आरज़ू शायरी

Aarzoo Shayari in Hindi

Aarzoo Shayari in Hindi
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आरज़ू शायरी| Aarzoo Shayari in Hindi

न खुशी की तलाश है
न गम-ए-निजात की आरजू,
मैं खुद से भी नाराज़ हूँ
तेरी नाराजगी के बाद।.

ख्वाइश बस इतनी सी है कि,
तुम मेरे लफ़्ज़ों को समझो,
आरज़ू ये नही की लोग,
वाह वाह करें..

आरजू बस इतनी सी है,
जो चाहत थी बो बस एक,
बार फिर से मिले यही बस,
एक आरजू दिल में बसी है…

इंतज़ार की आरज़ू अब खो गयी है,
खामोशियो की आदत हो गयी है,
न सीकवा रहा न शिकायत किसी से,
अगर है तो एक मोहब्बत,
जो इन तन्हाइयों से हो गई है..!.

आरज़ू वस्ल की रखती है,
परेशाँ क्या क्या,
क्या बताऊँ कि मेरे दिल में है,
अरमाँ क्या क्या. अख़्तर शीरानी.

दिल में हर किसी का अरमान नहीं होता
हर कोई दिल का मेहमान नहीं होता,
एक बार जिसकी आरजू दिल में बस जाती है,
उसे भुला देना इतना आसान नहीं होता…

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ना खुशी की तलाश है,
ना गम-ए-निजात की आरज़ू,
मै ख़ुद से ही नाराज हूँ,
तेरी नाराजगी के बाद..

आज तक दिल की आरज़ू है वही
फूल मुरझा गया है बू है वही..
जलाल मानकपुरी.

आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की,
लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं.
कौन पूछता है पिंजरे में बंद पंछियों को,
याद वही आते है जो उड़ जाते है…

तुझे पाने की आरज़ू में तुझे गंवाता रहा हूँ,
रुस्वा तेरे प्यार में होता रहा हूँ,
मुझसे ना पूछ तू मेरे दिल का हाल,
तेरी जुदाई में रोज़ रोता रहा हूँ।.

ये ज़िन्दगी तेरे साथ हो,
ये आरज़ु दिन रात हो,
मैं तेरे संग संग चलूँ,
तू हर सफर में मेरे साथ हो..

एक आरज़ू सी दिल में अक्सर छुपाये फिरता
हूँ,
प्यार करता हूँ तुझसे पर कहने से डरता हूँ,
कही नाराज़ न हो जाओ मेरी
गुस्ताखी से तुम,
इसलिए खामोश रहके भी तेरी
धडकनों को सुना करता हूँ …!.

ज़माने भर की निगाहों में
जो खुदा सा लगे,
वो अजनवी है मगर
मुझको आशना सा लगे,
न जाने कब मेरी
दुनिया में मुस्करायेगा,
वो शख्स जो खाबों
में भी अपना सा लगे।.

****

कुछ आग आरज़ू की ,उ
म्मीद का धुआँ कुछ
हाँ राख ही तो ठहरा ,
अंजाम जिंदगी का.

Aarzoo Shayari in Hindi

मेरे दिल में न आओ बरना डूब जाओगे तुम,
गम के आँशुओं का समंदर है मेरे अन्दर।.

आरजू थी की,
तेरी बाँहो मे दम निकले
लेकिन बेवफा तुम नही,
बदनसीब हम निकले..

आँखो की चमक पलकों की शान हो तुम..
चेहरे की हँसी लबों की मुस्कान हो तुम…..!!
धड़कता है दिल बस तुम्हारी आरज़ू मे…
फिर कैसे ना कहूँ मेरी जान हो तुम..!!.

दिल की आरज़ू तो बस यही है मेरे सनम,
तेरे दिल में हम रहे मेरे दिल में तुम,
तेरा हाथ हाथ में लेकर चलते रहे यूँही,
ये जिंदगी भी तेरे साथ जीने को पड़े कम।.

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मेरे दिल में न आओ,
बरना डूब जाओगे तुम
गम के आँसुओं का,
समंदर है मेरे अन्दर..

मुददत से थी किसी से मिलने की
आरज़ू खुवाइश ए दिदार में सब कुछ भुला दिया ,,,
किसी ने दी खबर वो आएंगे रात को
इतना किया उजाला अपना घर तक जला दिया.

