बाढ़ पर निबंध

Essay on Flood in Hindi: बाढ़ पृथ्वी पर होने वाली प्राकृतिक आपदाओं में से एक आपदा है। यह आपदा पानी की अधिकता से होती है, इस आपदा से जनहानि के साथ-साथ मालहानि भी होती है।

Essay on Flood in Hindi

यहां पर हम बाढ़ पर निबंध (Badh Par Nibandh) शेयर कर रहे हैं। यह निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित होगा।

बाढ़ पर निबंध – Essay on Flood in Hindi

प्रस्तावना

प्राकृतिक आपदाओं में खतरनाक आपदाओं का जब भी नाम लिया जाता है तो बाढ़ का जिक्र जरूर होता है। बाढ़ का सीधा अर्थ अत्यधिक पानी का एकम जगह एकत्र होने से है। भारत देश में बाढ़ आने का खतरा बना ही रहता है, क्योंकि आधा भारत समुद्र से घिरा हुया है और देश में बहुत सारी नदियाँ भी विद्यमान है। बाढ़ उन क्षेत्रों में होती है जहाँ अत्यधिक बहाव और जल निकासी की व्यवस्था खराब होती है।

दुनिया भर के कई शहरों को इस भयंकर बाढ़ का सामना हर साल करना पड़ता है, सबसे ज्यादा नुकसान नदियों और महासागरों के पास बसे शहरों को होता है। बाँध के टूटने के कारण मैदानी इलाकों में पानी की अधिकता, ग्लेशियर के अचानक से पिघलने के कारण महासागर में पानी की अधिकता के कारणों से बाढ़ आती है। तटीय क्षेत्रों में तूफान और सुनामी बाढ़ का कारण बनते है।

बाढ़ आने के बाद लोगों और जानवरों का जीवन जीना दूभर हो जाता है, इनके साथ पेड़-पौधे और मिट्टी का विनाश होता है। विडंबना यह है कि सरकार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र पता होते हुए भी वहाँ अभी तक उचित उपाय नहीं हो पाए जैसे कि पानी निकासी प्रणाली और जल भंडारण प्रणाली। बाढ़ से जीवित परिस्थितियों को नुकसान होता है और इस आपदा से उबरने में काफी समय लगता है। इसलिए बाढ़ के परिणामों को जानना चाहिए और इसे रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।

बाढ़ आने की वजह

जब भी बारिश का मौसम होगा बाढ़ आने की आशंका बढ़ जायेगी। बारिश के मौसम में जब भी हद से ज्यादा बारिश हो गई तो बाढ़ आने की संभावना प्रबल हो जाती है। बाढ़ किसी भी जगह आ सकती है, लेकिन सबसे ज्यादा उसी जगह आती है जहाँ उसके आस पास नदी या चारों तरफ पानी ही पानी हो। अगर उस जगह पानी निकासी का प्रबंध सही तरीके से हो तो कैसी भी बारिश हो बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनती है।

पहाड़ी या पर्वतीय क्षेत्र में बाढ़ आने की संभावना नगण्य ही होती है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्र ऊंचाई में होता है। बारिश के मौसम में अगर नदी किनारे बसे शहर या गाँव में बादल फुट जाता है तो बाढ़ आने की शत प्रतिशत संभावना बढ़ जाती है।  इसे बारिश का अतिप्रवाह कहते है। इसके साथ निम्नलिखित कारण भी शामिल है:

