित है।

गिरनार रोपवे बनने में कितनी लागत आई है?

आधुनिक टेक्नोलॉजी के कारण इस प्रोजेक्ट का खर्च 130 करोड़ तक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

गिरनार रोपवे का टिकट कितना है?

सिर्फ एक बार प्रयोग करने पर किराया 400 रुपये है। आने और जाने दोनों के लिए 700 रुपये किराया तय किया गया है।

गिरनार रोपवे योजना का संचालन कौन करेगा?

गिरनार रोपवे का संचालन ऊषा ब्रीको कंपनी करेगी।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको यह “गिरनार रोपवे से जुड़ी जानकारी (Girnar Ropeway Kya Hai)” पसंद आई होगी। यदि आपको इससे जुड़ा कोई सवाल है तो हमें कमेंट बॉक्स में जरुर पूछे, साथ में यह भी बताएं कि आपको यह जानकारी कैसी लगी। इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें। हमारा फेसबुक पेज लाइक जरुर करें।

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