मेरे जीने की ये आरजू तेरे आने की दुआ करे
कुछ इस तरह से दर्द भी तेरे सीने में हुआ
करे।.

******

उलझी सी ज़िन्दगी को सवारने की
आरजू में बैठे हैं,
कोई अपना दिख जाए
शायद उसे पुकारने को बैठे है..

Aarzoo Shayari in Hindi

हर जज्बात को जुबान नहीं मिलती..
हर आरजू को दुआ नहीं मिलती..
मुस्कान बनाये रखो तो साथ है दुनिया..
वर्ना आंसुओ को तो आंखो मे भी पनाह नहीं मिलती….

क्या वो ख़्वाहिश कि जिसे
दिल भी समझता हो हक़ीर,
आरज़ू वो है जो सीने में रहे
नाज़ के साथ.
अकबर इलाहाबादी.

आज ..खुद को तुझमे डुबोने की आरज़ू है।
क़यामत तक सिर्फ तेरा होने की आरज़ू है।
किसने कहा गले से लगा ले मुझको, मग़र
तेरी गोद में सर रखकर सोने की आरज़ू है।.

इक वक़्त था कि,
दिल को सुकूँ की तलाश थी,
और अब ये आरज़ू है कि,
दर्द-ए-निहाँ रहे..

जीने की आरज़ू है,
तो जी चट्टानों की तरह,
वरना पत्तों की तरह,
तुझको हवा ले जायेगी…

कभी कभी सोचता हूँ,
आखिर यहाँ कौन जीत गया,
मेरी आरज़ू उसकी ज़िद या,
फिर मोहब्बत?.

ये आरज़ू थी तुझे गुल के रू-ब-रू करते
हम और बुलबुल-ए-बेताब गुफ़्तुगू करते…

मरते हैं आरज़ू में मरने की,
मौत आती है पर नहीं आती..
मिर्ज़ा ग़ालिब.

तमन्ना है मेरी कि आपकी आरज़ू बन जाऊं
आपकी आँख का तारा ना सही
आपकी आँख का आंसू बन जाऊं.

आरजू इश्क़ मोहब्बत,
इसमे कभी आना नहीं,
जीना है अगर शान से तो,
किसी से दिल लगाना नहीं..

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जब कोई नौजवान मरता है,
आरज़ू का जहान मरता है..
फ़ारूक़ नाज़की.

दिल की आरज़ू थी कोई दिल रूवा मिले,
हकीकत न सही पर सपनों में ही मिलें…

काश की मुझे मोहोब्बत ना होती काश की मुझे तेरी
आरज़ू ना होती जी लेते यू ही ज़िंदगी को
हम तेरे बिन काश की ये तड़प हमे ना होती..

तुम आरजू तो करो मोहब्बत करने की,
हम इतने भी गरीब नहीं की मोहब्बत ना दे सके…

******

थाम लेना हाथ मेरा कभी पीछे जो छूट जाऊँ
मना लेना मुझे जो कभी तुमसे रूठ जाऊँ
मैं पागल ही सही मगर मैं वो हूँ
जो तेरी हर आरजू के लिये टूट जाऊँ ll.

आरज़ू‘ तेरी बरक़रार रहे ………….
दिल का क्या है रहे, रहे न रहे…..

आरजू थी तुम्हारी तलब बनने की,
मलाल ये है कि तुम्हारी लत लग गयी…

खोई हुई आँखो में सपना सज़ा लिया।।
आरज़ू में आपकी चाहत को बसा लिया।।
धड़कन भी ना रही ज़रूरी हमारे लिए।।
जब से दिल में हमने आपको बसा लिया।।.

Aarzoo Shayari in Hindi

एक पत्थर की आरजू करके ,
खुदको ज़ख्मी बना लिया मैंने…..

आरज़ू तेरी बरक़रार रहे,
दिल का क्या है रहे, न रहे..

