एड्स पर निबंध

Essay on Aids in Hindi: हर साल 1 दिसंबर को पूरी दुनिया में एड्स दिवस मनाया जाता है, जिसे विश्व एड्स दिवस कहा जाता है। एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यूनो डेफ़िशियेंसी सिंड्रोम है और ये एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डेफ़िशियेंसी वायरस) के कारण फैलता है।

इस दिन सभी सरकारी संगठन, गैर सरकारी संगठन, स्वास्थ्य कार्यालय में स्वास्थ्य अधिकारियों के द्वारा एड्स से संबंधित भाषण या चर्चा का आयोजन किया जाता है, इसके साथ एड्स जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जाता है।

Essay on Aids in Hindi
Essay on Aids in Hindi

हमने यहां पर इस निबन्ध में एड्स कैसे होता है हिंदी में जानकारी के साथ ही इसके बारे में विस्तार से बताया है। यह निबंध सभी कक्षाओं 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और उच्च कक्षा के विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित होगा।

Read Also: विश्व एड्स दिवस पर नारे (स्लोगन)

Essay on World AIDS Day in Hindi, एचआईवी पर निबंध, Essay on HIV in Hindi

एड्स पर निबंध – Essay on Aids in Hindi

प्रस्तावना

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने साल 1995 में 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाने के लिए एक आधिकारिक घोषणा की जिसका अनुसरण सारे देशों में किया गया। विश्व एड्स दिवस के दिन स्वास्थ्य संगठन के कर्मचारी लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने और रोकथाम के उपायों पर चर्चा करते है। मोटे तौर पर ये बात सामने आई है कि, 1981-2007 में करीब 25 लाख लोगों की मृत्यु एचआईवी संक्रमण की वजह से हुई थी।

एड्स का इतिहास

विश्व एड्स दिवस का ख्याल पहली बार 1987 में अगस्त के महीने में थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न के दिमाग में आया। थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न दोनों डब्ल्यू.एच.ओ.(विश्व स्वास्थ्य संगठन) जिनेवा, स्विट्जरलैंड के एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी थे। उन्होंने एड्स दिवस का अपना विचार डॉ. जॉननाथन मन्न (एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के निदेशक) के साथ साझा किया, जिन्होंने इस विचार को स्वीकृति दे दी और वर्ष 1988 में 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रुप में मनाना शुरु कर दिया।

एचआईवी/एड्स पर संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम, जो यूएन एड्स के रूप में भी जाना जाता है, वर्ष 1996 में प्रभाव में आया और दुनिया भर में इसे बढ़ावा देना शुरू कर दिया गया। एक दिन मनाये जाने के बजाय, पूरे वर्ष बेहतर संचार, बीमारी की रोकथाम और रोग के प्रति जागरूकता के लिये विश्व एड्स अभियान ने एड्स कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए वर्ष 1997 में यूएन एड्स शुरु किया।

शुरु के कुछ सालों में, विश्व एड्स दिवस के विषयों का ध्यान बच्चों के साथ-साथ युवाओं पर केन्द्रित था, जो बाद में एक परिवार के रोग के रूप में पहचाना गया, जिसमें किसी भी आयु वर्ग का कोई भी व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित हो सकता है। 2007 के बाद से विश्व एड्स दिवस को व्हाइट हाउस द्वारा एड्स रिबन का एक प्रतिष्ठित प्रतीक देकर शुरू किया गया था।

एड्स क्या है?

एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यूनो डेफ़िशियेंसी सिंड्रोम है, जिसका मतलब होता है किसी दूसरे व्यक्ति के द्वारा बीमारी का फैलना और सीधे ही अगले व्यक्ति के रोग प्रतिरोधक क्षमता को समाप्त करना। यह बीमारी एचआईवी के वजह से शरीर में फैलता है। यह रोग पहली बार 1981 में देखा गया और उस रोग का एड्स नाम 27 जुलाई 1982 में दिया गया।

एचआईवी एक वायरस है, यह रोग प्रतिरक्षा प्रणाली की टी-कोशिकाओं पर हमला करता है और जिसके कारण एक रोग होता है जो एड्स के रूप में जाना जाता है। यह मानव शरीर के तरल पदार्थों में पाया जाता है। दूषित सुई का इंजेक्शन लगाने से भी एड्स फैलता है। यह प्रसव के दौरान या स्तनपान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं से बच्चों में भी फैल सकता है। जो कि एड्स के कारण में शामिल है।

ये पश्चिम-मध्य अफ्रीका के क्षेत्र में 19 वीं और 20 वीं सदी में हुआ था। असल में इसका कोई भी इलाज नहीं है, लेकिन हो सकता है कि कुछ उपचारों के माध्यम से कम किया जा सके।

