गम शायरी

Gam Shayari in Hindi

Gam Shayari in Hindi
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Gam Shayari in Hindi | गम शायरी

उस शख्स का ग़म भी कोई सोचे,
जिसे रोता हुआ ना देखा हो किसी ने।

लोग कहते है हम मुश्कुराते बहुत है
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते

ना ख़ुशी की तलाश है
ना गम-ए-निजात की आरज़ू,
मैं खुद से नाराज़ हूँ…
तेरी बेरुखी के बाद।

मुस्कुराते पलको पे सनम चले आते हैं,
आप क्या जानो कहाँ से हमारे गम आते हैं,
आज भी उस मोड़ पर खड़े हैं,जहाँ किसी ने
कहा था कि ठहरो हम अभी आते है।

उस गली में हजार ग़म टूटा,
आना जाना मगर नहीं छूटा।

देखकर तुमको अक्सर
हमें ये एहसास होता है,
कभी कभी ग़म देने
वाला भी कितना ख़ास होता है।

हजार गम मेरी फितरत नही बदल सकते
क्या करू मुझे आदत है मुश्कुराने की

दर्द कितना है बता नहीं सकते,
ज़ख़्म कितने हैं दिखा नहीं सकते,
आँखों से समझ सको तो समझ लो,
आँसू गिरे हैं कितने गिना नहीं सकते.

ना मिलता ग़म तो बर्बादी के अफसाने कहाँ जाते,
चमन होती अगर दुनिया… तो वीराने कहाँ जाते,
चलो अच्छा हुआ अपनों में कोई ग़ैर तो निकला,
सभी होते अगर अपने ही तो बेगाने कहाँ जाते।

तेरी दुनिया में जीने से तो बेहतर हैं कि मर जायें,
वही आँसू, वही आहें, वही ग़म है जिधर जायें,
कोई तो ऐसा घर होता जहाँ से प्यार मिल जाता,
वही बेगाने चेहरे हैं कहाँ जायें किधर जायें।

इस दुनिया में अजनबी रहना ठीक है
लोग बहुत तकलीफ देते है
अक्सर अपना बना कर

मेरे कमरे में अँधेरा नहीं रहने देता,
आपका ग़म मुझे तन्हा नहीं रहने देता।

माना कि ग़म के
बाद मिलती है मुस्कराहटें,
लेकिन जियेगा कौन…
तेरी बेरुखी के बाद।

लूट लेते है अपने ही
वरना गैरो को क्या पता
इस दिल की दीवार कमज़ोर कहाँ है

मंज़िलों के ग़म में
रोने से मंज़िलें नहीं मिलती,
हौंसले भी टूट जाते हैं
अक्सर उदास रहने से।

ज़िंदगी लोग जिसे
मरहम-ए-ग़म जानते हैं,
किस तरह हमने
गुजारी है हम ही जानते हैं।

कुछ ग़मों का होना भी
जरूरी है ज़िन्दगी में,
ज़िंदा होने का अहसास बना रहता है।

गम खुद ही ख़ुशी में बदल जाएगा
सिर्फ मुश्कुराने की आदत डालो

****

जानता हूँ एक ऐसे
शख्स को मैं भी ‘मुनीर’,
ग़म से पत्थर हो गया
लेकिन कभी रोया नहीं।

रूठी जो ज़िंदगी तो मना लेंगे हम,
मिले जो ग़म वो सह लेंगे हम,बस आप
रहना हमेशा साथ हमारे,तो निकलते हुए
आंसूओं में भी,मुस्कुरा लेंगे हम।

देख कर उसको अक्सर हमें एहसास होता है,
कभी कभी ग़म देने वाला भी बहुत खास होता है,
ये और बात है वो हर पल नहीं होता पास हमारे,
मगर उसका दिया ग़म अक्सर हमारे पास होता है।

ऐसा नहीं के तेरे बाद अहल-ए-करम नहीं मिले,
तुझ सा नहीं मिला कोई, लोग तो कम नहीं मिले,
एक तेरी जुदाई के दर्द की बात और है,
जिनको न सह सके ये दिल, ऐसे तो ग़म नहीं मिले।

Gam Shayari in Hindi

किसी ने मुझसे पूछा कैसे हो
हमने हंस कर कहा ज़िन्दगी में गम है
गम में दर्द है और दर्द में मज़ा है
और मजे में हम है

अपनी तबाहियों का मुझे गम तो है मगर,
तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी।