आज खुद को तुझमे डुबोने की आरज़ू है,
क़यामत तक सिर्फ तेरा होने की आरज़ू है,
किसने कहा गले से लगा ले मुझको, मग़र
तेरी गोद में सर रखकर सोने की आरज़ू है…

आरज़ू ये नहीं कि ग़म का तूफ़ान टल जाये,
फ़िक्र तो ये है कि कहीं आपका दिल न बदल जाये.
कभी मुझको अगर भुलाना चाहो तो,
दर्द इतना देना कि मेरा दम ही निकल जाये…!.

ज़िन्दगी की आखरी आरजू बस यही हैं,
तू सलामत रहें दुआँ बस यही हैं…

उमरे दराज लाये थे, मांग के चार दिन,
दो आरजू में कट गए, दो इन्तेजार में..

खुल गया उन की आरज़ू में ये राज़,
ज़ीस्त अपनी नहीं पराई है..
शकील बदायुनी.

तेरा ख़याल तेरी आरजू न गयी !
मेरे दिल से तेरी जुस्तजू न गयी !!
इश्क में सब कुछ लुटा दिया हँसकर मैंने !
मगर तेरे प्यार की आरजू न गयी….!!.

अब तुझसे शिकायत करना,
मेरे हक मे नहीं,
क्योंकि तू आरजू मेरी थी,
पर अमानत शायद किसी और की…

जीने के आरजू में मरे जा रहे है लोग,
मरने के आरजू में जिया जा रहा हु मै….

यह आरजू नहीं कि किसी को भुलाएं हम,
न तमन्ना है कि किसी को रुलाएं हम..

“मै समेटती हूँ
ख्वाब तेरे….
तेरी आरजू….
तेरा ही गम….
तेरी ही तमन्ना….
यादें तेरी……
बहुत मशरूफ है ज़िन्दगी मेरी” !!.

बड़ी आरज़ू थी मोहब्बत को
बेनकाब देखने की,
दुपट्टा जो सरका तो
जुल्फें दीवार बन गयी..

” हर बार उसी से … गुफ़्तगू….
सौ बार उसी की … आरज़ू ;
.
वो पास नहीं होता .. तो भी ..
रहता है मेरे …….. रूबरू…

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साक़ी मुझे भी चाहिए इक जाम-ए-आरज़ू,
कितने लगेंगे दाम ज़रा आँख तो मिला..

तुझसे मिले न थे तो कोई आरजू न थी…
देखा तुम्हें तो तेरे तलबगार हो गये….

दस्तक सुनी – तो जाग उठा- दर्दे—–आरज़ू,
अपनी तरफ क्यों आती नहीं प्यार की हवा.

कुछ आग आरज़ू की, उम्मीद का धुआँ कुछ,
हाँ राख ही तो ठहरा, अंजाम जिंदगी का..

जब से हमने मोहब्बत को जाना है ……
एक तेरी ही आरज़ू की थी पाने की….
पर हालात ही कुछ ऐसे बने….
ना तुम कुछ समझे ना कुछ हम समझे ।.

आरज़ू हसरत और उम्मीद
शिकायत आँसू,
इक तिरा ज़िक्र था
और बीच में क्या क्या निकला…

दस्तक सुनी तो जाग उठा दर्दे आरज़ू,
अपनी तरफ क्यों आती नहीं प्यार की हवा…

कटती है आरज़ू के सहारे ज़िन्दगी,
कैसे कहूँ किसी की तमन्ना नहीं..

सिलसिला वफाओं का तुम जारी रखना,
आरज़ू मिलन की हम पूरी करते हैं..

तुझसे मिले न थे तो कोई आरजू न थी,
देखा तुम्हें तो तेरे तलबगार हो गये…

बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए,
हम एक बार तेरी आरज़ू भी खो देते.
मजरूह सुल्तानपुरी.

वो हादसे भी दहर में हम पर गुज़र गए,
जीने की आरज़ू में कई बार मर गए…

कैसी ख़्वाहिश, कौन-सी आरज़ू,
वक़्त ने जो थमा दिया, वही लेकर चल दिए..

ख़ामोश सा शहर और गुफ़्तगू की आरज़ू,
हम किससे करें बात, कोई बोलता ही नही…

******

सितारों की महफ़िल ने करके इशारा ,
कहा अब तो सारा जहाँ है तुम्हारा,
मुहब्बत जवाँ हो, खुला आसमाँ हो,
करे कोई दिल आरजू और क्या…

इसलिए आरज़ू छुपाई है,
मुँह से निकली हुई पराई है.
क़मर जलालवी.