  1. भारी बारिश – भारी बारिश के कारण जल निकासी का पूर्णत: समाधान होना बाढ़ आने की हालात बयां करता है।
  2. बर्फ का पिघलना – जैसी ही गर्मियों का मौसम शुरू होता है तो तापमान में वृद्धि होती है जिसके कारण सर्दियों में जमी बर्फ का पिघलना शुरू होता है। धीरे-धीरे बर्फ पिघलती है तो कोई परेशानी नहीं होती है। लेकिन तापमान में अचानक से वृद्धि होने के कारण ग्लेशियर के ग्लेशियर पिघलने शुरू हो जाते है जो महासागर के प्रवाह को और अधिक बना देते है। जिसके कारण बाढ़ आती है।
  3. बाँध का टूटना – बाँध का निर्माण ऊंचाई से गिरने वाले पानी को सुरक्षित करने के लिए किया जाता है, लेकिन जब बाँध की क्षमता के विपरीत पानी आ जाने से उसको रोक पाना मुश्किल हो जाता है, जिसके फलस्वरूप बाढ़ आ जाती है।
  4. जल निकायों का अतिप्रवाह – नदी से पानी का उफान मारना नदी किनारे बसे शहर या गाँव के लिए बाढ़ जैसी खतरनाक आपदा का निमंत्रण देने समान है।
  5. तटीय क्षेत्र में हवाएं – मजबूत हवाओं और तूफानों में समुद्र के पानी को सूखे तटीय इलाकों में ले जाने की क्षमता होती है जो की बाढ़ का कारण बनता है।
  6. ग्लोबल वार्मिंग – ग्लोबल वार्मिंग वायुमंडल के तापमान में वृद्धि पैदा करता है जिससे ग्लेशियर पिघलने लगते है। इसलिए बाढ़ आने की आवृत्ति बहुत ज्यादा बढ़ी है।

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बाढ़ के प्रकार

कुछ बाढ़ कुछ दिनों में कम हो सकती है जबकि अन्य को कम होने में हफ्तों लगते हैं और उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन पर एक बड़ा प्रभाव पड़ता है। यहाँ विभिन्न प्रकार के बाढ़ पर एक नज़र डालते है:

धीमी गति से सेट बाढ़: इस प्रकार की बाढ़ तब होती है जब जलस्रोत जैसे नदियाँ बह जाती हैं और आस-पास के क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं। यह बाढ़ धीरे-धीरे विकसित होती है और कुछ दिनों से लेकर हफ्तों तक रह सकती है। ये कई किलोमीटर में फैलती हैं और ज्यादातर निचले इलाकों में असर करती हैं। ऐसे क्षेत्रों में बाढ़ के कारण जमा हुआ पानी संपत्ति को नुकसान पहुँचाता है और विभिन्न बीमारियों का कारण भी बनता है।

रैपिड ऑन-सेट बाढ़: ये निर्माण में थोड़ा अधिक समय लेते हैं और एक या दो दिन तक चल सकते हैं। इन्हें अत्यंत विनाशकारी भी माना जाता है। हालांकि, लोगों को ज्यादातर इन के बारे में चेतावनी दी जाती है और स्थिति बिगड़ने से पहले बचने का मौका दिया जाता है। ऐसी जगहों पर छुट्टी की योजना बनाने वाले पर्यटक योजना को स्थगित कर सकते हैं या तब भी रद्द कर सकते हैं जब अभी भी समय है और इस स्थिति से होने वाले आघात से बचें।

फ़्लैश बाढ़: फ्लैश बाढ़ ज्यादातर समय की एक छोटी अवधि के भीतर होता है जैसे कुछ घंटे या मिनट। ये ज्यादातर भारी वर्षा, बर्फ के पिघलने या बाँध टूटने के कारण होते हैं। ये सभी के बीच सबसे अधिक घातक हैं और इसके परिणामस्वरूप सामूहिक विनाश हो सकता है क्योंकि ये लगभग अचानक होते हैं और लोगों को सावधानी बरतने का कोई समय नहीं मिलता है।

बाढ़ आने पर बचाव के उपाय

बाढ़ जब भी आती है भयंकर तबाही लाती है बाढ़ के पानी से लड़ा नहीं जा सकता है इसलिए भलाई इसमें ही है कि जितना हो सके बाढ़ से बचा जाए। उसके लिए हम निम्न काम कर सकते है:

ऊँचे स्थानों पर जाएँ – अगर आप पठारी या बाँध वाले इलाके में रहते है तो आपके इलाके में कभी भी बाढ़ आ सकती है। कभी-कभी अचानक बाढ़ आ जाती है जिससे बहुत ज्यादा हानि होती है और सब कुछ देखते ही देखते नष्ट हो जाता है। इसलिए जब भी आपके घरों में एक लिमिट से ज्यादा पानी आने लग जाए तो हमेशा ऊँचे स्थानों की ओर निकल जाना चाहिए। बाढ़ के पानी के बढ़ने का इंतजार ना करें क्योंकि यह पानी कभी भी बढ़ सकता है और फिर आप का घर से निकलना नामुमकिन हो जायेगा।

पानी उबालकर पिये – बाढ़ आने पर उस स्थान का पानी दूषित हो जाता है क्योंकि उसमे नालों का पानी और मरे हुए मवेशी और इंसानों के शव पड़े रहते है जिसके कारण पानी में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया फैल जाते है। इसलिए जब भी आप ऐसे इलाके में फंस जाते है तो हमेशा पानी को उबालकर ही पिये और हो सके तो अपने साथ स्वच्छ जल की कुछ बोतले भी रख ले।

बाढ़ में फंसे होने का संकेत दे – कभी-कभी बाढ़ इतनी तेजी से आती है कि लोग घरों में ही फंसे रह जाते है और बाद में भी घरों की छतों पर चले जाते है लेकिन अधिक समय तक बाढ़ के पानी वाले घरों में रहना खतरे से खाली नहीं है क्योंकि बाढ़ के कारण इमारतें गिरने का खतरा बना रहता है। इसलिए हमेशा छत पर लाल कपड़े से मदद के लिए चिन्ह बनाएं. जिससे सरकार द्वारा चलाई जा रही है बाढ़ राहत के हेलीकॉप्टरों को पता चल पाये कि आप कहाँ पर फंसे हुए है। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप को बचाए जाने की संभावना और अधिक हो जाती है।

प्रशासन की चेतावनी – बरसात के दिनों में प्रशासन द्वारा समय-समय पर चेतावनी जारी की जाती है कि भारी बारिश होने के आसार हैं और बाढ़ आ सकती है लेकिन कुछ लोग इन चेतावनियों को नजर अंदाज कर देते है जिसके कारण वह अपना घर छोड़कर ऊँचे स्थानों की ओर नहीं जाते है, और बाढ़ की चपेट में आ जाते है। इसलिए हमेशा प्रशासन द्वारा दी गई चेतावनी पर ध्यान बनाए रखें, और जहाँ पर हर साल बाढ़ आती है उन इलाके के लोगों को अपने घरों में एक रेडियो जरूर रखना चाहिए क्योंकि जब भी बाढ़ आती है तब बिजली कटौती हो जाती है। जिससे सरकार द्वारा चलाए जा रहे हैं अभियान की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए केवल रेडियो ही एक साधन बचता है।

इन सब के साथ जरूरी सामान अपने साथ जरूर रखना चाहिए और जहाँ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है वहाँ के लोग हमेशा निम्न सामान अपने घर जरूर रखें-

पीने का साफ पानी – बाढ़ आने पर हमेशा अपने साथ स्वच्छ जल की तीन-चार बोतल अवश्य रखें और अगर आप घर में अधिक सदस्य हैं तो अधिक स्वच्छ जल की व्यवस्था करके रखें क्योंकि बाढ़ के पानी का पता नहीं चलता है कि वह कितने दिन तक रहेगा।

खाने का सामान – भोजन सामग्री अपने साथ रखें और भोजन में ऐसी सामग्री अपने साथ रखें जिसे पकाने की आवश्यकता नहीं हो। जैसे कि बिस्किट, नमकीन, सूखी रोटी आदि।

