ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध

Essay on Global Warming in Hindi: हम यहां पर ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध शेयर कर रहे है। इस निबंध में ग्लोबल वार्मिंग के संदर्भित सभी माहिति को आपके साथ शेअर किया गया है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

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Essay on Global Warming in Hindi

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ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध | Essay on Global Warming in Hindi

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (250  शब्द)

आप लोगों ने नोटिस किया होगा की पिछले कई सालों से पृथ्वी के वायुमंडल के तापमान में वृद्धि देखी गई है। पिछले एक दशक से पृथ्वी पर औसत तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। क्योंकि पृथ्वी के वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में वृद्धि हो रही है। इसे ग्लोबल वार्मिंग कहते है।

मनुष्य द्वारा हो रही वनों की कटाई ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण है। इसके अलावा अतिरिक्त  ईंधन का जलना और वातावरण में जहरीले धुएं का निकलना भी ग्लोबल वार्मिंग के लिए जवाबदार है। ग्रीनहाउस गैसें  जैसे की कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और ओजोन  जब असंतुलित मात्रा में हो जाती है ,तब भी ग्लोबल वार्मिंग होता है।

ग्लोबल वार्मिंग का जीवों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है। ग्लोबल वार्मिंग  के कारण पृथ्वी पर तबाही मच सकती है। दुनिया के कई हिस्सों में तूफान, बाढ़ और हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएँ ग्लोबल वार्मिंग का प्रत्यक्ष परिणाम हैं।

ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए सभी धरतीवासियों को एक जुट होकर काम करना होगा। हमें  पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा और जल ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का  उपयोग करना चाहिए। प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। औद्योगीकरण के लिए कुछ नियम बनाने चाहिए , जिससे पर्यावरण में होने वाली हानि को रोका जा सके। ग्लोबल वार्मिंग में योगदान देने वाले ऐसे क्षेत्रों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।

हम सभी को इस दुनिया को अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर जगह बनाने के लिए और पर्यावरण को हरा-भरा बनाने के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए। यह एक आदर्श नागरिक का पहला कर्तव्य है। वरना ग्लोबल वार्मिंग एक दिन ऐसा कहर ढायेगा कि पृथ्वी पर कोई इंसान बच नहीं पायेगा।

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (800  शब्द)

प्रस्तावना

वर्तमान समय में टेक्नोलॉजी के विकास के चलते मनुष्य ने अपने सुख के लिए कई  नई-नई तकनीकें विकसित की है, जिसका सीधा प्रभाव प्रकृति पर पड़ रहा है। आज के समय में प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना बेहद मुश्किल हो रहा है। असंतुलित प्रकृति पृथ्वी पर गंभीर समस्याएं  पैदा कर रही है।

मानव द्वारा प्रकृति में अप्राकृतिक गतिविधियों की वजह से  पृथ्वी का तापमान बढ़ने लगा है। साल 1950 के बाद से पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि हो रही है और तब से अब तक पृथ्वी तापमान लगातार बढ़ रहा है। बढ़ते तापमान की वजह से पृथ्वी का जलचक्र भी प्रभावित हो रहा है। इस गंभीर समस्या को ग्लोबल वार्मिंग कहते है। यह पृथ्वी के अस्तित्व के लिए एक खतरनाक समस्या है।

ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ

ग्लोबल वार्मिंग दो शब्दों का मिश्रण है। ग्लोबल का अर्थ है ‘पृथ्वी’ और वॉर्मिंग का अर्थ है ‘गर्म’। पृथ्वी के जन्म से उसका तापमान निश्चित है और पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए एक निश्चित तापमान होना जरुरी है। लेकिन मानव गतिविधियों के कारण, जीवाश्म ईंधन के जलने से और वायुमंडल में  ग्रीनहाउस गैस का स्तर बढ़ने से पृथ्वी के तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस प्रक्रिया को ग्लोबल वार्मिंग कहते है। 

धरती पर रहने वाले मानव, पौधों और जानवरों पर ग्लोबल वार्मिंग का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। मौसम के पैटर्न में बदलाव का कारण भी ग्लोबल वार्मिंग को ही माना जाता है। यह घटना पिछली एक या दो शताब्दियों में देखी गई है।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण

ग्लोबल वार्मिंग प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों  तरीके से हो सकता है।ग्लोबल वार्मिंग के सबसे स्पष्ट कारण औद्योगीकरण, शहरीकरण, वनों की कटाई, मानवीय गतिविधियाँ हैं। इन मानवीय गतिविधियों के कारण ग्रीनहाउस के उत्सर्जन में वृद्धि हो रही है। ग्रीनहाउस में CO₂, नाइट्रस ऑक्साइड, मीथेन और अन्य  गैस  शामिल है।

यह सभी गैस वातावरण में गर्मी पैदा करते है क्योंकि ये सभी गैस सूर्य से मिल रही गर्मी को अपने अंदर सोख लेती हैं। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, घरों और व्यवसायों की गर्मी, और कारखाने आज के कार्बन डाइऑक्साइड के लगभग 80% के लिए जिम्मेदार हैं। जनसंख्या वृद्धि भी तापमान को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने का मुख्य एक कारन CFC गैस भी है क्योंकि CFC गैस के बढ़ने से ओजोन परत में कमी आ रही है। 

खेतों में फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए कीटनाशक का उपयोग करते है। यह  कीटनाशक जमीन को प्रदूषित करता ही है और साथ साथ कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसों को भी छोड़ते हैं। ग्लोबल वार्मिंग के लिए कीटनाशक भी ज़िम्मेवार हैं।

ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से आज पृथ्वी पर मौसम के पैटर्न में बदलाव हो रहा है। जगह जगह पर चक्रवात, तूफान, भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट,सूनामी, सूखे जैसी समस्याएं हो रही है। 

पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने और धरती पर जीवन के अस्तित्व के लिए  पारिस्थितिक तंत्र  बेहद जरूरी है। ग्लोबल वार्मिंग का पारिस्थितिक तंत्र  पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है क्योंकि धरती के जीवों के आश्रयस्थान मिट रहे है। बड़े बड़े  ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिसकी वजह से समुद्र में पानी का का स्तर बढ़ रहा है। समुद्र के जल-स्तर में वृद्धि का वनस्पति तथा जन्तु जगत पर  नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के उपाय

ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करना दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए हमें सबसे पहले वनों की कटाई रोकनी होगी और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने होंगे क्योंकि  पेड़  वातावरण से CO₂ ग्रहण करता है और गर्मी को भी कम करता है। हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को नियंत्रित करने का एकमात्र मुख्य स्त्रोत पेड़ है। 

हमें वातावरण में  सीएफसी गैसों का ऊत्सर्जन कम  करना होगा। इसके लिए हमें  फ्रिज़, एयर कंडीशनर और दूसरे मशीनों का इस्तेमाल कम करना होगा, जिनसे सीएफसी गैसें कम निकलती हैं। वातावरण को प्रदूषित करने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना होगा। हमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग अधिकतर करना होगा। ईंधन के बदले सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जल ऊर्जा का इस्तेमाल करना होगा।

कार्बन डाइऑक्साइड को कम करने का सबसे अच्छा तरीका इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कार पर स्विच करना है। प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करना। प्लास्टिक ग्लोबल वार्मिंग का प्राथमिक कारण है क्योंकि प्लास्टिक रीसायकल करने में वर्षों लग जाते हैं।

निष्कर्ष

ग्लोबल वार्मिंग से लगभग आज दुनिया का हर कोई व्यक्ति परिचित है। लेकिन उसके रोकने के लिए कोई भी पहला कदम उठाने को तैयार नहीं है। अगर भविष्य में भी आने वाली पीढ़ी धरती पर अपना जीवन बेहतरीन तरीके से बिता सके इसके लिए अभी से हमें ग्लोबल वार्मिंग को नाबूद करने के प्रयास शुरू करने होंगे।

हमें हमारी पृथ्वी को इस खतरनाक समस्या के मुक्त करना होगा। अगर इस तरह ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव बढ़ता गया तो एक दिन धरती पर जीवन का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा। हमें एकजुट अपनी पृथ्वी को हराभरा बनाये रखना होगा। इसके लिए वृक्षारोपण के महत्व  समझना होगा। लोगों को वृक्षारोपण करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।

अंतिम शब्द

हमने यहां पर “ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध( Essay on Global Warming in Hindi) शेयर किया है। उम्मीद करते हैं कि आपको यह निबंध पसंद आया होगा, इसे आगे शेयर जरूर करें। आपको यह निबन्ध कैसा लगा, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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