आँखो की चमक पलकों की शान हो तुम,
चेहरे की हँसी लबों की मुस्कान हो तुम,
धड़कता है दिल बस तुम्हारी आरज़ू मे,
फिर कैसे ना कहूँ मेरी जान हो तुम…

कोई गिला कोई शिकवा जरा रहे तुमसे,
ये आरजू है कि इक सिलसिला रहे तुमसे..

हम क्या करें अगर न तिरी आरज़ू करें,
दुनिया में और भी कोई तेरे सिवा है क्या.
हसरत मोहानी.

आरज़ू, हसरत, तमन्ना और ख़ुशी कुछ भी नही,
ज़िन्दगी में तू नही तो ज़िन्दगी कुछ भी नही..

Aarzoo Shayari in Hindi

उम्र-ए-दराज़ मांग के लाये थे चार दिन,
दो आरज़ू में कट गए दो इंतजार में,.

तुम्हारी आरज़ू मे मैने अपनी आरज़ू की थी
ख़ुद अपनी जुस्तुजू का
आप हासिल हो गया हूँ मै…

कैसी ख़्वाहिश, कौन-सी आरज़ू…
वक़्त ने जो थमा दिया,
वही लेकर चल दिए…

ऐसा नहीं की ज़िन्दगी में कोई आरजू ही नहीं,
पर वो ख्वाब पूरा कैसे करूँ जिसमे तू ही नहीं..

आरज़ू है कि तू यहाँ आए
और फिर उम्र भर न जाए कहीं.
नासिर काज़मी.

जरूरी नहीं ये कि तू मेरी हर बात समझे
आरजू बस इतनी है कि तू मुझे कुछ तो समझे.

ज़रा शिद्दत से चाहो तभी होगी आरज़ू पूरी,
हम वो नहीं जो तुम्हे खैरात में मिल जायेंगे…

हे आरजू की एक रात
तुम आओ ख्वाबोँ मेँ,
बस दुआ हे उस रात
की कभी सुबह न हो…

ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना,
ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते.
अख़्तर शीरानी.

लुत्फ़ दूना हो जो दोनों घर मिरे आबाद हों,
तू रहे पहलू में तेरी आरज़ू दिल में रहे.
जलील मानिकपूरी.

बहुत अज़ीज़ थी ये ज़िंदगी मगर हम लोग,
कभी कभी तो किसी आरज़ू में मर भी गए..
अब्बास रिज़वी.

साँस रूक जाये भला ही
तेरा इन्तज़ार करते-करते,
तेरे दीदार की आरज़ू
हरगिज कम ना होगी…

खुदा को भी है आरज़ू तेरी,
हमारी तो भला औकात क्या है..

आरज़ू थी कि एक लम्हा जी लूँ
तेरे कन्धे पे सर रख के,
मग़र ख्वाब तो ख्वाब हैं,
पूरे कब होते हैं?.

रखी न होती जो कुछ आरजू मोहब्बत की,
दिल-ओ-दिमाग़ से
हम भी हिले नहीं होते…

कोई गिला कोई शिकवा ना रहे आपसे
यह आरज़ू है कि सिलसिला रहे आपसे,
बस इस बात की बड़ी उम्मीद है आपसे
खफा ना होना अगर हम खफा रहें आपसे…

आरज़ू ज़िन्दगी हसरत तमन्ना. कटती है
आरज़ू के सहारे ज़िन्दगी, मत पूछो कैसे.
गुजरता है हर पल तुम्हारे बिना,
कभी मिलने की हसरत कभी देखने की तमन्ना…

साक़ी मुझे भी चाहिए इक जाम-ए-आरज़ू ,
कितने लगेंगे दाम ज़रा आँख तो मिला…

आरजू यह है कि इजहार ए मोहब्बत कर दें,
अल्फाज चुनते हैं तो लम्हात बदल जाते हैं…

आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या
क्या बताऊँ कि मेरे दिल में है अरमाँ क्या क्या..
अख़्तर शीरानी.

किसको ख्वाहिश है ख्वाब बनके
पलकों पे सजने की,
हम तो आरजू बनके तेरे दिल में
बसना चाहते हैं…

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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