प्राथमिक उपचार पेटी – जहाँ पर हर साल बाढ़ आती है उन इलाके के लोगों को हमेशा अपने रूम में प्राथमिक उपचार पेटी रखनी चाहिए जिससे अगर बाढ़ के समय किसी को छोटी-मोटी चोट आ जाती है तो उसका इलाज किया जा सके क्योंकि बाढ़ के समय कोई भी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है, और बाढ़ वाले इलाके में अगर छोटी सी भी चोट लग जाती है तो उस में इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है इसलिए हमेशा अपने साथ प्राथमिक उपचार पेटी अवश्य रखें।

प्रकाश और संचार के साधन – बाढ़ वाले क्षेत्र के लोगों को अपने घरों में रोशनी के लिए टॉर्च की व्यवस्था करनी चाहिए साथ ही रेडियो और मोबाइल जैसे संचार के साधन हमेशा अपने पास रखने चाहिए। जिससे प्रशासन द्वारा बाढ़ के समय जब भी कोई जानकारी दी जाएं तो आपके पास में जानकारी पहुँच जाएं।

सूखे कपड़े – बाढ़ के समय अपने साथ कुछ सूखे कपड़े हमेशा साथ लेकर चले क्योंकि अगर आप अधिक समय तक गीले कपड़ों में रहेंगे तो आप बीमार पड़ सकते है।

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बाढ़ आने के दुष्परिणाम

जिस क्षेत्र में बाढ़ आती है उस क्षेत्र में सामान्य काम करना भी कठिन हो जाता है। हर तरफ बस पानी ही पानी ही दिखता है। निचले इलाकों में बने घर जलमग्न हो जाते है और उसमें रहने वाले लोगों की मौत भी हो जाती है, इसके साथ उनके घर में रखे सामान भी पानी के साथ चले जाते है। इसके साथ ही कुछ और भी नुकसान होता है जो निम्नलिखित है-

जीवन को खतरा –भीषण बाढ़ के कारण जनहानि के साथ-साथ मवेशी हानि भी होती है। ज्यादा पानी हो जाने के कारण अधिकांश लोग और जानवर अपनी जान गंवा बैठते है। एक जगह पानी एकत्रित होने के कारण विभिन रोगों के संक्रमण का खतरा बना रहता है। क्योंकि बहुत सारे मच्छर और कीड़े-मकोड़े उत्पन्न हो जाते है। बाढ़ के कारण मलेरिया, डेंगू, न्यूमोनिक प्लेग और सैन्य जैसे बुखार होने की आशंका ज्यादा हो जाती है।

बिजली की कटौती – जब बारिश होती है तब बिजली काट दी जाती है, क्योंकि पानी में करंट का फैलना सबकी जान जोखिम में डालना होता है, लेकिन बाढ़ जैसी स्थिति में प्रशासन द्वारा पूर्ण रूप से बिजली काट दी जाती है। जिससे वो करंट की चपेट में आने से बच सके।

माल हानि – बाढ़ के कारण बहुत से लोग अपने धन-संपति से हाथ धो बैठते है। जिन्हें वापस से खरीदने में कई साल लग जाते है। अपनी कमाई के द्वारा ली गई कार या मोटरसाइकिल जब ऐसी प्राकृतिक आपदा के कारण खोनी पड़े तो बहुत दु:ख होता है।

वस्तु के कीमत में वृद्धि – जब बाढ़ आती है तो उस क्षेत्र तक किसी भी वस्तु का पहुँचा पाना कठिन हो जाता है। जिससे किसी भी वस्तु की मांग बढ़ जाती है और आपूर्ति कम होती है तो वस्तु की कीमत बढ़ जाती है।