एड्स के लक्षण या संकेत

वैसे तो इस रोग में शुरुआत में कई वर्षों तक कोई लक्षण दिखाई नहीं देते है, जिसके कारण एचआईवी वायरस अपना काम आसानी से करता रहता है। जिसके बाद कुछ प्रारम्भिक लक्षण दिखाई देते है जो निम्नलिखित है-

बुखार, ठंड लगना, गले में खराश, रात के दौरान पसीना, वजन घटना, थकान, दुर्बलता, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों में दर्द, लाल चकते और बढ़ी हुई ग्रंथियाँ।

लेकिन संक्रमित व्यक्ति आखिरी चरण में पहुँच जाता है तब उन मे निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते है-

रात में पसीना, दस्त, सूखी खाँसी, साँसों में कमी, निमोनिया, धुंधली दृष्टि, स्थायी थकान, तेज बुखार, गर्भाशय ग्रीवा, मलाशय, सिर, गर्दन के कैंसर और लिम्फोमा का कैंसर और टोक्सोप्लाज़मोसिज़ यानि मस्तिष्क का संक्रमण।

एड्स के लक्षण फोटो (Photo:onlymyhealth.com)

इनके अलावा समाज में एड्स के बारे में कुछ भ्रांतियाँ फैली हुई है जैसे कि एड्स हाथ मिलने, गले लगाने, छींकने या एक ही शौचालय के उपयोग करने से फैलता है। जो कि सरासर गलत है। एड्स की रोकथाम ही एड्स से बचाव है।

विश्व एड्स दिवस की थीम या विषय

यूएन एड्स विश्व एड्स दिवस के दिन वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष वार्षिक विषयों के साथ आयोजन करती है। सभी वर्षों की विषय सूची निम्नलिखित है-

वर्षविषय
1988संचार
1989युवा
1990महिकलाएं और एड्स
1991चुनौती साझा करना
1992समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता
1993अधिनियम
1994एड्स और परिवार
1995साझा अधिकार, साझा दायित्व
1996एक विश्व और एक आशा
1997बच्चे एड्स की एक दुनिया में रहते है
1998परिवर्तन के लिए शक्ति: विश्व एड्स अभियान युवा लोगों के साथ
1999जाने, सुने, रहे: बच्चे और युवा लोगों के साथ विश्व एड्स अभियान
2000एड्स: लोग अंतर बनाते है
2001मैं देख-भाल करती/करता हूँ। क्या आप करते है?
2002कलंक और भेदभाव
2003कलंक और भेदभाव
2004महिलाएं, लड़कियां, एचआईवी और एड्स
2005एड्स रोको: वादा करो
2006एड्स रोको: वादा करो – जवाबदेही
2007एड्स रोको: वादा करो – नेतृत्व
2008एड्स रोको: वादा करो – नेतृत्व – सशक्त – उद्धार
2009विश्वव्यापी पहुँच और मानवाधिकार
2010विश्वव्यापी पहुँच और मानवाधिकार
2011शून्य प्राप्त करना: नए एचआईवी संक्रमण शून्य। शून्य भेदभाव। शून्य एड्स से संबंधित मौतें
2012शून्य प्राप्त करना: नए एचआईवी संक्रमण शून्य। शून्य भेदभाव। शून्य एड्स से संबंधित मौतें
2013शून्य प्राप्त करना: नए एचआईवी संक्रमण शून्य। शून्य भेदभाव। शून्य एड्स से संबंधित मौतें
2014शून्य प्राप्त करना: नए एचआईवी संक्रमण शून्य। शून्य भेदभाव। शून्य एड्स से संबंधित मौतें
2015शून्य प्राप्त करना: नए एचआईवी संक्रमण शून्य। शून्य भेदभाव। शून्य एड्स से संबंधित मौतें
2016एचआईवी रोकथाम के लिए हाथ ऊपर करें
2017माई हेल्थ, माई राइट
2018नो योर स्टेटस (Know Your Status)
2019कम्युनिटीज मेक द डिफरेंस

और इस साल 2020 का विषय “एचआईवी/एड्स महामारी समाप्त करना: लचीलापन और प्रभाव” है।

निष्कर्ष

पूरे विश्व भर में लोग आज के दिन यानि 1 दिसंबर को लाल रीबन पहनकर एड्स से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति अपनी भावनात्मकता व्यक्त करते है। ऐसा लोगों में इस मुद्दे के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही इस रोग से लड़ रहे लोगो के लिए सहायता राशि जुटाने के लिए भी लोग इस लाल रीबन को बेचते हैं।

इसी तरह यह, इस बामारी से लड़ते हुए अपनी जान गवानें वाले लोगों के प्रति श्रद्धांजलि प्रदान करने का भी एक जरिया है।

Read Also

इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here