न हारा है इश्क न दुनिया थकी है,
दिया जल रहा है हवा चल रही है,
सुकून ही सुकून है खुशी ही खुशी है,
तेरा ग़म सलामत मुझे क्या कमी है।

वो तेरा ग़म था कि तासीर मेरे लहजे की,
कि जिसको हाल सुनाते थे रुला देते थे।

मौत-ओ-हस्ती की
कश्मकश में कटी तमाम उम्र,
ग़म ने जीने न दिया शौक़ ने मरने न दिया।

हाल-ए-दिल अपना क्या सुनाएं आपको,
ग़म से बातें करना आदत है हमारी,
लोग मरते हैं सिर्फ एक बार सनम,
रोज पल-पल मरना किस्मत है हमारी।

शायरों की बस्ती में कदम रखा तो जाना,
ग़मों की महफिल भी कमाल जमती है।

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ग़म देकर तुमने खता की,
ऐ सनम तुम ये न समझना,
तेरा दिया हुआ ग़म भी,
हमें दवा ही लगता है।

तेरे प्यार का सिला हर हाल में देंगे,
खुदा भी मांगे ये दिल तो टाल देंगे,
अगर दिल ने कहा तुम बेवफ़ा हो,
तो इस दिल को भी सीने से निकाल देंगे।

खुशियों की चाह थी
वहां बे-हिसाब ग़म निकले,
बेवफा तू नहीं
सनम बद-नसीब तो हम निकले।

ये जो गहरे सन्नाटे हैं
वक्त ने सबको ही बाँटें हैं,
थोड़ा ग़म है
सबका किस्सा थोड़ी धूप है सबका हिस्सा।

*****

गम तो है हर एक को
मगर हौसले हैं जुदा जुदा,
कोई टूट कर बिखर गया
कोई मुस्कुरा के चल दिया।

अब तू ही कोई मेरे ग़म का इलाज कर दे,
तेरा ग़म है तेरे कहने से चला जायेगा।

सुकून न दे सकीं राहतें ज़माने भर की,
जो नींद आई तेरे ग़म की छाँव में आई।

Gam Shayari in Hindi

जश्न-ए-शब में मेरी कभी
जल न सका इश्क़ का दिया,
वो अपनी अना में रही
और मैंने अपने ग़मों को ज़िया।

Gam Shayari in Hindi

मुद्दत से जिन की आस थी
वो मिले भी तो कुछ यूँ मिले,
हम नजर उठा कर तड़प उठे
वो नजर झुका कर गुजर गए।

अब तो मेरी आँख में एक अश्क भी नहीं,
पहले की बात और थी ग़म था नया नया।

किसी ने जैसे कसम खाई हो सताने की,
हमीं पे खत्म हैं सब गर्दिशें जमाने की,
सुकून तो खैर हमें नसीब क्या होगा,
कहो अभी भी हिम्मत है ग़म उठाने की।

नज़र नवाज़ नज़रों में ज़ी नहीं लगता,
फ़िज़ा गई तो बहारों में ज़ी नहीं लगता,
ना पूछ मुझसे तेरे ग़म में क्या गुजरती है,
यही कहूंगा हज़ारों में ज़ी नहीं लगता।

तुझको पा कर भी न कम
हो सकी बेताबी दिल की,
इतना आसान तेरे इश्क़ का ग़म था ही नहीं।

जब भी ठोकर लगी तेरे प्यार में मुझे,
मुझको मेरे ग़मों ने सहारा बहुत दिया।

एक कहानी सी दिल पर लिखी रह गयी,
वो नजर जो उसे देखती रह गयी,
वो बाजार में आकर बिक भी गए,
मेरी कीमत लगी की लगी रह गयी।

ग़म-ए-इश्क का मारा हूँ मुझे न छेड़ो,
जुबां खुलेगी तो लफ़्ज़ों से लहू टपकेगा।

निकल आते हैं आँसू हँसते-हँसते,
ये किस ग़म की कसक है हर खुशी में।

हमने सोचा के दो
चार दिन की बात होगी लेकिन,
तेरे ग़म से तो उम्र भर
का रिस्ता निकल आया।

तेरी ज़ुल्फों की स्याही से न जाने कैसे,
ग़म की ज़ुल्मत मेरी रातों में चली आई है।

गम-ए-दुनिया में
गम-ए-यार भी शामिल कर लो,
नशा भरता है
शराबें जो शराबों से मिले।

खुशीयों की मंजिल ढुंढी तो ग़म की गर्द मिली
चाहत के नगमें चाहे तो आहें सर्द मिली दिल के
बोझ को दुना कर गया, जो ग़मखार मिला.