मिट्टी का खिसकना – जब मूसलाधार बारिश होती है तो मिट्टी को ज्यादा नुकसान होता है। बारिश तेज होने के कारण पानी उस जगह कि मिट्टी खिसक कर अपने वेग में ले जाता है जिससे उस जगह में मिट्टी की कमी हो जाती है। जो आगे जा कर बड़ी ही परेशानी का कारण बनती है। लोग और जानवरों के साथ-साथ पेड़-पौधों को भी बाढ़ बुरी तरीके से प्रभावित करती है।

बाढ़ द्वारा उत्पन्न समस्याओं का निवारण

मानव और जानवर के जीवन को बाधित करने वाली बाढ़ के द्वारा बहुत सी समस्या उत्पन्न होती हैं, जिसका निवारण करना हम सब की पहली प्राथमिकता है। कुछ समाधान निम्न दिए जा रहे है –

ड्रेनेज सिस्टम को सही करना – बाढ़ का एक मुख्य कारण है जल की सही तरीके से निकासी नहीं होना। इसलिए सरकार को ड्रेनेज सिस्टम को सही करना चाहिए। जिससे जल का भराव नहीं होगा और बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनेगी।

जल भंडारण की शुरुआत करना – बारिश के पानी को पुन: उपयोग में लेने के लिए सरकार को जल भंडारण के लिए जलाशय बनाने चाहिए और उस पानी को किसानों को देना चाहिए जिससे किसान उस पानी को फसल उगाने के काम में ले सके।

बड़ी-बड़ी इमारतों का निर्माण करना – बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सरकार को बाढ़ के पानी के स्तर से ऊपर बड़ी-बड़ी इमारतों का निर्माण करवाना चाहिए जिससे वहाँ किसी की संपति और जनहानि का नुकसान ना हो।

बाढ़ चेतावनी प्रणाली – एक ऐसी चेतावनी प्रणाली बनानी चाहिए जो समय रहते सभी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सूचना पहुँचा सके। जिससे उन क्षेत्रों में रहने वाले सचेत हो जाए और अपने बचने की प्रक्रिया शुरू कर सकें।

बाढ़ बैरियर स्थापित करना – उन सभी क्षेत्रों में बाढ़ बैरियर स्थापित करने चाहिए जहाँ बाढ़ आई हुई है, पानी निकल जाने के बाद उन बैरियर को हटा दिया जाए। बैरियर लगाने से बाढ़ में अवरोध पैदा होता है और पानी कि दिशा परिवर्तित हो जाती है।

बाढ़ से होने वाले लाभ

जी हाँ, आपने सही पढ़ा। बाढ़ आने से लाभ भी होता है। हाँ, ये भी सच है कि बाढ़ के फायदे बहुत कम है लेकिन फायदे कम हो ज्यादा फायदे फायदे होते है। गिने चुने फ़ायदों में से कुछ फायदे निम्न है-

  1. नदियों में बाढ़ के वक्त मछलियों की आवक ज्यादा होती है, जिससे मछलियों का मिलना आसान हो जाता है।
  2. बाढ़ के जल को जलाशयों में इकट्ठा करके उसे सिंचाई के लिए उपयोग में ले सकते है।
  3. बाढ़ के वक्त मिट्टी का अपरदन होता है, जिससे एक जगह गड्ढे भर जाते है और समतल हो जाता है।
  4. लकड़ी के लट्ठों का परिवहन बाढ़ के वक्त आसान हो जाता है।

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भारत में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र

भारत में कई क्षेत्रों में साल दर साल बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता है। देश में इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित प्रमुख क्षेत्र उत्तर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल, मुंबई, महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों, तटीय आंध्र प्रदेश और उड़ीसा, ब्रह्मपुत्र घाटी और दक्षिण गुजरात सहित अधिकांश गंगा के मैदान हैं।

पिछले कई सालों पहले इन स्थानों पर बाढ़ से भारी नुकसान हुआ था और अब भी यहाँ खतरा बना हुआ है। साल 2018 में केरल राज्य में सबसे भयंकर बाढ़ आई थी और केरल राज्य की सभी 14 जिलों में बाढ़ का पानी आ चुका था। इससे बहुत ज्यादा जन धन की हानि हुई थी। केरल राज्य में यह बाढ़ 100 सालों की सबसे बड़ी और सबसे अधिक तबाही मचाने वाली बाढ़ थी।