****

इतना भी करम उनका कोई कम तो नहीं है,
ग़म दे के वो पूछते हैं कोई ग़म तो नहीं है?

कौन रोता है किसी और की खातिर ऐ दोस्त,
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया।

Gam Shayari in Hindi

इंसान अगर मोहब्बत में
पड़े तो ग़म में पड़ ही जाता है,
क्योंकि मोहब्बत किसी
को चाहे जितना भी करो,
थोड़ा सा तो कम पड़ ही जाता है।

खुश्क आँखों से भी
अश्कों की महक आती है,
मैं तेरे गम को ज़माने से छुपाऊं कैसे।

ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वरना,
थी आरज़ू कि तेरे दर पे सुबह-ओ-शाम करें।

गम यह नहीं के क़सम अपनी भुलाई तुमने,
ग़म तो ये है के रकीबों से निभाई तुमने,
कोई रंजिश थी अगर तुम को तो मुझसे कहते,
बात आपस की थी क्यों सबको बतायी तुमने।

दर्द होता नही दुनियाँ को दिखाने के लिए,
हर कोई रोता नही आँसू बहाने के लिए,
रूठने का मज़ा तो तब आता हैं दोस्तों
जब अपना हो कोई मनाने के लिए.

तेरे हाथ से मेरे हाथ
तक का जो फासला था,
उसे नापते उसे काटते
मेरी सारी उमर गुजर गयी।

अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं
तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी।

तुझको पा कर भी न
कम हो सकी बेताबी दिल की,
इतना आसान तेरे इश्क़ का ग़म था ही नहीं।

माना कि ग़म के बाद मिलती है मुस्कराहटें,
लेकिन जियेगा कौन? तेरी बेरुखी के बाद।

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निकल आते हैं आँसू हँसते हँसते,
ये किस ग़म की कशक है हर खुशी में।

दर्द से हाथ न मिलाते तो और क्या करते,
गम के आँसू न बहाते तो और क्या करते,
उसने माँगी थी हमसे रौशनी की दुआ,
हम अपना घर न जलाते तो और क्या करते।

जब्त-ए-गम कोई
आसमान काम नहीं फ़राज़,
आग होते है वो आँसू जो पिये जाते हैं।

ग़म नहीं ये कि क़सम अपनी भुलाई तुमने,
ग़म तो ये है कि रकीबों से निभाई तुमने,
कोई रंजिश थी अगर तुमको तो मुझसे कहते,
बात आपस की थी क्यूँ सब को बताई तुमने।

जब तक अपने दिल में उनका गम रहा,
हसरतों का रात दिन मातम रहा,
हिज्र में दिल का ना था साथी कोई,
दर्द उठ-उठ कर शरीके-गम रहा।

चाहा था मुक़म्मल हो मेरे गम की कहानी,
मैं लिख न सका कुछ भी तेरे नाम से आगे।

आज तेरी याद हम सीने से लगा कर रोये,
तन्हाई मैं तुझे हम पास बुला कर रोये,
कई बार पुकारा इस दिल ने तुम्हें,
और हर बार तुम्हें ना पाकर हम रोये.

सुन कर तमाम रात मेरी दस्ताने-ग़म,
वो मुस्कुरा के बोली बहुत बोलते हो तुम।

****

नींद आँखों में पिरोने की इजाज़त दे दे,
ऐ शब-ए-ग़म अब हमें सोने की इजाज़त दे दे।

दुनिया भी मिली गम-ए-दुनिया भी नीली है,
वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था खुदा से।

कितना और दर्द देगा बस इतना बता दे,
ऐसा कर ऐ खुदा मेरी हस्ती मिटा दे,
यूं घुट घुट के जीने से तो मौत बेहतर है,
मैं कभी न जागूं मुझे ऐसी नींद सुला दे।

दुनिया भी मिली गम-ए-दुनिया भी मिली है,
वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था खुदा से।

लोग कहते हैं
वक्त किसी का गुलाम नही होता,
फिर क्यूँ थम सा जाता है ग़मों के दौर में?