भारत देश में बाढ़ फैलानी वाली नदियाँ

भारत देश में बहुत सारी नदियाँ है लेकिन कुछ नदियों में ज्यादा पानी आ जाने से वो बाढ़ का रूप ले लेती है। जैसे- गंगा, यमुना, रावी, गंडक, घग्गर, कोसी, तीस्ता, ब्रह्मपुत्र, सतलज, दामोदर, साबरमती, गोदावरी आदि नदियों के कारण हर साल बाढ़ आती है। क्योंकि ये नदियाँ बहुत बड़ी है और पानी की अधिकता बाढ़ का कारण बनती है। इसके बाद जो माल हानि जीव हानि होती है उसके आँकड़ें ना ही सुने और देखे तो बेहतर है।

निष्कर्ष

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दिन-प्रतिदिन के जीवन को बाधित करता है। वे ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विभिन्न समस्याओं का कारण बनते हैं। गंभीर बाढ़ की चपेट में आने वाले क्षेत्रों में महीनों लग जाते हैं और कई बार सालों बाद भी पुनर्निर्माण करना पड़ता है

हालांकि बारिश की घटना, बर्फ के पहाड़ों के पिघलने, जल निकायों और तूफान के अतिप्रवाह को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इन मामलों में भविष्यवाणी की जा सकती है और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय कर सकती है कि जल भराव न हो, जिससे बदले में बाढ़ न आए। बाढ़ प्राकृतिक आपदाओं में से एक है जो विभिन्न क्षेत्रों में बड़े विनाश का कारण बनती हैं।

समय आ गया है कि भारत सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। हालांकि हम बारिश या ग्लेशियरों के पिघलने के बारे में बहुत कुछ नहीं कर सकते हैं, लेकिन हम निश्चित रूप से अपने साथ लाए जाने वाले पानी से निपटने के लिए अच्छी जल निकासी प्रणाली का निर्माण कर सकते हैं। सिंगापुर जैसे कई देश, जो वर्ष के अधिकांश भाग के लिए भारी वर्षा प्राप्त करते हैं, वास्तव में अच्छी जल निकासी व्यवस्था है।

भारी उथल-पुथल के दिनों के बाद भी वे साफ होते हैं। भारत सरकार को बाढ़ की समस्या और इससे प्रभावित क्षेत्रों को होने वाले नुकसान से बचने के लिए अच्छी जल निकासी प्रणाली का निर्माण करना चाहिए। बाढ़ आना यह एक प्राकृतिक आपदा है, जिसे हम मानव कभी नहीं रोक सकते है। लेकिन हम इस स्थिति से खुद को बचाने के लिए कुछ कर सकते है।

मतलब इसके लिए सरकार को और हमे पानी के जलाशयों और अन्य जल भंडारण प्रणालियों का ध्यान रखना चाहिए ताकि वे भारी बारिश के मामले में अतिप्रवाह न करें। बाढ़ अवरोधों का उपयोग करके बाढ़ को भी नियंत्रित किया जा सकता है जिसे बाढ़ के दौरान प्रतिरोध के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। जिससे बाढ़ को रोका तो नहीं जा सकता है, लेकिन उसके अतिप्रवाह को कम जरूर किया जा सकता है। जिससे नुकसान भी बहुत कम मात्रा में होगा।

प्राकृतिक आपदा को रोकना मानव के हाथ में नहीं है लेकिन उसे कम करने के उपाय मानव के हाथ में हैं। जितना कम कर सकते है उतना कम करने की कोशिश मानव को नहीं छोड़नी चाहिए और उसमें सफल परिणाम भी देखने को भी मिले है।

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