एक किरन भी तो
नहीं ग़म की अंधेरी रात में,
कोई जुगनू कोई
तारा कोई आँसू कुछ तो होता।

मेरे गम ने होश उनके भी खो दिए,
वो समझाते समझाते खुद ही रो दिए।

Gam Shayari in Hindi

इस शहर में हम जैसा
सौदागर कहाँ मिलेगा यारो,
हम गम भी खरीद लेते हैं
किसी की खुशी के लिए।

वो नहीं तो मौत सही, मौत नहीं तो नींद सही,
कोई तो आए शब-ए-ग़म का मुकद्दर बन कर।

तुम्हें पा लेते तो
किस्सा ग़म का खत्म हो जाता,
तुम्हें खोया है
तो यकीनन कहानी लम्बी चलेगी।

ये गम के दिन भी गुजर जायेंगे यूँ ही,
जैसे वो राहतों के ज़माने गुजर गए।

वो नही आती पर अपनी निशानी भेज देती
है, ख्वाबो में दास्ताँ पुरानी भेज देती है,
उसकी यादों के पल कितने भी मीठे हैं,
मगर कभी कभी आँखों में पानी भेज देती है।

यह गम के दिन भी गुजर जायेंगे यूं ही,
जैसे वह राहतों के जमाने गुजर गए।

तेरे हर ग़म को अपनी रूह में उतार लूँ,
ज़िन्दगी अपनी तेरी चाहत में संवार लूँ,
मुलाक़ात हो तुझसे कुछ इस तरह मेरी,
सारी उम्र बस एक मुलाक़ात में गुज़ार लूँ।

यकीन न आये तो एक बार पूछ कर देखो,
जो हँस रहा है वो ग़मों से चूर निकलेगा।

हद से बढ़ जाये
ताल्लुक तो ग़म मिलते हैं,
हम इसी वास्ते अब हर
शख्स से कम मिलते हैं।

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वो साथ थी तो मानो जन्नत थी ज़िन्दगी,
अब तो हर सांस जिंदा
रहने की वजह पूछती है।

रोने की सज़ा न रुलाने की सज़ा है
ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सज़ा है
हँसते हैं तो आँखों से निकल आते हैं आँसू
ये उस शख्स से दिल लगाने की सज़ा है.

दो कदम तो सभी चल लेते हैं पर,
ज़िन्दगी भर साथ कोई नहीं निभाता,
अगर रो कर भुला सकते यादें,
तो हँस कर कोई अपने गम न छुपाता।

ग़म किस को नहीं तुझको
भी है मुझको भी है,
चाहत किसी एक की
तुझको भी है मुझको भी है।

दोनों जहाँ तेरी मोहब्बत में हार के,
वो जा रहा है कोई शब्-ए-गम गुजर के।

लोग पढ़ लेते हैं आँखों से दिल की बात,
अब मुझसे तेरे ग़म की हिफाजत नहीं होती।

इलाही उनके हिस्से का गम भी
मुझको अता कर दे,
के उनकी मासूम आँखों में
नमी देखी नहीं जाती।

कभी जो कहते थे तुम्हे कभी ना रोने देंगे,
आंसू भरी आंख लेकर तुझे कभी सोने देंगे,
आखिर वहीं हमारी आंख का आंसू बन गए,
जो कहते थे तुमको कभी खोने ना देंगे.

झूठ कहते हैं
लोग कि मोहब्बत सब छीन लेती है,
मैंने तो मोहब्बत
करके ग़म का खजाना पा लिया।

ये मायूस सफर और ये ग़मगीन शाम,
मैं रुक तो जाऊं मगर कोई रोकता नहीं।

*****

गम की बारिश ने भी,
तेरे नक्स को धोया नहीं,
तू ने मुझ को खो दिया,
मैंने तुझे खोया नहीं।

जिसे गुजरे दिन के ग़म से नहीं फुर्सत,
उसको नए साल की मुबारकबाद क्या देना।

हम हंसते तो हैं लेकिन सिर्फ दूसरों को
हंसाने के लिए वरना ज़ख्म तो इतने हैं कि
ठीक से रोया भी नही जाता।

चाहा था मुक्कमल हो मेरे ग़म की कहानी,
मैं लिख ना सका कुछ भी तेरे नाम से आगे।

शायद खुशी का दौर भी आ जाए एक दिन,
ग़म भी तो मिल गये थे तमन्ना किये बगैर।

याद करते है तुम्हे तन्हाई में दिल डूबा है
गमो की गहराई में हमे मत ढूंढना दुनिया
की भीड़ में हम मिलेंगे तुम्हे तुम्हारी ही
परछाई में.

परछाइयों के शहर की तन्हाईयाँ ना पूछ,
अपना शरीक-ए-ग़म कोई अपने सिवा ना था।

Gam Shayari in Hindi

ग़म ये नहीं कि कसम अपनी भुलाई तुमने,
ग़म तो ये है कि रकीबों से निभाई तुमने,
कोई रंजिश थी अगर तुमको तो मुझसे कहते,
बात आपस की थी क्यूँ सब को बताई तुमने।

कर्ज गम का चुकाना पड़ा है,
रोके भी मुस्कुराना पड़ा है
सच को सच कह दिया था इसी पर
मेरे पीछे जमाना पड़ा है।

दर्द दे गए सितम भी दे गए,
ज़ख़्म के साथ वो मरहम भी दे गए,
दो लफ़्ज़ों से कर गए अपना मन हल्का,
और हमें कभी ना रोने की कसम दे गए।

तुझे पाने की कोशिश में
कुछ इतना खो चुका हूँ,
तू मिल भी अगर जाये
तो अब मिलने का ग़म होगा।

हम उम्मीदों की दुनियां बसाते रहे
वो भी पल पल हमें आजमाते रहे
जब मोहब्बत में मरने का वक्त आया
हम मर गए और वो मुस्कुराते रहे।

बिछड़ गए हैं जो उनका साथ क्या मांगू,
ज़रा सी उम्र बाकी है इस गम से निजात क्या मांगू,
वो साथ होते तो होती ज़रूरतें भी हमें,
अपने अकेले के लिए कायनात क्या मांगू।

बदल जाते है
ज़िन्दगी के मायने उस वक़्त,
जब कोई तुम्हारा, तुम्हारे सामने,
तुम्हारा नहीं होता।

लगी है चोट दिल पे दिखा नही सकते,
भुलाना भी चाहे तो भुला नही सकते,
मोहब्बत का अंजाम यही होता है
जिसके लिए तरसते हैं उसे पा नही सकते.

किसे सुनाएँ अपने ग़म के चन्द पन्नो के किस्से
यहाँ तो हर शख्स भरी किताब लिए बैठा है।

ज़िन्दगी हैं नादान इसलिए चुप हूँ,
दर्द ही दर्द सुबह शाम इसलिए चुप हूँ
कह दू ज़माने से दास्तान अपनी,
उसमे आएगा तेरा नाम इसलिए चुप हूँ.

वो रात दर्द और सितम की रात होगी,
जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी,
उठ जाता हूँ मैं ये सोचकर नींद से अक्सर,
कि एक गैर की बाहों में मेरी सारी कायनात होगी।

लोग पढ़ लेते है आँखों से मेरे दिल की बात,
अब मुझसे तेरे गम की हिफाजत नहीं होती।

कुछ मोहब्बत को न था चैन से रखना मंजूर,
और कुछ उन की इनायत ने जीने न दिया,
हादसा है कि तेरे सर पर इल्ज़ाम आया,
वाकया है कि तेरे ग़म ने मुझे जीने न दिया।

मत पूछा करो रात
भर जागने की वजह हटें,
मोहब्बत मैं कुछ
सवालों के जवाब नहीं होते.

अगर वो पूछ लें हमसे
कहो किस बात का ग़म है,
तो फिर किस बात का ग़म है
अगर वो पूछ लें हमसे।

वो तो अपने दर्द रो-रो कर सुनाते रहे,
हमारी तन्हाईयों से आँखें चुराते रहे,
और हमें बेवफ़ा का नाम मिला,क्योंकि
हम हर दर्द मुस्कुरा कर छिपाते रहे.

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तेज रफ़्तार जिंदगी
का ये आलम है दोस्तों,
सुबह के गम भी
शाम को पुराने लगते हैं।

ग़म की तशरीह बहुत मुश्किल थी,
तो अपनी तस्वीर दिखा दी मैंने।

दर्द का साज़ दे रहा हूँ तुम्हे,
दिल का हर राज़ दे रहा हूँ ‍‌तुम्हे
ये गज़ल-गीत सब बहाने हैं,
मैं तो आवाज़ दे रहा हूँ ‍‌तुम्हे.

सिर्फ जिंदा रहने को जिंदगी नहीं कहते,
कुछ गमे-मोहब्बत हो कुछ गमे-ज़हान हो।

रंजो-ग़म इश्क के गुजर भी गए,
अब तो वो दिल से उतर भी गए।
प्यार किया नादान थे हम, गलती हुई क्योंकि
इंसान थे हम, आज जिन्हें नज़रें मिलाने में
तकलीफ होती है कभी उसकी जान थे हम.

रहा यूँ ही नामुकम्मल
ग़म-ए-इश्क का फसाना,
कभी मुझको नींद
आई कभी सो गया ज़माना।

था कोई जो मेरे दिल को ज़ख्म दे गया ,
ज़िन्दगी भर रोने की कसम दे गया,
लाखों फूलों में से एक फूल चुना था मैंने,
जो काटों से भी गहरा ज़ख्म दे गया.

हमने सोचा कि दो चार
दिन की बात होगी लेकिन,
तेरे ग़म से तो उम्र भर
का रिश्ता निकल आया।

*****

सोच सोचकर उम्र क्यूँ कम करूँ,
वो नहीं मिला तो करूँ ग़म करूँ,
न हुआ न सही दीदार उनका,
किसलिए भला आँखें नम करूँ।

जरा सी गलतफहमी पर न छोड़ो किसी
अपने का दामन क्योंकि जिंदगी बीत
जाती है किसी को अपना बनाने में.

तू नाराज न रहा कर
तुझे वास्ता है खुदा का,
एक तेरा चेहरा देख
हम अपना ग़म भुलाते है।

मोहब्बत बहुत की हमने तुम से,
लेकिन तुमने धोखे के सिवा कुछ ना दिया,
हमेशा मुझको पराया ही समझा तुमने,मेरी
खुद की ज़िन्दगी से मुझको तनहा कर दिया.

इस दिल को किसी की आस रहती है,
निगाहों को किसी सूरत की प्यास रहती है,
तेरे बिना किसी चीज़ की कमी तो नही,
पर तेरे बेगैर जिन्दगी बड़ी उदास रहती है.

मुझे भीख की खुशियाँ पसंद नहीं,
मैं जीता हूँ अपने ग़मों के राज में।

Gam Shayari in Hindi

नशा मोहब्बत का हो या शराब का,
होश दोनों में खो जाता है, फर्क सिर्फ
इतना है शराब सुला देती है और मोहबत
रुला देती है.

याद-ए-ग़म दिल से कभी जाती नहीं,
अब तो भूले से भी हँसी आती नहीं।

रात को सोते हुए एक बेवजह सा ख्याल
आया, सुबह ना जाग पाऊँ तो क्या उसे
खबर मिलेगी कभी.

मुलाकात तो हुई थी उनसे एक रोज मगर,
हम उनको हाल-ए-दिल अपना सुनाते कैसे,
हमारी तकदीर में ही लिखे थे ग़म,
जख्म अपने हम उनको दिखाकर रुलाते कैसे।

बिन बात के ही रूठने की आदत है
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है
आप खुश रहें, मेरा क्या है मैं तो आइना हूँ,
मुझे तो टूटने की आदत है।

हर ग़म ने हर सितम ने नया हौसला दिया,
मुझको मिटाने वाले ने मुझको बना दिया।

हम तो मोहब्बत के
नाम से भी अनजान थे
एक शख्स की चाहत
ने पागल बना दिया.

जब भी करीब आता हूँ बताने के लिए,
जिंदगी दूर कर देती है सताने के लिए,
महफ़िलों की शान न समझना मुझे,
मैं अक्सर हँसता हूँ ग़म छुपाने के लिए।

रात भर मुझको गम-ए-यार ने सोने न दिया,
सुबह को खौफ-ए-शब-ए-तार ने सोने न दिया,
शमा की तरफ मेरी रात कटी सूली पर,
चैन से याद-ए-कद -ए-यार ने सोने न दिया।

रखे हैं दिल में हमने बड़े एहतराम से,
जो ग़म दिए हैं तुमने मोहब्बत के नाम से।

इस से बढ़कर दोस्त कोई दूसरा होता नहीं,
सब जुदा हो जायें लेकिन ग़म जुदा होता नहीं।

शिकायत क्या करूँ दोनों तरफ ग़म का फसाना है,
मेरे आगे मोहब्बत है तेरे आगे ज़माना है,
पुकारा है तुझे मंजिल ने लेकिन मैं कहाँ जाऊं,
बिछड़ कर तेरी दुनिया से कहाँ मेरा ठिकाना है।

हमें मत सताओ हम सताए हुए हैं,
अकेले रहने का ग़म उठाये हुए हैं,
यूँ खिलौना समझ कर न खेलो हमसे,
हम भी उसी खुदा के बनाये हुए हैं।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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